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* निर्मल पंड्या/ राणापुर:- ग्रामिण अंचलो में आखातीज पर विभिन्न टोने टोटको के माध्यम से जानने का प्रयास किया जाता है कि इस बार बारिश कैसी रहेगी साथ ही इस वर्ष फसल कैसी रहेगी। इसी परम्परा में ग्राम रूपाखेडा में बच्चों द्वारा हल एवं स्वंय के द्वारा छोटे हल का निर्माण किया जाता है एवं अन्य धार्मिक आयोजन जिनमें सर्वप्रथम धरती को पानी दिया जाता हे उन्ही बच्चों को अनाज भेंट किया जाता है तथा उसके उपरांत बैल बने बच्चों द्वारा हल जोता जाता है एवं खेत को खेडने की प्रक्रिया की जाती हैं। ग्रामिण अंचलो में चली आ रही विभिन्न परम्पराओं में से एक परम्परा हे जिसमें बच्चे खेल खेल में पुरे साल का सकुन निकालते है एवं फसल का भविष्य देखते हैं। 
आखिर क्या हे परम्परा
 प्रतिवर्ष आखातीज पर गर्मियों में ग्रामिण अंचलो में पानी एवं आने वाले साल के सकुन देखने के लिए उक्त परम्परारगत तरिके से ग्रामिणों द्वारा पानी का सकुन देखा जाता है। आयेाजन में सर्वप्रथम बच्चों द्वारा पलाश की लकडी का हल बनाया जाता है उसमें 2 बच्चों को बैल बनाकर खेती की जाती है जिसमें सर्वप्रथम बैलो एवं धरती को पानी दिया जाता है तथा उसके उपरांत अनाज दिया जाता है। बैल बने बच्चों द्वारा इन अनाज का वितरण ग्रामिणों में किया जाता है जिससे उनके घरों में अनाज एवं अन्य बरकत बनी रहती हैं।

Skul-bull-out-as-unique-tradition-of-child-rural-areas-बैल बनकर सकुल निकालते बच्चे- ग्रामीण अंचल की अनूठी परंपरा
हल जोतते बच्चे
Skul-bull-out-as-unique-tradition-of-child-rural-areas-बैल बनकर सकुल निकालते बच्चे- ग्रामीण अंचल की अनूठी परंपरा
पानी देते बैल बने बच्चों  को

* निर्मल पंड्या/ राणापुर:- राणापुर की होनहार बेटी ख्याति पिता हंसराज राठौर ने दिखा दिया कि बेटीया बेटो से किसी मायने में कम नहीं हैं। राणापुर के ही प्रतिष्ठीत ठेकेदार रणछोड लाल राठोर के बडे पुत्र स्वं. हसंराज राठौर की पुत्री ख्याती राठौर द्वारा जेईई की मेन्स परीक्षा में पिछडा वर्ग में 75 अंक प्राप्त कर मेन्स की परीक्षा उत्तीर्ण की। ख्याती की उपलब्धी पर परिजनों एवं समाजजनों द्वारा बधाईया दी गई एवं इष्टमित्रोें ने भी उन्हें बधाईया दी।

ranapur-khyati-rathore-selected-jee-mains-exam-2016-ख्याती राठौर द्वारा जेईई की मेन्स परीक्षा में पिछडा वर्ग में 75 अंक प्राप्त कर मेन्स की परीक्षा उत्तीर्ण की

Item Reviewed: मूवी रिव्यु - शिवगंगा हलमा Description: शिवगंगा हलमा भीली संस्कृति के बीच एक महान भीलि परंपरा है, जो अति प्राचीन काल से भीलों में जीवित है। यह एक प्राचीन भील परंपरा है, जिसके अनुसार एक परिवार की की कुछ समस्या थी, लेकिन सभी साधनों के समाप्त होने के बाद अकेले इस समस्या का सामना करने में सक्षम नहीं थे , तब जरूरत के समय उक्त परिवार को मदद करने के लिए आसपास के अन्य परिवारों को बुलाया गया , फिर कई परिवार एक साथ आये तथा बिना किसी स्वार्थ या सेवा मूल्य के परिवार को मदद मिली । Rating: 5 Reviewed By: Asha News

shivganga-halma-movie-review-2015-मूवी - शिवगंगा हलमा
Social Movie
हमारी रेटिंग: ★★★★★
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क्रिटिक रिव्यू

विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौती के लिए हलमा को दोबारा प्रारम्भ किया गया था। सामुदायिक समस्याओं को सुलझाने के लिए हलमा  को पुनः बनाया गया था और अब हर साल वृहद  संख्या में हलमा में गांव के जंगल में पौधे लगाते हैं, कभी बांध का निर्माण होता है। हर साल झाबुआ जिले के पूरे मार्च में हाथापाई के पहाड़ी इलाके में हलमा के आह्वान किया जाता है ,  आश्चर्य की बात है कि  शिवगंगा के इस प्रयास हलमा के लिए निस्वार्थ काम करने के लिए हर साल 8000 से अधिक लोग श्रमदान कर इस हलमा को सफल बनाते है. 

Official Trailor


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[item review-value="9"]स्टार कास्ट[/item]
[item review-value="7"]फ़िल्मांकन दृश्य [/item]
[item review-value="8"]डायलाग [/item]
[item review-value="9"]म्यूजिक[/item]
[content title="Summary" label="Overall Score"]2010 के बाद से हाथी पावा पहाड़ियों में झाबुआ के वर्षा जल संचयन के लिए एक साथ मिलकर काम करने के लिए वार्षिक हलमा का आयोजन किया जा रहा है। 2010 में 1500 से ज्यादा स्वयंसेवकों ने 2011 में 8000 से अधिक गांव के स्वयंसेवकों ने और 2012 में 12000 से अधिक स्वयंसेवकों ने "परमार्थ भाव " की प्रेरणा के साथ मिलकर काम किया। हाल ही में हलमा का आयोजन मार्च 14-15, 2017 में हुआ था जिसमें झाबुआ में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के लिए 8000 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से भाग लिया था। हाथीपावा झाबुआ जिले में एक पहाड़ी है जो 9 वर्ग किलोमीटर में फैल गया है। जमीन पर पानी की रिचार्जिंग में खाई खोदने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। इस प्रयास में स्पष्ट प्रभाव पड़ा है। झाबुआ शहर के तालाब जो गर्मियों के दौरान सूखेंगे अब अधिक लंबी अवधि के लिए पूर्ण रहते हैं[/content]
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anguri-bani-angara-movie ( अंगूरी बनी अंगारा फिल्म ) anguri-bani-angara-movie ( अंगूरी बनी अंगारा फिल्म )     झाबुआ : इंदौर और झाबुआ की खूबसूरत वादियों में शहर के स्थानीय कलाकारों को लेकर बनी फिल्म ' अंगूरी बनी अंगारा '  शुक्रवार को शहर के सिनेमाघर सहित पूरे प्रदेश के करीब 60 सिनेमाघरों में रिलीज हो गयी है। करोडों रुपए की लागत और नामी सितारों के साथ बनने वाली फिल्में भी कई बार दर्शकों को लुभा नहीं पाती लेकिन शहर के कलाकारों द्वारा बनाई फिल्म " अंगूरी बनी अंगारा " दर्शकों को खासी पसंद आई ।                     शहर में पहले दिन इस फिल्म का पहला ही शो हाउस फूल रहा। फिल्म में अंगूरी का किरदार निभाने वाली मोना चौधरी ने बताया पहली बार रिजनल लैंग्वेज की फिल्म में काम करके मज़ा  आया। इस दोरान भीलों की संस्कृति और बोली को सिखने का मौका भी मिला। इंदौर की कलाकार मोना चौधरी इससे पहले करीब 100 वीडियो एल्बम में काम कर चुकी हैं।
                    बॉलीवुड में आत्म समर्पण पर कई फिल्म बनी है , अंगूरी बनी अंगारा भी इसी विषय पर बनी फिल्म है लेकिन उसका अंत अलग होकर प्रेरणा दाई हो गया है गुलरेज हसन द्वारा लिखित यह फिल्म न केवल कहानी बल्कि क्षेत्रीय कलाकारों के अभिनय के दृष्टिकोण से भी सराहनीय है। निर्देशन की दृष्टि से निर्भय चौधरी ने अच्छी शरुवात की है फिल्म अश्लीलता से पूरी तरह दूर है। " हमु काका बाबा न पोरिया " फेम आनंदीलाल मोवेल गाते हुए फिल्म में है। आकांशा जाचक का गाया गीत है जवानी , उनकी आवाज़ की पहचान कराता है, फिर कैलाश खेर की आवाज़ तो फिल्म की जान है. निश्चित रूप से तोलानी मूवीज की इस फिल्म ने मप्र फिल्म निर्माण में अच्छी दखल अन्दाजी की है आगाज़ अच्छा कहा जा सकता है और यात्रा सुखद होगी क्योंकि यहाँ कई विषय इंतज़ार में है...
 होलीवूड जैसी लोकेशन 
          असिस्टेंट डायरेक्टर हर्ष चौहान ने बताया सिंनेमेटोग्राफी सुकुमार जेठानिया की थी जो बॉलीवुड के लिए काम करते है । उन्होंने झाबुआ और आसपास की लोकेशंस के बारे में कहा ये तो होलीवूड फिल्मो जैसी लोकेशंस हैं।

फिल्म के प्रोमो ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी
           फिल्म निर्माता हरीश तोलानी ने बताया की मप्र को फिल्म सिटी की सौगात देकर फिल्मो में मप्र की एक अलग पहचान बनाना है , अब तक मप्र में यदा कदा  ही गिनी चुनी फिल्मे होती थी लेकिन बड़वाह के पास आठ एकड़ में जल्द ही फिल्म इंडस्ट्री की स्थापना की जाएगी। लगभग छह माह में ही फ़िल्मी शूटिंग से एडिटिंग सम्बंधित कार्य के लिए लोगो को मुंबई नहीं जाना पड़ेगा ।
             तोलानी ने बताया  की उनकी फिल्म " अंगूरी बानी अंगारा " गत 13 मार्च को रिलीज़  हो चुकी है इस फिल्म में मप्र के कलाकारों को लिया गया है।  वही फिल्म की शूटिंग के लिए पूरी टेक्निकल टीम  मुंबई से बुलाई गयी है उन्होंने ने बताया की पहले प्रयास में ही उन्होंने बॉलीवुड स्तर की फिल्म बनाई है इस फिल्म के प्रोमो ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है इस फिल्म को प्रदेश सरकार का पूरा सहयोग रहा , तोलानी ने संकल्प दोहराया की वह प्रदेश में स्ट्रगल कर रहे कलाकारों को अछा प्लेटफार्म देना चाहते है उन्होंने बताया की फिल्म " अंगूरी बनी अंगारा" के--
  • डायरेक्टर निर्भय चौधरी है। 
  • मुख्य नायिका मोना चौधरी है
  • मुख्य भूमिका में नितेश चौधरी है और 
  • खलनायक की भूमिका में इदरीश खान है।  
  • इसके लेखक गुलरेज खान है 
  • फिल्म में संगीत आनंदसिंह ने दिया है।  
  • कोरियोग्राफी विशाल बैस  ने की है। 
  • फिल्मो के गाने प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर , आकांशा जाचक , पलक मुछाल , आनंदीलाल भावेल , निधि शर्मा , वैभव तिवारी व राजा हसन ने गाये  है।
90 फीसदी शूटिंग झाबुआ में 
           फिल्म के शूटिंग में झाबुआ व खरगोन के भीली संस्कृति को दर्शाया गया है।  झाबुआ और इंदौर में शट हुई तोलानी मूवीज की फिल्म " अंगूरी बानी अंगारा " की 90 फीसदी शूटिंग झाबुआ में और 10 फीसदी शूटिंग इंदौर में हुई है फिल्म के प्रोडूयसर और डायरेक्टर का मानना है की इस फिल्म के जरिये प्रदेश के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।  नारी प्रधान इस फिल्म की हीरोइन मोना चौधरी , हीरो नितेश उपाध्याय और विलेन इदरीस खत्री प्रदेश के रंग मंच के जाना पहचाना नाम है।  अन्य भूमिका में शहाना खान , पूजा शर्मा , दीपिका शर्मा , कृष्णा राव सहित अन्य कलाकार इंदौर के है।  मोना चौधरी इससे पहले " फेसलो म्हारो छे  " फिल्म की भी मुख्य अभिनेत्री रह चुकी है
यह है फिल्म की कहानी
          निर्भय सिंह ने बताया की फिल्म की कहानी एक रियल स्टोरी से इंस्पायर्ड है , जैसा की नाम है " अंगूरी बनी अंगारा " , . स्पष्ट है की अंगूरी क्यों बनी अंगारा। अंगूरी ( मोना चौधरी ) समर्पण करने वाले डाकू मेघा सिंह ( नीतीश उपाध्याय ) की पत्नी है। गांव के रसूखदार और विधायक नाहरसिंह ( इदरीस खान ) के यहाँ कई किसानो की जमीन गिरवी पड़ी है जिसे मेघा अपना सब कुछ बेचकर छुड़वा लेता है फिर होता है विधान सभा चुनाव जिसमे नाहरसिंह के सामने मेघा सिंह खड़ा होता है नाहरसिंह एक पुलिस वाले की हत्या करवाकर छलपूर्वक मेघा को हत्यारा साबित करवाकर उम्र कैद करवा देता है फिर उसकी पत्नी अंगूरी पर कठोर जुल्म करता है डाकू जलवा गैंग को दुखयारी अंगूरी मिल जाती है और वो उससे कहता है की नाहरसिंह से बदला लो। 

झाबुआ की लोकेशंस
          निर्भय सिंह ने बताया की झाबुआ के सुदूर अंचल में हमे ऐसी लोकेशन मिली जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी ये लोकेशन पहली बार सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी इसमें हमे रेगिस्तान की ऐसी लोकेशन मिली जैसी लोकेशन दुबई में है।  इंदौर में पितृपर्वत और नखराली दानी में शूटिंग की गयी है

anguri-bani-angara-movie ( अंगूरी बनी अंगारा फिल्म )

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फिल्म रीलीज़ के मौके पर " अंगूरी बनी अंगारा " की पूरी टीम झाबुआ में मौजूद रही 
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                        झाबुआ :  साहित्यकार डॉ.रामशंकर चंचल की ताजा कृति  " पर्यावरण की पुजारिन " ने लोकप्रियता हासिल कर देश के सबसे बड़े प्रकाशक नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली में लोकप्रिय लेखको की सूचि में अपना नाम , झाबुआ जिले का नाम दर्ज़ कर एक नया कीर्तिमान रचा है।  हाल ही में दो दिन पूर्व उनको कृति  के तीसरे संस्करण की प्रतिया प्राप्त हुई. डॉ.चंचल ने एक मुलाकात में बताया की संभव है की ट्रस्ट अब विश्व की किसी भी भाषा में  उक्त कृति  का अनुवाद भी प्रकाशित करे।  
           ज्ञात हो की डॉ.चंचल द्वारा विगत वर्षो में अनेकानेक उपलब्धिया हासिल की गयी है जिनमे आपकी रचनाओ पर फिल्म काली का निर्माण , दूरदर्शन  आकाशवाणी पर सतत प्रसारण , रचनाओ का पाठ्यक्रम में शामिल होने के साथ ही अनेक भाषाओ में अनुवाद , साथ ही आपकी कृतियों पर पीएचडी होना आदि है।
        अपनी इन गौरवमय उपलब्धियों का श्रेय डॉ. चंचल अपने माता पिता के आशीर्वाद,  जिले की जनता का प्यार और मीडिया के सहयोग को मानते है जिसने उनको कर्मशील व सक्रिय रखा।

paryavaran-ki-pujarin
   
अन्य प्रकाशित कृतियाँ 





आदिवासी त्यौहारअर्धनग्नबड़ा आदमीबदल गया गाँवएकलव्य





कालीपड़ना लिखना सीखोपानी पानीपानी पानीसाक्षर बनो महान बनो



सोमारूतुम्हारी मुस्कराहटवृक्षा रोपण

Item Reviewed: मूवी रिव्यु - अंगूरी बनी अंगारा 2014 Description: अंगूरी बनी अंगारा (2014): आदिवासी पृष्ठभूमि पर आधारित एक महिला केंद्रित हिंदी फ़ीचर फिल्म है, फिल्म में दर्शाया गया है की कैसे भारत में महिलाओं को सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और अंत में उनके संघर्ष को न्याय मिलता ही है। Rating: 5 Reviewed By: Asha News
Sony Mobile
Action Movie
हमारी रेटिंग: ★★★★
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क्रिटिक रिव्यू

Angoori Bani Angara (2014) : Is a female oriented Hindi Feature film based on Tribal backdrop, The film features basic social problems faced by women in India and her Struggle for Justice.

Official Trailor


[review]
[item review-value="8"]स्टार कास्ट[/item]
[item review-value="7"]फ़िल्मांकन दृश्य [/item]
[item review-value="6"]डायलाग [/item]
[item review-value="9"]म्यूजिक[/item]
[content title="Summary" label="Overall Score"] बॉलीवुड में आत्म समर्पण पर कई फिल्म बनी है , अंगूरी बनी अंगारा भी इसी विषय पर बनी फिल्म है लेकिन उसका अंत अलग होकर प्रेरणा दाई हो गया है गुलरेज हसन द्वारा लिखित यह फिल्म न केवल कहानी बल्कि क्षेत्रीय कलाकारों के अभिनय के दृष्टिकोण से भी सराहनीय है। निर्देशन की दृष्टि से निर्भय चौधरी ने अच्छी शरुवात की है फिल्म अश्लीलता से पूरी तरह दूर है। " हमु काका बाबा न पोरिया " फेम आनंदीलाल मोवेल गाते हुए फिल्म में है। आकांशा जाचक का गाया गीत है जवानी , उनकी आवाज़ की पहचान कराता है, फिर कैलाश खेर की आवाज़ तो फिल्म की जान है. निश्चित रूप से तोलानी मूवीज की इस फिल्म ने मप्र फिल्म निर्माण में अच्छी दखल अन्दाजी की है आगाज़ अच्छा कहा जा सकता है और यात्रा सुखद होगी क्योंकि यहाँ कई विषय इंतज़ार में है[/content]
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    झाबुआ : प्रख्यात राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार  डॉ. रामशंकर चंचल की 22 वी कृति  "पर्यावरण की पुजारिन " का विमोचन जिला स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना के गड़वाड़ा कैंप में महाविद्यालय की वरिष्ट प्राध्यापिका , साहित्यकार डॉ. गीता दुबे के कर कमलो से संपन्न हुआ।  इस अवसर पर डॉ. एसी जैन प्राचार्य डॉ.जेसी सिन्हा , डॉ. अंजना सोलंकी भी अथिति के रूप में मौजूद थी. 
dr-ramshankar-chanchal-jhabua-डॉ. रामशंकर चंचल की ताजा कृति "पर्यावरण की पुजारिन " का विमोचन                डॉ. चंचल की लोकप्रिय कृति " नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली " से प्रकाशित हुई है जिसकी लोकप्रियता यह की कृति  का दूसरा संस्करण हाल ही में नेशनल संस्करण द्वारा प्रकाशित किया गया है।  उक्त अवसर पर डॉ. रंजना रावत , डॉ. गोपाल भूरिया , कीर्तिश राठोड आदि उपस्थित थे. संचालन प्रो रीता गणावा ने किया आभार डॉ. वीएस मेडा  ने माना।

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तीसरा संस्करण जल्द ही प्रकाशित 
      डॉ. चंचल ने एक मुलाकात में बताया के अगर कृति  का तीसरा संस्करण निकलता है तो नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा उसका कई भाषाओ में अनुवाद भी किया जा सकता है ओर  हर कृति पर 75% रॉयल्टी बुक ट्रस्ट द्वारा प्रदान की जाएगी।
 डॉ. रामशंकर चंचल

             इस शख्स की पीड़ा उनके नाम को लेकर है. वे हर वक्त इससे दुखी रहते हैं और मजाक का कारण तो बनते ही है, उन्हें अपने नाम के कारण दस्तावेजों को भी दिखना पड जाता है. हालांकि उनका जन्म दिन पूरा देश उत्साह और उमंग के साथ मनाता है, बावजूद इसके वे अपने नाम को लेकर पीडि़त और दुःखी है. 
            मंदसौर में रहने वाले सत्यनारायण टेलर ने अपने बेटे का नाम ‘26 जनवरी’ रखा , क्योकि वे 26 जनवरी 1966 के दिन पैदा हुये थे. गणतंत्र दिवस पर पैदा हुये बेटे की खुशी में सत्यनारायण ने उसका नाम ही ’26 जनवरी’ रख दिया. परंतु 26 जनवरी को बचपन से लेकर जवानी और जवानी से लेकर नौकरी करने तक में यह नाम परेशानी का सबब बन गया.

26-january-taylor-man-name-in-jhabua-झाबुआ के एक शख्स का नाम है ‘26 जनवरी’

 झाबुआ के उदयगढ़ में कार्यरत थे पिता " सत्यनारायण टेलर "
              सत्यनारायण टेलर प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में उदयगढ़ जिला झाबुआ में कार्य करते थे. सेवानिवृत्त होने पर वे परिवार सहित मंदसौर आ गये. उनके जिस ’26 जनवरी’ नामक बेटे की बात हो रही है, वे डाइट में बतौर भृत्य सेवारत है और नाम के कारण चर्चा में बने रहते है. उनके पिता ने उनकी जन्म दिनांक को ही नाम बना दिया. हालांकि पांचवी बोर्ड की परीक्षा में उनके पिता को सलाह दी गई थी कि वे नाम बदला सकते है परंतु उन्होंने नहीं माना. 
             26 जनवरी को अपने नाम के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि 1998 के लोकसभा चुनाव के मतदान दलों की सूची में सबसे उपर उनका नाम था. सूची को देखकर तत्कालीन कलेक्टर मनोज श्रीवास्तव भड़क गये और कहा ये क्या मजाक है.... और उन्होंने सूची पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. इसके बाद 26 जनवरी को अपना प्रमाणीकरण देना पड़ा था.
                  इसके अलावा एक बार डाइट के कर्मचारियों का वेतन इसलिये कोषालय ने रोक दिया था कि अधिकारियों को 26 जनवरी नाम होने पर फर्जीवाड़े का संदेह हो गया था. आखिरकार यहां भी 26 जनवरी को प्रमाणीकरण के साथ नियुक्ति पत्र देना पडा, तब जाकर उनके सहित अन्य कर्मचारियों को वेतन मिल सका. हालांकि लोगों ने कहा कि इस नाम को बदल लीजिए, लेकिन पिता को नाम बदलना ठीक नहीं लगा. नाम की वजह से एक तरफ बेटे की जिंदगी दिलचस्प बनी तो दूसरी तरफ उनको कई मुसीबतें भी झेलनी पड़ीं.एक बार तो नौकरी के दौरान सैलरी नहीं मिली, क्योंकि ऑफिस में उनके नाम को लेकर संदेह था. फिलहाल डाइट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) में पदस्थ 26 जनवरी 22 साल से सेवा दे रहे हैं.

    परीक्षा में सवा चार लाख से ज्यादा अभ्यर्थी बैठे थे। इनमें से मेरिट के आधार पर पर्दों को तुलना में 15 गुना ज्यादा  को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया है। ये अभ्यर्थी 23 मार्च को होने वाली  मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकेंगे  ।
      वही झाबुआ  जिले में कुल  6575 अभ्यर्थी पीएससी प्रारंभिक परीक्षा में बैठे थे. जिनमे 152 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए हैँ। 

Sd Academy के अभ्यर्थियों ने इस वर्ष भी दिया श्रेष्ट परिणाम 
एमपी पीएससी प्रारंभिक परीक्षा के  नतीज़ों ने ये साबित कर दिया की झाबुआ के प्रतियोगी अब मध्य प्रदेश स्तर  पर नतीजे देने लगे है और मध्य प्रदेश के अन्य जिलो को भी अच्छी टक्कर दे रहे है। वही  झाबुआ के Sd Academy का परिणाम हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रेष्ट रहा , संस्था के संचालक श्री संजीव दुबे ने बताया की संस्था में पीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2013 के लिए कुल 87 अभ्यर्थी नामांकित थे , जिनमे से 62 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए हैँ। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्था का परिणाम ८५ प्रतिशत से अधिक रहा है। 

 एक्सपर्ट व्यू  


झाबुआ  जिले में प्रतिभाओ की कोई कमी नहीं है यदि उन्हे परिवार द्वारा प्रोत्साहित किया जाये तो निश्चित ही वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।  जितने परिश्रमी झाबुआ के छात्र है उतने शायद ही कही हो. सही मार्ग दर्शन के आभाव में अपेक्षित सफलता नहीं आ पाती , वर्तमान में में सीसेट पैटर्न आने से  झाबुआ के विद्यार्थियों को IAS आदि परीक्षाओ में भी सफलता प्राप्त करने के अवसर है आरम्भ में छात्रों की मेहनत  ही शिक्षको के परिश्रम को मंज़िल तक पहुचाती  है में अपने सभी चयनित छात्र छात्राओ को बधाई और शुभकामनाये देता हु
श्री संजीव दुबे , संचालक ( SD ACADEMY, JHABUA)


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निष्पक्ष, और निडर पत्रकारिता समाज के उत्थान के लिए बहुत जरुरी है , उम्मीद करते है की आशा न्यूज़ समाचार पत्र भी निरंतर इस कर्त्तव्य पथ पर चलते हुए समाज को एक नई दिशा दिखायेगा , संपादक और पूरी टीम बधाई की पात्र है !- अंतर सिंह आर्य , पूर्व प्रभारी मंत्री Whatsapp Status Shel Silverstein Poems Facetime for PC Download

आशा न्यूज़ समाचार पत्र के शुरुवात पर हार्दिक बधाई , शुभकामनाये !!!!- निर्मला भूरिया , पुर्व विधायक

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आशा न्यूज़ से में फेसबुक के माध्यम से लम्बे समय से जुड़ा हुआ हूँ , प्रकाशित खबरे निश्चित ही सच की कसौटी ओर आमजन के विकास के बीच एक अहम कड़ी है , आशा न्यूज़ की पूरी टीम बधाई की पात्र है .- शांतिलाल बिलवाल , पुर्व विधायक झाबुआ

आशा न्यूज़ चैनल की शुरुवात पर बधाई , कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अंक पड़ा था तीखे तेवर , निडर पत्रकारिता इस न्यूज़ चैनल की प्रथम प्राथमिकता है जो प्रकाशित उस अंक में मुझे प्रतीत हुआ , नई शुरुवात के लिए बधाई और शुभकामनाये.- कलावती भूरिया , पुर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

मुझे झाबुआ आये कुछ ही समय हुआ है , अभी पिछले सप्ताह ही एक शासकीय स्कूल में भारी अनियमितता की जानकारी मुझे आशा न्यूज़ द्वारा मिली थी तब सम्बंधित अधिकारी को निर्देशित कर पुरे मामले को संज्ञान में लेने का निर्देश दिया गया था समाचार पत्रो का कर्त्तव्य आशा न्यूज़ द्वारा भली भाति निर्वहन किया जा रहा है निश्चित है की भविष्य में यह आशा न्यूज़ जिले के लिए अहम कड़ी बनकर उभरेगा !!- डॉ अरुणा गुप्ता , पूर्व कलेक्टर झाबुआ

Congratulations on the beginning of Asha Newspaper .... Sharp frown, fearless Journalism first Priority of the Newspaper . The Entire Team Deserves Congratulations... & heartly Best Wishes- कृष्णा वेणी देसावतु , पूर्व एसपी झाबुआ

महज़ ३ वर्ष के अल्प समय में आशा न्यूज़ समूचे प्रदेश का उभरता और अग्रणी समाचार पत्र के रूप में आम जन के सामने है , मुद्दा चाहे सामाजिक ,राजनैतिक , प्रशासनिक कुछ भी हो, हर एक खबर का पूरा कवरेज और सच को सामने लाने की अतुल्य क्षमता निश्चित ही आगामी दिनों में इस आशा न्यूज़ के लिए एक वरदान साबित होगी, संपादक और पूरी टीम को हृदय से आभार और शुभकामनाएँ !!- संजीव दुबे , निदेशक एसडी एकेडमी झाबुआ

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