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1 26 january 1 abvp 45 Administrative 1 b4 cinema 1 balaji dhaam 1 bhagoria 1 bhagoria festival jhabua 2 bjp 1 cinema hall jhabua 27 city 16 crime 19 cultural 35 education 2 election 15 events 12 Exclusive 1 Famous Place 6 gopal mandir jhabua 17 Health and Medical 78 jhabua 4 jhabua crime 1 Jhabua History 1 matangi 3 Movie Review 5 MPPSC 1 National Body Building Championship India 4 photo gallery 18 politics 2 ram sharnam jhabua 48 religious 5 religious place 2 Road Accident 3 sd academy 65 social 13 sports 1 tourist place 13 Video 1 Visiting Place 11 Women Jhabua 2 अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन 1 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 1 अंगूरी बनी अंगारा 1 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 15 अपराध 1 अल्प विराम कार्यक्रम 6 अवैध शराब 1 आदित्य पंचोली 1 आदिवासी गुड़िया 1 आरटीओं 1 आलेख 1 आवंला नवमी 3 आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट 1 ईद 1 उत्कृष्ट सड़क 20 ऋषभदेव बावन जिनालय 3 एकात्म यात्रा 2 एमपी पीएससी 1 कलाल समाज 1 कलावती भूरिया 3 कलेक्टर 14 कांग्रेस 6 कांतिलाल भूरिया 1 कार्तिक पूर्णिमा 2 किन्नर सम्मेलन 2 कृषि 1 कृषि महोत्सव 3 कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ 1 केरोसीन 2 क्रिकेट टूर्नामेंट 4 खबरे अब तक 1 खेडापति हनुमान मंदिर 15 खेल 1 गडवाड़ा 1 गणगौर पर्व 1 गर्मी 1 गल पर्व 8 गायत्री शक्तिपीठ 2 गुड़िया कला झाबुआ 1 गोपाल पुरस्कार 4 गोपाल मंदिर झाबुआ 1 गोपाष्टमी 1 गोपेश्वर महादेव 14 घटनाए 1 चक्काजाम 3 जनसुनवाई 1 जय आदिवासी युवा संगठन 5 जय बजरंग व्यायाम शाला 1 जयस 6 जिला चिकित्सालय 3 जिला जेल 3 जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ 1 जीवन ज्योति हॉस्पिटल 9 जैन मुनि 6 जैन सोश्यल गुुप 2 झकनावदा 80 झाबुआ 1 झाबुआ इतिहास 1 झाबुआ का राजा 3 झाबुआ पर्व 9 झाबुआ पुलिस 1 झूलेलाल जयंती 1 तुलसी विवाह 6 थांदला 3 दशहरा 1 दस्तक अभियान 1 दिल से कार्यक्रम 3 दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि 1 दीपावली 2 देवझिरी 38 धार्मिक 5 धार्मिक स्थल 7 नगरपालिका परिषद झाबुआ 5 नवरात्री 4 नवरात्री चल समारोह 4 नि:शुल्क स्वास्थ्य मेगा शिविर 1 निर्वाचन आयोग 4 परिवहन विभाग 1 पर्यटन स्थल 3 पल्स पोलियो अभियान 7 पारा 1 पावर लिफ्टिंग 14 पेटलावद 1 प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय 3 प्रतियोगी परीक्षा 1 प्रधानमंत्री आवास योजना 30 प्रशासनिक 1 बजरंग दल 2 बाल कल्याण समिति 1 बेटी बचाओं अभियान 2 बोहरा समाज 1 ब्लू व्हेल गेम 1 भगोरिया पर्व 1 भगोरिया मेला 3 भगौरिया पर्व 1 भजन संध्या 1 भर्ती 2 भागवत कथा 28 भाजपा 1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान 1 भारतीय जैन संगठना 3 भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 1 भावांतर योजना 2 मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग 1 मल्टीप्लेक्स सिनेमा 2 महाशिवरात्रि 1 महिला आयोग 1 महिला एवं बाल विकास विभाग 1 मिशन इन्द्रधनुष 1 मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना 2 मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान 8 मुस्लिम समाज 1 मुहर्रम 3 मूवी रिव्यु 6 मेघनगर 1 मेरे दीनदयाल सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता 2 मोड़ ब्राह्मण समाज 1 मोदी मोहल्ला 1 मोहनखेड़ा 2 यातायात 1 रंगपुरा 2 राजगढ़ 12 राजनेतिक 8 राजवाडा चौक 11 राणापुर 5 रामशंकर चंचल 1 रामा 1 रायपुरिया 1 राष्ट्रीय एकता दिवस 2 राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप 4 राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना 1 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण 1 रोग निदान 2 रोजगार मेला 15 रोटरी क्लब 2 लक्ष्मीनगर विकास समिति 1 लाडली शिक्षा पर्व 2 वनवासी कल्याण परिषद 1 वरदान नर्सिंग होम 1 वाटसएप 1 विधायक 4 विधायक शांतिलाल बिलवाल 1 विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस 2 विश्व विकलांग दिवस 2 विश्व हिन्दू परिषद 1 वेलेंटाईन डे 3 व्यापारी प्रीमियर लीग 1 शरद पूर्णिमा 5 शासकीय महाविद्यालय झाबुआ 32 शिक्षा 1 श्रद्धांजलि सभा 3 श्री गौड़ी पार्श्वनाथ जैन मंदिर 9 सकल व्यापारी संघ 2 सत्यसाई सेवा समिति 1 संपादकीय 2 सर्वब्राह्मण समाज 4 साज रंग झाबुआ 33 सामाजिक 1 सारंगी 11 सांस्कृतिक 1 सिंधी समाज 1 सीपीसीटी परीक्षा 3 स्थापना दिवस 3 स्वच्छ भारत मिशन 4 हज 3 हजरत दीदार शाह वली 5 हाथीपावा 1 हिन्दू नववर्ष 5 होली झाबुआ

सिलकोसिस और लोगों का 'शांत' होना 
      गुजरात से सटे मध्य प्रदेश के आदिवासी- बहुल इलाके झाबुआ के गांवों में तस्वीर तेजी से बदल रही है। वैसे यह इलाका गुजरात से आयातित जानलेवा सिलकोसिस बीमारी के हृदय विदारक प्रसंगों से अटा हुआ है। हर गांव में पांच-छह परिवारों में अपनों को खोने की टीस धंसी हुई है। वे गरीबी और बेरोजगारी से बचने के लिए गुजरात में सफेद पत्थर तोड़ने के लिए जाते हैं और बड़ी संख्या में फेफड़ों को छलनी करके सिलकोसिस लेकर घर लौटते हैं और शांत हो (मर) जाते हैं। 
           आज झाबुआ की धरती में गुजरात में पत्थर तोड़ने के लिए कोई तैयार नहीं होता है। उनके लिए गुजरात में यह काम करना मौत के मुंह में जाने का पर्याय बन चुका है। हालांकि, गुजरात पर उनकी और कारोबार के लिए गुजरात की झाबुआ पर जबर्दस्त निर्भयता बनी हुई है। इसके अलावा, हिंदुत्ववादी राजनीति के प्रचार-प्रसार में भी इन दोनों राज्यों में जबर्दस्त समानता है।
               झाबुआ इसकी प्रयोगस्थली के रूप में विकसित की जा रही है। झाबुआ की धरती में धीरे-धीरे तह जमा रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार के बारे में विस्तार से पूरे उत्साह से जब मथुर बता रहे थे तो झाबुआ में पिछले कुछ समय से चल रहे हिंदुत्व के प्रयोग को कड़ी-दर-कड़ी जोड़कर देखने की राह मिल रही थी। 
आरएसएस और समझदार 
      एक नई परिभाषा मिली, आरएसएस यानी समझदार लोगों का चुनाव। इस पूरे इलाके में ज्यादा समझदार वही मिले, जिनके पास छोटी-मोटी दुकानें हैं या कोई कारोबार का आसरा। बाकी आदिवासी समाज अपनी दिहाड़ी जुटाने में व्यस्त। हारी-बीमारी से घिरा हुआ। पत्थर तुड़ाई की खदान से लेकर सुधीर शर्मा (जेल में बंद व्यापमं अभियुक्त, जिसके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जाहिराना तौर पर गहरे संबंध रहे हैं) की मैगनीज की खदान में खून-पसीना एक करता हुआ, सूखे की मार झेलते हुए, खेतों में मक्के की खेती को लाभदायक बनाने की जुगत बैठाने में लगा रहता है। लेकिन आरएसएस को जानते सब हैं, बजरंग बली से भी सब वाकिफ हैं। आसपास के तमाम गांवों में चक्कर लगाने पर जो बातें उभर कर आई, उनके कुछ सूत्र आरएसएस का पूरा नाम क्या है,’ ये  तो नहीं जानते, पर ये पता है कि अच्छा काम करते हैं, पाप नहीं होने देते हैं,’ हर एक गांव में एक-दो लोग काम देखते हैं, हमारे गांव में हनुमान जी का फोटो दिए थे, आरएसएस के लोग, तब लोग समझदार हुए। घर-घर में बजरंगबली।’ 
         पूरे इलाके में हनुमान के छोटे-बड़े मंदिर भी खूब नजर आते हैं। आस्था के नए केंद्र विकसित हो रहे। इनकी गूंज और उपस्थति पूरे इलाके में महसूस की जा सकती है। 
संस्कृति, हिंदुत्व की छाप और विकास संवाद का मंथन 
तेजी से बदल रहे झाबुआ के मौसम में जमीनी मुद्दों पर पड़ताल करने के लिए जनपक्षधर सवालों के लिए प्रतिबद्ध संस्था विकास संवाद में स्वास्थ्य और मीडिया पर तीन दिन की कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें ऐसे मुद्दों पर चर्चा हुई जो मुख्यधारा के मीडिया से सामान्य तौर पर नहीं शामिल किए जाते हैं। समाज का ताप ऐसे तमाम आयोजनों पर महसूस होता है। यहीं मुलाकात हुई बाडवानी के मोहन सुलिया से। उन्होंने बताया कि किस तरह आदिवासी समाज में गहरे तक हिंदुत्व ने पैठ बना ली है। उन्होंने बताया कि किस तरह आदिवासी शादी में बज रहे डीजे में सबसे पहले यह बजता है, गर्व से कहो हम हिंदू हैं, सिर्फ हिंदू की संतान बचेगा।’ इस तरह के परिवर्तन हर कदम पर दिखाई देते हैं। यहां तक कि ईद-उल-फितर को झाबुआ की गलियों में बड़ी धूमधाम से जगन्नाथ की यात्रा निकाली गई जबकि झाबुआ का जगन्नाथ यात्रा से कोई रिश्ता नहीं है, फिर भी इतना भव्य आयोजन-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की कहानी बयां कर रहा था। 
भील और उनके घोड़े 
इसके बरक्स आदिवासी समाज के अपने आस्था के केंद्र भी कायम हैं। कचलदरा गांव की एक फलिया के पटेल दिनेश राय सिंह (भील) ने अपनी शीतला देवी का थान (स्थान) दिखाते हुए बताया कि असल शक्ति अब भी यहीं से मिलती है। वहां एलोवेरा की झाड़ी के आगे कुछ घड़े और मिट्टी के छोटे-छोटे आकार के घोड़े रखे हैं। घोड़ों को वह देवी की सवारी बताते हैं। यहीं मथुर दिखाते हैं बलि का स्थान। दो पत्थर रखे हैं और वहीं दी जाती है बलि। पास खड़े बुजुर्ग नूर सिंह बताते हैं कि यहां पूजा के समय दारू भी चढ़ाई जाती है। जब पूछा, क्या आरएसएस वाले इस पूजा में भी शामिल होते हैं, तो उन्होंने बताया, नहीं। वे बड़े भगवान की पूजा करने को कहते हैं। 

झाबुआ- बदलते परिवेश की तेजी सी बदलती तस्वीर- Jhabua-changing-rapidly-changing-environment-particularly-Article

कड़कनाथ मुर्गे की तासीर 
झाबुआ में सुबह कडक़नाथ की बांग के साथ होती है या नहीं, लेकिन छाया हर जगह कड़कनाथ ही रहता है। कड़कनाथ मुर्गा झाबुआ की शान है, क्योंकि यह कहीं और नहीं होता। इसे लेकर तमाम किस्से इलाके में मशहूर है। कलगी काली, देह काली, मांस काला, रक्तभी कालापन लिए, कडक़नाथ मुर्गा अपनी कड़क तासीर के लिए 90 फीसदी आदिवासी-बहुल झाबुआ को मध्य प्रदेश में खास बनाता है, लेकिन व्यापमं को लेकर कड़कनाथ की छाया नहीं दिखाई देती। कड़कनाथ मुर्गे की खासियत के बारे में जितनी कड़क और बुलंद आवाज में बताते हैं, व्यापमं की चर्चा आते ही पूरी टोन बदल जाती है। मौत के खौफ की स्याह परछाईं उनके चेहरे पर बादलों-सी उड़ती-फिरती है।
 व्यापमं और मौत का साया 
सबको पता है कि व्यापमं एक ऐसी बला का नाम है जिसके पास जो गया, सो शांत हो गया। मौत को यहां कहते हैं शांत होना। झाबुआ पर व्यापमं की स्याह छाया की गहरी जकड़न महसूस की जा सकती है। व्यापमं का आदिवासी नौजवानों पर कितना खौफनाक असर पड़ा है, इसे यहां पर महसूस किया जा सकता है। बताया जाता है कि झाबुआ से 50 लोग अभियुक्त बनाए गए हैं। यानी सारे आदिवासी नौजवान। डर के मारे बड़ी संख्या में शिक्षित आदिवासी नौजवान बाहर भी भागे हुए हैं। झाबुआ की नम्रता डामोर की 2012 में हुई हत्या (पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार) के बाद से यहां के तमाम दूसरे परीक्षार्थियों और उनके परिजनों पर जो खौफ जारी था, अब वह पत्रकार अक्षय सिंह की मौत के बाद और गहरा हो गया है। नम्रता, ओम प्रकाश और अक्षय सीबीआई द्वारा नम्रता डामोर की हत्या के मामले की फिर से जांच शुरू होने से एक तरफ जहां नम्रता के परिजनों को इस बात की आस बंधी है कि अब शायद न्याय की दिशा में छानबीन बढ़े, वहीं दबी जुबान में यह भी कहा जा रहा है कि इस प्रकरण को व्यापमं से अलग कर एक प्रेम प्रसंग के रूप में करने की कोशिश की जा रही है। 
        नम्रता के भाई ओम प्रकाश डामोर से मुलाकात का वाकया भी कम दिलचस्प नहीं रहा। गहरे संकोच और शंकाओं को चीरते हुए ओम अपने एक दोस्त के यहां मिलने को जब तैयार हुए तो मेरे जेहन में सिर्फ अक्षय की मौत का रहस्य हावी था। रास्ते में होने वाली दुर्घटनाएं कई बार किसी बड़ी कड़ी का हिस्सा लगने लगीं। यह डर झाबुआ की हवा में हर कोई महसूस कर रहा था। सत्ता, माफिया और मौत के बेहया खेल की गवाह यह धरती रही है। ओम ने गहरे आक्रोश के साथ बताया, अक्षय सिंह की मौत के बाद नम्रता का केस दोबारा खोला लेकिन दो घंटे में बंद कर दिया गया। जब हमने इसकी वजह जाननी चाही, तो कहा गया कि चूंकि कोई नया सबूत नहीं मिला है, इसलिए बंद किया मामला। यह तो समय ही बताएगा कि सीबीआई की पड़ताल क्या उन चार लड़कों से कोई सच उगलवा पाएगी जिन पर नम्रता के परिजनों ने शक जाहिर किया था। बहरहाल सच पर अभी गहरा पर्दा पड़ा हुआ है।
 खनन, दबदबा और निगाहें 
झाबुआ की एक पहचान और है। यह व्यापमं के अभियुक्त और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए सुधीर शर्मा का इलाका है। यहां उनकी खाम का दबदबा बदस्तूर जारी है। यहां से गुजरते हुए इसका दबदबा महसूस किया जा सकता है। 
           झाबुआ का दाल पनिया जितना सरस है, उतनी ही जटिल है यहां की जमीन। रहस्य-मौतें और मौतों के खौफ के बीच आदिवासी घरों में जहां महुआ की शराब 60 रुपये में औरतें बेचती मिलती हैं, वहीं बीयर की खपत इतनी बढ़ गई है कि खेतों को पार करते वक्त इसकी बोतलें पांव से टकराती हैं।

झाबुआ। जैन सोश्यल ग्रुप मैत्री झाबुआ के तत्वाधान में शनिवार को स्थानीय निजी गार्डन में डीजे गरबा उत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें ग्रुप के सदस्यों ने बडे उत्साह एवं जोश के साथ डीजे डांडिया उत्सव में सहभागिता की। आयोजको के द्वारा इस कार्यक्रम को भव्य बनाने के लियें सारी तैयारियां को बडे़ पैमाने के रूप में किया गया।  एवं इसे सफल बनाने के लियें कई दिनों से निरंतर तैयारियां की जा रही थी। जिसका परिणाम एक सफल कार्यक्रम के रूप में रहा। नगर के लोगो ने एवं शहर के कई लोगो द्वारा कार्यक्रम की प्रशंसा की गई। कार्यक्रम में जैन सोश्यल ग्रुप मैत्री के सदस्यों ने वेस्टर्न थीम के आधार पर परिधान एवं डीजे गरबा किया। कार्यक्रम की शुरूआत कार्यक्रम के अतिथि निर्णायक मंडल एवं ग्रुप के समस्त सदस्यों ने माॅ आदिशक्ति के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित करके किया गया। साथ ही राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की गई। 
            इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका में श्रुति अतिश सकलेचा, संजय कटकानी, नीरज गादिया, जय भण्डारी, मयंक रूनवाल, नितेश कोठारी, विशाल कोठारी, पंकज कोठारी, दिनेंश रूनवाल, आशीष श्रीमाल, शीतल नितिन छाजेड़ एवं खुशबु पराग रूनवाल, निधि उत्कर्ष कोठारी की रही एवं कार्यक्रम को आकर्षक एक रूप में बांधने के लियें विशेष सहयोग रवि राठोर एवं अजय जैन की रही। जैन सोश्यल मैत्री की नीव रखने वाले मनोज बाबेल की विशेष उपस्थिति रही। प्रतियोगिता को चार ग्रुपो में बांटा गया जिसमें येल्लौ ग्रुप , व्हाईट ग्रुप, ब्लु ग्रुप, रेड़ ग्रुप रहा। इन चारो ग्रुपो में प्रतियोगिता को जितने के लियें कशमकस रही।  कार्यक्रम का संचालन के लियें विशेष भूमिका ग्रुप की पीआरओं निधि रूनवाल एवं अंकित रूनवाल की रही। 
निर्णायक की रही अहम भूमिका
    कार्यक्रम में अतिथि के रूप में शीना विक्रांत भूरिया एवं निर्णायकगण शैलेन्द्र राठोर, विपुल सरोलकर , नेहा आचार्य, भूमिका माहेष्वरी की रही। जिन्होने अपने निर्णय में बडी ही सरलता एवं सहजता के साथ डीजे डांडीया रास में खेलने वालो का चयन किया गया। सबसे बेस्ट कॅपल के लियें जय खुशबु भण्डारी, मयंक निधिता रूनवाल एवं पंकज रानी कोठारी, मयंक सोनम जैन, अंकुर निशा भण्डारी रहे। पुरूष वर्ग में विशाल कोठारी, शालीन धारिवाल, पराग रूनवाल , कपिल गादिया एवं संदीप जैन (राजरतन) रहे। इसी के साथ महिला वर्ग में निक्की जैन , सलौनी जैन एवं श्रृुति सकलेचा, किरण चौधरी को दिया गया। जूनियर वर्ग में पलक जैन, खवाइश जैन, स्वरा कोठारी को ग्रुप की तरफ से प्रात्साहन पुरूस्कार दिया गया। विशेष गु्रप के लियें बेस्ट गु्रप में येल्लो  ग्रुप को स्थान दिया गया। येल्लौ ग्रुप के सदस्यो ने प्रतियोगीता में सर्वाधिक पुरूस्कार जिते।  
ग्रुप के सदस्यो द्वारा चातुर्मास के दौरान तप करने वाले श्रावक श्राविकाओं का मंच से बहुमान की अनुमोदना की गई। चारो टीमों का नेत्रृत्व कर रही टीमों में येल्लौ टीम की कैप्टन खुशबू पराग रूनवाल, रेड ग्रुप की शीतल नितिन छाजेड, व्हाईट ग्रुप निधि उत्कर्ष कोठारी एवं ब्लू टीम में निशिता मनिष काठेड़ मातृ शक्ति ने इसकी अभिनव तरिके से ग्रुप टीम की सहभागिता की गई। इस अवसर पर आंगतुक दंपत्तियों का स्वागत भी किया गया। 
आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में संदीप जैन राजरतन को मिडिया प्रभारी का दायित्व के लियें ग्रुप के सभी सदस्यों की सहमति से नियुक्त किया गया। उक्त कार्यक्रम को सम्पन्न कराने में ग्रुप के अध्यक्ष प्रतीक  मेहता, सचिव मनिष काठेड़, द्वारा पधारे हुये अतिथि, निर्णायक एवं ग्रुप के समस्त दंपत्ति सदस्यो का स्वागत कर आभार प्रकट किया गया। 

झाबुआ। जिले कें पेटलावद ब्लाक के ग्राम जामली मे विधायक सुश्री निर्मला भूरिया ने शासकीय सीनियर अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास भवन जामली का लाकार्पण किया। लोकार्पण के अवसर पर बालिकाओ को संबोधित करते हुए विधायक सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि शासन द्वारा बालिकाओ की शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे,यह नवनिर्मित छात्रावास भवन भी बालिका शिक्षा के क्षेत्र मे शासन का एक महत्वपूर्ण कदम है। आप सभी इस भवन मे रहकर अपनी पढाई पूरी करे। और पढाई जब तक करे जब तक कि आपकी नौकरी नही लग जाये। कम से कम कक्षा 12 वी तक की पढाई पूरी नही हो तब तक विवाह नही करे। 
          कम उम्र मे विवाह हो जाने से महिलाओ को कई समस्याओ का सामना करना पडता है। शैक्षणिक एवं आर्थिक रूप से संपन्न महिला जीवन मे आने वाली हर चुनौती से लड कर अपना जीवन निर्वाह कर सकती है। इसलिए आप भी अपनी पढाई पूरी कर अपने आपको सशक्त बनाये और शासन की मंशानुसार स्वर्णिम मध्यप्रदेश के निर्माण मे अपना योगदान दे। लाकार्पण कार्यक्रम के अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बडी संख्या मे बालिकाए उपस्थित थी।

जामली मे विधायक विधायक सुश्री निर्मला भूरिया ने किया कन्या छात्रावास का लोकार्पण-MLA-inaugurated-st-girls-hostel-in-Jameli

साध्वजी एवं मुनिश्री ने सुनाई मांगलिक  

झाबुआ।  चातुर्मास पर्व के दौरान भक्ति एवं तप की श्रृंखला सतत प्रवाहित हो रही है जिनालय जैन मंदिर से प्रभु दर्शन कर परमात्मा आदिनाथ, दादा गुरू देव राजेन्द्रसूरिजी मसा  के दर्शन वंदन तथा बाद साध्वी श्री रत्नरेखा म.सा. से मांगलिक का श्रवण कर 80 सदस्यीय श्री संघ ने गौडीपाश्र्वनाथ पहुँचकर संघ संघ पति अशोक राजेन्द्र समरथमल राठौर का आचार्य तीर्थेंद्र सूरि समिति ने शाल श्रीफल से स्वागत किया तथा उन्हे मंगलमय यात्रा की कामना के साथ बिदा किया । संघपति सहित श्री संघ के सदस्यों ने गौडी पाश्र्वनाथजी  प्रभु के दर्शन कर यात्रा प्रारंभ की ।  
80 सदस्यीय श्रीसंघ तीर्थ यात्रा पर हुआ रवाना -80-member-Shreesangh-proceeded-on-pilgrimage             इसके पूर्व गौडी पाश्र्वनाथ मंदिर पर बिराजित जिनचंद्र विजयजी म.सा. ने सभी को मांगलिक श्रवण कराई। संघ ने धार जिले के तीर्थ बाग पहुचकर दर्षन वंदन कियें एवं आचार्य भगवन हेमेन्द्र सुरी जी म.सा. के शिष्य चंद्रेशवविजय जी मं.सा. के प्रवचन श्रवण किये एवं झाबुआ संघ ने चातुर्मास के बाद झाबुआ पधारने मुनिश्री से विनती की तथा अंट्ठम तप की आराधना कराने के लियें भी विनती की गई। इसके बाद श्री संघ जैन तीर्थ तालनपुर , लक्ष्मणी, बलईमाता पहुचकर वहां दर्शन वंदन किये। संघ के लाभार्थी अनिल राठौर एवं संजय कांठी व तेज प्रकाश कोठारी है ।  संघ के सदस्य वर्धमान राठोैर, विमल कांठी, निर्मल मेहता, अभय धारीबाल, इन्द्रसेन संघवी, नरेन्द्र पगारीया, सुरेन्द्र सकलेचा, अनिल राठोर, अनिल रूनवाल, अशोक कटकानी, महेन्द्र जैन बाग वाले विशेष रूप से उपस्थित रहें।

झाबुआ। जिले में 12 अक्टूबर को लाडली शिक्षा पर्व का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत जिला मुख्यालय पर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसमें कक्षा 6 टी में प्रवेश लेने वाली लाडली लक्ष्मी बेटियों को छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी।
    लाडली लक्ष्मी बेटियों के स्वास्थ्य की जाॅच भी की जाएगी, जिन लाडली बेटियों ने कक्षा 6 वी में प्रवेश लिया है उन्हें छात्रवृत्ति का वितरण किया जाएगा। झाबुआ जिले में इस वर्ष कक्षा 6 टी में प्रवेश लेने वाली 383 लाडली लक्ष्मी बेटियां है, जिन्हें लाडली शिक्षा पर्व में दो दो हजार रूपए की छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य की जांच कर आयरन, फोलिक एसिड की गोलियां वितरित की जाएंगी तथा उन्हें पोषण आदि की जानकारी भी दी जाएगी। भोपाल में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में आयोजित मुख्य समारोह का सीधा प्रसारण किया जाएगा।जिसमें मुख्य मंत्री द्वारा संबोधित किया जाएगा। जिले में मुख्यमंत्री का संबोधन जिले वासी सुन व देख सके इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएॅ की जाएगी।

लाडली शिक्षा पर्व का आयोजन 12 को, 383 लडलियो को छात्रवृति का होगा वितरण-Ladli-Education-Festival-will-be-organized-on-12th-383-students-will-be-given-scholarship.

आलौकिक अविस्मरणीय अनुभूति ने शरद पूर्णिमा पर ब्रजधाम की अनुभूति को किया साकार 
       मां दुर्गा की आराधना में हजारों पांवों ने संगीत की स्वर लहरियों के साथ अनुशासनबद्ध होकर थिरक कर शरद पूर्णिमा को एक उत्सव के रूप् में तब्दिल कर दिया । राजवाडा चौक में रात्रि 9 बजे से जमें गरबो के रंग में रंगे, माँ की आराधना में तल्लीन माँ भक्त व इसको निहारती दर्शकों की हजारों जोड़ी आंखे, अलपक होकर इस भक्ति एवं आराधना के  गरबों रास का आनन्द उठाती दिखाई दी । रात्रि 11.30 पर महशूर फिल्म अभिनेता आदित्य पंचोली को अपने बीच पाकर , युवा वर्ग सहित नगरवासी रोमांचित हो मस्ती में झूमने व गाने लगे ।         फिल्म अदाकार आदित्य पंचोली सीधे मुख्य मंच पर पहुँचे वहां सभी से मिल यहाँ का दृश्य देख वे स्वंय को रोक न पाए और उतर गए अपने चाहने वाले हजारों दर्शकों के बीच जो उनको समीप से देखने के लिए लालायित थे । वे गरबा ग्राउंड आर्केस्ट्रा के मंच पर पहुँचे  सभी से मुखातिब हो उनको अपनी चर्चित फिल्मों के डायलॉग सुनाए व उनका अभिवादन भी किया । करीब आधे घण्टे से अधिक समय तक वे आर्केस्ट्रा मंच पर जनता का अभिवादन करते हुए उनसे मुखातिब होते रहे और वहां से वे पुनः मुख्य मंच पर पहुँचे । अतिथि स्वागत की इस परम्परा में राजवाडा मित्र मंडल ने इस बार अनूठी पहल की । महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयासरत मित्र मंडल ने यह कार्य सिर्फ और सिर्फ अपनी महिला मंडल के हाथों करवाया । स्वागत के बाद मित्र मंडल द्वारा नवदुर्गा महोत्सव के दौरान आयोजित स्वच्छता चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता बच्चो को मुख्य अतिथि आदित्य पंचोली के हाथों पुरस्कार प्रदान किए गए ।
            कार्यक्रम की अगली कड़ी में झाबुआ शहर की तीन अति विशिष्ट प्रतिभा को तालियों की गडगडाहट के बीच सम्मानित किया गया । अंगदान के रूप मे स्वयं की कीडनी को अपनी मां को दान करने वाली कु. आयुषी दत्त को आदित्य पंचोली द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं शाल ओडा कर अंगदान व उसके बाद उसको लेकर जागरूकता अभियान चलाने के लिए पुरस्कृत किया । वही  अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश एवं अपने शहर का नाम रोशन करने वाली खिलाडी कु. सिमरन राठौर को क्रिडा के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हांसील करने पर प्रशस्ति पत्र एवं शाल ओढा कर सम्मानित किया । वही नगर के बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक कुशल संगीतकार, चित्रकार, कोरियोग्राफर , रंगमंच के कलाकार व प्रशिक्षक आशीष पाण्डे का सम्मान आदित्य पंचोली के हाथों मित्र मंडल द्वारा कराया  गया ।
            इसी बीच ठीक 12 बजे मध्यरात्री को श्री देवधर्मराज मंदिर पर महाआरती भी हुई व उसके पश्चात 500 किलो केशर मिश्रित केशरिया दूध की प्रसादी का वितरण विभिन्न काउंटरों के माध्यम से प्रत्येक आगन्तुक को किया गया ।
             कार्यक्रम के अंत मे फिल्म कलाकार आदित्य पंचोली ने अपने सम्बोधन में यह कहा कि आपके लाड़ले चुन्नू भैय्या हमारे भी मित्र हैं । दुनिया में मित्रता का एक ऐसा रिश्ता हैं जो हम तय करते हैं । इससे बढ़कर और कोई रिश्ता नहीं । में इनके आग्रह को टाल नहीं सका । पहले भी झाबुआ आ चुका हूँ, और आपके इस प्यार व स्नेह का आभारी हूँ । आपका यह आयोजन व दर्शकों का यह प्यार मेैं कभी नही भूल सकता । पुनः आऊँगा यह मेरा वादा है आपसे ।
      कार्यक्रम का संचालन नगर के ख्यातनाम मंच संचालक मनीष त्रिवेदी व अंकुश कांठी ने किया व आभार पार्षद अजय सोनी ने व्यक्त किया ।
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राजेश थापा , झाबुआ । शहर में धार्मिक सद्भाव का नजारा पेश करते हुए हजारों मुस्लिमों ने रविवार को इस्लामी महीने के दसवें दिन 'अशूरा' पर मुहर्रम का जुलूस निकाला, जबकि एक दिन पहले विजयादशमी पर हिंदुओं ने दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जित किया। मुस्लमानों और हिंदुओं ने इस धार्मिक अवसरों पर पूर्ण शांति और सद्भाव के साथ भाग लिया। 
         मुहर्रम के मौकों पर, मुस्लमानों ने इस्लामिक महीने के मुहर्रम के 10 वें दिन ढोल की ताल पर सीने पर हाथ पीटते हुए जुलूस निकाला। इस जुलूस के साथ ही उन्होंने 680 ईस्वी में इराक के करबला में पैगंबर मोहम्मद के पोते इमाम हुसैन की शहादत पर शोक मनाया। रविवार की रात मुहर्रम की नौ तारीख को ताजिये नगर भ्रमण पर निकले । इस माह के 7वें दिन मेहँदी की रस्म होती है। 10 वें दिन जुलूस निकाला जाता है। 
        पुलिस के पुख्ता सुरक्षा इंतजामो के बीच निकले इन ताजियों के पीछे हजारो की संख्या में महिलाये भी शामिल हुई । मुहर्रम की नौ तारीख यानी क़त्ल की रात, इसी रात को ताजिये नगर भ्रमण पर निकलते है । शनिवार रात को यही परम्परा निभाई गई । इन ताजियों के साथ ही हजारो की तादाद में मुस्लिम समाजजन नजर आए । मान्यता के अनुसार जिन महिलाओं की मन्नत पूरी होती है वो ताजियों के पीछे चलती है जिसमे हिन्दू महिलाये भी शामिल है । ताजियों के दौरान कोई शरारती तत्व गड़बड़ी न फैला दे इस वजह से पुलिस ने पुरे मार्ग को कैमरो की नजर में कैद कर दिया था ।
 इस्लामी नववर्ष 1439 की शुरुवात
           जुलुस के दौरान पुलिस प्रशासन का अमला पुरे रास्ते मुस्तैद नजर आया , देर रात तक शहर में मुहर्रम के जुलुस की धूम रही । नए साल का चाँद मुबारक नजर आते ही मुस्लिम समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी के साथ इस्लामी नववर्ष 1439 हिजरी  की शुरुआत हो गई है। 
         समाज के हुसैन खान, आबिद खान एवं साबिद खान ने बताया कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब ने इस दिन मक्का से मदीना के लिए हिजरत (प्रस्थान) किया था। उसी की याद में इस्लामी कैलेण्डर बनाया गया। उसी दिन से कैलेण्डर की गणना की जाती है। इसलिए इस्लामी वर्ष को हिजरी कहा जाता है। मोहर्रम माह में 10 दिन में विशेष इबादत की जाती है। श्री खान के अनुसार इन दिनों में इबादत करने और खाना खिलाने का विशेष महत्व है।
        उल्लेखनीय है कि झाबुआ में ताजिए राजवाड़ा चौक पर रखे जाते हैं। यहाँ देर रात तक ढोल-नगाड़ों के साथ समाज के बच्चे और युवा अखाड़े के आकर्षक करतब दिखाते हैं। यहाँ पूजा-अर्चना सहित मन्नातें लेने एवं उतारने का दौर भी चलता है। 
 एक से बढ़कर एक ताजिए
चाँद दिखते ही स्थानीय हुडा क्षेत्र में ताजिए बनाने का कार्य प्रारंभ हो गया था।  वसीम शेख ने बताया कि नगर के हुडा क्षेत्र एवं टीचर्स कॉलोनी में करीब एक दर्जन से अधिक ताजिए बनाये गए। बाँस, कागज एवं अन्य सजावटी सामग्री से ताजिए बनाए गए। इनमें आकर्षक विद्युत सज्जा वाले ताजिए भी शामिल हैं। इस वर्ष छोटे बच्चों ने भी आकर्षक ताजिए बनाए, जिन्हें देखेने कई लोग आए।     
चौकी का जुलूस निकाला
रविवार की शाम चाँद दिखते ही मुस्लिम समाज द्वारा ढोल-नगाड़ों के साथ स्थानीय हुसैनी चौक से जुलूस निकाला गया। जुलूस हुसैनी चौक से शुरू हुआ, जो जगमोहनदास मार्ग, बाजार क्षेत्र होते हुए राजवाड़ा चौक पहुँचा।  जुलूस के दौरान जमकर ढोल-नगाड़े बजाए जा रहे थे। 
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