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1 26 january 1 abvp 52 Administrative 1 b4 cinema 1 balaji dhaam 1 bhagoria 1 bhagoria festival jhabua 2 bjp 1 cinema hall jhabua 35 city 16 crime 22 cultural 37 education 2 election 15 events 14 Exclusive 2 Famous Place 6 gopal mandir jhabua 17 Health and Medical 92 jhabua 5 jhabua crime 1 Jhabua History 1 matangi 3 Movie Review 5 MPPSC 1 National Body Building Championship India 4 photo gallery 19 politics 2 ram sharnam jhabua 57 religious 5 religious place 2 Road Accident 3 sd academy 72 social 14 sports 2 tourist place 13 Video 2 Visiting Place 11 Women Jhabua 2 अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन 1 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 1 अंगूरी बनी अंगारा 1 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 15 अपराध 1 अल्प विराम कार्यक्रम 6 अवैध शराब 1 आदित्य पंचोली 1 आदिवासी गुड़िया 1 आरटीओं 1 आलेख 1 आवंला नवमी 4 आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट 1 ईद 1 उत्कृष्ट सड़क 23 ऋषभदेव बावन जिनालय 3 एकात्म यात्रा 2 एमपी पीएससी 1 कलाल समाज 1 कलावती भूरिया 3 कलेक्टर 15 कांग्रेस 6 कांतिलाल भूरिया 1 कार्तिक पूर्णिमा 2 किन्नर सम्मेलन 2 कृषि 1 कृषि महोत्सव 3 कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ 1 केरोसीन 2 क्रिकेट टूर्नामेंट 4 खबरे अब तक 1 खेडापति हनुमान मंदिर 16 खेल 1 गडवाड़ा 1 गणगौर पर्व 1 गर्मी 1 गल पर्व 8 गायत्री शक्तिपीठ 2 गुड़िया कला झाबुआ 1 गोपाल पुरस्कार 4 गोपाल मंदिर झाबुआ 1 गोपाष्टमी 1 गोपेश्वर महादेव 14 घटनाए 1 चक्काजाम 4 जनसुनवाई 1 जय आदिवासी युवा संगठन 5 जय बजरंग व्यायाम शाला 1 जयस 7 जिला चिकित्सालय 3 जिला जेल 3 जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ 1 जीवन ज्योति हॉस्पिटल 9 जैन मुनि 7 जैन सोश्यल गुुप 2 झकनावदा 98 झाबुआ 1 झाबुआ इतिहास 2 झाबुआ का राजा 3 झाबुआ पर्व 10 झाबुआ पुलिस 1 झूलेलाल जयंती 1 तुलसी विवाह 6 थांदला 3 दशहरा 1 दस्तक अभियान 1 दिल से कार्यक्रम 3 दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि 1 दीपावली 3 देवझिरी 47 धार्मिक 5 धार्मिक स्थल 10 नगरपालिका परिषद झाबुआ 5 नवरात्री 4 नवरात्री चल समारोह 4 नि:शुल्क स्वास्थ्य मेगा शिविर 1 निर्वाचन आयोग 6 परिवहन विभाग 2 पर्यटन स्थल 3 पल्स पोलियो अभियान 8 पारा 1 पावर लिफ्टिंग 16 पेटलावद 1 प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय 3 प्रतियोगी परीक्षा 1 प्रधानमंत्री आवास योजना 37 प्रशासनिक 1 बजरंग दल 2 बाल कल्याण समिति 1 बेटी बचाओं अभियान 2 बोहरा समाज 1 ब्लू व्हेल गेम 1 भगोरिया पर्व 1 भगोरिया मेला 3 भगौरिया पर्व 1 भजन संध्या 1 भर्ती 2 भागवत कथा 30 भाजपा 1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान 1 भारतीय जैन संगठना 3 भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 1 भावांतर योजना 2 मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग 1 मल्टीप्लेक्स सिनेमा 2 महाशिवरात्रि 1 महिला आयोग 1 महिला एवं बाल विकास विभाग 1 मिशन इन्द्रधनुष 1 मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना 2 मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान 9 मुस्लिम समाज 1 मुहर्रम 3 मूवी रिव्यु 8 मेघनगर 1 मेरे दीनदयाल सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता 2 मोड़ ब्राह्मण समाज 1 मोदी मोहल्ला 1 मोहनखेड़ा 3 यातायात 1 रक्तदान 1 रंगपुरा 2 राजगढ़ 13 राजनेतिक 10 राजवाडा चौक 11 राणापुर 5 रामशंकर चंचल 1 रामा 2 रायपुरिया 1 राष्ट्रीय एकता दिवस 2 राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप 4 राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना 1 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण 1 रोग निदान 3 रोजगार मेला 16 रोटरी क्लब 2 लक्ष्मीनगर विकास समिति 1 लाडली शिक्षा पर्व 2 वनवासी कल्याण परिषद 1 वरदान नर्सिंग होम 1 वाटसएप 1 विधायक 4 विधायक शांतिलाल बिलवाल 1 विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस 2 विश्व विकलांग दिवस 2 विश्व हिन्दू परिषद 1 वेलेंटाईन डे 3 व्यापारी प्रीमियर लीग 1 शरद पूर्णिमा 5 शासकीय महाविद्यालय झाबुआ 35 शिक्षा 1 श्रद्धांजलि सभा 3 श्री गौड़ी पार्श्वनाथ जैन मंदिर 11 सकल व्यापारी संघ 2 सत्यसाई सेवा समिति 1 संपादकीय 2 सर्वब्राह्मण समाज 4 साज रंग झाबुआ 40 सामाजिक 1 सारंगी 14 सांस्कृतिक 1 सिंधी समाज 1 सीपीसीटी परीक्षा 3 स्थापना दिवस 4 स्वच्छ भारत मिशन 5 हज 3 हजरत दीदार शाह वली 7 हाथीपावा 1 हिन्दू नववर्ष 5 होली झाबुआ
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श्रावण मास के अंतिम सोमवार को शिवालयों में गूंजे ऊॅं नमः षिवाय के स्वर, देवझिरी तीर्थ पर लगा मेला, भक्तों की रहीं भारी भीड़

झाबुआ। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को शहर में स्थित शिव मंदिरों पर अलसुबह से ही दर्शन-पूजन का क्रम आरंभ हो गया, जो देर शाम तक चलता रहा। मंदिरों में भोले शंभु-भोलेनाथ एवं ऊॅं नम‘ शिवाय के समधुर गीत गूंजायमान हुए। देवझिरी तीर्थ पर मेले जैसा माहौल रहा। अंतिम सोमवार होने सभी मंदिरों में पर भक्तों की भारी लगी रहीं। शहर के  विवेकानंद कालोनी स्थित उमापति महादेव मंदिर सुश्री विद्या गोलानी द्वारा भगवान भोलेनाथ का फलों, एवु पुष्पों से आकर्षक श्रृगार किया गया तथा सजावत में धारा 370 का सन्देश दिया गया वहीं सिद्धेष्वर कॉलोनी स्थित सिद्धेष्वर महादेव मंदिर में अलसुबह से ही महिलाओं का पूजन की थालियां सजाकर दर्शन-पूजन के लिए आना आरंभ हो गया। सुबह के दौरे में यहां भक्तों की कतार भी लगी।   
       श्रद्धालुओं ने आस्था एवं श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत से अभिषेक कर कुंक, चावल चंदन से तिलक लगाकर भगवान के चरणों में पुष्पों के साथ गुलाब के फूल, बिल्व पत्र एवं शिवजी को प्रिय धतुरा अर्पण किया। भांग भी अर्पण की। मंदिर में शिवजी के समधुर गीत गूंजायमान हुए। छोटा तालाब स्थित श्री मनकामेष्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से लेकर शाम तक भक्तों की आना-जाना लगा रहा। यहां श्रद्धालुओं की मनकामेष्वर महोदवजी के दर्शन के लिए कतार देखी गई। डीआरपी लाईन स्थित गोपेष्वर महादेव मंदिर पर भोले शंभु-भोलेनाथ के जयकारों के साथ भक्तों ने गोपष्वर महादेवजी की पूजा-अर्चना करने का लाभ प्राप्त किया। 
इन मंदिरों पर भी रहीं भीड़
अंतिम श्रावण सोमवार को शहर के विवेकानंद कॉलोनी स्थित उमापति महादेव मंदिर पर विवेकानंद कॉलोनी, हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी, न्यू हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी, लक्ष्मीनगर, रतनपुरा, एलआईसी कॉलोनी के रहवासी महिला-पुरूषों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर यहां पूजन-पाठ किया। कॉलेज मार्ग पर प्राचीन सोमेष्वर महादेव मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ स्थित स्फटिक महादेव मंदिर, बसंत कॉलोनी स्थित षिव मंदिर, गोपाल कॉलोनी स्थित महांकाल मंदिर पर भी श्रद्धालुओं का सुबह के दौर में आना-जाना लगा रहा। 
विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए संपन्न
देवझिरी तीर्थ पर शहर सहित जिलेभर से श्रद्धालुओं द्वारा पवित्र कुंड में स्नान करने के बाद कतार में खड़े रहकर भगवान के दर्शन किए गए। यहां स्व. पं. हरिप्रसाद अिर्ग्नहोत्री की परंपरा का निर्वहन करते हुए जितेन्द्रप्रसाद अग्निहोत्री, देवेन्द्रप्रसाद अग्निहोत्री परिवार की ओर से भगवान का रूद्राभिषेक बादआचार्य जैमिनी शुक्ला द्वारा मंत्रोच्चार के साथ करवाया गया तथा दोपहर में महाआरती पश्चात् महाप्रसादी रखी गई। झाबुआ-मेघनगर मार्ग पर स्थित पारदेष्वर महादेव मंदिर एवं दूधेष्वर महादेव मंदिर पर भी श्रद्धालुजन दर्षन-पूजन के लिए पहुंचे।

jhabua news-धारा 370 को लेकर उमापति महादेव का किया गया श्रृंगार

झाबुआ। श्रावण माह के अंतिम सोमवार को शहर के छोटा तालाब स्थित श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर से शाम 6 बजे शिवजी की शाही सवारी निकाली गई। जिसमें  मनकामेष्वर महादेव मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारी-सदस्यों के साथ बड़ी संख्या मंश्रद्धालुजन शामिल हुए। बैंड-बाजों पर प्रस्तुत धार्मिक गीतों से पूरा शहर गूंजायमान हुआ।
         शाही सवारी में सबसे आगे बेंड-बाजे बज रहे थे। इसके पीछे ढोल और पुरूष श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक गीतों पर महिलाओं एवं बालिकाओं द्वारा जगह-जगह नृत्य किया एवं गरबे खेले। शाही सवारी में मनकामेश्वर महादेवजी को विराजमान किया और उन्हें नगर भ्रमण करवाया। शाही ढोले को कंधे पर युवा लेकर चले। सबसे पीछे महिलाएं एवं बालिकाएं सम्मिलित हुई। यह शाही सवारी शहर के मनकामेश्वर महादेव मंदिर से पानी की टंकी, राजवाड़ा, नेहरू मार्ग, श्री गौवर्धननाथ मंदिर तिराहा, आजाद चैक, बाबेल चैराहा, थादंला गेट, लक्ष्मीबाई मार्ग होते हुए पुनः मंदिर पर पहुंची। जहां महाआरती का आयोजन हुआ। बाद महाप्रसादी रखी गई।
इनकी रहीं विशेष  सहभागिता 
चल समारोह में मनकामेश्वर महादेव मंदिर समिति के पदाधिकारियों में अजय रामावत, जगदीश पंवार, सुशील वाजपेयी, रविराजसिंह राठौर, अरविन्दसिंह सांकला, राकेश कटारा, श्री बैरागी, श्रीमती रेखा राठौर, श्रीमती गोस्वामी आदि विशेष रूप से शामिल हुई। चल समारोह के दौरान पुलिस सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम रहे।

शाही सवारी में विराजित मनकामेश्वर महादेवजी, ढोले को लेकर चलते युवाजन

चल समारोह में शामिल मनकामेश्वर महादेव मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं श्रद्धालुजन

पुष्टिमार्ग के प्राकट्योत्सव के रूप  मे मनाई परित्रा एकादशी

नित नये मनोरथ के हिण्डोला दर्शन का मिल रहा लाभ

झाबुआ । श्रावण माह में भगवान श्री गोवर्धननाथजी को नित नये कलेवर में गोवर्धननाथजी की हवेली में  सायंकाल हिण्डोले  पर झुलाने का क्रम चल रहा है । रविवार को पवित्रा एकादशी के पावन दिन को भगवान श्री गोवर्धननाथजी के बाल स्वरूप को पवित्रा के रेशमी धागो से बने हिण्डोले में झुलाया गया । भगवान गोवर्धननाथजी की इस अनुपम हिण्डोला दर्शन के लिये सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष दर्शनार्थियों ने भगवान के हिण्डोला दर्शन का लाभ उठाया । 
‘पवित्रा परहत राजकुमार तीन्यों लोक पवित्र किये है श्री विट्ठल गिरिधार ।  
अतिही पवित्र  प्रिया बहु बिलकत निरख मगन भयो मार । 
रमानन्द पवित्र की माला  गोकूल की नीज नार ।’’  
पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीडजैेसे  पुष्टिमार्गीय संगीत मय कीर्तन के साथ सभी श्रद्धालुजन भगवान को नतमस्तक हो रहे थे । पवित्रा एकादशी के बारे में जानकारी देते हुए गोस्वामी  श्री दिव्येशकुमारजी महाराज ने पवित्रा एकादशी के माहत्म्य को बताते हुए कहा कि पवित्रा एकादशी पुष्टिमार्ग का प्राकट्य दिवस माना जाता है । इस एकादशी की मध्यरात्री को साक्षात भगवान श्रीनाथजी  ने प्रकट होकर पूज्य श्री वल्लभाचार्यजी  से ब्रह्म संबंध स्थापित कर महामंत्र एवं जगतकल्याण का सन्देश दिया था । इस मंत्र के द्वारा भक्त को भगवत सेवा का अधिकार प्राप्त हो जाता है । पवित्रा एकादशी को 307 केशरिया रंग के तार अर्पित करके मिश्री का भोग अर्पित किया था तथा मदराष्टक स्त्रोत से भगवान श्रीनाथजी के हर अंग का वर्णन किया गया था । पवित्रा एकादशी के दिन  ठाकुरजी ने  ब्रह्म संबंध  का सन्देश दामोदरदासजी हरदानी को दिया था इसलिये पवित्रा एकादशी के दूसरे दिन द्वादशी का दिवस गुरू को  समर्पित होता है । पुष्टिमार्ग में पवित्रा एकादशी का सबसे अधिक महत्व होता है और इस दिन भगवान गोवर्धननाथजी के दर्शन मात्र से ही  सर्व मनोकामनायें पूरी होती है तथा आत्मीय शांति प्राप्त होती है। इसी पूरातन परम्परा को अभी तक पुष्टिमार्ग में  बनाया रखा है । 
श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में  भगवान के पवित्रा हिण्डोले  में बिराजित होकर झुलने की मनोहारी छबि को निहारने के लिये पूरा मंदिर खचाखच भर गया तथा भगवान के दर्शन एवं एक झलक पाने के लिये  श्रद्धालुजनो मे काफी उत्साह दिखाई दिया । मंदिर के मुखिया दिलीप आचार्य द्वारा भगवान के हिण्डोले को होले होले झुला झुलाया गया तथा भगवान को पंखा झला गया । वही पण्डित रमेश त्रिवेदी, गोकूलेश आचार्य एवं कान्हा अरोडा द्वारा संगीत के साथ ’’ पवित्रा पहीरे  हिण्डोला झुले, श्यामा श्याम बराबर बैठे निखट ही समजतुले, ललीतादि सब सखी झुलावत ठाडी खंभ अनुकेले जैसे कीर्तन प्रस्तुत करके पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया ।  करीब एक घंटे से अधिक समय तक भगवान गोवर्धननाथजी के पवित्रा हिण्डोले के दर्शनलाभ श्रद्धालुओं ने प्राप्त किये । इस अवसर पर फलों की प्रसादी का वितरण भी किया गया ।  
पुलिस प्रशासन ने नही लगाई यातायात पुलिस की ड्युटी
श्रावण माह में श्री गोवर्धननाथ जी के मंदिर में प्रति दिन भगवान के हिण्डोला दर्शन का आयोजन हो रहा है । जिसमें सैकडो की संख्या में  महिला एवं पुरूष दर्शनार्थी सायंकाल को हिण्डोला दर्शन के लिये मंदिर आते है। श्रावण माह में सायंकाल को यातायात को नियंत्रित करने तथा मंदिर के आसपास अव्यवस्थित पार्किग को लेकर श्रद्धालुजनों ने पुलिस अधीक्षक से मंदिर के बाहर यातायात नियंत्रित करने के लिये पुलिस की ड्युटी लगाये जाने की मांग की थी । मुख्य बाजार में उक्त मंदिर स्थित होने से  यहां बार बार जाम वाली स्थिति निर्मित हो जाती है ऐसे में दुर्घटनाओं की संभावनायेंब नी रहती है । हिण्डोला पर्व जन्माष्टमी तक जारी रहता है । ऐसे मे मंदिर समिति के साथ ही यमुना मंडल की महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया है कि मंदिर के आसपास दुपहिया एवं चार पहिया वाहनों की व्यवस्थित पार्किग के साथ ही यातायात पुलिस की यहां व्यवस्था बनाये रखने की दृष्टि से ड्युटी लगाई जावे ताकि दर्शनार्थियों को परेशान नही होना पडें ।

पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीडपवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड

पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड


नगर भ्रमण कर भगवान भोलेनाथ देगें दर्शन -आशीर्वाद 

झाबुआ । नगर के छोटा तालाब के तट पर विराजित भगवान मनकामेश्वर महादेव कल अन्तिम सोमवार को नगर भ्रमण कर नगरवासियों को दर्शन एवंआशीर्वाद प्रदान करेगें । श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर के मनोज नानालाल कोठारी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रावण माह के अंतिम सोमवार 12 अगस्त को को भगवान श्री मनकामेश्वर महादेव की शाही सवारी सायं 5-30 बजे से बेंड बाजों एवं ढोल ढमाकों के साथ निकाली जाएगी जो नेहरू मार्ग, चन्द्र शेखर आजाद मार्ग, बस स्टैंड, लक्ष्मीबाई मार्ग होकर पुनः मन कािमेश्वर महादेव मंदिर मंदिर पर वापस आएगी।   
     भगवान भोलेनाथ की इस शाही सवारी में नगर की धर्मप्राण जनता से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लिये जाने की अपील मंदिर समिति द्वारा की गई है । सवारी समापन के अवसर पर भगवान की आरती की जावेगी, तत्पश्चात रात्रि 8 बजे महाआरती एवं प्रसादी वितरण होगा । श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर समिति द्वारा नगरवासियों सेे सपरिवार सम्मिलित होने का अनुरोध किया गया है ।





राजेश नागर परिवार ने लिया लाभ

झाबुआ। श्रावण माह के तीसरे सोमवार को शहर के कृषि विभाग के पीछे बालाजी धाम पर स्थित हाटकेष्वर (धर्मेष्वर) धाम पर नागर ब्राम्हण समाज द्वारा रूद्राभिषेक का आयोजन किया गया। यह रूद्राभिषेक सोमवार को सुबह 8 से 10 बजे तक तक चला। बाद महाआरती कर प्रसादी वितरण हुआ।  
तीसरे सोमवार को रूद्राभिषेक के लाभार्थी समाज के राजेश नागर एवं लीना नागर परिवार रहा। रूद्रिभषेक विधि-विधान से पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने संपन्न करवाया। 2 घंटे तक सत्तत चले अभिषेक के आयोजन के बाद राजेश-लीना नागर परिवार ने हाटकेष्वर महादेव की आरती की। बाद सभी को प्रसादी वितरित की। इस अवसर पर मातंगी पारमार्थिक ट्रस्ट के प्रमुख राकेश त्रिवेदी के साथ नागर ब्राम्हण समाजजनों में सुभाष नागर, देवेन्द्र कोठारी, धर्मेन्द्र नागर, हेमेन्द्र नागर, नैना कोठारी, साधना कोठारी आदि उपस्थित थे।


पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देता है हरियाली अमावस्या पर्व- श्री त्रिवेदी

झाबुआ।  श्रावण के पावन माह में हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली में बिराजित भगवान गोवर्धननाथ का  हरितिमा से आच्छादित विशेष श्रृंगार करके उन्हे हरितिमा से सज्जित हिण्डोलें पर झुलाया गया । इस अवसर पर  मंदिर मे उपस्थित महिला श्रद्धालुओं द्वारा  पुष्टिमार्गीय कीर्तन किये गये । जैसे ही भगवान के पट खुले हरितिमा सें सजाये गये हिण्डोलें में भगवान गोवर्धननाथ को होले होले झुला झुलाया गया । मंदिर के पण्डित दिलीप आचार्य जहां भगवान का झुला दे रहे थे वही दुर्गेश पालीवाल भगवान को पंखा झल रहे थे ।  कीर्तनकार रमेश त्रिवेदी द्वारा हरियाली अमावस्या पर संगीत मय ’’ झुला तो डाल्या श्री वृंदावन बाग में जी, राधा ने झुला डारों, रेशम की डोर को जी, एजी कोई डारों है जमुना बाग’ जैसे कीर्तनों के माध्यम से पूरे वातावरण को वृंदावनमय कर दिया । करीब एक घंटे तक  भगवान के हिंडोलें के दर्शनों का क्रम चलता रहा तथा बडी संख्या में दर्शनार्थियों ने भगवान के हरियाली अमावस्या के विशेष श्रृंगार के दर्शनों का लाभ उठाया ।   
             इस अवसर पर यमुना मंडल की महिला सदस्याओं द्वारा अपनी सराहनीय भूमिका का निर्वाह किया गया । हरियाली अमावस्या के महत्व को प्रतिपादित करते हुए गोवर्धननाथ मंदिर के अधिकारी बृजबिहारी त्रिवेदी ने बताया कि  भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। पर्यावरण को संरक्षित करने की दृष्टि से ही पेड़-पौधों में ईश्वरीय रूप को स्थान देकर उनकी पूजा का विधान बताया गया है। जल में वरुण देवता की परिकल्पना कर नदियों व सरोवरों को स्वच्छ व पवित्र रखने की बात कही गई है। वायुमंडल की शुचिता के लिए वायु को देवता माना गया है। 
      वेदों व ऋचाओं में इनके महत्व को बताया गया है। शास्त्रों में पृथ्वी, आकाश, जल, वनस्पति एवं औषधि को शांत रखने को कहा गया है। इसका आशय यह है कि इन्हें प्रदूषण से बचाया जाए। यदि ये सब संरक्षित व सुरक्षित होंगे तभी हमारा जीवन भी सुरक्षित व सुखी रह सकेगा। इसी सन्देश को आत्मसात करते हुए पुरातन काल से हरियाली अमावस्या पर्व को मनाया जारहा है । आरती एवं प्रसादी वितरण के साथ हरियाली महोत्सव का कार्यक्रम समाप्त हुआ । ज्ञातव्य है कि पूरे श्रावण माह में भगवान के विभिन्न मनोरथों के तहत हिण्डोला दर्शन का हवेली में  सायंकाल 6-30 बजे से आयोजन हो रहा है।

Jhabua News- हरियाली अमावस्या पर हरितिमा से आच्छादित हिण्डोले में झुले भगवान गोवर्धननाथ

Jhabua News- हरियाली अमावस्या पर हरितिमा से आच्छादित हिण्डोले में झुले भगवान गोवर्धननाथ

’’झुलत है राधा सुंदरवर सावन सरस हिण्डोरे ’’ कीर्तन के साथ कामदा एकादशी को गोवर्धननाथ पंचमेवों के हिण्डोले में झुले

राजेंद्र सोनी , झाबुआ। नगर के हृदयस्थल स्थित श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली में श्रावण माह में श्रद्धा एवं भक्ति की बयार बह रही है । भगवान श्री गोवर्धननाथ जी का श्रावण माह की कामदा एकादशी पर सायंकाल 7 बजे से विशेष श्रृंगार किया जाकर उन्हे सूखे मेवे से बने हिण्डोले में झुलाया गया ।
      इस अवसर पर महिलाओं ने दर्शन के पूर्व कामदा एकादशी होने से  सामूहिक भजनों की प्रस्तुति दी । ’’ छबीलों गोपाल झुले छबिले हिंडोरना ’’झुलत है राधा सुंदरवर सावन सरस हिण्डोरे ’’ झुलत लाल श्री गोवर्धनधारी  शोभा बरनी न जाये ’’ जेसे संगीत मंय कीर्तन के साथ भगवान की छबि निहारने एवं दर्शन करने के लिये सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष श्रद्धालुओं ने भगवान गोवर्धननाथजी के दर्शन वंदन कर अपने आप को धन्य माना । भगवान गोवर्धननाथ को पंचमेवों से सजाये गये  हिण्डोलें में बिराजित करके मुखिया दिलीप आचार्य भगवान के श्री विग्रह को होले होले झुला दे रहे थे वही उन्हें परम्परागत तरिके से पंखा झल कर हवा की जारही थी । पण्डित रमेश त्रिवेदी , गोकुलेश आचार्य एवं कान्हा अरोडा द्वारा पुष्टिमार्गीय कीर्तनों के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं को कर्णप्रिय स्वरों में कीर्तन से आल्हादित किया गया । करीब एक घंटे से अधिक समय तक कामदा एकादशी पर्व होने के कारण भगवान गोवर्धननाथ जी ने अपने भक्तों को दर्शन दिये । श्री आचार्य ने बताया कि कामदा एकादशी से ही भगवान के जन्माष्टमी बधाई का भी पर्व प्रारंभ हो गया है । 
पुलिस  व्यवस्था की मांग की 
नगर के हृदयस्थल स्थित गोवर्धननाथजी की हवेली में श्रावण माह प्रति दिन हिण्डोला दर्शन मेंं सैकडो की संख्या में नगरवासी एवं श्रद्धालुजन भगवान के हिण्डोला दर्शन के लिये आते है । मुख्य मार्ग होने से यहां बेतरतीब यातायात एवं यही पर दुपहिया एवं अन्य वाहनों पार्किग के कारण दर्शन के आने वाली महिलाओं, एवं श्रद्धालुओं को थोडी थोडी देर में ट्राफिक जाम हो जाने के कारण परेशानिया उठाना पडती है तथा यहां इन दिनों हमेशा दुर्घटना होने की संभावनायें बनी रहती है ।  ऐसे में यातायात व्यवस्था को बनाये रखने की दृष्टि से यातायात पुलिस की पर्व को देखते हुए तैनाती की जाना जनहित में जरूरी है।
     इसके लिये मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालु राजेन्द्र अिर्ग्नहौत्री, जितेन्द्र शाह , शेष नारायण मालवीय, मोहनलाल माहेश्वरी, निरंजनसिंह चौहान, राधेश्याम पटेल, शरद पारिक कृष्णकांत शाह, अजय रामावत, श्रीकिशन माहेश्वरी,नरेन्द्र भाटी, यमुना मंडल की महिलाओं श्रीमती मंजु मिस्त्री, संगीता शाह, संगीता पारिक आदि ने पुलिस अधीक्षक  से मांग की है कि श्रावण माह में हिण्डोला दर्शन पर्व को देखते हुए श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली के पास यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिये यातायात पुलिस की ड्युटी लगाई जाने से  श्रद्धालुओ को परेशानियों का सामना नही करना पडेगा ।

Jhabua News- गोवर्धननाथ जी हवेली में प्रतिदिन सायंकाल हो रहे नये कलेवर मे हिण्डोला दर्शन

झाबुआ। भगवान भोलेनाथ के पावन तीर्थ स्थल देवझिरी में वैकुण्डठवासी पण्डित हरिप्रसाद अग्निहोत्री द्वारा स्थापित परम्परा को सतत रखते हुए उनके परिजनों के सहयोग द्वारा श्रावण के पवित्र माह में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष प्रथम श्रावण सोमवार दिनांक 22 जुलाई को भगवान संकट मोचन महादेव का विधि विधान से महाअभिषेक, अनुष्ठान पण्डित संत रूपादास के सानिध्य में प्रातः 10 से  दोपहर 2ः30 तक अभिषेक का कार्यक्रम होगा तत्पश्चात दोपहर 3 बजे महाआरती का आयोजन होगा तथा दोपहर 3ः30 प्रसादीत आयोजन होगा।  
Jhabua News- श्रावण सोमवार के पावन अवसर पर देवझिरी में होगा अभिषेक      उक्त जानकारी देते हुए समाजसेवी जितेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री एवं हर्ष भटट् ने बताया कि अभिषेक पंडित रमेश उपाध्याय भी पंडित भागवतजी शुक्ल उपाध्याय, पंडित जनार्दन शुक्ला पंडित जैमिनी शुक्ला, पंडित विलास सारोलकर, पंडित आनन्द शर्मा, पंडित शैलेन्द्र पंडिया, पंडिया गोलु चतुर्वैदी, पंडित निखिल त्रिवेदी, पंडित आचार्य नामदेव जी, द्वारा संम्पन्न किया जायेगा। जितेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री ने अंचल के सभी शिव भक्तों से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में  सपरिवार देवझिरी मंदिर में पधाकर श्रावण सोमवार पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त करें। 

भूखे को भोजन,प्यासे को पानी, घर घर कर कल्याण- के गगन भेदी नारे के साथ निकली भगवान वरूणदेव की शोभायात्रा

समाज की महासभा की बैठक में विशद चर्चा कर लिये गये निर्णय

झाबुआ। अरोडा खत्री सामज के आराध्य देव श्री वरूण भगवान की प्रतिमा की स्थापना के तृतीय वर्ष पर  अरोडा खत्री समाज द्वारा तुलसी गली स्थित  खेडापति हनुमान मंदिर स्थित भगवान वरूण देव का तृतीय स्थापना दिवस धुमधाम से मनाया गया । इस समारोह में नगर सहित खाचरौद, आलोट,रतलाम, नागदा, जावरा, भाबरा, रानापुर, जोबट, थांदला, उदयपुर, जोधपुर आदि स्थानों से परिवार सहित समाजजनों ने इस आयोजन में सहभागिता की । प्रातः 7-30 बजे  मंदिर में बिराजित भगवान वरूण देव का शास्त्रोक्त विधि से मंत्रोच्चार के साथ महा अभिषेक किया गया । इस अवसर पर बडी संख्या में समाज के पुरूष एवं महिलाओं ने भाग लिया । आरती के पश्चात नगर में भगवान वरूणदेव की रथ मे बिराजित करके भव्य शोभायात्रा निकाली गई । बेंड बाजो एवं पुष्पवर्षा के साथ पैलेस गार्डन से प्रारंभ हुई शोभायात्रा राजवाडा चौक ,राधाकृष्ण मार्ग, थांदला गेट, बाबेल चौराहा होते हुए तुलसी गली स्थित खेडापति हनुमान मंदिर पर समाप्त हुई । पूरी शोभायात्रा में भगवान वरूणदेव के जय जय कारो के साथ ही ’’ सूर सुरतान ने दरियावान, मुश्किल कर आसान, भूखे को भोजन,प्यासे को पानी, घर घर कर कल्याण, घर घर कर कल्याण, राजा राज करो, प्रजा चेन करों, प्राणीमात्र का कल्याण करो, जय दरियाव जय दरियाव ’’ के गगन भेदी नारे लगाये जारहे थे । शोभायात्रा का सभी समाजजनों की ओर से स्वागत किया गया ।   


ठीक 12 बजे भगवान वरूणदेव की आरती में सैकेडो की संख्या में  समाजजनों ने भाग लिया तथा प्रसादी का वितरण किया गया । इस आयोजन में अतिथिगण’ के रूप में’ धनराज खत्री, अध्यक्ष अखिल भारतीय खत्री महासभा,’ ज्योतिप्रकाश छाबड़ा, संरक्षक राजस्थान अरोड़ा-खत्री सर्वोच्च समिति,विजय तोलवानी, अध्यक्ष राजस्थान अरोड़ा-खत्री सर्वोच्च समिति,हरिनारायण अरोड़ा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश अरोड़ा-खत्री महासभा’ तथा कुंदन अरोडा राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश महा सचिव तथा सरंक्षक सत्यनारायण अरोडा विशेष रूप से शामील हुए । महामंगल आरती के बाद पैलेस गार्डन मे समाजजनों के लिये सहभोज का आयोजन किया गया । दोपहर 1 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन पैलेस गार्डन में रखा गया जिसमें समाज की युवा प्रतिभाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर तालिया बटोरी । 
’महासभा की बैठक’
अरोडा खत्री समाज के सत्यनारायण अरोडा ने जानकारी देते हुए बताया कि पैलेस गार्डन में दोपहर 3.30 बजे मध्यप्रदेश अरोड़ा-खत्री महासभा कार्यकारिणी की बैठक होगी संपन्न हुई जिसमें अनेक महत्वपूर्ण मुद्दो पर चर्चा, सुझाव प्राप्त करके समाज हित में निर्णय लिये गये । महासभा की बैठक के बाद मध्यप्रदेश अरोड़ा-खत्री नवयुवक मंडल द्वारा ’समाज मे नवयुवक मंडल का योगदान व भूमिका’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें युवचा तरूणाई ने अपने बेवाक विचार व्यक्त किये । आभार के साथ आयोजन का समापन किया गया । 

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया



दीप यज्ञ एवं महाआरती का होगा आयोजन

झाबुआ। मां गंगा दशमी और वेद माता गायत्रीजी की जयंती (अवतरण) दिवस पर आज 12 जून, बुधवार को स्थानीय कॉलेज मार्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। इस दिन मुख्य रूप से शाम को मंदिर में दीप यज्ञ एवं महाआरती का आयोजन रखा गया है।  
यह जानकारी देते हुए गायत्री शक्तिपीठ से जुड़ी नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने बताया कि मंदिर में बुधवार को अलसुबह 4.30 बजे गायत्री माताजी का महाभिषेक पश्चात् 7.30 बजे मंगला आरती होगी। 6 से 8 बजे के बीच साधकों द्वारा मंदिर परिसर में बैठकर गायत्री महामंत्र का जाप (उच्चारण) भी किया जाएगा। बाद 9 से 12 बजे के बीच गर्भवती महिलाओं के गभोत्सव संस्कार गायत्री परिवार के जिला समन्वयक पं. घनष्याम बैरागी द्वारा संपन्न करवाएं जाएंगे। शाम 7 बजे दीप यज्ञ होगा एवं बाद रात 8 बजे महाआरती का आयोजन रखा गया है। तत्पष्चात् प्रसादी वितरण होगा।
वेद माता गायत्रीजी की महिमा
नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने मां गायत्रीजी की महिमा बताई कि गायत्री माता वेदो की माता है। उनसे संपूर्ण वेद आदि ज्ञान प्रकट हुआ है। उन्हें देव माता भी कहा गया है, यहीं माता समस्त देवताओं की उत्पत्ति करती है। उन्हें जगत माता भी कहा गया है, यहीं समस्त विष्व की जननी और पालन करने वाली है। गायत्री मंत्रजी का देवता सविता (सूर्य) है। गायत्री साधक सविता के तेज का ध्यान करने से भी महातेजस्वी बन जाता है। गायत्री मंत्रजी के ऋषि विष्वामित्रजी है। स्वयं भगवान श्री रामजी एवं श्री कृष्णजी भी गायत्री मंत्र का नित्य जाप करते थे। ऐसी मां गायत्रीजी की साधकों द्वारा आराधना-भक्ति-पूजा-अर्चना करने से समस्त संकटों एवं विपत्तियो का नाश होता है एवं घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मप्र के 51 हजार स्थानों पर एक साथ एक समय पर होंगे दीपयज्ञ, झाबुआ जिले में 1 हजार स्थानों पर होगा आयोजन
अखिल विष्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में देश से आतंकवाद-भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं खत्म हो, विष्व शांति बनी रहे और भारत विष्व गुरू बनने की ओर अग्रसर हो, इस हेतु गायत्री परिवार द्वारा आज बुधवार को गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा पर मप्र में 51 हजार स्थानों पर दीप यज्ञ का आयोजन रखा गया है। इसी क्रम में झाबुआ जिले में करीब 1 हजार स्थानों पर यह आयोजन होगा। जिसकी तैयारी गायत्री परिवार गायत्री शक्तिपीठ कॉलेज मार्ग झाबुआ ने पूर्ण कर ली है।
गायत्री परिवार नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने बताया कि गायत्री परिवार की ओर से आध्यात्मिक पहल के रूप में यह आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के गांव-कस्बों एवं शहरों में यह आयोजन होगा। इस आयोजन की खासियत यह रहेगी कि एक साथ एक समय पर ही पूरे प्रदेश में दीप यज्ञ किया जाएगा। इसी के तहत प्रदेश के हर जिले को गायत्री जयंती पर एक हजार स्थानों पर दीप यज्ञ का आयोजन करने जिम्मेदारी सौंपी गई है। गायत्री शक्तिपीठ कॉलेज मार्ग के तत्वावधान में संपूर्ण जिले में जिसमें रानापुर, मांंडलीनाथू, समोई, पारा, कालीदेवी, मेघनगर, कल्याणपुरा, थांदला, नौगांवा, खवासा, पेटलावद बामनिया, सारंगी, झकनावदा आदि स्थानों पर शक्तिपीठ से जुड़े गायत्री परिजनों द्वारा दीप यज्ञ संपन्न करवाएं जाएंगे। 
दीप यज्ञ बाद होगी महाआरती
दीप यज्ञ का समय देर शाम 7.30 से 8.30 बजे के बीच होगा। बाद महाआरती कर प्रसादी वितरण होगा। श्रीमती नलिनी बैरागी ने झाबुआ जिले के समस्त साधकगणों से इस दिन अपने घरों पर भी शाम 7 से 8 के बीज पांच-पांच दीपक प्रज्जवलित कर गायत्री महामंत्र का जाप करने हेतु आग्रह किया है। 

जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकल जाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा - श्री सतीशकुमार शर्मा

श्रीमद भागवत कथा में प्रहलाद चरित्र की विशद व्याख्या की गई

झाबुआ । भगवान गोवर्धननाथ जी जिस धरा पर विराजित है,वहां गोवर्धननाथजी की हवेली में 11 दिवसीय 151 पाटोत्सव के दौरान पैलेस गार्डन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से पण्डित सतीश जी शर्मा शास्त्री जी के श्रीमुख से गोस्वामी श्री दिव्येश कुमारजी की दीव्य उपस्थिति में भक्त प्रहलाद एवं नरसिंह अवतार की कथामृत का रसपान कराते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि जो माता अपने पुत्र को संस्कारित बनाने का कार्य करती है उसका पुत्र पूरे कुल को तारने वाला होता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखे तो समय बहुत ही कीमती होता है किन्तु समय को पैसों के बल पर खरीदा नही जासकता है । आज हमारे देश में भारतीय संस्कृति को भुल कर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने ही होड से लगी हुई है । जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकलजाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा । मानव जन्म एक बार मिलता है इसलिये इसे ऐसा बनाओं को हरिकृपा सदैव मिलती रहे । भगवान श्री हरि ठाकुर के चरणों का सदा वंदन पूजन करों। इनके चरणों के चार चिन्ह  का हमे चिंतन करना चाहिये । श्री हरि के चरण में वज्र का चिन्ह हम प्रेरणा देता है कि वज्र के समान कठोर बनों, अंकुश का चिन्ह हमे प्रेरणा देता है कि अपने मन को सदा वश में रखो तथा उस पर अंकुश रखो । घ्वज का चिन्ह हमें बताता है कि जीवनपथ पर सदैव सदकार्य करते हुए विजय पथ को अंगीकार करों । एवं कमल का चिन्ह बताता है कि हमारा हृदय सदा कोमलता एवं संवेदनशीलता से परिपूर्ण बना रहें ।  
         भक्त प्रहलाद का वृतांत सुनाते हुए पण्डित सतीशजी ने कहा कि कश्यप नामक ऋषि एवं उनकी पत्नी दिति को 2 पुत्र हुए जिनमें से एक का नाम हिरण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकश्यप था। हिरण्याक्ष को भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह रूप धरकर मार दिया था। अपने भाई की मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकश्यप ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया। सहस्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, लोकपालों को मारकर भगा दिया और स्वतः संपूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरुपाय हो गए थे। वे असुर हिरण्यकश्यप को किसी प्रकार से पराजित नहीं कर सकते थे। ब्रह्माजी की हिरण्यकश्यप कठोर तपस्या करता है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी वरदान देते हैं कि उसे न कोई घर में मार सके न बाहर, न अस्त्र से और न शस्त्र से, न दिन में मरे न रात में, न मनुष्य से मरे न पशु से, न आकाश में न पृथ्वी में। इस वरदान के बाद हिरण्यकश्यप ने प्रभु भक्तों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, लेकिन भक्त प्रहलाद के जन्म के बाद हिरण्यकश्यप उसकी भक्ति से भयभीत हो जाता है, उसे मृत्युलोक पहुंचाने के लिए प्रयास करता है। इसके बाद भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लेते हैं और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं।
          भगवान नरसिंह में वे सभी लक्षण थे, जो हिरण्यकश्यप के मृत्यु के वरदान को संतुष्ट करते थे। भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का नाश हुआ किंतु एक और समस्या खड़ी हो गई। भगवान नरसिंह इतने क्रोध में थे कि लगता था, जैसे वे प्रत्येक प्राणी का संहार कर देंगे। यहां तक कि स्वयं प्रह्लाद भी उनके क्रोध को शांत करने में विफल रहा। सभी देवता भयभीत हो भगवान ब्रह्मा की शरण में गए। परमपिता ब्रह्मा उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे प्रार्थना की कि वे अपने अवतार के क्रोध शांत कर लें किंतु भगवान विष्णु ने ऐसा करने में अपनी असमर्थता जतलाई। भगवान विष्णु ने सबको भगवान शंकर के पास चलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चूंकि भगवान शंकर उनके आराध्य हैं इसलिए केवल वही नरसिंह के क्रोध को शांत कर सकते हैं। और कोई उपाय न देखकर सभी भगवान शंकर के पास पहुंचे। 
       देवताओं के साथ स्वयं परमपिता ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर भगवान शिव नरसिंह का क्रोध शांत करने उनके समक्ष पहुंचे किंतु उस समय तक भगवान नरसिंह का क्रोध सारी सीमाओं को पार कर गया था। साक्षात भगवान शंकर को सामने देखकर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ बल्कि वे स्वयं भगवान शंकर पर आक्रमण करने दौड़े। उसी समय भगवान शंकर ने एक विकराल ऋषभ का रूप धारण किया और भगवान नरसिंह को अपनी पूंछ में लपेटकर खींचकर पाताल में ले गए। काफी देर तक भगवान शंकर ने भगवान नरसिंह को वैसे ही अपने पूंछ में जकड़कर रखा। अपनी सारी शक्तियों और प्रयासों के बाद भी भगवान नरसिंह उनकी पकड़ से छूटने में सफल नहीं हो पाए। अंत में शक्तिहीन होकर उन्होंने ऋषभ रूप में भगवान शंकर को पहचाना और तब उनका क्रोध शांत हुआ। इसे देखकर भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर ऋषभरूपी भगवान शंकर ने उन्हें मुक्त कर दिया। इस प्रकार देवताओं और प्रह्लाद के साथ-साथ सभी सत्पात्रों को 2 महान अवतारों के दर्शन हुए। हरिण्याक्ष और हिरण्यकश्यप तथा उनकी बहिन होलिका वर्तमान की राजनीति के षड्यंत्रों के प्रतीक हैं। वर्तमान संदर्भों से इन प्रतीकों का गहरा रिश्ता है।  तीसरे  दिन की कथा के विराम पर पूज्य दिव्येश कुमारजी द्वारा श्रीमद भागवतजी की आरती की गई । सैकडो की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती के बाद प्रसादी का लाभ लिया ।
पनघट मनोरथ के दर्शनों के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड
श्रीमदभागवत कथा के विराम के बाद रात्री 8 बजे से शयन समय पर ‘‘गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली’’ भजन के साथ श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में आकर्षक झांकिया लगा कर पनघट, जलाशय के प्रतिकात्मक सुंदर आयोजन किया गया । भगवान गोवर्धननाथजी, श्री गोपालजी एवं श्री राधे रानी की प्रतिमाओं को  श्रृंगारित करके बनाये गये महल में बिराजित किया गया जहां  पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज भगवान को पंखा झलरही थी । स्वयं गोस्वामी दिव्येशकुमारजी महाराज संगीतके साथ ’’ गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली ’’ भजन की प्रस्तुति दे रहे थे । सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष कतार बद्ध होकर भगवान की सुंदर झांकी को निहार कर भगवान के दर्शन लाभ लेकर कृतार्थ दिखाई दिये । शयन आरती के बाद भगवान के कपाट बंद हो गये ।
नन्द उत्सव का हुआ उल्लास के साथ आयोजन
रविवार  को दोपहर 12-30 बजे दिनेश सक्सेना के सौजन्य से राजभोग समय पर ’हेरी है आज नन्दराय के आनंद भयो’ के साथ नंद महोत्सव धुमधाम से मनाया गया। जूज्य दिव्येशकुमार जी द्वारा झुले मे भगवान की त्रिप्रतिमाओं को बिराजित कर झुला झुलाते हुए परम्परागत खिलौनों के द्वारा भगवान का लाड लडाया गया। वही पूज्य पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज द्वारा भी भगवान के झुले के पास नन्दोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान किये गये । रात्री शयन समय कमल तलाई मनोरथ दर्शन का अलौकिक कार्यक्रम आयोजित किया गया । राज भोज दर्शन के बाद बजे गोस्वामी दिव्येशकुमारजी के कर कमलों से श्रद्धालुओ को तुलसी के पौधों का वितरण भी किया गया ।






मंदिर में श्री सच्चियायमाता ओसियाजी एवं श्री सोनाणा खेतलाजी भैरव महाराज की प्रतिमा होगी विराजमान 

झाबुआ। जिले के सेठो की नगरी बामनिया में 12 से 14 जून तक 3 दिवसीय भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होगा। जिसमें मप्र में प्रथम मंदिर में ओसवाल वंश की कुलदेवी राजराजेश्वरी श्री सच्चियायमाताजी ओसियाजी व 36 कोम के कुलदेवता भैरूजी श्री सोनाणा खेतलाजी बामनिया की भव्य प्रतिष्ठा 14 जून को होगी। जानकारी देते हुए खेतलाजी महाराज के परम भक्त विवेक लुणावत ने बताया कि,आयोजन की शुरुआत 12 जून को को ज्योत एवं ध्वजा आगमन से होगी। दोपहर में भोजन प्रसादी एवं शाम को सोनू सिसोदिया, लहरुदास वैष्णव एंड पार्टी एवं सृष्टि बीकानेर (नृत्य कलाकार) द्वारा दी जाएगी। आयोजन के दूसरे दिन 13 जून को प्रातः 09 बजे भव्य विशाल कलश यात्रा (भीनमाल लेझिम पार्टी) हाथी, घोड़ा, ऊंट, बग्गी, बैंड बाजो के साथ नगर में निकाली जाएगी।   
        दोपहर में भोजन प्रसादी एवं शाम 8 बजे सरिता खारवाल एंड पार्टी पंचपदरा, रमेश माली (पाली), दिलीप गवैया (जोधपुर), नृत्य कलाकार धर्मेंद्र, हेमा जोड़ी नंबर वन राजस्थान द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएगी। आयोजन के तीसरे दिन 14 जून शुक्रवार को प्रातः शुभ बेला में देवों का प्रसाद, प्रवेश तथा शिखर,ध्वज, कलश आदि देव प्रतिष्ठा स्थापना, प्रसाद प्रबोधन, उत्तर पूजन, दिगपाल पूजन, बलिदान, पूर्णाहुति, महाआरती, महाप्रसादी, ब्राह्मण पूजन, घट चालान होगा। दोपहर में विशाल भंडारे (फले चुंदडी) प्रसादी का आयोजन होगा। पहले दर्शन के लिए जाना पड़ता था राजस्थान, अब बामनिया में ही होंगे दर्शन श्री लुणावत ने आगे बताया कि कार्यक्रम आयोजन श्री सांचला सोनाणा तीर्थ धाम, पेटलावद रोड़ बामनियापर भव्य रूप से संपन्न होगा। 
       आयोजन के पूर्व आयोजन स्थल पर समस्त कार्यकताओं द्वारा भव्य तैयारियां की जा रही है। साथ ही आमंत्रक समिति श्री सोनाणा खेतलाजी भैरूजी ट्रस्ट 36 कौम सेवार्थ बामनिया ने समस्त माता ,भैरव भक्तो को सादर आमंत्रित किया है। अपील की है कि सभी अधिक से आधिक तादात में पधार कर आयोजन को सफल बनाएं और अपनी प्रभु भक्ति का परिचय दे। खेतलाजी के परम भक्तो ने बताया कि उक्त आयोजन में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, निमाड़ सहित कई स्थानों ने बड़ी संख्या में भक्तगण पधार कर हिस्सा लेंगे। ज्ञातव्य है कि पहले माता भैरव भक्तो को अपने कुल देवी, कुल देवता के दर्शन हैतु राजस्थान जाना पड़ता था अब वही स्थान के नाम से बामनिया में ही यह तीर्थ मशहूर होगा। भक्तो को दर्शन हेतु भी बड़ी आसानी होगी।

तीन दिवसीय भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का होगा आयोजन

भगवान के अनुग्रह से स्वतः उत्पन्न हो और जिसमें भगवान दयालु होकर स्वतः जीव पर दया करें, वह पुष्टिभक्ति कहलाती है- पूज्य दिव्येश कुमार जी

झाबुआ। श्री वल्लभ सम्प्रदाय भक्ति का एक संप्रदाय, जिसकी स्थापना महाप्रभु वल्लभाचार्य ने की थी। इसे वल्लभ संप्रदाय या वल्लभ भी कहते हैं। चैतन्य महाप्रभु से भी पहले पुष्टिमार्ग के संस्थापक वल्लभाचार्य राधा की पूजा करते थे, जहां कुछ संप्रदायों के अनुसार, भक्तों की पहचान राधा की सहेलियों (सखी) के रूप में होती है, जिन्हें राधाकृष्ण के लिए अंतरंग व्यवस्था करने के लिए विशेषाधिकार प्राप्त होता है। अपने वैष्णव सहधर्मियों के साथ राधावल्लभी, भागवतपुराण के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं, लेकिन कुछ अंतरंगता जो राधा और गोपियों के साथ रिश्तों की परिधि के बाहर है, वह इस सम्प्रदाय के दर्शन में शामिल नहीं है। वल्लभाचार्य ने अपने शुद्धाद्वैत दर्शन के आधार पर इस मत का प्रतिपादन किया, जो भक्त साधन निरपेक्ष हो, भगवान के अनुग्रह से स्वतरू उत्पन्न हो और जिसमें भगवान दयालु होकर स्वतः जीव पर दया करें, वह पुष्टिभक्ति कहलाती है। ऐसा भक्त भगवान के स्वरूप दर्शन के अतिरिक्त अन्य किसी वस्तु के लिए प्रार्थना नहीं करता। वह आराध्य के प्रति आत्मसमर्पण करता है। इसको प्रेमलक्षणा भक्ति भी कहते हैं। ऐसी भक्ति कर्म, ज्ञान और योग से भी श्रेष्ठ बताई गई है। उक्त उदबोधन नगर के पूरातन दिव्य अलौलिक श्री गोवर्धननाथजी की हवेली  के 151 वे पाटोत्सव महोत्सव एवं श्रीमद भागवत रसपान महोत्सव 6 जून ये 16 जून तक आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सर्वाध्यक्ष एवं मार्गदर्शक पूज्य श्री दिव्येशकुमारजी बावाश्री महाराज के मुख्य आतिथ्य में 19 मई  रविवार को सायंकाल आमंत्रण पत्रिका का विमोचन के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं गणमान्य जनों को संबोधित करते हुए कहीं । 

श्री गोवर्धन मंदिर के 151 पाटोत्सव की आमंत्रण पत्रिका का हुआ विमोचन

पूज्य श्री दिव्येशकुमारजी महाराज के द्वारा उपस्थित भक्तों को  आमंत्रण पत्रिका का वितरण भी किया जाकर सभी भक्तो एवं श्रद्धालुओं  से आव्हान किया कि इस ऐतिहासिक पाटोत्सव एवं  श्रीमद भागवत रसपान के इस भव्य आयोजन का अधिक से अधिक लोग सहभागी होकर धर्मलाभ लेवें इसके लिये व्यापक प्रचार‘प्रसार किया जावे । इस अवसर पर  पूज्य दिव्येशकुमारजी  महाराज के अलावा बहिन भामीनी राजा, हरिश शाह, गोपाल हरसौला, महेश हरसौला, प्रदीप शाह, जितेन्द्रकुमार शाह, माहन माहेश्वरी, शेष नारायण मालवीय, संजय शाह, शरद पारीक, श्रीमती संगीता शाह, चंचला सोनी, प्रेमा भाटी, मंजु मिस्त्री, संगीता पारिक, शीला त्रिवेदी, अलका हरसौला, ममता हरसौला सहित बडी संख्या में वैष्णवजन उपस्थित थे ।
         श्री गोवर्धननाथ मंदिर के 151 पाटोत्सव के दौरान 11 दिवसीय इस आयोजन में 6 जून  से 16 जनू जून तक विभिन्न मनोरथ  चंदन चोली मनोरथ, मोती का बंगला मनोरथ, नौका विहार मनोरथ, पनघट मनोरथ, नन्द महोत्सव, कमल तलाई मनोरथ, अष्टखंभ मनोरथ, आम्र कुंज मनोरथ, ब्रज कमल मनोरथ, कुण्डवारा मनोरथ, गौचारण मनारेथ, बडी फुंल मंडली मनोरथ, व्यवला-विवाह खेल मनोरथ  के अलावा 16 जून को दोपहर 3-30 बजे से हवेली से बाडी तक भव्य शोभायात्रा एवं सायंकाल छप्पन भोग बडा मनोरथ का आयोजन गिरधर विलास वाडी झाबुआ में होगा । 17 जून को समापन एवं सम्मान समारोह का आयोजन मंदिर पर सायंकाल 6 बजे होगा । भागवत कथा 6 जून से 12 जून तक शास्त्री श्री सतीशजी शर्मा ग्वालियर के श्रीमुख से होगी । श्री गोवर्धन प्रभू के नित्य नूतन मनोरथ के अलावा स्वास्थ्य परिक्षण शिविर, गौ सेवा एवं निराश्रितों को भोजन के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम रास गरबा लोक नृत्य आदि का भी आयोजन किया जावेगा ।

श्री गोवर्धन मंदिर के 151 पाटोत्सव की आमंत्रण पत्रिका का हुआ विमोचन

          बुधवार सुबह 9-30 बजे से श्री गुरु पाद पूजन  तथा भजनांजलि का आयोजन किया गया गुरु भक्तो ने भाव विभोर हो कर लाखे बैसिये करोडो उभिए रे तमे तो भजन करावे नी , दर्शन दो घनश्याम नाथ, मोरी अंखियां प्यासी हैं, मन मंदिर की जोत जगाओ  घट घट वासी रे … .गोपाल कॉलोनी में म्हारा गुरुजी बिराजे, दुनिया मां डंको बाजे जी.. . मोहन प्यारा लागी छे तारी माया . . . आदि भजनों ने  वातावरण भक्तिमय कर दिया ।  
          दिन चढ़ने के साथ भजनों के स्वर तेज होते चले गए। जैसे ही घडी में 12 बजे मंदिर परिसर गोपाल प्रभु के जयकारों से गूंज उठा। पं. रूपक त्रिवेदी ने रामशंकर जानी (बड़े बापजी ), घनश्याम प्रभु (छोटे बापजी ) व माँ गोपाल प्रभु की आरती की। महाआरती के दोरान पूरा पंडाल खचाखच भरा हुआ था। पुष्पांजलि के बाद महाप्रसादी का आयोजन हुआ । इसम बडी संख्या में भक्तगण शामिल हुए ।   
रातभर चला भजन - कीर्तन का दौर 
     तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार शाम से मंदिर में भजन क्रीर्तन का सिलसिला शुरू हो गया  । झांझ- मंजीरे, ढोल और हारमोनियम पर भजनों की संगत के बीच भक्त भाव विभोर हो गए । अनवरत भजनों का क्रम गुरूवार को महाआरती के समय तक चलता रहा।
उमड़ा भक्तो  का सैलाब
     मोहिनी एकादशी 6 मई 1971 को मंदिर का पहला वार्षिकोत्सव मनाया गया था । तभी से यहां लगातार आध्यात्मिक आयोजनों का सिलसिला चल रहा है । इसी तारतम्य में 49 वा वार्षिकोत्सव धूमधाम से बुधवार  को मनाया गया । मंदिर में बुधवार सुबह से ही भक्तो का तांता लगना शुरू हो गया । सभी  बारी- बारी से अपने गुरुदेव की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते रहे । सवेरे 7 बजे से ही यह सिलसिला आरंभ हो गया था जो लगातार दोपहर तक चलता रहा । इस बीच सामूहिक भजनो की स्वर लहरियां भी गूंजने लगी । भक्ति के माध्यम से  भक्तगण एक लय में अपने भावो को अभिव्यक्ति करते रहे और भक्ति का आनंद चरम की और बढ़ता चला गया। 
तीन दिन धूम रही 
       3 दिवसीय समारोह की शुरुआत सोमवार सुबह 9-30 बजे से हो गयी थी , दैनिक आरती के बाद लोक कल्याण के लिए गुरु ॐ का अखंड जाप आरम्भ हुआ जो अनवरत २४ घंटे तक चलता रहा।  तत्पश्चात पूर्णाहुति हुई, दोपहर में भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया , वही इस दिन शाम को सामूहिक भजनो का आरम्भ हुआ जो अलसुबह तक चलता रहा बुधवार सुबह से ही वार्षिकोत्सव को गुरुदेव चरण पादुका पूजन एवं सद्गुरु फोटो पूजन के पश्चात् महाआरती एवं भंडारे का आयोजन हुआ।  
देश भर से आये गुरु भक्त 
         झाबुआ जिले के अतिरिक्त देश - प्रदेश  के कोने कोने से आए भक्तगण इस आयोजन के साक्षी थे । प्रदेश के इंदौर, रतलाम , उज्जैन, भोपाल, अलीराजपुर, महू , धार , राजस्थान के कोटा , बांसवाडा , जयपुर , गुजरात के राजकोट . बड़ोदा , अहमदाबाद, भरुच, जंत्राल , छत्तीसगढ़ के रायपुर सहित  बैंगलोर , मुंबई , पूना , आदि स्थानों से भक्त बड़ी संख्या में समारोह में शामिल हुए. 

gopal-mandir-jhabua-varshikotsav-annula-function-organized-2018-भजनों की धुन - मजीरों की थाप पर झूम उठे भक्त -गोपाल मंदिर में आयोजित हुआ त्रिदिवसीय वार्षिकोंत्सव समारोह

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भक्तो द्वारा ऑनलाइन दर्शन सुविधा का लाभ भी लिया गया 
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श्री वाडी हनुमान मंदिर में धूमधाम से आयोजित हुआ हनुमान जयंती महोत्सव        
झाबुआ। प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर नगर के मध्य स्थित चमत्कारिक श्री वाडी हनुमान मंदिर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी हनुमान जयंति महोत्सव धूमधाम व श्रद्धाभक्ति के साथ मनाया गया।  प्रातः काल से देर रात्रि तक धार्मिक आयोजनों का क्रम जारी रहा । प्रातः जहां सूरज की पहली किरण के साथ भगवान बजरंगबली के प्राकट्योत्सव को धुमधाम से महा मंगल आरती के साथ मनाया गया तथा दर्शनार्थियों को प्रसादी का वितरण किया गया वही दिन में नाम जपके साथ ही सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। 19 अप्रैल शुक्रवार को सुबह 6 बजे जन्मोत्सव आरती हुई। हनुमान जन्मोत्सव को लेकर बुधवार को ही संपूर्ण तैयारियां पूर्ण कर ली गई। मंदिर पुजारी नित्यप्रकाश चौहान व व्यवस्थापक गोपाल नीमा, प्रवीण चौहान, अशोक सिन्हा, मनोज सोनी आदि ने बताया कि हनुमान जयंति को लेकर मंदिर में भगवान की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कर पूरे मंदिर में आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है।
               सायंकाल हनुमानजी की आरती का अभिनव आयोजन गाजे बाजे के साथ किया गया । इस अवसर पर मंदिर समिति की ओर से सवा पांच क्विंटल साबुदाना खिचडी के अलावा पंचप्रकारी प्रसादी का वितरण देर रात्री तक किया गया । पूरे मंदिर को आकर्षक रोशनाई से सजाया गया । रात्री मे मंदिर की अनुपम छटा को निहारने के लिये भी दर्शनार्थियों का तांता उमडा। 

झाबुआ हनुमान जयंती महोत्सव: पंचकुंडीय मारुति यज्ञ के साथ हुआ अनुष्ठान-Hanuman-Jayanti-Jhabua-
हनुमान टेकरी पर आयोजित हुआ भव्य समारोह
हनुमान टेकरी के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को लेकर चल रहीं श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति, हनुमान टेकरी पर प्रतिवर्ष भव्य स्तर पर हनुमान जयंती को समारोहपूर्वक मनाती रहीें है । नगर की जनता के भरपूर सहयोग से इस वर्ष भी 18 व 19 अप्रैल को दो दिवसीय समारोह हनुमान जयंती के उपलक्ष में समिति द्वारा भव्य स्तर पर मनाया गया ।
     दो दिवसीय हनुमान जयंती महोत्सव पर  18  अप्रैल गुरुवार को प्रातः 06 बजे से सायं 06 बजें तक अखण्ड़ श्री राम नाम जाप, सायं 07 बजे प्रश्न मंच प्रतियोगिता (सुंदरकांड़ पर आधारित) रात्रि 09 बजें भजन संध्या , रात्रि 12 बजे से सुंदरकांड़ व रात्रि जागरण का आयोजन किया गया ।
        इसी तरह हनुमान जयंती पर प्रातः 06 बजे जन्मोत्सव आरती, प्रातः 07 बजे श्री पंचकुंड़ीय मारूती यज्ञ, दोप. 12 बजे महाआरती, दोप. 12:30 बजे से सायं 05 बजे तक अन्नकूट प्रसादी भंड़ारा व सायं 07 बजे नृत्य प्रतियोगिता (धार्मिक गीत व भजनों पर आधारित) आदि आयोजन हुए. प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बड़ी संख्या में भक्तो ने मोहत्सव में हिस्सा लेकर आयोजन को सफल बनाया  ।

झाबुआ हनुमान जयंती महोत्सव: पंचकुंडीय मारुति यज्ञ के साथ हुआ अनुष्ठान-Hanuman-Jayanti-Jhabua-
श्री बालाजी धाम कृषि विभाग में धूमधाम से मनी हनुमान जयन्ती 
श्री सिद्धपीठ बालाजी धाम समिति द्वारा तीन दिवसीय हनुमान जयन्ती महोत्सव स्थानीय कृषि विभाग स्थित बालाजी धाम पर बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया । समिति के राकेश त्रिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रात:काल से ही महोत्सव को लेकर उत्साह का वातावरण व्याप्त रहा । 
झाबुआ हनुमान जयंती महोत्सव: पंचकुंडीय मारुति यज्ञ के साथ हुआ अनुष्ठान-Hanuman-Jayanti-Jhabua-           महोत्सव के पहले दिन 17 अप्रेल बुधवार को प्रातः 10 बजे से गन्ने के रस के साथ धर्माचार्यो द्वारा लघुरूद्र का आयोजन किया गया , अगले दिन 18 अप्रेल गुरूवार को प्रातः 10 बजे से लाभार्थी नीरज राठौर द्वारा मारूति यज्ञ का आयोजन किया गया , तत्पश्चात सायंकाल 5 बजे से समूह एवं एकल भजन प्रतियोगिता का आयोजन सोलंकी कंस्ट्रक्षन एंड सप्लायर्स लाखनसिंह सोलंकी के सौजन्य से आयोजित किया गया, जिसमें समूह भजन में प्रथम पुरस्कार 5555 रुपये द्वितीय पुरस्कार 3333 रुपये एवं तृतीय पुरस्कार 1111 रुपये प्रदान किये गए इसी तरह एकल भजन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 1500 रु. द्वितीय पुरस्कार 1000 एवं तृतीय पुरस्कार 500 रुये प्रदान किये गए।  19 अप्रैल शुक्रवार को हनुमान जयंती के अवसर पर प्रातः 6 बजे जन्मोत्सव आरती एवं दोपहर 12 बजे महाआरती की गयी तथा दोपहर 12 बजे से भंडारा एवं भजन आर्केष्ट्रा का आयोजन किया गया.  आयोजन में समाज के सभी सदस्यों ने बढ चढकर भाग लिया । 
                पूरे मंदिर को आकर्षक रूप से बिजली के बल्बो से आलोकित किया गया , समूचे मंदिर प्रांगण को फूलमालाओं से सुसज्जित किया गया । अध्यक्ष राकेश त्रिवेदी के अनुसार इस आयोजन में सभी सदस्यों एवं भक्तो सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ तथा नगर के अलावा बाहर के भक्तो ने भी इस धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की । 

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