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National-Body-Building-Championships-india-was-selected-bodybuilder-Jhabua-राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप में चयनित हुआ झाबुआ का बॉडी बिल्डर  झाबुआ : दिनांक 18 व 19 फरवरी 2017 को राजहरा (दुर्ग) राज्य छतीसगढ में 53 वी  राष्ट्रीय जूनियर बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप  का आयोजन किया जा रहा है, राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप  हेतु चयन प्रक्रिया में विभिन्न भारवर्गो में म.प्र. बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन द्वारा ट्रायल रखा गया था म.प्र. बॉडी बिल्डिंग की चयन समिति के सदस्य राष्ट्रीय खिलाडी श्री सुशील वाजपेयी द्वारा बताया गया कि 65 किलो भारवर्ग में जय बजरंग व्यायाम शाला झाबुआ के बॉडी बिल्डर श्री अजय मोर्य को 9 अंक प्राप्त होकर राष्ट्रीय स्पर्धा हेतु चयन किया गया है । 
        स्पर्धा में हिस्सा लेने हेतु श्री अजय मोर्य व गुलाबसिंग दिनांक 17.02.2017 को राजहरा (दुर्ग) राज्य छतीसगढ रवाना होगे । बॉडी बिल्डिंग का प्रशिक्षण श्री सुशील  वाजपेयी द्वारा दिया जा रहा है, जिससे खिलाडी जिले, संभाग, प्रदेश स्तर, एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे है । चयनित खिलाडी को जय बजरंग व्यायाम शाला के श्री उमंगजी सक्सेना, श्री नारायणसिंहजी ठाकुर, श्री ललीतजी शर्मा, श्री प्रकाश चौहान , नरेश  डोषी, श्री राजेन्द्रजी यादव, श्री नीरज राठौर च मोहनदादा माहेश्वरी , प्रदीपजी, रूनवाल, प्रकाश जी रांका, मनोहरजी भंडारी, मनीषजी व्यास, दिनेश जी सक्सेना, मुकुल सक्सेना, यशवंत पंवार ,चंदू खलीफा, किशोर खलीफा, वीरसिंहजी भूरिया, प्रतीक मेहता, सौरभ सोनी, हितेष संघवी, आलोकजी द्विवेदी, निकी डामोर, महेषजी राठौर, हेमेन्द्र पंवार, धन्नालालजी, आदि द्वारा बधाई दी जाकर राष्ट्रीय स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु शुभकामनाएं दी गई । उक्त जानकारी जय बजरंग व्यायाम शाला के चंदर पहलवान एवं राजेश बारिया द्वारा दी गई ।

प्रणय दिवस को लेकर श्री उपाध्याय के बेवाक विचार 
झाबुआ । पाश्चात्य संस्कृति में 14 फरवरी वेलेंटाईन दिवस का दुष्प्रभाव आज देश के युवा वर्ग पर सबसे अधिक दिखाई देता है । युवा वर्ग इस दिवस को अपने अलग ही अंदाज में मना कर अपनी पूरातन संस्कृति से विमुख हो रहे है  । नगर के साहित्यकार एवं समाजसेवा मे अग्रणी, कवि एवं हिन्दुधर्म के विद्वान पण्डित गणेश प्रसाद उपाध्याय ने  वेलेंटाईन दिवस को लेकर चर्चा में बताया कि हमारी संस्कृति में अपने पूर्वजों ने मकरसंक्रांति, होली, गुढीपाडवा, गणेशोत्सव तथा दीपावलीके समान विशेषतापूर्ण त्योहार किस प्रकार मनाए जाते हैं, यह सिखाया है। किंतु हम 1 जनवरी को नव वर्षारंभ, प्रेमिकाओं का दिन ‘वेलेंटाईन डे’ ‘मदर्स-डे’, ‘चॉकलेट डे’ इस प्रकारके अनेक विकृत ‘डे’ मनाते हैं । इन विभिन्न ‘डे’द्वारा वासना, कामांधता, विकृति, अश्लीलता एवं अनैतिकताका दर्शन होता है । ये सभी सुख क्षणिक हैं । इस प्रकारका अधर्माचरण करने से चरित्रका हनन होता है, भोगवाद विलासवाद  फैलता है, कामांधता बढती है तथा अनाचारोंकी मात्रा बढती है ।
Celebrating-Valentine-Day-is-the-biggest-corruption-in-Indian-culture-भारतीय संस्कृति में वेलेंटाईन डे मनाना सबसे बडा नैतिक पतन - पण्डित गणेश उपाध्याय पण्डित उपाध्याय के अनुसार युवक-युवतियां एकत्रित होकर 14 फरवरी को प्रेमिकाओं का दिन मनाते हैं । इस दिन वे एक-दूसरेको भेंटवस्तु तथा फूल अथवा ‘पार्टी’ देकर प्रेम व्यक्त करते हैं । वैलेंटाईन डे मनाना, पश्चिमी संस्कृति की अनैतिकता का अनुसरण व हिन्दू संस्कृति का अवमूल्यन है । आर्थिक लाभ हेतु प्रसारमाध्यम ,शुभकामना पत्र-निर्माता इसका प्रसार करते हैं । इससे हिन्दुओं के एक दिन के राष्ट्रांतरण एवं धर्मांतरण को प्रोत्साहन मिलता है । उनका कहना है कि यदि आपने प्रेमिकाओ का दिन 26 वें वर्ष र्में मनाया होगा, तो आपके बालक 16 वें वर्ष में ही वह मनाएंगे । यदि हममें अनैतिकता की मात्रा 40 प्रतिशत होती है, तो बालकों में वह 70 प्रतिशत होती हुई दिखाई देगी । ध्यान में रखें कि आपके बालक आपकी अपेक्षा सभी बातों में आगे बढ रहे हैं । यदि आप धर्माचरण कर रहे हैं, तो आपके बालक भी आपसे आगे बढकर धर्माचरण करेंगे । यदि आप अनैतिकताका आचरण करेंगे, तो भविष्यकी पीढी भी अनैतिक होगी ।
पण्डित गणेश उपाध्याय-pandit-ganesh-upadhyay
पण्डित गणेश उपाध्याय
श्री उपाध्याय का कहना है कि क्रांतिकारियो ने देश को स्वतंत्रता प्राप्त होने के लिए अत्यंत परिश्रम किए । क्रांतिकारी देश के लिए फांसी पर चढ गए, अपने घरों का त्याग किया, उस समय छोटे-छोटे बालक भी पथ पर उतरे । क्या उन्होंने यह त्याग इस हेतु ही किया था कि हम अनैतिकताका आचरण करें ? हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि ब्रिटिशों ने जब देशमें अनैतिकता फैलाना प्रारंभ किया, उस समय हमारी संस्कृति पर होनेवाले तीव्र अन्याय का भान होकर लडाई करनेके लिए क्रांतिकारी उनके विरोध में रस्ते पर उतरे । कुछ क्रांतिकारियों के प्राणत्याग करने के पश्चात ही भारतको स्वतंत्रता प्राप्त हुई है । 
            भारतीय संस्कृति विश्व की एकमात्र महान संस्कृति होने के कारण उसकी रक्षा करने के लिए ही हमारे पूर्वजों ने त्योहार मनाना आरंभ किया तथा उसमें भी ब्रिटिशों द्वारा अडचनें उत्पन्न करने के कारण क्रांतिकारियो ने एकत्रित होकर आंदोलन किया । क्रांतिकारियों ने भारत देश स्वतंत्र करने के पीछे विशिष्ट उद्देश्य रखा था । हम हमारे देश में प्राचीन कालावधि से जो भी त्योहार-उत्सव मनाते आए हैं, वे उसी पद्धति से मनाए जाने चाहिए । त्योहार के दिन परिवार के सर्व सदस्य एकत्रित होने के पश्चात देश तथा धर्म के संदर्भ में बातचीत होती थी । उनमें से ही देश प्रेम जागृत होकर पारिवारिक संबंध स्थापित किए जाते थे । क्रांतिकारियों को इस बात का पता था कि हमारी संस्कृति विश्व की एकमात्र महान संस्कृति है । उसका रक्षण करने हेतु हमारे पूर्वज त्योहार मनाते थे, साथ ही धर्माचरण भी करते थे । ब्रिटिशों द्वारा उसमें अडचनें उत्पन्न करना आरंभ करते ही क्रांतिकारियों ने एकत्रित होकर  ब्रिटिशो के विरोध में आंदोलन किया ।
उन्होने आगे कहा कि ये प्रेमिकाओं का दिन हमारे मन एवं बुद्धि पर कौन सी संस्कृति अंकित करता है ? इससे आपके सामने कौन सा आदर्श स्थापित होता है ? इसका उत्तर आपके पास है, किंतु उसका उत्तर देने में आपको लज्जा आती है । प्रेमिकाओं का दिन अर्थात एक-दूसरे के अतिरिक्त अन्य कोई भी नहीं । वही सर्वस्व, उसके लिए ही जन्म, ऐसे मूढ भ्रम में रहने वाले प्रेमी उस दिन मिलते हैं । प्रेमिकाओं का दिन मनाना, अर्थात इसे मूर्खताकी परमावधि ही कहनी पडेगी । ईश्वरने क्यों हमारी सृष्टि की है ? भारतकी संस्कृति, क्रांतिकारियों का त्याग, साथ ही माता-पिता द्वारा किया गया पालन पोषण, इस सभीका विस्मरण कर हम प्रेमिका का दिन मनाते हैं । एक कहावत है, पागल कुत्ता उनके स्वामी को कभी भी नहीं काटता किंतु यहां मानव ही कुत्ते की अपेक्षा नीच हो गया है । 
14 फरवरी को हिंदु प्रेमी-प्रेमिका माता-पिता का विस्मरण कर उनके मनके विरूद्ध आचरण करते हैं । उस क्षणिक सुखके लिए आत्महत्या तक के लिए भी प्रवृत्त होते हैं । क्या प्रेमिका का दिन यही आदर्श सिखाता है ? इस प्रश्नका निर्लज्ज लोग यहां’ ऐसा ही उत्तर देते हैं । यदि आप वास्तव में हिंदुस्थान में जन्मे हैं अथवा आपके माता-पिता ने आपके बचपन में आप पर अच्छे संस्कार किए हैं तथा आपको चरित्रहीन होने से दूर रहना है, तो 14 फरवरी, यह दिन मनाना छोड दें तथा उसे मनाने वालों का प्रबोधन कर उन्हें इससे दूर करें, तो ही आपका जन्म सार्थक होगा । श्री उपाध्याय का कहना है हिन्दुओं की विवाह संस्कृति संयमी व नैतिक प्रेम जीवन सिखाती है । इसीलिए भविष्य में राष्ट्र-धर्मप्रेमियों द्वारा स्थापित होनेवाले धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र में यह भोगवादी डे प्रथा नहीं रहेगी !

 झाबुआ। शास्त्रों में उल्लेखित है कि जहां वतन को शांति प्राप्त हो, आत्मा का परमात्मा से तादात्म्य स्थापित हो, जहां देवषक्तियां स्वयं बिराजित होकर सर्वे सुखिनः भवन्तु के आशीष प्रदान करती है, जहां जाने मात्र से ही मन को एक सुकुन मिलता हो ऐसे स्थान को मंदिर की उपमा दी गई है। यह जानकारी देते श्री संघ के युवा रिंकू रूनवाल ने बताया कि झाबुआ शहर का सौभाग्य है कि आज से 121 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1952 माह सुदी पूर्णिमा को अवतार तुल्य दादा गुरूदेव श्री विजय राजेन्द्र सूरिष्वरजी मसा ने 251 जिनबिंब की प्रतिमा की अंजन शलाका  की थी और इतनी अवधि में इस पवित्र तीर्थ स्थल 52 जिनालय का का प्रादुर्भाव होना ही अपने आप मे एक चमत्कार ही कहा जावेगा। आज न सिर्फ समूचा मालवा प्रांत बल्कि देष के कोने-कोने से यहां तीर्थयात्रियों का जमावडा होता है और भगवान की मनमोहक प्रतिमा के दर्षन करके अपने आप को धन्य एवं गौरवान्वित महसूस करते है। 
            52 जिनालय जैन तीर्थ जहां स्वयं साक्षात परमात्मा का वास माना जाता है, को देव विमान का स्वरूप माना जाता है। शाष्वत तीर्थ नंदिष्वर द्वीप जहां पर देवता वंदन पूजन करते है उसकी रचना भी हुबहु 52 जिनालय कहलाती है। 
 जैन तीर्थ में भक्त को दर्शन से मिलती है आत्म शांति
Ancient-Jain-pilgrimage-Rishabhdev-122nd-Foundation-Day-today-jhabua-अति प्राचीन जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय का 122वां स्थापना दिवस आज  पूरे प्रदेश ही नही देश  में 52 जिनालय के समकक्ष एवं इसकी अनुठी वास्तुकला का उदाहरण अन्यत्र कहीं नही है। झाबुआ नगर का 52 जिनालय मालवांचल का एक मात्र जैन तीर्थ है जिसके मूल नायक प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री ऋषभदेवजी भगवान है। इस जीनालय को जैन संप्रदाय का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल होने का गौरव प्राप्त है इस तीर्थ में 117 पाषाण की अति प्रचित प्रतिमायें बिराजमान है। इसके साथ ही श्री सिद्धचक्र यंत्र, दादा गुरूदेव की प्रतिमा भी यहां बिराजित है। बावन जिनालय तीर्थ मंदिर में प्रवेश के साथ ही प्रत्येक मानव के आंतरिक भावों की शुद्धि  हो जाती है। सांसारित मायाजाल से अलहदा होकर वह यहां अनुपम शांति का अहसास करता है कहते है जहां प्रवेष करते ही मनोविकार दूर हो जावे वही मंदिर तीर्थ बन जाता है। यहां प्रतिदिन औसतन 250 से 300 श्राविकाएं नियमित रूप से पूजन करने आते है वही प्रतिदिन 500 से अधिक श्रद्धालुजन भगवान के दिव्य दर्शन  का लाभ प्राप्त कर अनुग्रहित होते है।
 शहर में है 5 जिनालय 
इस तीर्थ की प्रसिद्धी इसी बात से होती है कि जैन संप्रदाय के सभी महान मुनियो, आचार्यो एवं संतो ने यहां पधार कर भगवान के दर्शनलाभ लेकर इस धरा को पवित्र करके आध्यात्मिक आनंद का केन्द्र बना दिया है। बावन जिनालय परिसर में श्री गणधर मंदिर, के अलावा नगर में चमत्कारिक जिनदत्तसूरी, जिन कुशल सूरि दादावाडी, श्री नाकोडा पार्श्वनाथ मंदिर के साथ ही गोडी पार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री महावीर बाग मंदिर भी इस पावन धरा पर स्थापित होकर पूरे नगर, एवं अंचल में अपनी आध्यात्मिक आभा से पूरे वातावरण को धर्ममय बना रहे है। श्री 52 जिनालय को लेकर बाहर से आने वाले यात्रिकों के अनुभवों को यदि सुना जा तो यहां सर्व मनोरथ पूर्ण होने में देरी नही लगती है।  
आज मनाया जाएगा 122वां स्थापना दिवस 
     सुश्रावक संजय मेहता ने बताया कि शुक्रवार को श्री ऋषभदेव बावन जिनालय का 122वां स्थापना दिवस विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रातः श्री भक्तामर पाठ के पश्चात् भगवान का पंचामृत से अभिषेक एवं केशर पूजन होगी। महिला परिषद् द्वारा श्री आदिनाथ भगवान की पंच कल्याण पूजन पश्चात् सामूहिक सामायिक का आयोजन होगा। श्री संघ द्वारा सभी धार्मिक कार्यक्रमों को सफल बनाने की अपील समाजजनों से की है। 


पुरस्कार वितरण समारोह 12 फरवरी को शक्तिपीठ पर आयोजित 

अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा
      भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक श्याम त्रिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया की प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली यह परीक्षा 15 अक्टोबर 2016 को आयोजित की गई थी। जिसमें शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्थाओं मे कक्षा 5 वी से 12 वीं स्तर तक के 24 हजार 8 सो 50 विद्यार्थियों  ने यह परीक्षा दी थी। प्रतिवर्ष परीक्षा मे बढते बच्चो की संख्या के कारण राज्य स्तर पर जिले को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। 
 पुरस्कार वितरण रविवार को
    परीक्षा के जिला सचिव एसएस पुरोहित ने जानकारी देते हुए बताया की पुरस्कार वितरण समारोह 12 फरवरी रविवार को स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ बसंत कालोनी पर दोपहर 12 बजे से प्रारंभ होगा। प्रावीण्य सूचि मे जिला एवं तहसील स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे छात्र छात्राओं को पुरस्कार के रूप मे प्रमाण पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं नगद राशि प्रदान की जाएगी।
      तहसील प्रभारियों द्वारा प्रावीण्य सूची मे स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की सूचना उनके विद्यालयों मे पहुंचा दी गई है। जो विद्यार्थी इस परीक्षा मे सम्मीलित हुए थे उनके प्रमाण पत्र भी संस्थाओं को पहुंचा दिए गए है। पुरस्कार विरतण समारोह मे जिले के अन्य स्थानों एवं तहसील से आने वाले विद्यार्थीयों को आने जाने का मार्ग व्यय दिया जाएगा एवं उनके लिए भोजन व्यवस्था भी रखी गई है।

Gayatri-Parivar-Shantikunj-Haridwar-Sanskrati-Gyan-Exam-Result-Declared-Today-अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित

Gayatri-Parivar-Shantikunj-Haridwar-Sanskrati-Gyan-Exam-Result-Declared-Today-अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित

Gayatri-Parivar-Shantikunj-Haridwar-Sanskrati-Gyan-Exam-Result-Declared-Today-अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित

Gayatri-Parivar-Shantikunj-Haridwar-Sanskrati-Gyan-Exam-Result-Declared-Today-अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित

Gayatri-Parivar-Shantikunj-Haridwar-Sanskrati-Gyan-Exam-Result-Declared-Today-अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के परिणाम घोषित

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*निर्मल पंड्या/ रानापुर: विगत दिवस वाटसएप पर बालक लोकेश पिता रमेश को फोटो प्रसारीत हुआ जो की थांदला रोड रेलवे स्टेशन पर अकेला पाया गया। लोकेश को पुलिस की सहायता से झाबुआ स्थित चाइल्ड लाईन झाबुआ लाया गया जहा से उक्त मैसेज को वाटसएप एवं अन्य सोशियल मिडिया पर प्रसारीत किया गया जिसके चलते कईयों के प्रयासों से बालक लोकेश को उसका घर मिला साथ ही वह कालीदेवी के रमेश का पुत्र निकला जो स्वंय चाइल्ड लाईन आकर बच्चें लोकेश को अपने साथ ले गए।

lost-child-came-home-with-help-Whatsapp-messenger-वाटसएप की सहायता से खोया बच्चा पहुचा अपने घर

गोपाल मंदिर में आयोजित हुआ त्रिदिवसीय वार्षिकोंत्सव समारोह

महाआरती के साथ हुआ त्रिदिवसीय समारोह का समापन 
झाबुआ: गोपाल कालोनी स्थित श्री गोपाल मंदिर का 46 वां वार्षिकोंत्सव समारोह भव्याति भव्य पैमाने पर मनाया गया । रविवार से शुरू हुए त्रिदिवसीय आयोजन में अखण्ड जाप,भजन संध्या, एवं सत्संग का आयोजन किया गया जिसमे बडी संख्या में गोपाल भक्तों ने भागीदारी की । मंगलवार को मोहिनी एकादशी के अवसर पर हर वर्ष मनाया जाने वाला यह वार्षिकोत्सव की व्यापक तैयारियां गुरू भक्तों द्वारा की गई । रौशनी की चकाचौंध, पुष्पसाज  ओर आशा पालव की तोरण से आछदित पूरा मंदिर प्रांगण..... । 
              जानकारी देते हुए भक्त मंडल के विशाल भट्ट ने बताया की त्रिदिवसीय आयोजन के तहत रविवार को गुरु भक्तो द्वारा प्रातः 10 बजे से 24 घंटे का गुरु ओम मंत्र का जाप शुरू किया गया जो की सोमवार प्रातः 10 बजे तक चला। सोमवार की दोपहर 2 बजे भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, रात्री को गुरूभक्तों द्वारा जागरण कर भजन कीर्तन किये गये । मंगलवार को प्रातः 8-30 बजे से श्रीगुरू पाद पूजन तथा भजनांजलि का आयोजन किया गया। आयोजन में देश भर के विभिन्न प्रांतो शहरो से आये हज़ारो भक्तो ने भक्ति ओर भजनों का ऐसा राग छेड़ा मानो सदियों तक ये राग युही चलता रहे......  गुरूभक्तों द्वारा बडे भाव विभोर होकर लाखे बेसीये रे करोडो उभिये रे, तमे तो भजन करावे नी .... दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अंखिया प्यासी रे, मन मंदिर की जोत जगाओं घट घट वासी रे.... गोपाल कालोनी म्हारा गुरूजी बिराजे, दुनिया मां डंकों बाजे जी ओ ओ... मोहन प्यारा लागी छे तारी माया... रंगाया तारा रंग मां हूं तो बन्यों छू दीवाना थारा संग मां ...... हरी नु भजन,सदा हरी नु भजन, प्रेमियों ना लक्ष्य सदा हरी नूं भजन आदि भजनों के द्वारा पूरा वातावरण भक्ति मय हो गया । 
       मंगलवार को दोपहर 12 बजे हजारों भक्तों की उपस्थिति में श्री गोपाल प्रभू, घनश्याम प्रभू बाबजी और रामशंकर जी जानी मोटा बाबजी की महाआरती की गई । तत्पश्चात प्रसादी का वितरण कर भंडारे का आयोजन किया गया ।  इस अवसर पर वार्षिकोत्सव में भाग लेने के लिये देश भर के विभिन्न राज्यों से आये भक्तो के साथ ही इन्दौर, महू, रतलाम, उज्जैन, आदि शहरो सहित हज़ारो की संख्या में भक्त जनों ने आकर गुरूभक्ति का लाभ लिया। गोपाल मंदिर झाबुआ द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित यह वार्षिकोत्सव समारोह आज न सिर्फ झाबुआ शहर अपितु प्रदेश ओर साथ ही देश में एक अति प्राचीन , धार्मिक ओर सांस्कृतिक आयोजन का प्रतिक है निश्चित रूप से आगामी वर्षो में यह आयोजन न केवल प्रादेशिक अपितु देश भर में अपना एक अलग वर्चस्व स्थापित करेगा ।

gopal-mandir-jhabua-varshikotsav-annula-function-organized-2016-भजनों की धुन - मजीरों की थाप पर झूम उठे भक्त -गोपाल मंदिर में आयोजित हुआ त्रिदिवसीय वार्षिकोंत्सव समारोह
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gopal-mandir-jhabua-varshikotsav-annula-function-organized-2016-भजनों की धुन - मजीरों की थाप पर झूम उठे भक्त -गोपाल मंदिर में आयोजित हुआ त्रिदिवसीय वार्षिकोंत्सव समारोह
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*निर्मल पंड्या/ राणापुर: राणापुर के होनहार युवा अमन श्रीवास्तव ने मध्यप्रदेश बोर्ड की हायर सेकण्डरी परीक्षा में विज्ञान संकाय के गणित विषय मे जिले में तृतीय स्थान प्राप्त कर राणापुर का नाम रोशन किया। अमन पिता महेश श्रीवास्तव द्वारा आयोजित परीक्षा में विज्ञान संकाय के समस्त विषयों में विशेष योग्यता प्राप्त की एवं विघालय कैथोलिक मिशन का भी नाम रोशन किया। अमन श्रीवास्तव द्वारा अपनी इस उपलब्धी पर अपने परिजन महेश श्रीवास्तव एवं उनकी माता मिथीलेश श्रीवास्तव के आर्शिवाद के साथ विघालय परिवार की मेहनत का हाथ भी बताया। अमन द्वारा विज्ञान संकाय में 500 में से 472 अंकों के साथ 94 प्रतिशत अंका प्राप्त किए। 
       अमन की उपलब्धि पर परिजनों एवं इष्ट मित्रो द्वारा बधाईयों को तातां सा लग गया वहीं अमन द्वारा आगे की योजना में मेनेजमेंट कोर्स में एमबीए कर प्रबंधन में भविष्य बनाने की योजना बनाने की बात कही।

* निर्मल पंड्या/ रानापुर: रानापुर के ग्राम रुपाखेडा के समिप ट्रैक्टर से जा रहे 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गयी।  पुलिस के अनुसार कसरिया पिता बिजिया (50 ) निवासी लम्बेला की ट्रैक्टर से गिरने से मोके पर मौत हो गयी । रानापुर पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर जाच की जा रहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार ट्रैक्टर मे 70 से ज्यादा सवारियाँ बेठी थी। जम्प लेने पर  पीछे बेठा केसरिया गिर गया जिससे मोके पर मौत हो गई.

rural-Death-of-falling-tractor-ranapur-jhabua-ट्रैक्टर से गिरने से ग्रामीण की मौत रानापुर
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झाबुआ : पिछले वर्षों में मध्यप्रदेश पीएससी की परीक्षा में जिले के युवाओं की सफलता के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं खासकर सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए माहौल बनने लगा है। इसकी तैयारी के लिए जहां प्रदेश के युवा बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं वहीं झाबुआ जिले में विगत 14 वर्षो से पीएससी, आईएस , बैंक, संविदा शिक्षक आदि परीक्षाओं के लिए प्रदेश का अग्रणी संसथान एसडी एकेडमी द्वारा सभी परीक्षाओं में शत  प्रतिशत परिणाम देकर नया कीर्तिमान रचा जा रहा है।  
      विगत 14 वर्षो से नियमित कक्षाओं के अलावा अतिरिक्त कक्षाएं इस संस्थान की मूल विशेषता है । झाबुआ  जैसे छोटे शहर में प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को लेकर विद्यार्थी काफी फिक्रमंद है रोजाना छात्रों को करंट अफेयर्स, राजनीतिक घटनाक्रम से अपडेट कराया जाता है। यहां सभी विषयों के विशेषज्ञ क्लास लेते हैं। यहां तर्कशक्ति, संख्यात्मक अभियोग्यता, इतिहास, संविधान, मप्र  जैसे सभी विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है। आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स को अतिथि विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसके लिए संस्थान प्रबंधन  द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
आगामी परीक्षाओं में मिलेगा फायदा
संस्था प्रबंधक संजीव दुबे ने जानकारी देते हुए बताया की आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। संस्थान द्वारा सेमिनार , मॉक टेस्ट जैसे कई ओर नए प्रयासों के साथ संस्थान हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शत प्रतिशत परिणाम हेतु संकल्पित है, रोजाना अखबार में तात्कालिक मुद्दों को गंभीरता से लेने की सलाह दे रहे हैं, जो ऐसे परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
ज्ञान सबके लिए
झाबुआ जैसे ग्रामीण ओर पिछड़े हुए जिले में हर उम्र, जाति और वर्ग के लोगों तक पिछले कई वर्षों से ज्ञान का प्रकाश पहुंचा रही ‘एसडी एकडेमी ’ ने पिछले दिनों एमपी पीएसी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में ऐतिहासिक परिणाम देकर नया कीर्तिमान रचा  है । संस्थान द्वारा  एमपी पीएसी ओर  आईएस परीक्षाओं हेतु आम लोगों का रास्ता खोल दिया है। एमपी पीएसी, यूपीएससी ,बैंक, संविदा शिक्षक या ऐसी ही किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए झाबुआ जिले के साथ ही समूचे प्रदेश का एक मात्र संस्थान जहाँ प्रतिवर्ष शत प्रतिशत परिणाम देकर दिन प्रतिदिन सफलता के नए आयाम स्थापित किये जा रहे है।
बढ़ते कदम
डॉ सुरेश कोठरी द्वारा 2002 -03 में बैकलॉग PSC हेतु निःशुल्क क्लासेज शुरू करने के बाद झाबुआ में प्रतियोगिता परीक्षाओं हेतु माहौल बनना शुरू हुआ ओर बैकलॉग में प्रदेश का सबसे बड़ा परीक्षा परिणाम झाबुआ ने दिया लेकिन 2003 में ही कोठरी क्लासेज बंद हो गया ओर संस्था के अधिकांश शिक्षक इंदौर चले गए लेकिन शिक्षक संजीव दुबे द्वारा इंदौर वापस न जाकर यही प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्य करने का निर्णय लिया।
     वर्ष 2003  में छोटे से स्तर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाला यह संस्थान 14  वर्षो में हर वर्ष श्रेष्ठ परिणाम देते हुए आज झाबुआ जिले के साथ ही पुरे प्रदेश का तेजी से बढ़ता संस्थान हो चला है , परिणामों में निरन्तर श्रेष्ठता इस संस्थान की खासियत है जो प्रतिवर्ष घोषित परिणामों में दिखाई पड़ती है  ।
खासियत
वर्ष 2003  में स्थापित ‘एसडी एकडेमी ’ने मात्र एक दशक में जिले  के सबसे बड़े प्रतियोगी परीक्षा संस्थान के रूप में अपनी पहचान बना ली है। प्रबंधक संजीव दुबे द्वारा संचालित इस संस्थान का लक्ष्य समाज के हर वर्ग के लोगों को बेहतरीन व उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने, उनकी हिम्मत बढ़ाने, उनसे कोऑर्डिनेट करने और जिले के साथ ही प्रदेश में  एक मानक तय करने के उद्देश्य से रखा गया। 2005  से संस्थान ने शैक्षणिक कार्यक्रम चलाने आरंभ किए। सबसे पहले 700  छात्रों के साथ ‘निःशुलक सेमिनार ’ और ‘निःशुलक शिविर ’ कार्यक्रम शुरू किए गए, जिसके बाद निरन्तर इस तरह के शिविर सेमिनार आयोजित किये जा रहे है ।
पुस्तकालय की सुविधा
 संस्थान द्वारा सभी प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु वृहद पुस्तक श्रृंखला ओर  विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकों की विशाल श्रृंखला संस्थान द्वारा पुस्तकालय में रखी गयी है । लाइब्रेरी में स्टूडेंट्स, एकेडमिक काउंसलर्स और एकेडमिक कोऑर्डिनेटर्स की जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। संस्थान  ने वेब लाइब्रेरी भी तैयार कर रखी है। ऑथर, टाइटल, सब्जेक्ट और की-वर्डस के आधार पर यूजर्स ऑनलाइन लाइब्रेरी की सेवा भी ले सकते हैं।
बढ़ रही हैं उपलब्धियां
आज जिले के प्रतियोगी परीक्षाओं के  क्षेत्र में नामांकित कुल छात्रों में से लगभग 65  प्रतिशत परीक्षार्थियों  की शैक्षणिक आवश्यकता एसडी एकडेमी संस्थान पूरी कर रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अग्रणी संस्थान के रूप में एसडी एकडेमी को प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में सर्वोत्तम संस्थान के रूप में उच्च शिक्षा मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया गया है ।  खास बात यह भी है कि केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समर्पित जिले ओर प्रदेश के अभ्यर्थियों द्वारा एसडी एकडेमी को न केवल बेहतर मार्गदर्शक संस्थान अपितु संस्थान ने शिक्षा के नए युग में प्रवेश कराया है। आज संस्थान द्वारा विभिन्न  क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों  के माध्यम से दूर-दराज के विद्यार्थियों तक प्रतियोगी परीक्षाओं में रूचि ओर अवसर हेतु विभिन्न सेमिनार द्वारा मोटीवेट किया जा रहा है ।
हर वर्ग के लिए वरदान
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले उन सभी लोगों के लिए संस्थान एक वरदान की तरह है, जो किसी कारणवश रेगुलर पढ़ाई नहीं कर पाते। इस संस्थान में आज के हिसाब से लगभग सभी तरह की परीक्षाओं हेतु पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि इनकी विश्वसनीयता नियमित संस्थानों द्वारा दी जा रही शिक्षा से किसी भी मायने में कम नहीं है। संस्थान द्वारा संचालित अधिकांश परीक्षाओं में निःशुल्क सेमिनार सुविधा छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है.
          मुख्य परीक्षा में चयनित अविनाश भूरिया ने बताया की इंदौर जैसे महानगर में व्यवसायिक स्तर पर संचालित विभिन्न संस्थान लाखो रु. की फीस वसूलते है झाबुआ के सेकड़ो युवा इंदौर जाते है लेकिन परीक्षा परिणाम न के बराबर रहता है। वही जिले के आर्थिक रूप से अक्षम छात्र इंदौर के संस्थान से ही 10% फीस में ही यही रहकर अपने दैनिक कामकाज करते हुए पीएससी परीक्षाओं में मेरिट में स्थान पा रहे है
पर्याप्त स्टडी मैटीरियल
स्टूडेंट्स को परीक्षा  पर आधारित पर्याप्त स्टडी मैटीरियल भी उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे रेगुलर पढ़ाई कर सकें। समय-समय पर परीक्षाएं, मॉक टेस्ट, सेमिनार भी आयोजित किये जाते  हैं।  इसके आधार पर वे सरकारी और निजी कहीं भी अपने अनुकूल रोजगार भी पा सकते हैं।
बढ़ती लोकप्रियता
ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों के युवाओं के बीच एसडी एकडेमी की बढ़ती लोकप्रियता का आलम यह है कि इसकी लोकप्रियता को देखते हुए जिले के कई अन्य संस्थानों द्वारा एसडी एकडेमी की तरह सेमिनार आयोजित किये जाने लगे  है.  इन संस्थानों  के अलावा जिले में 25 से अधिक  इंस्टीट्यूट भी एमपी पीएससी, यूपीएससी  की जरूरत पर बल दे रहे हैं। 

Sd Academy के अभ्यर्थियों ने इस वर्ष भी दिया श्रेष्ट परिणाम 

एमपी पीएससी प्रारंभिक परीक्षा के नतीज़ों ने ये साबित कर दिया की झाबुआ के प्रतियोगी अब मध्य प्रदेश स्तर पर नतीजे देने लगे है और मध्य प्रदेश के अन्य जिलो को भी अच्छी टक्कर दे रहे है। वही झाबुआ के Sd Academy का परिणाम हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रेष्ट रहा , संस्था के संचालक श्री संजीव दुबे ने बताया की संस्था में पीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2015 के लिए कुल 80 से अधिक अभ्यर्थी नामांकित थे , जिनमे से 60 से अधिक अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए हैँ। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्था का परिणाम 85 प्रतिशत से अधिक रहा है।
          जानकारी देते हुए संस्था संचालक संजीव दुबे ने बताया की विगत कई वर्षो से झाबुआ में दमोह , सागर, जबलपुर, रायसेन ,रीवा , इंदौर आदि स्थानों से भी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी हेतु विद्यार्थी आने लगे है शासन प्रशासन अगर सिविल परीक्षाओं हेतु थोड़ी सहायता भी करे तो झाबुआ में इससे भी बेहतर परिणाम आ सकते है  संस्था द्वारा वर्ष 2003 से अब तक पीएसी बैकलॉग परीक्षा के बाद एमपीपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में 300 से अधिक युवा चयनित होकर विभिन्न विभागों में अपनी सेवा दे रहे है वही रेल्वे, बैंक , एसएससी , एसआई , व्यापम सहित विभिन्न परीक्षाओं में ये आंकड़ा 1000 से अधिक पहुंच चूका है.
ये अभ्यर्थी हुए प्रारंभिक परीक्षा में चयनित 
      रवि सस्तिया, दीपा सरवन ,विकास मेड़ा , नीना भाबोर ,शम्भू बारिया ,ठाकुर सिंह ,संगीता भाबोर, पूजा वास्कले ,अयाज़ शेख,हेमलता बिलवाल ,शिखा सोनी, निकिता सिन्हा ,देव श्री नाय, मधुबाला गोयल ,शिखा शर्मा ,रिंकू चौहान, अश्विन वसुनिया ,कनका बामनिया ,राकेश परमार ,शेखर दुबे, बलवंत नलवाया ,सपना पचौली, रवि साहू ,लॉरेंस ,मोनिका बघेल ,सुनीता बरिया ,ललित गड़रिया ,राजेश बारिया ,राजेंद्र वसुनिया, कमलेश बामनिया सहित कुल 60 से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
2015 -16 मुख्य परीक्षा में ये अभ्यर्थी हुए चयनित 
        अविनाश भूरिया , आरती गरवाल, शिखा सोनी, हेमलता बिलवाल , अभिषेक बिलवाल, देवश्री नाय, मुकेश मचार , हर्षिता मेड़ा , ज्योति भाबोर, बलवंत नलवाया, अश्विन वसुनिया , राकेश परमार , लॉरेंस भूरिया, मोनिका बघेल , सुनीता बरिया , निकिता सिंह , ललित गड़रिया , कमलेश बामनिया , कुसुम मेड़ा , विकास मवि, राधा डावर सहित 40 से अधिक  अभ्यर्थियों  ने मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त की जिनके साक्षात्कार पीएससी द्वारा लिए जा रहे है.
          2015 -16 में अयाज़ शेख , सुनील पाल , कमलेश बामनिया , भवरसिंह , रामसिंह आदि ने एमपी एसआई परीक्षा में सफलता प्राप्त की है वही महिला पर्यवेक्षक परीक्षा में 25 से अधिक अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की है जिनमे संस्था की वंदना वाखला ने पुरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है

 एक्सपर्ट व्यू  


झाबुआ  जिले में प्रतिभाओ की कोई कमी नहीं है यदि उन्हे परिवार द्वारा प्रोत्साहित किया जाये तो निश्चित ही वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।  जितने परिश्रमी झाबुआ के छात्र है उतने शायद ही कही हो. सही मार्ग दर्शन के आभाव में अपेक्षित सफलता नहीं आ पाती , वर्तमान में में सीसेट पैटर्न आने से  झाबुआ के विद्यार्थियों को IAS आदि परीक्षाओ में भी सफलता प्राप्त करने के अवसर है आरम्भ में छात्रों की मेहनत  ही शिक्षको के परिश्रम को मंज़िल तक पहुचाती  है में अपने सभी चयनित छात्र छात्राओ को बधाई और शुभकामनाये देता हु.
श्री संजीव दुबे , संचालक ( SD ACADEMY, JHABUA)


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