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1 26 january 1 abvp 45 Administrative 1 b4 cinema 1 balaji dhaam 1 bhagoria 1 bhagoria festival jhabua 2 bjp 1 cinema hall jhabua 27 city 16 crime 19 cultural 35 education 2 election 15 events 12 Exclusive 1 Famous Place 6 gopal mandir jhabua 17 Health and Medical 78 jhabua 4 jhabua crime 1 Jhabua History 1 matangi 3 Movie Review 5 MPPSC 1 National Body Building Championship India 4 photo gallery 18 politics 2 ram sharnam jhabua 48 religious 5 religious place 2 Road Accident 3 sd academy 65 social 13 sports 1 tourist place 13 Video 1 Visiting Place 11 Women Jhabua 2 अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन 1 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 1 अंगूरी बनी अंगारा 1 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 15 अपराध 1 अल्प विराम कार्यक्रम 6 अवैध शराब 1 आदित्य पंचोली 1 आदिवासी गुड़िया 1 आरटीओं 1 आलेख 1 आवंला नवमी 3 आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट 1 ईद 1 उत्कृष्ट सड़क 20 ऋषभदेव बावन जिनालय 3 एकात्म यात्रा 2 एमपी पीएससी 1 कलाल समाज 1 कलावती भूरिया 3 कलेक्टर 14 कांग्रेस 6 कांतिलाल भूरिया 1 कार्तिक पूर्णिमा 2 किन्नर सम्मेलन 2 कृषि 1 कृषि महोत्सव 3 कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ 1 केरोसीन 2 क्रिकेट टूर्नामेंट 4 खबरे अब तक 1 खेडापति हनुमान मंदिर 15 खेल 1 गडवाड़ा 1 गणगौर पर्व 1 गर्मी 1 गल पर्व 8 गायत्री शक्तिपीठ 2 गुड़िया कला झाबुआ 1 गोपाल पुरस्कार 4 गोपाल मंदिर झाबुआ 1 गोपाष्टमी 1 गोपेश्वर महादेव 14 घटनाए 1 चक्काजाम 3 जनसुनवाई 1 जय आदिवासी युवा संगठन 5 जय बजरंग व्यायाम शाला 1 जयस 6 जिला चिकित्सालय 3 जिला जेल 3 जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ 1 जीवन ज्योति हॉस्पिटल 9 जैन मुनि 6 जैन सोश्यल गुुप 2 झकनावदा 80 झाबुआ 1 झाबुआ इतिहास 1 झाबुआ का राजा 3 झाबुआ पर्व 9 झाबुआ पुलिस 1 झूलेलाल जयंती 1 तुलसी विवाह 6 थांदला 3 दशहरा 1 दस्तक अभियान 1 दिल से कार्यक्रम 3 दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि 1 दीपावली 2 देवझिरी 38 धार्मिक 5 धार्मिक स्थल 7 नगरपालिका परिषद झाबुआ 5 नवरात्री 4 नवरात्री चल समारोह 4 नि:शुल्क स्वास्थ्य मेगा शिविर 1 निर्वाचन आयोग 4 परिवहन विभाग 1 पर्यटन स्थल 3 पल्स पोलियो अभियान 7 पारा 1 पावर लिफ्टिंग 14 पेटलावद 1 प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय 3 प्रतियोगी परीक्षा 1 प्रधानमंत्री आवास योजना 30 प्रशासनिक 1 बजरंग दल 2 बाल कल्याण समिति 1 बेटी बचाओं अभियान 2 बोहरा समाज 1 ब्लू व्हेल गेम 1 भगोरिया पर्व 1 भगोरिया मेला 3 भगौरिया पर्व 1 भजन संध्या 1 भर्ती 2 भागवत कथा 28 भाजपा 1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान 1 भारतीय जैन संगठना 3 भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 1 भावांतर योजना 2 मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग 1 मल्टीप्लेक्स सिनेमा 2 महाशिवरात्रि 1 महिला आयोग 1 महिला एवं बाल विकास विभाग 1 मिशन इन्द्रधनुष 1 मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना 2 मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान 8 मुस्लिम समाज 1 मुहर्रम 3 मूवी रिव्यु 6 मेघनगर 1 मेरे दीनदयाल सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता 2 मोड़ ब्राह्मण समाज 1 मोदी मोहल्ला 1 मोहनखेड़ा 2 यातायात 1 रंगपुरा 2 राजगढ़ 12 राजनेतिक 8 राजवाडा चौक 11 राणापुर 5 रामशंकर चंचल 1 रामा 1 रायपुरिया 1 राष्ट्रीय एकता दिवस 2 राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप 4 राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना 1 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण 1 रोग निदान 2 रोजगार मेला 15 रोटरी क्लब 2 लक्ष्मीनगर विकास समिति 1 लाडली शिक्षा पर्व 2 वनवासी कल्याण परिषद 1 वरदान नर्सिंग होम 1 वाटसएप 1 विधायक 4 विधायक शांतिलाल बिलवाल 1 विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस 2 विश्व विकलांग दिवस 2 विश्व हिन्दू परिषद 1 वेलेंटाईन डे 3 व्यापारी प्रीमियर लीग 1 शरद पूर्णिमा 5 शासकीय महाविद्यालय झाबुआ 32 शिक्षा 1 श्रद्धांजलि सभा 3 श्री गौड़ी पार्श्वनाथ जैन मंदिर 9 सकल व्यापारी संघ 2 सत्यसाई सेवा समिति 1 संपादकीय 2 सर्वब्राह्मण समाज 4 साज रंग झाबुआ 33 सामाजिक 1 सारंगी 11 सांस्कृतिक 1 सिंधी समाज 1 सीपीसीटी परीक्षा 3 स्थापना दिवस 3 स्वच्छ भारत मिशन 4 हज 3 हजरत दीदार शाह वली 5 हाथीपावा 1 हिन्दू नववर्ष 5 होली झाबुआ
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दीप यज्ञ एवं महाआरती का होगा आयोजन

झाबुआ। मां गंगा दशमी और वेद माता गायत्रीजी की जयंती (अवतरण) दिवस पर आज 12 जून, बुधवार को स्थानीय कॉलेज मार्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। इस दिन मुख्य रूप से शाम को मंदिर में दीप यज्ञ एवं महाआरती का आयोजन रखा गया है।  
यह जानकारी देते हुए गायत्री शक्तिपीठ से जुड़ी नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने बताया कि मंदिर में बुधवार को अलसुबह 4.30 बजे गायत्री माताजी का महाभिषेक पश्चात् 7.30 बजे मंगला आरती होगी। 6 से 8 बजे के बीच साधकों द्वारा मंदिर परिसर में बैठकर गायत्री महामंत्र का जाप (उच्चारण) भी किया जाएगा। बाद 9 से 12 बजे के बीच गर्भवती महिलाओं के गभोत्सव संस्कार गायत्री परिवार के जिला समन्वयक पं. घनष्याम बैरागी द्वारा संपन्न करवाएं जाएंगे। शाम 7 बजे दीप यज्ञ होगा एवं बाद रात 8 बजे महाआरती का आयोजन रखा गया है। तत्पष्चात् प्रसादी वितरण होगा।
वेद माता गायत्रीजी की महिमा
नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने मां गायत्रीजी की महिमा बताई कि गायत्री माता वेदो की माता है। उनसे संपूर्ण वेद आदि ज्ञान प्रकट हुआ है। उन्हें देव माता भी कहा गया है, यहीं माता समस्त देवताओं की उत्पत्ति करती है। उन्हें जगत माता भी कहा गया है, यहीं समस्त विष्व की जननी और पालन करने वाली है। गायत्री मंत्रजी का देवता सविता (सूर्य) है। गायत्री साधक सविता के तेज का ध्यान करने से भी महातेजस्वी बन जाता है। गायत्री मंत्रजी के ऋषि विष्वामित्रजी है। स्वयं भगवान श्री रामजी एवं श्री कृष्णजी भी गायत्री मंत्र का नित्य जाप करते थे। ऐसी मां गायत्रीजी की साधकों द्वारा आराधना-भक्ति-पूजा-अर्चना करने से समस्त संकटों एवं विपत्तियो का नाश होता है एवं घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मप्र के 51 हजार स्थानों पर एक साथ एक समय पर होंगे दीपयज्ञ, झाबुआ जिले में 1 हजार स्थानों पर होगा आयोजन
अखिल विष्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में देश से आतंकवाद-भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं खत्म हो, विष्व शांति बनी रहे और भारत विष्व गुरू बनने की ओर अग्रसर हो, इस हेतु गायत्री परिवार द्वारा आज बुधवार को गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा पर मप्र में 51 हजार स्थानों पर दीप यज्ञ का आयोजन रखा गया है। इसी क्रम में झाबुआ जिले में करीब 1 हजार स्थानों पर यह आयोजन होगा। जिसकी तैयारी गायत्री परिवार गायत्री शक्तिपीठ कॉलेज मार्ग झाबुआ ने पूर्ण कर ली है।
गायत्री परिवार नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने बताया कि गायत्री परिवार की ओर से आध्यात्मिक पहल के रूप में यह आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के गांव-कस्बों एवं शहरों में यह आयोजन होगा। इस आयोजन की खासियत यह रहेगी कि एक साथ एक समय पर ही पूरे प्रदेश में दीप यज्ञ किया जाएगा। इसी के तहत प्रदेश के हर जिले को गायत्री जयंती पर एक हजार स्थानों पर दीप यज्ञ का आयोजन करने जिम्मेदारी सौंपी गई है। गायत्री शक्तिपीठ कॉलेज मार्ग के तत्वावधान में संपूर्ण जिले में जिसमें रानापुर, मांंडलीनाथू, समोई, पारा, कालीदेवी, मेघनगर, कल्याणपुरा, थांदला, नौगांवा, खवासा, पेटलावद बामनिया, सारंगी, झकनावदा आदि स्थानों पर शक्तिपीठ से जुड़े गायत्री परिजनों द्वारा दीप यज्ञ संपन्न करवाएं जाएंगे। 
दीप यज्ञ बाद होगी महाआरती
दीप यज्ञ का समय देर शाम 7.30 से 8.30 बजे के बीच होगा। बाद महाआरती कर प्रसादी वितरण होगा। श्रीमती नलिनी बैरागी ने झाबुआ जिले के समस्त साधकगणों से इस दिन अपने घरों पर भी शाम 7 से 8 के बीज पांच-पांच दीपक प्रज्जवलित कर गायत्री महामंत्र का जाप करने हेतु आग्रह किया है। 

जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकल जाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा - श्री सतीशकुमार शर्मा

श्रीमद भागवत कथा में प्रहलाद चरित्र की विशद व्याख्या की गई

झाबुआ । भगवान गोवर्धननाथ जी जिस धरा पर विराजित है,वहां गोवर्धननाथजी की हवेली में 11 दिवसीय 151 पाटोत्सव के दौरान पैलेस गार्डन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से पण्डित सतीश जी शर्मा शास्त्री जी के श्रीमुख से गोस्वामी श्री दिव्येश कुमारजी की दीव्य उपस्थिति में भक्त प्रहलाद एवं नरसिंह अवतार की कथामृत का रसपान कराते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि जो माता अपने पुत्र को संस्कारित बनाने का कार्य करती है उसका पुत्र पूरे कुल को तारने वाला होता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखे तो समय बहुत ही कीमती होता है किन्तु समय को पैसों के बल पर खरीदा नही जासकता है । आज हमारे देश में भारतीय संस्कृति को भुल कर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने ही होड से लगी हुई है । जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकलजाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा । मानव जन्म एक बार मिलता है इसलिये इसे ऐसा बनाओं को हरिकृपा सदैव मिलती रहे । भगवान श्री हरि ठाकुर के चरणों का सदा वंदन पूजन करों। इनके चरणों के चार चिन्ह  का हमे चिंतन करना चाहिये । श्री हरि के चरण में वज्र का चिन्ह हम प्रेरणा देता है कि वज्र के समान कठोर बनों, अंकुश का चिन्ह हमे प्रेरणा देता है कि अपने मन को सदा वश में रखो तथा उस पर अंकुश रखो । घ्वज का चिन्ह हमें बताता है कि जीवनपथ पर सदैव सदकार्य करते हुए विजय पथ को अंगीकार करों । एवं कमल का चिन्ह बताता है कि हमारा हृदय सदा कोमलता एवं संवेदनशीलता से परिपूर्ण बना रहें ।  
         भक्त प्रहलाद का वृतांत सुनाते हुए पण्डित सतीशजी ने कहा कि कश्यप नामक ऋषि एवं उनकी पत्नी दिति को 2 पुत्र हुए जिनमें से एक का नाम हिरण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकश्यप था। हिरण्याक्ष को भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह रूप धरकर मार दिया था। अपने भाई की मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकश्यप ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया। सहस्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, लोकपालों को मारकर भगा दिया और स्वतः संपूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरुपाय हो गए थे। वे असुर हिरण्यकश्यप को किसी प्रकार से पराजित नहीं कर सकते थे। ब्रह्माजी की हिरण्यकश्यप कठोर तपस्या करता है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी वरदान देते हैं कि उसे न कोई घर में मार सके न बाहर, न अस्त्र से और न शस्त्र से, न दिन में मरे न रात में, न मनुष्य से मरे न पशु से, न आकाश में न पृथ्वी में। इस वरदान के बाद हिरण्यकश्यप ने प्रभु भक्तों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, लेकिन भक्त प्रहलाद के जन्म के बाद हिरण्यकश्यप उसकी भक्ति से भयभीत हो जाता है, उसे मृत्युलोक पहुंचाने के लिए प्रयास करता है। इसके बाद भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लेते हैं और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं।
          भगवान नरसिंह में वे सभी लक्षण थे, जो हिरण्यकश्यप के मृत्यु के वरदान को संतुष्ट करते थे। भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का नाश हुआ किंतु एक और समस्या खड़ी हो गई। भगवान नरसिंह इतने क्रोध में थे कि लगता था, जैसे वे प्रत्येक प्राणी का संहार कर देंगे। यहां तक कि स्वयं प्रह्लाद भी उनके क्रोध को शांत करने में विफल रहा। सभी देवता भयभीत हो भगवान ब्रह्मा की शरण में गए। परमपिता ब्रह्मा उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे प्रार्थना की कि वे अपने अवतार के क्रोध शांत कर लें किंतु भगवान विष्णु ने ऐसा करने में अपनी असमर्थता जतलाई। भगवान विष्णु ने सबको भगवान शंकर के पास चलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चूंकि भगवान शंकर उनके आराध्य हैं इसलिए केवल वही नरसिंह के क्रोध को शांत कर सकते हैं। और कोई उपाय न देखकर सभी भगवान शंकर के पास पहुंचे। 
       देवताओं के साथ स्वयं परमपिता ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर भगवान शिव नरसिंह का क्रोध शांत करने उनके समक्ष पहुंचे किंतु उस समय तक भगवान नरसिंह का क्रोध सारी सीमाओं को पार कर गया था। साक्षात भगवान शंकर को सामने देखकर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ बल्कि वे स्वयं भगवान शंकर पर आक्रमण करने दौड़े। उसी समय भगवान शंकर ने एक विकराल ऋषभ का रूप धारण किया और भगवान नरसिंह को अपनी पूंछ में लपेटकर खींचकर पाताल में ले गए। काफी देर तक भगवान शंकर ने भगवान नरसिंह को वैसे ही अपने पूंछ में जकड़कर रखा। अपनी सारी शक्तियों और प्रयासों के बाद भी भगवान नरसिंह उनकी पकड़ से छूटने में सफल नहीं हो पाए। अंत में शक्तिहीन होकर उन्होंने ऋषभ रूप में भगवान शंकर को पहचाना और तब उनका क्रोध शांत हुआ। इसे देखकर भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर ऋषभरूपी भगवान शंकर ने उन्हें मुक्त कर दिया। इस प्रकार देवताओं और प्रह्लाद के साथ-साथ सभी सत्पात्रों को 2 महान अवतारों के दर्शन हुए। हरिण्याक्ष और हिरण्यकश्यप तथा उनकी बहिन होलिका वर्तमान की राजनीति के षड्यंत्रों के प्रतीक हैं। वर्तमान संदर्भों से इन प्रतीकों का गहरा रिश्ता है।  तीसरे  दिन की कथा के विराम पर पूज्य दिव्येश कुमारजी द्वारा श्रीमद भागवतजी की आरती की गई । सैकडो की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती के बाद प्रसादी का लाभ लिया ।
पनघट मनोरथ के दर्शनों के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड
श्रीमदभागवत कथा के विराम के बाद रात्री 8 बजे से शयन समय पर ‘‘गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली’’ भजन के साथ श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में आकर्षक झांकिया लगा कर पनघट, जलाशय के प्रतिकात्मक सुंदर आयोजन किया गया । भगवान गोवर्धननाथजी, श्री गोपालजी एवं श्री राधे रानी की प्रतिमाओं को  श्रृंगारित करके बनाये गये महल में बिराजित किया गया जहां  पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज भगवान को पंखा झलरही थी । स्वयं गोस्वामी दिव्येशकुमारजी महाराज संगीतके साथ ’’ गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली ’’ भजन की प्रस्तुति दे रहे थे । सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष कतार बद्ध होकर भगवान की सुंदर झांकी को निहार कर भगवान के दर्शन लाभ लेकर कृतार्थ दिखाई दिये । शयन आरती के बाद भगवान के कपाट बंद हो गये ।
नन्द उत्सव का हुआ उल्लास के साथ आयोजन
रविवार  को दोपहर 12-30 बजे दिनेश सक्सेना के सौजन्य से राजभोग समय पर ’हेरी है आज नन्दराय के आनंद भयो’ के साथ नंद महोत्सव धुमधाम से मनाया गया। जूज्य दिव्येशकुमार जी द्वारा झुले मे भगवान की त्रिप्रतिमाओं को बिराजित कर झुला झुलाते हुए परम्परागत खिलौनों के द्वारा भगवान का लाड लडाया गया। वही पूज्य पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज द्वारा भी भगवान के झुले के पास नन्दोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान किये गये । रात्री शयन समय कमल तलाई मनोरथ दर्शन का अलौकिक कार्यक्रम आयोजित किया गया । राज भोज दर्शन के बाद बजे गोस्वामी दिव्येशकुमारजी के कर कमलों से श्रद्धालुओ को तुलसी के पौधों का वितरण भी किया गया ।






मंदिर में श्री सच्चियायमाता ओसियाजी एवं श्री सोनाणा खेतलाजी भैरव महाराज की प्रतिमा होगी विराजमान 

झाबुआ। जिले के सेठो की नगरी बामनिया में 12 से 14 जून तक 3 दिवसीय भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होगा। जिसमें मप्र में प्रथम मंदिर में ओसवाल वंश की कुलदेवी राजराजेश्वरी श्री सच्चियायमाताजी ओसियाजी व 36 कोम के कुलदेवता भैरूजी श्री सोनाणा खेतलाजी बामनिया की भव्य प्रतिष्ठा 14 जून को होगी। जानकारी देते हुए खेतलाजी महाराज के परम भक्त विवेक लुणावत ने बताया कि,आयोजन की शुरुआत 12 जून को को ज्योत एवं ध्वजा आगमन से होगी। दोपहर में भोजन प्रसादी एवं शाम को सोनू सिसोदिया, लहरुदास वैष्णव एंड पार्टी एवं सृष्टि बीकानेर (नृत्य कलाकार) द्वारा दी जाएगी। आयोजन के दूसरे दिन 13 जून को प्रातः 09 बजे भव्य विशाल कलश यात्रा (भीनमाल लेझिम पार्टी) हाथी, घोड़ा, ऊंट, बग्गी, बैंड बाजो के साथ नगर में निकाली जाएगी।   
        दोपहर में भोजन प्रसादी एवं शाम 8 बजे सरिता खारवाल एंड पार्टी पंचपदरा, रमेश माली (पाली), दिलीप गवैया (जोधपुर), नृत्य कलाकार धर्मेंद्र, हेमा जोड़ी नंबर वन राजस्थान द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएगी। आयोजन के तीसरे दिन 14 जून शुक्रवार को प्रातः शुभ बेला में देवों का प्रसाद, प्रवेश तथा शिखर,ध्वज, कलश आदि देव प्रतिष्ठा स्थापना, प्रसाद प्रबोधन, उत्तर पूजन, दिगपाल पूजन, बलिदान, पूर्णाहुति, महाआरती, महाप्रसादी, ब्राह्मण पूजन, घट चालान होगा। दोपहर में विशाल भंडारे (फले चुंदडी) प्रसादी का आयोजन होगा। पहले दर्शन के लिए जाना पड़ता था राजस्थान, अब बामनिया में ही होंगे दर्शन श्री लुणावत ने आगे बताया कि कार्यक्रम आयोजन श्री सांचला सोनाणा तीर्थ धाम, पेटलावद रोड़ बामनियापर भव्य रूप से संपन्न होगा। 
       आयोजन के पूर्व आयोजन स्थल पर समस्त कार्यकताओं द्वारा भव्य तैयारियां की जा रही है। साथ ही आमंत्रक समिति श्री सोनाणा खेतलाजी भैरूजी ट्रस्ट 36 कौम सेवार्थ बामनिया ने समस्त माता ,भैरव भक्तो को सादर आमंत्रित किया है। अपील की है कि सभी अधिक से आधिक तादात में पधार कर आयोजन को सफल बनाएं और अपनी प्रभु भक्ति का परिचय दे। खेतलाजी के परम भक्तो ने बताया कि उक्त आयोजन में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, निमाड़ सहित कई स्थानों ने बड़ी संख्या में भक्तगण पधार कर हिस्सा लेंगे। ज्ञातव्य है कि पहले माता भैरव भक्तो को अपने कुल देवी, कुल देवता के दर्शन हैतु राजस्थान जाना पड़ता था अब वही स्थान के नाम से बामनिया में ही यह तीर्थ मशहूर होगा। भक्तो को दर्शन हेतु भी बड़ी आसानी होगी।

तीन दिवसीय भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का होगा आयोजन

भगवान के अनुग्रह से स्वतः उत्पन्न हो और जिसमें भगवान दयालु होकर स्वतः जीव पर दया करें, वह पुष्टिभक्ति कहलाती है- पूज्य दिव्येश कुमार जी

झाबुआ। श्री वल्लभ सम्प्रदाय भक्ति का एक संप्रदाय, जिसकी स्थापना महाप्रभु वल्लभाचार्य ने की थी। इसे वल्लभ संप्रदाय या वल्लभ भी कहते हैं। चैतन्य महाप्रभु से भी पहले पुष्टिमार्ग के संस्थापक वल्लभाचार्य राधा की पूजा करते थे, जहां कुछ संप्रदायों के अनुसार, भक्तों की पहचान राधा की सहेलियों (सखी) के रूप में होती है, जिन्हें राधाकृष्ण के लिए अंतरंग व्यवस्था करने के लिए विशेषाधिकार प्राप्त होता है। अपने वैष्णव सहधर्मियों के साथ राधावल्लभी, भागवतपुराण के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं, लेकिन कुछ अंतरंगता जो राधा और गोपियों के साथ रिश्तों की परिधि के बाहर है, वह इस सम्प्रदाय के दर्शन में शामिल नहीं है। वल्लभाचार्य ने अपने शुद्धाद्वैत दर्शन के आधार पर इस मत का प्रतिपादन किया, जो भक्त साधन निरपेक्ष हो, भगवान के अनुग्रह से स्वतरू उत्पन्न हो और जिसमें भगवान दयालु होकर स्वतः जीव पर दया करें, वह पुष्टिभक्ति कहलाती है। ऐसा भक्त भगवान के स्वरूप दर्शन के अतिरिक्त अन्य किसी वस्तु के लिए प्रार्थना नहीं करता। वह आराध्य के प्रति आत्मसमर्पण करता है। इसको प्रेमलक्षणा भक्ति भी कहते हैं। ऐसी भक्ति कर्म, ज्ञान और योग से भी श्रेष्ठ बताई गई है। उक्त उदबोधन नगर के पूरातन दिव्य अलौलिक श्री गोवर्धननाथजी की हवेली  के 151 वे पाटोत्सव महोत्सव एवं श्रीमद भागवत रसपान महोत्सव 6 जून ये 16 जून तक आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सर्वाध्यक्ष एवं मार्गदर्शक पूज्य श्री दिव्येशकुमारजी बावाश्री महाराज के मुख्य आतिथ्य में 19 मई  रविवार को सायंकाल आमंत्रण पत्रिका का विमोचन के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं गणमान्य जनों को संबोधित करते हुए कहीं । 

श्री गोवर्धन मंदिर के 151 पाटोत्सव की आमंत्रण पत्रिका का हुआ विमोचन

पूज्य श्री दिव्येशकुमारजी महाराज के द्वारा उपस्थित भक्तों को  आमंत्रण पत्रिका का वितरण भी किया जाकर सभी भक्तो एवं श्रद्धालुओं  से आव्हान किया कि इस ऐतिहासिक पाटोत्सव एवं  श्रीमद भागवत रसपान के इस भव्य आयोजन का अधिक से अधिक लोग सहभागी होकर धर्मलाभ लेवें इसके लिये व्यापक प्रचार‘प्रसार किया जावे । इस अवसर पर  पूज्य दिव्येशकुमारजी  महाराज के अलावा बहिन भामीनी राजा, हरिश शाह, गोपाल हरसौला, महेश हरसौला, प्रदीप शाह, जितेन्द्रकुमार शाह, माहन माहेश्वरी, शेष नारायण मालवीय, संजय शाह, शरद पारीक, श्रीमती संगीता शाह, चंचला सोनी, प्रेमा भाटी, मंजु मिस्त्री, संगीता पारिक, शीला त्रिवेदी, अलका हरसौला, ममता हरसौला सहित बडी संख्या में वैष्णवजन उपस्थित थे ।
         श्री गोवर्धननाथ मंदिर के 151 पाटोत्सव के दौरान 11 दिवसीय इस आयोजन में 6 जून  से 16 जनू जून तक विभिन्न मनोरथ  चंदन चोली मनोरथ, मोती का बंगला मनोरथ, नौका विहार मनोरथ, पनघट मनोरथ, नन्द महोत्सव, कमल तलाई मनोरथ, अष्टखंभ मनोरथ, आम्र कुंज मनोरथ, ब्रज कमल मनोरथ, कुण्डवारा मनोरथ, गौचारण मनारेथ, बडी फुंल मंडली मनोरथ, व्यवला-विवाह खेल मनोरथ  के अलावा 16 जून को दोपहर 3-30 बजे से हवेली से बाडी तक भव्य शोभायात्रा एवं सायंकाल छप्पन भोग बडा मनोरथ का आयोजन गिरधर विलास वाडी झाबुआ में होगा । 17 जून को समापन एवं सम्मान समारोह का आयोजन मंदिर पर सायंकाल 6 बजे होगा । भागवत कथा 6 जून से 12 जून तक शास्त्री श्री सतीशजी शर्मा ग्वालियर के श्रीमुख से होगी । श्री गोवर्धन प्रभू के नित्य नूतन मनोरथ के अलावा स्वास्थ्य परिक्षण शिविर, गौ सेवा एवं निराश्रितों को भोजन के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम रास गरबा लोक नृत्य आदि का भी आयोजन किया जावेगा ।

श्री गोवर्धन मंदिर के 151 पाटोत्सव की आमंत्रण पत्रिका का हुआ विमोचन

          बुधवार सुबह 9-30 बजे से श्री गुरु पाद पूजन  तथा भजनांजलि का आयोजन किया गया गुरु भक्तो ने भाव विभोर हो कर लाखे बैसिये करोडो उभिए रे तमे तो भजन करावे नी , दर्शन दो घनश्याम नाथ, मोरी अंखियां प्यासी हैं, मन मंदिर की जोत जगाओ  घट घट वासी रे … .गोपाल कॉलोनी में म्हारा गुरुजी बिराजे, दुनिया मां डंको बाजे जी.. . मोहन प्यारा लागी छे तारी माया . . . आदि भजनों ने  वातावरण भक्तिमय कर दिया ।  
          दिन चढ़ने के साथ भजनों के स्वर तेज होते चले गए। जैसे ही घडी में 12 बजे मंदिर परिसर गोपाल प्रभु के जयकारों से गूंज उठा। पं. रूपक त्रिवेदी ने रामशंकर जानी (बड़े बापजी ), घनश्याम प्रभु (छोटे बापजी ) व माँ गोपाल प्रभु की आरती की। महाआरती के दोरान पूरा पंडाल खचाखच भरा हुआ था। पुष्पांजलि के बाद महाप्रसादी का आयोजन हुआ । इसम बडी संख्या में भक्तगण शामिल हुए ।   
रातभर चला भजन - कीर्तन का दौर 
     तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार शाम से मंदिर में भजन क्रीर्तन का सिलसिला शुरू हो गया  । झांझ- मंजीरे, ढोल और हारमोनियम पर भजनों की संगत के बीच भक्त भाव विभोर हो गए । अनवरत भजनों का क्रम गुरूवार को महाआरती के समय तक चलता रहा।
उमड़ा भक्तो  का सैलाब
     मोहिनी एकादशी 6 मई 1971 को मंदिर का पहला वार्षिकोत्सव मनाया गया था । तभी से यहां लगातार आध्यात्मिक आयोजनों का सिलसिला चल रहा है । इसी तारतम्य में 49 वा वार्षिकोत्सव धूमधाम से बुधवार  को मनाया गया । मंदिर में बुधवार सुबह से ही भक्तो का तांता लगना शुरू हो गया । सभी  बारी- बारी से अपने गुरुदेव की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते रहे । सवेरे 7 बजे से ही यह सिलसिला आरंभ हो गया था जो लगातार दोपहर तक चलता रहा । इस बीच सामूहिक भजनो की स्वर लहरियां भी गूंजने लगी । भक्ति के माध्यम से  भक्तगण एक लय में अपने भावो को अभिव्यक्ति करते रहे और भक्ति का आनंद चरम की और बढ़ता चला गया। 
तीन दिन धूम रही 
       3 दिवसीय समारोह की शुरुआत सोमवार सुबह 9-30 बजे से हो गयी थी , दैनिक आरती के बाद लोक कल्याण के लिए गुरु ॐ का अखंड जाप आरम्भ हुआ जो अनवरत २४ घंटे तक चलता रहा।  तत्पश्चात पूर्णाहुति हुई, दोपहर में भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया , वही इस दिन शाम को सामूहिक भजनो का आरम्भ हुआ जो अलसुबह तक चलता रहा बुधवार सुबह से ही वार्षिकोत्सव को गुरुदेव चरण पादुका पूजन एवं सद्गुरु फोटो पूजन के पश्चात् महाआरती एवं भंडारे का आयोजन हुआ।  
देश भर से आये गुरु भक्त 
         झाबुआ जिले के अतिरिक्त देश - प्रदेश  के कोने कोने से आए भक्तगण इस आयोजन के साक्षी थे । प्रदेश के इंदौर, रतलाम , उज्जैन, भोपाल, अलीराजपुर, महू , धार , राजस्थान के कोटा , बांसवाडा , जयपुर , गुजरात के राजकोट . बड़ोदा , अहमदाबाद, भरुच, जंत्राल , छत्तीसगढ़ के रायपुर सहित  बैंगलोर , मुंबई , पूना , आदि स्थानों से भक्त बड़ी संख्या में समारोह में शामिल हुए. 

gopal-mandir-jhabua-varshikotsav-annula-function-organized-2018-भजनों की धुन - मजीरों की थाप पर झूम उठे भक्त -गोपाल मंदिर में आयोजित हुआ त्रिदिवसीय वार्षिकोंत्सव समारोह

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भक्तो द्वारा ऑनलाइन दर्शन सुविधा का लाभ भी लिया गया 
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श्री वाडी हनुमान मंदिर में धूमधाम से आयोजित हुआ हनुमान जयंती महोत्सव        
झाबुआ। प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर नगर के मध्य स्थित चमत्कारिक श्री वाडी हनुमान मंदिर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी हनुमान जयंति महोत्सव धूमधाम व श्रद्धाभक्ति के साथ मनाया गया।  प्रातः काल से देर रात्रि तक धार्मिक आयोजनों का क्रम जारी रहा । प्रातः जहां सूरज की पहली किरण के साथ भगवान बजरंगबली के प्राकट्योत्सव को धुमधाम से महा मंगल आरती के साथ मनाया गया तथा दर्शनार्थियों को प्रसादी का वितरण किया गया वही दिन में नाम जपके साथ ही सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। 19 अप्रैल शुक्रवार को सुबह 6 बजे जन्मोत्सव आरती हुई। हनुमान जन्मोत्सव को लेकर बुधवार को ही संपूर्ण तैयारियां पूर्ण कर ली गई। मंदिर पुजारी नित्यप्रकाश चौहान व व्यवस्थापक गोपाल नीमा, प्रवीण चौहान, अशोक सिन्हा, मनोज सोनी आदि ने बताया कि हनुमान जयंति को लेकर मंदिर में भगवान की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कर पूरे मंदिर में आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है।
               सायंकाल हनुमानजी की आरती का अभिनव आयोजन गाजे बाजे के साथ किया गया । इस अवसर पर मंदिर समिति की ओर से सवा पांच क्विंटल साबुदाना खिचडी के अलावा पंचप्रकारी प्रसादी का वितरण देर रात्री तक किया गया । पूरे मंदिर को आकर्षक रोशनाई से सजाया गया । रात्री मे मंदिर की अनुपम छटा को निहारने के लिये भी दर्शनार्थियों का तांता उमडा। 

झाबुआ हनुमान जयंती महोत्सव: पंचकुंडीय मारुति यज्ञ के साथ हुआ अनुष्ठान-Hanuman-Jayanti-Jhabua-
हनुमान टेकरी पर आयोजित हुआ भव्य समारोह
हनुमान टेकरी के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को लेकर चल रहीं श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति, हनुमान टेकरी पर प्रतिवर्ष भव्य स्तर पर हनुमान जयंती को समारोहपूर्वक मनाती रहीें है । नगर की जनता के भरपूर सहयोग से इस वर्ष भी 18 व 19 अप्रैल को दो दिवसीय समारोह हनुमान जयंती के उपलक्ष में समिति द्वारा भव्य स्तर पर मनाया गया ।
     दो दिवसीय हनुमान जयंती महोत्सव पर  18  अप्रैल गुरुवार को प्रातः 06 बजे से सायं 06 बजें तक अखण्ड़ श्री राम नाम जाप, सायं 07 बजे प्रश्न मंच प्रतियोगिता (सुंदरकांड़ पर आधारित) रात्रि 09 बजें भजन संध्या , रात्रि 12 बजे से सुंदरकांड़ व रात्रि जागरण का आयोजन किया गया ।
        इसी तरह हनुमान जयंती पर प्रातः 06 बजे जन्मोत्सव आरती, प्रातः 07 बजे श्री पंचकुंड़ीय मारूती यज्ञ, दोप. 12 बजे महाआरती, दोप. 12:30 बजे से सायं 05 बजे तक अन्नकूट प्रसादी भंड़ारा व सायं 07 बजे नृत्य प्रतियोगिता (धार्मिक गीत व भजनों पर आधारित) आदि आयोजन हुए. प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बड़ी संख्या में भक्तो ने मोहत्सव में हिस्सा लेकर आयोजन को सफल बनाया  ।

झाबुआ हनुमान जयंती महोत्सव: पंचकुंडीय मारुति यज्ञ के साथ हुआ अनुष्ठान-Hanuman-Jayanti-Jhabua-
श्री बालाजी धाम कृषि विभाग में धूमधाम से मनी हनुमान जयन्ती 
श्री सिद्धपीठ बालाजी धाम समिति द्वारा तीन दिवसीय हनुमान जयन्ती महोत्सव स्थानीय कृषि विभाग स्थित बालाजी धाम पर बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया । समिति के राकेश त्रिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रात:काल से ही महोत्सव को लेकर उत्साह का वातावरण व्याप्त रहा । 
झाबुआ हनुमान जयंती महोत्सव: पंचकुंडीय मारुति यज्ञ के साथ हुआ अनुष्ठान-Hanuman-Jayanti-Jhabua-           महोत्सव के पहले दिन 17 अप्रेल बुधवार को प्रातः 10 बजे से गन्ने के रस के साथ धर्माचार्यो द्वारा लघुरूद्र का आयोजन किया गया , अगले दिन 18 अप्रेल गुरूवार को प्रातः 10 बजे से लाभार्थी नीरज राठौर द्वारा मारूति यज्ञ का आयोजन किया गया , तत्पश्चात सायंकाल 5 बजे से समूह एवं एकल भजन प्रतियोगिता का आयोजन सोलंकी कंस्ट्रक्षन एंड सप्लायर्स लाखनसिंह सोलंकी के सौजन्य से आयोजित किया गया, जिसमें समूह भजन में प्रथम पुरस्कार 5555 रुपये द्वितीय पुरस्कार 3333 रुपये एवं तृतीय पुरस्कार 1111 रुपये प्रदान किये गए इसी तरह एकल भजन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 1500 रु. द्वितीय पुरस्कार 1000 एवं तृतीय पुरस्कार 500 रुये प्रदान किये गए।  19 अप्रैल शुक्रवार को हनुमान जयंती के अवसर पर प्रातः 6 बजे जन्मोत्सव आरती एवं दोपहर 12 बजे महाआरती की गयी तथा दोपहर 12 बजे से भंडारा एवं भजन आर्केष्ट्रा का आयोजन किया गया.  आयोजन में समाज के सभी सदस्यों ने बढ चढकर भाग लिया । 
                पूरे मंदिर को आकर्षक रूप से बिजली के बल्बो से आलोकित किया गया , समूचे मंदिर प्रांगण को फूलमालाओं से सुसज्जित किया गया । अध्यक्ष राकेश त्रिवेदी के अनुसार इस आयोजन में सभी सदस्यों एवं भक्तो सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ तथा नगर के अलावा बाहर के भक्तो ने भी इस धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की । 

झाबुआ। झाबुआ का राजा ग्रुप (जेकेआर) द्वारा शहर के सभी सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं के साथ मिलकर 6 अप्रेल को हिन्दू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर्व पर मातृ शक्ति वाहन रैली निकाली जाएगी। वाहन रैली में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं शामिल होने के साथ इस दौरान उनके द्वारा मतदाता जागरूकता का भी संदे दिया जाएगा। शाम 7.30 बजे से कस्तूरबा मार्ग में कवि सम्मेलन का आयोजन रखा गया है। यह जानकारी देते हुए जेकेआर ग्रुप के संयोजक जितेन्द्र पंचाल ने बताया कि वाहन रैली की शुरूआत सुबह 10 बजे से पैलेस गार्डन से होगी। वाहनों पर सवार सभी महिलाएं साफा पहने रहेगी। साथ ही उनके हाथों में भगवा ध्वज भी रहेंगे। सबसे पीछे पुरूष वर्ग एक-जैसी वेभूषा में चलेगा। यह वाहन रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए समापन कस्तूरबा मार्ग में होगा। जहां भारत माता की आरती का आयोजन होगा। 
कवि सम्मेलन में जिले के कवि बांधेंगे समां
शाम 7.30 बजे से आयोजित कवि सम्मेलन में जिले के प्रख्यात साहित्यकार और कवियों में डॉ. रामशंकर चंचल पं. गणेशप्रसाद उपाध्याय, विरेन्द्र मोदी, भेरूसिंह चौहान ‘तरंग’, प्रदीप अरोड़ा, प्रवीण सोनी ‘पुष्प’, तुषार राठौड़ एवं सुरेश समीर आदि द्वारा देशभक्ति और धर्म पर केंद्रित रचनाओ  का पाठ किया जाएगा।



झाबुआ । मकर संक्राति के पावन अवसर पर मंगलवार को राजवाडा चौक पर हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा समिति द्वारा आयोजित भजन संध्या श्याम महा कीर्तन एवं ज्योति दर्शन के  कार्यक्रम में नगर सहित बाहर से पधारे  श्रद्धालुओं ने रात्री 3 बजे तक खाटूवाले श्याम के दर्शन वंदन के लिये एकत्रित होकर अपनी आस्था एवं भक्ति को प्रवाहित किया । रात्री 9 बजे से राजवाडा चौक पर भव्य पाण्डाल पर श्री खाटूश्याम की मनोहारी झांकी सजाई गई जिसमें अलौकिक ज्योति प्रज्वलित की गई । हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने  ज्योति के दर्शन कर अपनी आहूतिया अर्पित की । भजन गायिक सोनल शर्मा ने म्हारा कीर्तन मे रस बरसाओ  आओ जी गजानन आओ’’ से  कीर्तन की प्रस्तुति दी  । वही उन्होने हनुमानजी का भजन एक बार तो हाथ उठाओं मेरे हनुमान के लिये तथा जब से थारे  से हुई मलाकात सावरे की प्रस्त्रुति दी वही दुर्गा गामड राजगढ ने नैनो की सूरतिया बहुत सतावेरे आल्यू आवे रे भजन से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया । वही लक्ष्मी नारायण कुमावत इन्दौर द्वारा ’’ सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये है  तथा बाबा का दरबार सुहाना लगता है भक्तो का दिल दीवाना लगता है- जैसे भजनों से दर्शकों को थिरकने को मजबुर किया ।  
          समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में  विशेष रूप  से विधायक गुमानसिंह डामोर, नगरपालिका अध्यक्षा श्रीमती मन्नुबेन डोडियार, जिला भाजपाध्यक्ष ओम शर्मा सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे । भजन गायक बंटी सोनी के  मंच पर पहूंचते ही नगर की विभिन्न संस्थाओ की ओर उनका स्वागत किया गया । बण्टी सोनी ने अपने  भजनों की प्रस्तुति देते हुए  जग घुमिया थारे जेसा न कोई, तथा हारे का सहारा आजा’’ जैसे भजन प्रस्तुत करके लोगों को नाचने एवं झुमने को मजबुर कर दिया । बंटी सोनी द्वारा एक से बढ कर एक भजनों की प्रस्तुति रात्री 3 बजे तक दी गई । 
     पूरे  पाण्डाल में इत्र , केशर एवं पुष्पो की वर्षा की गई । वही बंटी सोनी द्वारा होली गीत प्रस्तुत किये गये जिस पर पुरूष , महिलाओ , युवकों एवं बच्चों ने जमकर गुलाल रंग उडा कर अपनी आस्था व्यक्त की । उनका भजन महाभारत में आपने कृष्ण को शिश का दान किया- प्रस्तुत करके सभी को नमन करने का बाध्य कर दिया । कान्हा आयेगा, बाबा आयेगा, सच्चे मन से उसे पुकारा रूक नही पायेगा भजन पर सभी नाचने लगें । उनकी भजन प्रस्तुति इतनी कृपा सांवरे बनाये रखना...मरते दम तक सेवा मे लगाये रखना.. कोई्र नही आता मेरा श्याम आता है, मेरे दुख के समय  में वो बडे काम आते है.... बांस की बासूरिया पे घणो इतरावे कई सोना हीरा मोतिया की होती तो जाने कई करतो भजन पर श्रद्धालु थिरकने को बाध्य हो गये । महिलाओ ने जहां उनके भजनों पर गरबा रास खेला वही आदिवासी गीत काका बाबा नो पोरिया पर भी उन्होने  भजन देकर खुब नचाया । 
      बंटी सोनी ने खाटू श्याम के चमत्कार एवं अवतरण की कथा सुनाते हुए कहा कि मेरे खाटू के दरबार में  हाजरी लगाने वाला कैसा भी हो उसका दुख दूर होता ही है  । उनकी भजन रचना पति के नाम कुर्बान हो जाये वो औरत, दुनिया मे अपना नाम अमर कर जाये वह औरत ने सभी की आंखे नम कर दी । उन्होने अन्तिम भजन प्रस्तुत करते हुए कहा कि जो भी गया खाटू उसका काम बन गया, निराशा ओर दुख दर्द से छूटकारा मिल गया ।
अन्त मे सभी श्रद्धालुओं को खाटू श्याम की ज्योति के पवित्र काजल एवं पुष्पों का वितरण किया गया तथा अर्पित की गई छप्पन भोग की प्रसादी का वितरण किया गया ।







मन की शुद्धि के लिए श्रीमद् भगवत से बढ़कर कोई साधन नहीं है- पण्डित लोकेशानंद

झाबुआ । नगर की धर्मधरा पर भागवताचार्य पण्डित लोकेशानंद शास्त्री के श्रीमुख से 26 दिसंबर बुधवार से 1 जनवरी तक होने वाली श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ श्री कालिकामाता मंदिर परिसर से श्री शिरडी साई मंदिर परिसर स्थित भागवत कथा स्थल तक बेंडबाजों के साथ विशाल कलश यात्रा का आयोजन किया गया । ठा. मनोहरसिंह राठौर, दिलीपसिंह वर्मा एवं सुश्री रूकमणी वर्मा परिवार के सौजन्य से आयोजित भागवत कथा के प्रथम दिन निकाली गई कलश यात्रा का पूरे मार्ग पर पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया । कथास्थल पर यात्रा पहूंचने के बाद श्रीमद भागवत कथा का श्रुभारंभ वैदिक मंत्रों से भागवत पूजन के साथ प्रारंभ हुआ । 
         संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के माहत्म्य को बताते पण्डित लोकेशानंद शास्त्री ने कहा कि सच्चिदानंदस्वरुप भगवान श्रीकृष्ण को हम नमस्कार करते हैं जो जगत की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश के हेतु तथा आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक ,तीनों प्रकार के तापों का नाश करने वाले हैं। कहते हैं कि अनेक पुराणों और महाभारत की रचना के उपरान्त भी भगवान व्यास जी को परितोष नहीं हुआ। परम आल्हाद तो उनको श्रीमद् भागवत की रचना के पश्चात् ही हुआ, कारण कि भगवान श्रीकृष्ण इसके कुशल कर्णधार हैं, जो इस असार संसार सागर से वर्तमान में सुख-शांति पूर्वक पार करने के लिए सुदृढ़ नौका के समान हैं। यह श्रीमद् भागवत ग्रन्थ प्रेमाश्रुसक्ति नेत्र, गदगद कंठ, द्रवित चित्त एवं भाव समाधि निमग्न परम रसज्ञ श्रीशुकदेव जी के मुख से उद्गीत हुआ। सम्पूर्ण सिद्धांतो का निष्कर्ष यह ग्रन्थ जन्म व मृत्यु के भय का नाश कर देता है, भक्ति के प्रवाह को बढ़ाता है तथा भगवान श्रीकृष्ण की प्रसन्नता का प्रधान साधन है। 
       मन की शुद्धि के लिए श्रीमद् भगवत से बढ़कर कोई साधन नहीं है। यह श्रीमद् भागवत कथा देवताओं को भी दुर्लभ है तभी परीक्षित जी की सभा में शुकदेव जी ने कथामृत के बदले में अमृत कलश नहीं लिया। ब्रह्माजी ने सत्यलोक में तराजू बाँध कर जब सब साधनों, व्रत, यज्ञ, ध्यान, तप, मूर्तिपूजा आदि को तोला तो सभी साधन तोल में हल्के पड़ गए और अपने महत्व के कारण भागवत ही सबसे भारी रहा। अपनी लीला समाप्त करके जब श्री भगवान निज धाम को जाने के लिए उद्यत हुए तो सभी भक्त गणों ने प्रार्थना कि- हम आपके बिना कैसे रहेंगे तब श्री भगवान ने कहा कि वे श्रीमद् भगवत में समाए हैं। यह ग्रन्थ शाश्वत उन्हीं का स्वरुप है।
       पठन-पाठन व श्रवण से तत्काल मोक्ष देने वाले इस महाग्रंथ को सप्ताह-विधि से श्रवण करने पर यह निश्चय ही भक्ति प्रदान करता है। पण्डित लोकेशानन्द ने कहा कि भागवतकथा श्रवण से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मनुष्य को नियमित रूप से कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से प्रभु की भक्ति करने वाला मनुष्य जीवन में दुख नहीं पाता है और मनुष्य को प्रतिदिन कुछ समय भजन के लिए निकालना चाहिए। कथा के माहत्म्य को सुनाते हुए उन्होने कहा कि भागवत कथा मन कोशांकति देने वाली तथा समाज के लिये क्रांति देने वाली है। मानव के पूण्यकर्मो से भागवत कथा के श्रवण एवं आयोजन का लाभ मिलता है । आत्मा को परमात्मा से एकाकार करने वाली सिर्फ भागवत कथा होती है । भागवत का अर्थ बताते हुए उन्होने कहा कि ’भा’ अर्थात  भगवान,’ग’ अर्थात गहन’, ब अर्थात वाणी एवं त अर्थात तारण होता है। मीरा ने स्वयं ही अपनी वाणी से भगवान का सानिध्य प्राप्त किया था । भागवत इह लोक एवं परलोक के झंझावातों से दूर करने वाली भगवान  के साक्षात स्वरूप् का प्रतिबिंब है।
कथा के प्रथम दिन बडी संख्या में श्रद्धालुजन एवं एक ही ड्रेस कोड में महिलायें कथा श्रवण हेतु उपस्थिसत रही । कथा के माहत्म्य के बाद प्रथम दिन की कथा का विराम हुआ तथा भागवत जी की आरती के बाद प्रसादी का वितरण हुआ ।


देश के प्रसिद्ध ज्योतिषियों ने हस्तरेखा, जन्म कुंडली, पत्रिका और कर्म कांड के आधार पर किया लोगों की समस्याओं का समाधानझाबुआ सहित रानापुर, मेघनगर और आलीराजपुर, जोबट के भी 375 लोगों ने निःशुल्क ज्योतिष परामर्श शिविर का लिया लाभ

झाबुआ। ज्योतिष शिक्षण जन कल्याण समिति रतलाम के सहयोग से आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट झाबुआ द्वारा शहर में पहली बार 16 दिसंबर, रविवार को स्थानीय सिद्धेष्वर कॉलोनी स्थित आदर्श विद्या मंदिर में निःशुल्क ज्योतिष परामर्ष शिविर का आयोजन किया गया, जो काफी सफल रहा। शिविर में झाबुआ ही नहीं अपितु आसपास के क्षेत्रों रानापुर, मेघनगर यहां तक की आलीराजपुर और जोबट से भी लोग पहुंचे और उन्होंने देष के ख्यातनाम ज्योतिषियों को गृह जीवन, वैवाहिक जीवन, व्यापार संबंधी, नौकरी संबंधी, बच्चों की पढ़ाई  सहित दैनिक जीवन की अन्य कई तरह की समस्याओं और दिक्कतों को बताकर समाधान पाएं। ज्योतिषियों द्वारा सुखमय एवं आनंदमय जीवनयापन हेतु शिविरार्थियों को आवष्यक उपाय, सलाह और परामर्श भी प्रदान किया गया। शिविर सुबह 10 से शाम 4 बजे तक चला। इस दौरान 375 लोगों ने इसका लाभ लिया।  
     निर्धारित कार्यक्रम के तहत शिविर स्थल पर रविवार को सुबह 9.30 बजे सभी ज्योतिषियों का आगमन हुआ। उनका मातृ शक्ति में ट्रस्ट की आजीवन अध्यक्ष श्रीमती वंदना व्यास, सीमा चौहान, सुशीला भट्ट, कुंता सोनी, राजकुमारी देषलहरा, लीना नागर, मंजुला देराश्री, पवित्रा भावसार, श्रीमती शर्मा आदि द्वारा अक्षत-कुमकुम से तिलक लगाकर स्वागत किया गया। बाद पधारे सभी अतिथि ज्योतिषाचार्यों के साथ ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी यशवंत भंडारी, संस्थापक अध्यक्ष राजेश नागर, वरिष्ठ सदस्य अशोक शर्मा, डॉ. पीठके पाठक, शिविर के सूत्रधार एवं आसरा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पं. द्विजेन्द्र व्यास, परामर्षदाता सुधीरसिंह कुशवाह, सेवा प्रकल्प अध्यक्ष रविराजसिंह राठौर आदि द्वारा मां सरस्वतीजी के चित्र पर पूजन, माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर शिविर का शुभारंभ किया गया। बाद शिविर आरंभ हुआ।
10 कक्षों में किया गया लोगों की समस्याओं का समाधान
शिविर स्थल आदर्ष विद्या मंदिर में ज्योतिषो के बैठने के लिए अलग-अलग कक्षों में व्यवस्था की गई। जिसमें विशेष सहयोग स्कूल के संचालक सुरेशचन्द्र जैन एवं स्टॉफ का रहा। कुल 10 कक्षा में प्रसिद्ध ज्योतिषी श्री बजरंग गिरीजी रतलाम जन्म कुंडली, श्री योगेशजी आसरा अहमदबाद (गुजरात) जन्म पत्रिका, श्रीमती संगीतादेवी भट्ट पिपलौदा, डॉ. विनीता नागर उज्जैन हस्तरेखा जन्म पत्रिका, श्री पुष्पेन्द्र आचार्य जन्म पत्रिका वास्तु, श्री जीवन पाठक जन्म पत्रिका कर्म कांड विशेषज्ञ, पं. जितेन्द्र नागर सैलाना जन्म पत्रिका, पं. वैद्य़ धर्मेन्द्र व्यास अंक ज्योतिष, जन्म पत्रिका एवं श्री रमेश पंड्या राजौद, वस्तु विशेषज्ञ पंचागकर्ता ने कक्षों में उनके पास आने वाले शिविरार्थियों की समस्याएं एवं परेशानी जानकर उनका समाधान किया।  
आवष्यक उपाय बताने के साथ दिया विशेष परामर्श 
शिविर में लोगों को कक्षों में प्रवेश उनके पूर्व में किए गए पंजीयन के आधार पर दिया गया। शिविरार्थियों ने अलग-अलग ज्योतिषियों को अपनी दैनिक जीवन की समस्याओं, गृह जीवन में कलेश, परिवार में सुख-शांति की कमी, वैवाहिक जीवन में तरह-तरह की कठिनाईयां, बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगना, गृह-नक्षत्र दोष आदि की जानकारी देने के बाद ज्योतिषाचार्यों से उनके सफल समाधान एवं इस हेतु आवष्यक उपाय बताएं। साथ ही लोगों को आवष्यक परामर्ष भी प्रदान किया।
375 लोगों ने लिया लाभ
यह शिविर सुबह 10 से शाम 4 बजे तक चला। जिसमें झाबुआ के अलावा रानापुर, मेघनगर यहां तक की जोबट और आलीराजपुर से भी लोग ज्योतिष शिविर आयोजन के बारे में जानकारी मिलने पर आवष्यक परामर्श एवं सलाह लेने शिविर स्थल पर पहुंचे। शिविर में पंजीयन का कार्य ट्रस्ट की मातृ शक्ति ने किया एवं कक्षों में प्रवेश पर अपनी सराहनीय सेवाएं ट्रस्ट की ओर सेवा प्रकल्प सचिव सुनिल चौहान, सत्यम् भट्ट, सुधीर रूनवाल, दौलत गोलानी, अतिशय देशलहरा, घनष्याम भाटी, पं, द्विजेन्द्र व्यास, पं. जैमिनी शुक्ल आदि द्वारा दी गई। 
सभी ज्योतिषाचार्यों का किया गया सम्मान
शिविर के बीच में दोपहर 2 बजे सभी ज्योतिषाचार्यों के सम्मान समारोह का आयोजन रखा गया। जिसका संचालन ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य विरेन्द्रसिंह ठाकुर ने किया। इस अवसर पर सभी ज्योतिषाचार्यों का सम्मान ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी यशवंत भंडारी, संस्थापक अध्यक्ष राजेश नागर की उपस्थिति में ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी-सदस्यों के साथ महिलाओं द्वारा करते हुए उन्हें शाल-ओढ़कार श्रीफल प्रदान किए गए। साथ ही स्मृति चिन्ह एवं ट्रस्ट की ओर से सहयोग राशि भी भेंट की गई। इस अवसर पर उक्त आयोजन के सूत्रधार मप्र ज्योतिष संघ के जिलाध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं. द्विजेन्द्र व्यास एवं आदर्ष विद्या मंदिर के संचालक सुरेशचन्द्र जैन का भी विशेष सम्मान हुआ। शिविर के अंत में पधारे सभी ज्योतिषाचार्यों के प्रति आभार आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष राजेश नागर एवं सेवा प्रकल्प सचिव सुनिल चौहान ने माना।


झाबुआ। परमपूज्य पूण्य सम्राट आचार्य देवेश श्रीमदविजय जयंतसेन सूरिश्वरजी मसा के पट्टधर आचार्य देवेश श्रीमदविजय जसरत्नसूरिश्वरजी मसा आदि ठाणा का झाबुआ नगर में शुक्रवार को भव्य मंगल प्रवेश होगा । इस अवसर पर विशाल शोभा यात्रा एवं धर्मसभा का आयोजन किया गया हे। श्री संघ प्रवक्ता डा. प्रदीप संघवी ने बताया कि पूज्य आचार्य देवेश देवझिरी से प्रातः विहार करते हुए पधारेगें एवं कालिका माता मंदिर परिसर से पूज्य महाराजश्री का मंगल प्रवेश प्रातः 9-30 बजे से मंगल प्रवेश प्रारंभ होगा जो  नगर के विभिन्न मार्गो से होते हुए स्थानीय जेन तीर्थ बावन जिनालय पहूंचेगा । जहां पर विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया है । धर्मसभा के बाद साधर्मी वात्सल्य का आयोजन भी किया गया है । 
श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता,  बाबुलाल कोठारी, सुभाष कोठारी, राजा रुनवाल, जितेन्द्र जैन, राजेश महेता, अंतिम जैन, उल्लास जैन,  रिंकू रूनवाल मुकेश लोढा, आदि ने समाजजनों से इस भव्य कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पधारने की अपील की है ।

श्रीमदविजय जसरत्नसूरिष्वरजी का मंगल प्रवेश, निकलेगी शोभायात्रा होगी विशाल धर्मसभा

नवमी महाआरती में समाजसेवी श्री राजेंद्र सिंह नायक एवं हितेश पडियार ने लिया लाभ

मेघनगर।  नवमी नवरात्रि के आखिरी दिन पूजी जाती हैं। मां सिद्धिदात्री, भगवान शिव भी करते हैं । इनकी उपासना नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह मां दुर्गा का नवां रूप है।नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह मां दुर्गा का नवां रूप हैं।
कौन हैं मां सिद्धिदात्री
भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही आठ सिद्धियों को प्राप्त किया था. इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। इन्हीं माता की वजह से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बना। हिमाचल का नंदा पर्वत इनका प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।
मां सिद्धिदात्री का रूप
कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में लिपटी होती हैं।इनके चारों हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमल रहता है। सिर पर ऊंचा सा मुकूट और चेहरे पर मंद मुस्कान ही मां सिद्धिदात्री की पहचान है।
मां की भक्ति में रात भर डूबे रहे श्रद्धालु नम आंखों से दी मां दुर्गा को विदाई
नवरात्रि के अंतिम दिवस नवमी के पावन अवसर पर रात्रि 9 बजे 108 दीपक की मां सिद्धिदात्री की महाआरती समाजसेवी श्री राजेंद्र सिंह नायक एवं हितेश पडियार द्वारा की गई। उसके तत्पश्चात मां की भक्ति में नन्ही मुन्नी बालिकाओं द्वारा आरती थाली सजा कर लाने पर सभी बालिकाओं को समाजसेवी  राजेंद्र सिंह नायक व हितेश पडियार द्वरा उत्साह वर्धन करते हुए सोलह सिंगार देकर पुरस्कृत किया। तत्पश्चात ऑर्केस्ट्रा ग्रुप द्वारा माता भजन तूने मुझे बुलाया शेरावालिए की शानदार प्रस्तुति दी गई। तत्पश्चात श्री गणेश के साथ गरबा प्रारंभ किया गया ।गरबे में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति उत्सव समिति गरबा पांडाल में गुजरात अहमदाबाद से पधारे आर्केस्ट्रा ग्रुप द्वारा गरबा गायन, ढोली तारो ढोल बाजे,मानी मारा मदिरिया मा, तू तो काली रे कल्याणी मां ,गरबो पर भक्त थिरकते नजर आए।  
        उत्सव समिति भव्य गरबा पांडाल में विशेष अतिथि के रूप में श्री बृजेश (चुन्नू ) शर्मा, समाज सेवी राजेन्द्र सिंह नायक (राजू भैया ) प्रफुल्ल गादीया , पुरुषोत्तम प्रजापत, ओपी राय, भूपेश, प्रितेश भानपुरिया, इंदौर से आमन्त्रित अतिथि  रक्षा शुक्ला गौरव,दिलीप नायक,बाहदुर नायक, दिलीप कटारा,रुस्तम चरपोटा, रोटरी क्लब अपना मेघनगर की समस्त टीम माँ के प्रांगण में शिरकत की ।रोटरी क्लब अपना द्वारा उत्सव नवरात्रि उत्सव को शानदार गरबा कराने पर मंदिर के महंत 108 बद्री दास महाराज उत्सव समिति के अध्यक्ष निलेश भानपुरिया एवं नवरात्रि के अध्यक्ष श्रीमती मेंनाबेन केवट को रोटरी अलंकरण देकर सर्वश्रेष्ठ गरबा करवाने पर सम्मानित भी किया गया। आस्था के इस विशाल केंद्र में मां भक्तों ने  माँ सिद्धिदात्री की आराधना गरबा खेल उपवास रखकर की रतिचौका की सुबह कब हुई पता ही नहीं लगा । एक बार फिर नगर की धार्मिक जनता ने  सिद्ध कर दिया की मां की भक्ति का कोई अंत नहीं।



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