झाबुआ : मातंगी मंदिर प्रांगण में ही सिध्दपीठ बालाजी धाम है। बालाजी के इतिहास के बारे मे तो किसी के पास वास्तविक जानकारी तो नही है लेकिन बताया जाता है कि कभी घने जंगलो के बीच पहाडी पर हनुमानजी का छोटा सा चबुतरा हुआ करता था कृषि विभाग के कर्मचारी नित्य पुजन प्रारंभ किया । 
       वर्ष 1993 में जनसहयोग से सुंदर व मनोरम मंदिर का निर्माण हुआ और विधिवत भगवान की प्राण प्रतिष्टा का गई।पिछले 16 वर्षो से प्रतिदिन यहॉ रामायण का पाठ किया जा रहा है। प्रति शनिवार मंदिर में सुंदरकांड का पाठ भी किया जाता है। पुराणो के अनुसार नित्य पुजन पाठ लगातार 12 वर्षो तक करने से वह स्थान सिद्व हो जाता है। इसलिए बालाजी धाम को सिद्वपीठ बालाजी धाम कहा जाताहै। मंदिर की देख रेख का जिम्मा कृषि विभाग के कर्मचारी श्री शिवनारायण पुरोहित पिछले 16 वर्षो से सभाल रहे है। श्री पुरोहित की सेवानिवृति का समय निकट होने से अब यह दायित्व सभी कई सहमति से श्री राकेश त्रिवेदी को सौपा गया है। वे यह कार्य पुरी निष्ठां से कर रहे है।

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