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*निर्मल पंड्या/ राणापुर: राणापुर के होनहार युवा अमन श्रीवास्तव ने मध्यप्रदेश बोर्ड की हायर सेकण्डरी परीक्षा में विज्ञान संकाय के गणित विषय मे जिले में तृतीय स्थान प्राप्त कर राणापुर का नाम रोशन किया। अमन पिता महेश श्रीवास्तव द्वारा आयोजित परीक्षा में विज्ञान संकाय के समस्त विषयों में विशेष योग्यता प्राप्त की एवं विघालय कैथोलिक मिशन का भी नाम रोशन किया। अमन श्रीवास्तव द्वारा अपनी इस उपलब्धी पर अपने परिजन महेश श्रीवास्तव एवं उनकी माता मिथीलेश श्रीवास्तव के आर्शिवाद के साथ विघालय परिवार की मेहनत का हाथ भी बताया। अमन द्वारा विज्ञान संकाय में 500 में से 472 अंकों के साथ 94 प्रतिशत अंका प्राप्त किए। 
       अमन की उपलब्धि पर परिजनों एवं इष्ट मित्रो द्वारा बधाईयों को तातां सा लग गया वहीं अमन द्वारा आगे की योजना में मेनेजमेंट कोर्स में एमबीए कर प्रबंधन में भविष्य बनाने की योजना बनाने की बात कही।

* निर्मल पंड्या/ रानापुर: रानापुर के ग्राम रुपाखेडा के समिप ट्रैक्टर से जा रहे 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गयी।  पुलिस के अनुसार कसरिया पिता बिजिया (50 ) निवासी लम्बेला की ट्रैक्टर से गिरने से मोके पर मौत हो गयी । रानापुर पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर जाच की जा रहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार ट्रैक्टर मे 70 से ज्यादा सवारियाँ बेठी थी। जम्प लेने पर  पीछे बेठा केसरिया गिर गया जिससे मोके पर मौत हो गई.

rural-Death-of-falling-tractor-ranapur-jhabua-ट्रैक्टर से गिरने से ग्रामीण की मौत रानापुर
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झाबुआ : पिछले वर्षों में मध्यप्रदेश पीएससी की परीक्षा में जिले के युवाओं की सफलता के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं खासकर सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए माहौल बनने लगा है। इसकी तैयारी के लिए जहां प्रदेश के युवा बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं वहीं झाबुआ जिले में विगत 14 वर्षो से पीएससी, आईएस , बैंक, संविदा शिक्षक आदि परीक्षाओं के लिए प्रदेश का अग्रणी संसथान एसडी एकेडमी द्वारा सभी परीक्षाओं में शत  प्रतिशत परिणाम देकर नया कीर्तिमान रचा जा रहा है।  
      विगत 14 वर्षो से नियमित कक्षाओं के अलावा अतिरिक्त कक्षाएं इस संस्थान की मूल विशेषता है । झाबुआ  जैसे छोटे शहर में प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को लेकर विद्यार्थी काफी फिक्रमंद है रोजाना छात्रों को करंट अफेयर्स, राजनीतिक घटनाक्रम से अपडेट कराया जाता है। यहां सभी विषयों के विशेषज्ञ क्लास लेते हैं। यहां तर्कशक्ति, संख्यात्मक अभियोग्यता, इतिहास, संविधान, मप्र  जैसे सभी विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है। आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स को अतिथि विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसके लिए संस्थान प्रबंधन  द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
आगामी परीक्षाओं में मिलेगा फायदा
संस्था प्रबंधक संजीव दुबे ने जानकारी देते हुए बताया की आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। संस्थान द्वारा सेमिनार , मॉक टेस्ट जैसे कई ओर नए प्रयासों के साथ संस्थान हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शत प्रतिशत परिणाम हेतु संकल्पित है, रोजाना अखबार में तात्कालिक मुद्दों को गंभीरता से लेने की सलाह दे रहे हैं, जो ऐसे परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
ज्ञान सबके लिए
झाबुआ जैसे ग्रामीण ओर पिछड़े हुए जिले में हर उम्र, जाति और वर्ग के लोगों तक पिछले कई वर्षों से ज्ञान का प्रकाश पहुंचा रही ‘एसडी एकडेमी ’ ने पिछले दिनों एमपी पीएसी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में ऐतिहासिक परिणाम देकर नया कीर्तिमान रचा  है । संस्थान द्वारा  एमपी पीएसी ओर  आईएस परीक्षाओं हेतु आम लोगों का रास्ता खोल दिया है। एमपी पीएसी, यूपीएससी ,बैंक, संविदा शिक्षक या ऐसी ही किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए झाबुआ जिले के साथ ही समूचे प्रदेश का एक मात्र संस्थान जहाँ प्रतिवर्ष शत प्रतिशत परिणाम देकर दिन प्रतिदिन सफलता के नए आयाम स्थापित किये जा रहे है।
बढ़ते कदम
डॉ सुरेश कोठरी द्वारा 2002 -03 में बैकलॉग PSC हेतु निःशुल्क क्लासेज शुरू करने के बाद झाबुआ में प्रतियोगिता परीक्षाओं हेतु माहौल बनना शुरू हुआ ओर बैकलॉग में प्रदेश का सबसे बड़ा परीक्षा परिणाम झाबुआ ने दिया लेकिन 2003 में ही कोठरी क्लासेज बंद हो गया ओर संस्था के अधिकांश शिक्षक इंदौर चले गए लेकिन शिक्षक संजीव दुबे द्वारा इंदौर वापस न जाकर यही प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्य करने का निर्णय लिया।
     वर्ष 2003  में छोटे से स्तर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाला यह संस्थान 14  वर्षो में हर वर्ष श्रेष्ठ परिणाम देते हुए आज झाबुआ जिले के साथ ही पुरे प्रदेश का तेजी से बढ़ता संस्थान हो चला है , परिणामों में निरन्तर श्रेष्ठता इस संस्थान की खासियत है जो प्रतिवर्ष घोषित परिणामों में दिखाई पड़ती है  ।
खासियत
वर्ष 2003  में स्थापित ‘एसडी एकडेमी ’ने मात्र एक दशक में जिले  के सबसे बड़े प्रतियोगी परीक्षा संस्थान के रूप में अपनी पहचान बना ली है। प्रबंधक संजीव दुबे द्वारा संचालित इस संस्थान का लक्ष्य समाज के हर वर्ग के लोगों को बेहतरीन व उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने, उनकी हिम्मत बढ़ाने, उनसे कोऑर्डिनेट करने और जिले के साथ ही प्रदेश में  एक मानक तय करने के उद्देश्य से रखा गया। 2005  से संस्थान ने शैक्षणिक कार्यक्रम चलाने आरंभ किए। सबसे पहले 700  छात्रों के साथ ‘निःशुलक सेमिनार ’ और ‘निःशुलक शिविर ’ कार्यक्रम शुरू किए गए, जिसके बाद निरन्तर इस तरह के शिविर सेमिनार आयोजित किये जा रहे है ।
पुस्तकालय की सुविधा
 संस्थान द्वारा सभी प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु वृहद पुस्तक श्रृंखला ओर  विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकों की विशाल श्रृंखला संस्थान द्वारा पुस्तकालय में रखी गयी है । लाइब्रेरी में स्टूडेंट्स, एकेडमिक काउंसलर्स और एकेडमिक कोऑर्डिनेटर्स की जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। संस्थान  ने वेब लाइब्रेरी भी तैयार कर रखी है। ऑथर, टाइटल, सब्जेक्ट और की-वर्डस के आधार पर यूजर्स ऑनलाइन लाइब्रेरी की सेवा भी ले सकते हैं।
बढ़ रही हैं उपलब्धियां
आज जिले के प्रतियोगी परीक्षाओं के  क्षेत्र में नामांकित कुल छात्रों में से लगभग 65  प्रतिशत परीक्षार्थियों  की शैक्षणिक आवश्यकता एसडी एकडेमी संस्थान पूरी कर रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अग्रणी संस्थान के रूप में एसडी एकडेमी को प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में सर्वोत्तम संस्थान के रूप में उच्च शिक्षा मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया गया है ।  खास बात यह भी है कि केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समर्पित जिले ओर प्रदेश के अभ्यर्थियों द्वारा एसडी एकडेमी को न केवल बेहतर मार्गदर्शक संस्थान अपितु संस्थान ने शिक्षा के नए युग में प्रवेश कराया है। आज संस्थान द्वारा विभिन्न  क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों  के माध्यम से दूर-दराज के विद्यार्थियों तक प्रतियोगी परीक्षाओं में रूचि ओर अवसर हेतु विभिन्न सेमिनार द्वारा मोटीवेट किया जा रहा है ।
हर वर्ग के लिए वरदान
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले उन सभी लोगों के लिए संस्थान एक वरदान की तरह है, जो किसी कारणवश रेगुलर पढ़ाई नहीं कर पाते। इस संस्थान में आज के हिसाब से लगभग सभी तरह की परीक्षाओं हेतु पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि इनकी विश्वसनीयता नियमित संस्थानों द्वारा दी जा रही शिक्षा से किसी भी मायने में कम नहीं है। संस्थान द्वारा संचालित अधिकांश परीक्षाओं में निःशुल्क सेमिनार सुविधा छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है.
          मुख्य परीक्षा में चयनित अविनाश भूरिया ने बताया की इंदौर जैसे महानगर में व्यवसायिक स्तर पर संचालित विभिन्न संस्थान लाखो रु. की फीस वसूलते है झाबुआ के सेकड़ो युवा इंदौर जाते है लेकिन परीक्षा परिणाम न के बराबर रहता है। वही जिले के आर्थिक रूप से अक्षम छात्र इंदौर के संस्थान से ही 10% फीस में ही यही रहकर अपने दैनिक कामकाज करते हुए पीएससी परीक्षाओं में मेरिट में स्थान पा रहे है
पर्याप्त स्टडी मैटीरियल
स्टूडेंट्स को परीक्षा  पर आधारित पर्याप्त स्टडी मैटीरियल भी उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे रेगुलर पढ़ाई कर सकें। समय-समय पर परीक्षाएं, मॉक टेस्ट, सेमिनार भी आयोजित किये जाते  हैं।  इसके आधार पर वे सरकारी और निजी कहीं भी अपने अनुकूल रोजगार भी पा सकते हैं।
बढ़ती लोकप्रियता
ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों के युवाओं के बीच एसडी एकडेमी की बढ़ती लोकप्रियता का आलम यह है कि इसकी लोकप्रियता को देखते हुए जिले के कई अन्य संस्थानों द्वारा एसडी एकडेमी की तरह सेमिनार आयोजित किये जाने लगे  है.  इन संस्थानों  के अलावा जिले में 25 से अधिक  इंस्टीट्यूट भी एमपी पीएससी, यूपीएससी  की जरूरत पर बल दे रहे हैं। 

Sd Academy के अभ्यर्थियों ने इस वर्ष भी दिया श्रेष्ट परिणाम 

एमपी पीएससी प्रारंभिक परीक्षा के नतीज़ों ने ये साबित कर दिया की झाबुआ के प्रतियोगी अब मध्य प्रदेश स्तर पर नतीजे देने लगे है और मध्य प्रदेश के अन्य जिलो को भी अच्छी टक्कर दे रहे है। वही झाबुआ के Sd Academy का परिणाम हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रेष्ट रहा , संस्था के संचालक श्री संजीव दुबे ने बताया की संस्था में पीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2015 के लिए कुल 80 से अधिक अभ्यर्थी नामांकित थे , जिनमे से 60 से अधिक अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए हैँ। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्था का परिणाम 85 प्रतिशत से अधिक रहा है।
          जानकारी देते हुए संस्था संचालक संजीव दुबे ने बताया की विगत कई वर्षो से झाबुआ में दमोह , सागर, जबलपुर, रायसेन ,रीवा , इंदौर आदि स्थानों से भी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी हेतु विद्यार्थी आने लगे है शासन प्रशासन अगर सिविल परीक्षाओं हेतु थोड़ी सहायता भी करे तो झाबुआ में इससे भी बेहतर परिणाम आ सकते है  संस्था द्वारा वर्ष 2003 से अब तक पीएसी बैकलॉग परीक्षा के बाद एमपीपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में 300 से अधिक युवा चयनित होकर विभिन्न विभागों में अपनी सेवा दे रहे है वही रेल्वे, बैंक , एसएससी , एसआई , व्यापम सहित विभिन्न परीक्षाओं में ये आंकड़ा 1000 से अधिक पहुंच चूका है.
ये अभ्यर्थी हुए प्रारंभिक परीक्षा में चयनित 
      रवि सस्तिया, दीपा सरवन ,विकास मेड़ा , नीना भाबोर ,शम्भू बारिया ,ठाकुर सिंह ,संगीता भाबोर, पूजा वास्कले ,अयाज़ शेख,हेमलता बिलवाल ,शिखा सोनी, निकिता सिन्हा ,देव श्री नाय, मधुबाला गोयल ,शिखा शर्मा ,रिंकू चौहान, अश्विन वसुनिया ,कनका बामनिया ,राकेश परमार ,शेखर दुबे, बलवंत नलवाया ,सपना पचौली, रवि साहू ,लॉरेंस ,मोनिका बघेल ,सुनीता बरिया ,ललित गड़रिया ,राजेश बारिया ,राजेंद्र वसुनिया, कमलेश बामनिया सहित कुल 60 से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
2015 -16 मुख्य परीक्षा में ये अभ्यर्थी हुए चयनित 
        अविनाश भूरिया , आरती गरवाल, शिखा सोनी, हेमलता बिलवाल , अभिषेक बिलवाल, देवश्री नाय, मुकेश मचार , हर्षिता मेड़ा , ज्योति भाबोर, बलवंत नलवाया, अश्विन वसुनिया , राकेश परमार , लॉरेंस भूरिया, मोनिका बघेल , सुनीता बरिया , निकिता सिंह , ललित गड़रिया , कमलेश बामनिया , कुसुम मेड़ा , विकास मवि, राधा डावर सहित 40 से अधिक  अभ्यर्थियों  ने मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त की जिनके साक्षात्कार पीएससी द्वारा लिए जा रहे है.
          2015 -16 में अयाज़ शेख , सुनील पाल , कमलेश बामनिया , भवरसिंह , रामसिंह आदि ने एमपी एसआई परीक्षा में सफलता प्राप्त की है वही महिला पर्यवेक्षक परीक्षा में 25 से अधिक अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की है जिनमे संस्था की वंदना वाखला ने पुरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है

 एक्सपर्ट व्यू  


झाबुआ  जिले में प्रतिभाओ की कोई कमी नहीं है यदि उन्हे परिवार द्वारा प्रोत्साहित किया जाये तो निश्चित ही वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।  जितने परिश्रमी झाबुआ के छात्र है उतने शायद ही कही हो. सही मार्ग दर्शन के आभाव में अपेक्षित सफलता नहीं आ पाती , वर्तमान में में सीसेट पैटर्न आने से  झाबुआ के विद्यार्थियों को IAS आदि परीक्षाओ में भी सफलता प्राप्त करने के अवसर है आरम्भ में छात्रों की मेहनत  ही शिक्षको के परिश्रम को मंज़िल तक पहुचाती  है में अपने सभी चयनित छात्र छात्राओ को बधाई और शुभकामनाये देता हु.
श्री संजीव दुबे , संचालक ( SD ACADEMY, JHABUA)


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* निर्मल पंड्या/ राणापुर:- ग्रामिण अंचलो में आखातीज पर विभिन्न टोने टोटको के माध्यम से जानने का प्रयास किया जाता है कि इस बार बारिश कैसी रहेगी साथ ही इस वर्ष फसल कैसी रहेगी। इसी परम्परा में ग्राम रूपाखेडा में बच्चों द्वारा हल एवं स्वंय के द्वारा छोटे हल का निर्माण किया जाता है एवं अन्य धार्मिक आयोजन जिनमें सर्वप्रथम धरती को पानी दिया जाता हे उन्ही बच्चों को अनाज भेंट किया जाता है तथा उसके उपरांत बैल बने बच्चों द्वारा हल जोता जाता है एवं खेत को खेडने की प्रक्रिया की जाती हैं। ग्रामिण अंचलो में चली आ रही विभिन्न परम्पराओं में से एक परम्परा हे जिसमें बच्चे खेल खेल में पुरे साल का सकुन निकालते है एवं फसल का भविष्य देखते हैं। 
आखिर क्या हे परम्परा
 प्रतिवर्ष आखातीज पर गर्मियों में ग्रामिण अंचलो में पानी एवं आने वाले साल के सकुन देखने के लिए उक्त परम्परारगत तरिके से ग्रामिणों द्वारा पानी का सकुन देखा जाता है। आयेाजन में सर्वप्रथम बच्चों द्वारा पलाश की लकडी का हल बनाया जाता है उसमें 2 बच्चों को बैल बनाकर खेती की जाती है जिसमें सर्वप्रथम बैलो एवं धरती को पानी दिया जाता है तथा उसके उपरांत अनाज दिया जाता है। बैल बने बच्चों द्वारा इन अनाज का वितरण ग्रामिणों में किया जाता है जिससे उनके घरों में अनाज एवं अन्य बरकत बनी रहती हैं।

Skul-bull-out-as-unique-tradition-of-child-rural-areas-बैल बनकर सकुल निकालते बच्चे- ग्रामीण अंचल की अनूठी परंपरा
हल जोतते बच्चे
Skul-bull-out-as-unique-tradition-of-child-rural-areas-बैल बनकर सकुल निकालते बच्चे- ग्रामीण अंचल की अनूठी परंपरा
पानी देते बैल बने बच्चों  को

* निर्मल पंड्या/ राणापुर:- राणापुर की होनहार बेटी ख्याति पिता हंसराज राठौर ने दिखा दिया कि बेटीया बेटो से किसी मायने में कम नहीं हैं। राणापुर के ही प्रतिष्ठीत ठेकेदार रणछोड लाल राठोर के बडे पुत्र स्वं. हसंराज राठौर की पुत्री ख्याती राठौर द्वारा जेईई की मेन्स परीक्षा में पिछडा वर्ग में 75 अंक प्राप्त कर मेन्स की परीक्षा उत्तीर्ण की। ख्याती की उपलब्धी पर परिजनों एवं समाजजनों द्वारा बधाईया दी गई एवं इष्टमित्रोें ने भी उन्हें बधाईया दी।

ranapur-khyati-rathore-selected-jee-mains-exam-2016-ख्याती राठौर द्वारा जेईई की मेन्स परीक्षा में पिछडा वर्ग में 75 अंक प्राप्त कर मेन्स की परीक्षा उत्तीर्ण की

Item Reviewed: मूवी रिव्यु - शिवगंगा हलमा Description: शिवगंगा हलमा भीली संस्कृति के बीच एक महान भीलि परंपरा है, जो अति प्राचीन काल से भीलों में जीवित है। यह एक प्राचीन भील परंपरा है, जिसके अनुसार एक परिवार की की कुछ समस्या थी, लेकिन सभी साधनों के समाप्त होने के बाद अकेले इस समस्या का सामना करने में सक्षम नहीं थे , तब जरूरत के समय उक्त परिवार को मदद करने के लिए आसपास के अन्य परिवारों को बुलाया गया , फिर कई परिवार एक साथ आये तथा बिना किसी स्वार्थ या सेवा मूल्य के परिवार को मदद मिली । Rating: 5 Reviewed By: Asha News

shivganga-halma-movie-review-2015-मूवी - शिवगंगा हलमा
Social Movie
हमारी रेटिंग: ★★★★★
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क्रिटिक रिव्यू

विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौती के लिए हलमा को दोबारा प्रारम्भ किया गया था। सामुदायिक समस्याओं को सुलझाने के लिए हलमा  को पुनः बनाया गया था और अब हर साल वृहद  संख्या में हलमा में गांव के जंगल में पौधे लगाते हैं, कभी बांध का निर्माण होता है। हर साल झाबुआ जिले के पूरे मार्च में हाथापाई के पहाड़ी इलाके में हलमा के आह्वान किया जाता है ,  आश्चर्य की बात है कि  शिवगंगा के इस प्रयास हलमा के लिए निस्वार्थ काम करने के लिए हर साल 8000 से अधिक लोग श्रमदान कर इस हलमा को सफल बनाते है. 

Official Trailor


[review]
[item review-value="9"]स्टार कास्ट[/item]
[item review-value="7"]फ़िल्मांकन दृश्य [/item]
[item review-value="8"]डायलाग [/item]
[item review-value="9"]म्यूजिक[/item]
[content title="Summary" label="Overall Score"]2010 के बाद से हाथी पावा पहाड़ियों में झाबुआ के वर्षा जल संचयन के लिए एक साथ मिलकर काम करने के लिए वार्षिक हलमा का आयोजन किया जा रहा है। 2010 में 1500 से ज्यादा स्वयंसेवकों ने 2011 में 8000 से अधिक गांव के स्वयंसेवकों ने और 2012 में 12000 से अधिक स्वयंसेवकों ने "परमार्थ भाव " की प्रेरणा के साथ मिलकर काम किया। हाल ही में हलमा का आयोजन मार्च 14-15, 2017 में हुआ था जिसमें झाबुआ में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के लिए 8000 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से भाग लिया था। हाथीपावा झाबुआ जिले में एक पहाड़ी है जो 9 वर्ग किलोमीटर में फैल गया है। जमीन पर पानी की रिचार्जिंग में खाई खोदने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। इस प्रयास में स्पष्ट प्रभाव पड़ा है। झाबुआ शहर के तालाब जो गर्मियों के दौरान सूखेंगे अब अधिक लंबी अवधि के लिए पूर्ण रहते हैं[/content]
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anguri-bani-angara-movie ( अंगूरी बनी अंगारा फिल्म ) anguri-bani-angara-movie ( अंगूरी बनी अंगारा फिल्म )     झाबुआ : इंदौर और झाबुआ की खूबसूरत वादियों में शहर के स्थानीय कलाकारों को लेकर बनी फिल्म ' अंगूरी बनी अंगारा '  शुक्रवार को शहर के सिनेमाघर सहित पूरे प्रदेश के करीब 60 सिनेमाघरों में रिलीज हो गयी है। करोडों रुपए की लागत और नामी सितारों के साथ बनने वाली फिल्में भी कई बार दर्शकों को लुभा नहीं पाती लेकिन शहर के कलाकारों द्वारा बनाई फिल्म " अंगूरी बनी अंगारा " दर्शकों को खासी पसंद आई ।                     शहर में पहले दिन इस फिल्म का पहला ही शो हाउस फूल रहा। फिल्म में अंगूरी का किरदार निभाने वाली मोना चौधरी ने बताया पहली बार रिजनल लैंग्वेज की फिल्म में काम करके मज़ा  आया। इस दोरान भीलों की संस्कृति और बोली को सिखने का मौका भी मिला। इंदौर की कलाकार मोना चौधरी इससे पहले करीब 100 वीडियो एल्बम में काम कर चुकी हैं।
                    बॉलीवुड में आत्म समर्पण पर कई फिल्म बनी है , अंगूरी बनी अंगारा भी इसी विषय पर बनी फिल्म है लेकिन उसका अंत अलग होकर प्रेरणा दाई हो गया है गुलरेज हसन द्वारा लिखित यह फिल्म न केवल कहानी बल्कि क्षेत्रीय कलाकारों के अभिनय के दृष्टिकोण से भी सराहनीय है। निर्देशन की दृष्टि से निर्भय चौधरी ने अच्छी शरुवात की है फिल्म अश्लीलता से पूरी तरह दूर है। " हमु काका बाबा न पोरिया " फेम आनंदीलाल मोवेल गाते हुए फिल्म में है। आकांशा जाचक का गाया गीत है जवानी , उनकी आवाज़ की पहचान कराता है, फिर कैलाश खेर की आवाज़ तो फिल्म की जान है. निश्चित रूप से तोलानी मूवीज की इस फिल्म ने मप्र फिल्म निर्माण में अच्छी दखल अन्दाजी की है आगाज़ अच्छा कहा जा सकता है और यात्रा सुखद होगी क्योंकि यहाँ कई विषय इंतज़ार में है...
 होलीवूड जैसी लोकेशन 
          असिस्टेंट डायरेक्टर हर्ष चौहान ने बताया सिंनेमेटोग्राफी सुकुमार जेठानिया की थी जो बॉलीवुड के लिए काम करते है । उन्होंने झाबुआ और आसपास की लोकेशंस के बारे में कहा ये तो होलीवूड फिल्मो जैसी लोकेशंस हैं।

फिल्म के प्रोमो ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी
           फिल्म निर्माता हरीश तोलानी ने बताया की मप्र को फिल्म सिटी की सौगात देकर फिल्मो में मप्र की एक अलग पहचान बनाना है , अब तक मप्र में यदा कदा  ही गिनी चुनी फिल्मे होती थी लेकिन बड़वाह के पास आठ एकड़ में जल्द ही फिल्म इंडस्ट्री की स्थापना की जाएगी। लगभग छह माह में ही फ़िल्मी शूटिंग से एडिटिंग सम्बंधित कार्य के लिए लोगो को मुंबई नहीं जाना पड़ेगा ।
             तोलानी ने बताया  की उनकी फिल्म " अंगूरी बानी अंगारा " गत 13 मार्च को रिलीज़  हो चुकी है इस फिल्म में मप्र के कलाकारों को लिया गया है।  वही फिल्म की शूटिंग के लिए पूरी टेक्निकल टीम  मुंबई से बुलाई गयी है उन्होंने ने बताया की पहले प्रयास में ही उन्होंने बॉलीवुड स्तर की फिल्म बनाई है इस फिल्म के प्रोमो ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है इस फिल्म को प्रदेश सरकार का पूरा सहयोग रहा , तोलानी ने संकल्प दोहराया की वह प्रदेश में स्ट्रगल कर रहे कलाकारों को अछा प्लेटफार्म देना चाहते है उन्होंने बताया की फिल्म " अंगूरी बनी अंगारा" के--
  • डायरेक्टर निर्भय चौधरी है। 
  • मुख्य नायिका मोना चौधरी है
  • मुख्य भूमिका में नितेश चौधरी है और 
  • खलनायक की भूमिका में इदरीश खान है।  
  • इसके लेखक गुलरेज खान है 
  • फिल्म में संगीत आनंदसिंह ने दिया है।  
  • कोरियोग्राफी विशाल बैस  ने की है। 
  • फिल्मो के गाने प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर , आकांशा जाचक , पलक मुछाल , आनंदीलाल भावेल , निधि शर्मा , वैभव तिवारी व राजा हसन ने गाये  है।
90 फीसदी शूटिंग झाबुआ में 
           फिल्म के शूटिंग में झाबुआ व खरगोन के भीली संस्कृति को दर्शाया गया है।  झाबुआ और इंदौर में शट हुई तोलानी मूवीज की फिल्म " अंगूरी बानी अंगारा " की 90 फीसदी शूटिंग झाबुआ में और 10 फीसदी शूटिंग इंदौर में हुई है फिल्म के प्रोडूयसर और डायरेक्टर का मानना है की इस फिल्म के जरिये प्रदेश के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।  नारी प्रधान इस फिल्म की हीरोइन मोना चौधरी , हीरो नितेश उपाध्याय और विलेन इदरीस खत्री प्रदेश के रंग मंच के जाना पहचाना नाम है।  अन्य भूमिका में शहाना खान , पूजा शर्मा , दीपिका शर्मा , कृष्णा राव सहित अन्य कलाकार इंदौर के है।  मोना चौधरी इससे पहले " फेसलो म्हारो छे  " फिल्म की भी मुख्य अभिनेत्री रह चुकी है
यह है फिल्म की कहानी
          निर्भय सिंह ने बताया की फिल्म की कहानी एक रियल स्टोरी से इंस्पायर्ड है , जैसा की नाम है " अंगूरी बनी अंगारा " , . स्पष्ट है की अंगूरी क्यों बनी अंगारा। अंगूरी ( मोना चौधरी ) समर्पण करने वाले डाकू मेघा सिंह ( नीतीश उपाध्याय ) की पत्नी है। गांव के रसूखदार और विधायक नाहरसिंह ( इदरीस खान ) के यहाँ कई किसानो की जमीन गिरवी पड़ी है जिसे मेघा अपना सब कुछ बेचकर छुड़वा लेता है फिर होता है विधान सभा चुनाव जिसमे नाहरसिंह के सामने मेघा सिंह खड़ा होता है नाहरसिंह एक पुलिस वाले की हत्या करवाकर छलपूर्वक मेघा को हत्यारा साबित करवाकर उम्र कैद करवा देता है फिर उसकी पत्नी अंगूरी पर कठोर जुल्म करता है डाकू जलवा गैंग को दुखयारी अंगूरी मिल जाती है और वो उससे कहता है की नाहरसिंह से बदला लो। 

झाबुआ की लोकेशंस
          निर्भय सिंह ने बताया की झाबुआ के सुदूर अंचल में हमे ऐसी लोकेशन मिली जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी ये लोकेशन पहली बार सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी इसमें हमे रेगिस्तान की ऐसी लोकेशन मिली जैसी लोकेशन दुबई में है।  इंदौर में पितृपर्वत और नखराली दानी में शूटिंग की गयी है

anguri-bani-angara-movie ( अंगूरी बनी अंगारा फिल्म )

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फिल्म रीलीज़ के मौके पर " अंगूरी बनी अंगारा " की पूरी टीम झाबुआ में मौजूद रही 
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                        झाबुआ :  साहित्यकार डॉ.रामशंकर चंचल की ताजा कृति  " पर्यावरण की पुजारिन " ने लोकप्रियता हासिल कर देश के सबसे बड़े प्रकाशक नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली में लोकप्रिय लेखको की सूचि में अपना नाम , झाबुआ जिले का नाम दर्ज़ कर एक नया कीर्तिमान रचा है।  हाल ही में दो दिन पूर्व उनको कृति  के तीसरे संस्करण की प्रतिया प्राप्त हुई. डॉ.चंचल ने एक मुलाकात में बताया की संभव है की ट्रस्ट अब विश्व की किसी भी भाषा में  उक्त कृति  का अनुवाद भी प्रकाशित करे।  
           ज्ञात हो की डॉ.चंचल द्वारा विगत वर्षो में अनेकानेक उपलब्धिया हासिल की गयी है जिनमे आपकी रचनाओ पर फिल्म काली का निर्माण , दूरदर्शन  आकाशवाणी पर सतत प्रसारण , रचनाओ का पाठ्यक्रम में शामिल होने के साथ ही अनेक भाषाओ में अनुवाद , साथ ही आपकी कृतियों पर पीएचडी होना आदि है।
        अपनी इन गौरवमय उपलब्धियों का श्रेय डॉ. चंचल अपने माता पिता के आशीर्वाद,  जिले की जनता का प्यार और मीडिया के सहयोग को मानते है जिसने उनको कर्मशील व सक्रिय रखा।

paryavaran-ki-pujarin
   
अन्य प्रकाशित कृतियाँ 





आदिवासी त्यौहारअर्धनग्नबड़ा आदमीबदल गया गाँवएकलव्य





कालीपड़ना लिखना सीखोपानी पानीपानी पानीसाक्षर बनो महान बनो



सोमारूतुम्हारी मुस्कराहटवृक्षा रोपण

Item Reviewed: मूवी रिव्यु - अंगूरी बनी अंगारा 2014 Description: अंगूरी बनी अंगारा (2014): आदिवासी पृष्ठभूमि पर आधारित एक महिला केंद्रित हिंदी फ़ीचर फिल्म है, फिल्म में दर्शाया गया है की कैसे भारत में महिलाओं को सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और अंत में उनके संघर्ष को न्याय मिलता ही है। Rating: 5 Reviewed By: Asha News
Sony Mobile
Action Movie
हमारी रेटिंग: ★★★★
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क्रिटिक रिव्यू

Angoori Bani Angara (2014) : Is a female oriented Hindi Feature film based on Tribal backdrop, The film features basic social problems faced by women in India and her Struggle for Justice.

Official Trailor


[review]
[item review-value="8"]स्टार कास्ट[/item]
[item review-value="7"]फ़िल्मांकन दृश्य [/item]
[item review-value="6"]डायलाग [/item]
[item review-value="9"]म्यूजिक[/item]
[content title="Summary" label="Overall Score"] बॉलीवुड में आत्म समर्पण पर कई फिल्म बनी है , अंगूरी बनी अंगारा भी इसी विषय पर बनी फिल्म है लेकिन उसका अंत अलग होकर प्रेरणा दाई हो गया है गुलरेज हसन द्वारा लिखित यह फिल्म न केवल कहानी बल्कि क्षेत्रीय कलाकारों के अभिनय के दृष्टिकोण से भी सराहनीय है। निर्देशन की दृष्टि से निर्भय चौधरी ने अच्छी शरुवात की है फिल्म अश्लीलता से पूरी तरह दूर है। " हमु काका बाबा न पोरिया " फेम आनंदीलाल मोवेल गाते हुए फिल्म में है। आकांशा जाचक का गाया गीत है जवानी , उनकी आवाज़ की पहचान कराता है, फिर कैलाश खेर की आवाज़ तो फिल्म की जान है. निश्चित रूप से तोलानी मूवीज की इस फिल्म ने मप्र फिल्म निर्माण में अच्छी दखल अन्दाजी की है आगाज़ अच्छा कहा जा सकता है और यात्रा सुखद होगी क्योंकि यहाँ कई विषय इंतज़ार में है[/content]
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