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नगरपालिका के साधारण सम्मेलन में बाले-बाले ‘लीज की दर स्वीकृत कर’ एजेंडे में ना किया स्थान और ना राशि का उल्लेख

झाबुआ। नगरपालिका परिषद झाबुआ का एक गोलमाल मामला सामने आया है। गत 7 अगस्त को नगरपालिका कार्यालय के सभा कक्ष में परिषद की साधारण सम्मेलन की बैठक संपन्न हुई थी। जिसमें परिषद एवं पार्षदों के समक्ष प्रस्ताव हेतु कुल 29 एजेंडे रखे गए। जिसमें एजेंडा एवं बिंदु क्र. 22, जिसमें ‘लीज हेतु प्राप्त दर स्वीकृत’ का होकर उस प्रस्ताव पर गुमराह कर सभी से सहमति ली गई जबकि इस बिंदु में ना तो लीज किस स्थान के लिए स्वीकृत हुई इसका उल्लेख है, ना राशि आदि का जिक्र है। इस मामले में वार्ड क्र. 1 के पार्षद पपीश पानेरी ने नपा सीएमओ एलएस डोडिया को आवेदन देकर इस लीज प्रक्रिया पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई एवं साथ ही इसे निरस्त करने हेतु कहा है।
पूरा मामला इस पकार है कि गत 7 अगस्त को नगरपालिका परिषद झाबुआ की सर्व साधारण की बेठक संपन्न हुई थी, इस बैठक में कुल 29 प्रस्ताव रखे गए। ज्ञातव्य रहे कि यह बैठक नगरपालिका परिषद ने बंद कमरे में की। प्रायः हर बैठक में मीडियाकर्मियों को भी आमंत्रित किया जाता है, लेकिन इस बैठक से मीडिया को दूर रखते हुए इसकी सूचना नहीं दी गई। बैठक में एजेंडा क्रमाक 22 जो रखा गया, जिसमें लीज हेतु प्राप्त दर स्वीकृति का रखा गया। इस बिंदु में ना तो स्थान की जानकारी दी गई और किस स्थान की लीज स्वीकृति हुई है और राशि का भी उल्लेख नहीं है। बैठक में नपा परिषद ने गुमराह कर इस बिंदु पर सभी से सहमति ले ली । 
थांदला गेट पर भवन को कमर्शियल उपयोग में लेने हेतु ली लीज
सूत्रों से जब ज्ञात हुआ तो पता चला कि इस बिंदु में जिस लीज की बात की गई, वह थांदला गेट पर कोठारी रेस्टारेंट के समीप के भवन की है, जिसका उपयोग कुष्ठ रोगियों के आश्रय के रूप में होता है, उसकी लीज नगरपालिका ने बैठक में स्वीकृत करवाकर इसका उपयोग कमर्शियल के रूप में करने हेतु प्रस्ताव पास करवाया। जिसमें भारी घालमेल होने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है, इसी के चलते एजेंडे में किसी प्रकार कोई उल्लेख नहीं किया गया। वहीं यह एजेंड़ा एवं इसका सूचना पत्र 29 जुलाई को जारी हुआ और पार्षदों को 5 अगस्त को यह एजेंडा प्राप्त हुआ, जबकि 7 अगस्त को साधारण सभा की बैठक भी रख दी गई।
वार्ड पार्षद ने की नपा सीएमओ को आवेदन देकर शिकायत
वार्ड पार्षद पपीश पानेरी ने इस संबंध में नगरपालिका सीएमओ श्री डोडिया को एक आवेदन देते हुए बताया कि उक्ज एजेंडे में ना तो परिषद् द्वारा दी जा रहीं जगह का स्पष्ट उल्लेख किया गया है और ना ही टेंडर प्रक्रिया से पहले परिषद् ने टेंडर आमंत्रण के लिए विषय प्रस्तुत किया है। टेंडर की पूर्ण प्रक्रिया आपसी मेल-जोल से संपन्न की गई है। जिस स्थान को लीज पर दिया जाना है, उस स्थान को लेकर किसी प्रकार की पूर्व सूचना परिषद में नहीं रखी गई। ना ही परिषद की बेठक में किसी प्रकार की इस विषय से जुड़ी कोई जानकारी प्रस्तुत की गई। आवेदन में कहा गया कि उपरोक्त पूरे घटनाक्रम से राजस्व की हानि होना निष्चित है। आवेदन में शासन के हित एवं राजस्व वृद्धि को ध्यान में रखते हुए यह लीज प्रक्रिया निरस्त कर पुनः लीज हेतु टेंडर आमंत्रित करने हेतु कहा गया। 
कुछ महत्वूर्ण बाते 
  • नगरपालिका की सर्व साधारण सभा की उक्त बैठक में मीडिया को आमंत्रित नहीं किया गया। 
  • बैठक में प्रस्तुत एजेंडा बिंदु क्रमांक 22 में लीज किस स्थान की दी जा रहीं है एवं लागत आदि का उल्लेख नहंी किया गया।
  • सूत्रों से ज्ञात हुआ कि यह लीज थांदला गेट के समीप स्थित भवन की है, जहां निराश्रित एवं बेघर, बीमार लोग रहकर जैसे-तैसे अपना जीवन यापन कर रहे है।
  • कमर्शियल के रूप में उपयोग होने से नगरपालिका इसमें अपनी आय की तो वृद्धि कर रही है, लेकिन इसका कमर्शियल उपयोग होने पर यहां रहने वाले कई जरूरतमंद लोग बेघर हो जाएंगे।
  • पार्षद पपीश पानेरी ने इस लीज प्रक्रिया को निरस्त करते हुए पुनः लीज हेतु टेंडर आमंत्रित करने की मांग नपा सीाएमओ को पत्र देकर की।
जवाबदारों का कहना 
- आपके द्वारा मुझे इस संबंध में अवगत करवाया है, में दिखवाता हूॅ।
एलएस डोडिया, सीएमओ, नपा झाबुआ

- इस संबंध में आप पूरी जानकारी नपा सीएमओ से प्राप्त करे। वह पूरी जानकारी देंगे। 
श्रीमती मन्नूबेन डोडियार, अध्यक्ष, नपा झाबुआ

jhabua news- पार्षद पपीश पानेरी ने नपा सीएमओ को आवेदन देकर लीज प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की
नपा के साधारण सम्मेलन के एजेंडा क्रमांक 22 में लीज की जगह एवं राशि का नहीं है उल्लेख

jhabua news- पार्षद पपीश पानेरी ने नपा सीएमओ को आवेदन देकर लीज प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की
पार्षद पपीश पानेरी ने नपा सीएमओ को आवेदन देकर लीज प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की



झाबुआ। झाबुआ जिला मुख्यालय पर प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मिडिया से जुडे पत्रकारो द्वारा दो घंटे का धरना विरोध प्रदर्शन कर कमलनाथ सरकार के तानाशाही रवैये एवं विधानसभा परिसर मे विधानसभा कार्यवाही की कवरेज को रोकने के खिलाफ धरना दिया गया इस अवसर पर धरने के दौरान उपस्थित पत्रकारो ने लोकतंत्र के चौथें सजग प्रहरी की भुमिका पर प्रकाश डालते हुए आजादी से लगाकर आज तक पत्रकारो की भुमिका पर विचार व्यक्त करते हुए झाबुआ जिले की पत्रकारिता पर भी प्रकाश डाला।
धरना आंदोलन का नेतृत्व पत्रकार कुंवर नरेश प्रतापसिंह पारा ने किया ओर धरने को संबोधित करते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार पत्रकारो की आजादी कुचलने का प्रयास कर रही है जो किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नही की जायेगी। आगे बोलते हुए कहा कि झाबुआ जिले की पत्रकारिता का एक लंबा इतिहास रहा है जिन्होने अंग्रेजो से टक्कर लेते हुए अपनी कलम की धार को पैनी रखते हुए आजादी का बिगुल बजाया। कमलनाथ दिल्ली की तर्ज पर ये निर्णय तुरंत ले अन्यथा ये पत्रकार आंदोलन को और आगे बढायेगे।
 पत्रकार चंद्रभानसिंह भदौरिया ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा मे कमलनाथ सरकार का तुगलकी निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि विधानसभा सदन मे विधायक पोर्न विडियो , विडियो गेम, सोते हुए, प्रिंट ओर इलेक्ट्रानिक मिडिया द्वारा दिखाये जाने पर कमलनाथ ने ये अप्रिय निर्णय लिया है जो घोर निदंनीय है।
राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार दौलत भावसार ने भी धरने पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि झाबुआ जिले के पत्रकार कन्हैयालाल वैद्य जो आजादी के समय वरिष्ठ पत्रकार रहे जिन्होने अपनी कलम की टक्कर अंग्रेजो से ली थी उस परंपरा का निर्वाह आज भी यहा का पत्रकार कर रहा है शासन ओर प्रशासन की गलत नीतियो का विरोध कलम के माध्यम से  निडर होकर यहा का पत्रकार करता आया है ओर करता रहेगा  आपने कमलनाथ सरकार के यह अप्रिय निर्णय के बारे मे बोलते हुए कहा कि ये निर्णय 1975 की याद दिलाता हुआ नजर आता है जब पत्रकारिता की आजादी पर ताले डाल दिये गये।
पत्रकार आलोक द्विवेदी ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भोपाल मे विधानसभा मे कमलनाथ सरकार पत्रकार को दबाने का प्रयास कर रही है ओर झाबुआ जिले मे कलेक्टर ओर एस पी दबाने का प्रयास कर रहे है ये कतई बर्दाश्त नही किया जायेगा द्विवेदी का कहना है कि बंद कमरो मे प्रभारी मंत्री ओर कांग्रेस नेताओ के साथ प्रशासन पुलिस छावनी के बीच मे तबादला उद्योग की चर्चा करते है ओर वहा पत्रकारो को जाने नही दिया जाता है इस प्रकार की कार्यवाही कई सवालो को खडा करती है। पत्रकार यंशवत पंवार ने भी धरने का समर्थन करते हुए कहा स्वराज काल की भुमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उस समय भी पत्रकार नही दबे थे ओर आज भी नही दबेगे। प्रदेश सरकार की ये कार्यवाही अनुचित है पत्रकारो की आजादी पर हमला नही करना चाहिए।
इस अवसर पर सचिन बैरागी, विरेन्द्र राठौर, सचिन जोशी, राजेन्द्र सोनगरा, मनोज अरोडा, विपुल पांचाल, दिनेश वर्मा, मनीष गिरधानी, राधेश्याम पटेल, पीयूष गादिया, मुकेश परमार, राकेश पोद्वार आदि बडी संख्या मे पत्रकार  उपस्थित थे। इस अवसर पर पत्रकारो ने धरने के पश्चात भोपाल की घटना को लेकर एडीएम श्री चौहान को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा ज्ञापन का वाचन नरेश प्रतापसिंह पारा वाले ने किया।

Jhabua News- कमलनाथ सरकार द्वारा विधानसभा मे पत्रकारो के कवरेज पर प्रतिबंध का विरोध

झाबुआ।  कांग्रेस ने मिटटी की सड़क से अधिक कुछ काम नहीं किया जबकि प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत दुरस्त आदिवासी इलाको में पक्की सड़के बन गयी है। कांग्रेस के शासन काल में आदिवासियों की मिटटी की सड़को से अधिक मांगने की कुछ हिम्मत नहीं होती थी लेकिन अब तो आदिवासी टू लेन सड़को की मांग करने लगे है . जो कार्य कांग्रेस चार पीड़ी में नहीं कर पायी वह मोदी ने चार साल में कर दिखाया और जो कार्य कांग्रेस पचास साल में नहीं कर सकी वह शिवराज ने 15 वर्ष में कर दिखाया विकास का यह सिलसिला अब नहीं थमेगा.
        उक्त विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्यान झाबुआ के महती सभा में पीजी कॉलेज मैदान पर भाजपा आयोजित सभा में सीमावर्ती जिलों सहित दूरदराज़ के आदिवासी अंचलो से भारी संख्या में आये आदिवासियों को सम्बोधित करते हुए कही। सर्वप्रथम आदिवासियों द्वारा परम्परागत नृत्य प्रस्तुत कर प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री की सभा में भाग लेने हेतु केंद्रीय मंत्री थावर सिंह गेहलोत एवं यशवंत भाबर पहले ही मंच पर आ गए थे। जिला भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री के भी आने की जानकारी मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से दी थी किन्तु मुख्यमंत्री यहाँ नहीं आये। सभा में झाबुआ सहित धार एवं अलीराजपुर जिले के विधानसभा सीट के प्रत्याशियों में दो प्रत्याशी नदारद रहे।
        प्रधानमंत्री ने कहा कि झाबुआ से मेरा पुराना नाता है। झाबुआ चंद्रशेखर आजाद की कर्मभूमि है। उन्‍होंने एक बार फिर कांग्रेस सरकार को कोसते हुए कहा कि संपत्ति न होने पर पहले बैंक वाले लोन नहीं देते थे, खेत गिरवी रखवाते थे। जिसके पास संपत्ति नहीं है वो क्या गिरवी रखेगा। पर आज अगर मेरे आदिवासी भाई मुद्रा लोन चाहते हैं तो कोई गारंटी की जरूरत नहीं है। 14 करोड़ लोगों को बिना गारंटी लोन मिला है। इनमें से 70 फीसदी ऐसे लोग हैं जिन्हें बैंक से पहली बार पैसा लेने का सौभाग्य मिला है।

       पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नौकरी देने के मामले में गरीबों के पैसे लूटे जाते थे, भ्रष्टाचार होता था, उन सभी पर हमने रोक लगाई।  है इसलिए अब कांग्रेस को तकलीफ हो रही है। पीएम मोदी ने कहा कि, इस देश को भ्रष्टाचार ने तबाह किया है कि नहीं, देश को इससे बाहर निकलना चाहिए कि नहीं। दीमक लगती है तो सबसे ज़हरीली दवाई डालना पड़ती है। इसलिए नोटबंदी जैसा बड़ा फैसला लिया।  कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस ने वादा किया था कर्ज माफ करेंगे। अब किसानों को जेल भेजने के वारंट निकल रहे हैं। जब मैडम की रिमोट कंट्रोल वाली सरकार थी, तब 6 लाख करोड़ कर्ज था। 60 हज़ार करोड़ भी माफ नहीं किया। ये बातें बाहर नहीं आई।
        कांग्रेस वाले किसानों की बात करते हैं, लेकिन बताइए 15 सिंचाई प्रोजेक्ट प्रदेश के क्यों अटकते रहे। देश में हमने ऐसे 99 प्रोजेक्ट खोजकर निकाले। ऐसे प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिए और काम पूरे हुए। हमने सपना देखा है 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल होंगे। चंद्रशेखर आज़ाद ने जो सेपने देखे देखे थे वो पूरे करना। किसानों की आय दोगुनी करना, पक्का घर सबका हो। हमने 1 करोड़ 25 लाख को घर बनाकर चाबी दे दी। हमारे घर में उनके जैसी चाहरदीवारी नहीं, घर में नल भी होगा, बिजली, पानी, गैस होगा।
     पहले जितना काम होता था उससे दोगुना किया है।   पहले घर, ज़मीन गिरवी रखाते थे। जिनके पास कुछ नहीं वो क्या गिरवी रखेंगे। हमने 14 करोड़ लोन बिना गारंटी स्वीकृत किए। 70 प्रतिशत पहली बार लोन लेने वाले। वो खुद कमा रहे और गांव के दूसरे युवाओं को भी रोजगार दे रहे।
      पीएम मोदी ने रैली में कहा कि, पहले कांग्रेस के समय लोन मेले लगते थे तो बाबू आकर ज्ञान देते थे। उन्हें बताते थे तेज़ी से बढ़ेंगे। वो लोन ले लेता था। कुछ होता नहीं था। गांव में लालबत्ती वाले साहब आते थे। गांव वाले आग्रह करते थे रात रुक जाइए। वो मेहमाननवाज़ी के लिए कड़कनाथ को कड़क कर देता था। लोन वहीं का वहीं। वो आदिवासियों का भला नहीं कर पाए। हमने मुद्रा योजना में नया हौसला दिया है।  पीएम मोदी ने कहा कि, हमने 14 करोड़ लोन बिना गांरटी के मंजूर किए हैं। उसमें 70 फीसद वो लोग हैं, जिन्हें पहली बार बैंक से पैसा मिला है। वो आज अपने पैरों पर खड़े हुए हैं। वो दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। ये सुदूर इलाकों के नौजवानों के हाथों में ताकत देने का काम किया है।


     हमने मुद्रा योजना के तहत जवानों को अपने पैरों पर खड़ा रहने की ताकत दी है। पहले बैंक लोन नहीं देते थे। घर, खेत गिरवी रखने पर लोन मिलता था। जिसके पास कुछ नहीं है, वो क्या गिरवी रखेगा। हमारी सरकार ने गारंटी का चक्कर खत्म किया। मुद्रा योजना के तहत उन्हें लोन दिया गया और वो आसानी से अपना कारोबार चला रहे हैं।   मुझे झाबुआ के लोगों से बातचीत करने का मौका मिलता रहा है। झाबुआ की चंपाबेन से बातचीत में वह कड़कनाथ लेकर आई थी। उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात हुई थी। यह कड़कनाथ मुर्गा झाबुआ की बहनों को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने के साथ ही लोगों को भी कड़क बनाता है।  पीएम मोदी ने गुजराती में अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि, आज मैं अपने परिवार के बीच आया हूं। सौभाग्य महसूस कर रहा हूं। ये धरती देवझिरी और कालिका मां की धरती है। ये चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली है।
विरोधियों को परेशानी है मोदी बिना थके इतना काम कैसे कर लेता है
       पीएम मोदी ने अपना भाषण खत्म करते हुए कहा कि, मैं आपको पुराने पड़ोसी होने के नाते भरोसे दिलाता हूं, आपके लिए काम होगा। आदिवासियों को इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया गया। हमने भ्रष्टाचार बंद करने के लिए एक के बाद एक कई कदम उठाए। कांग्रेस की बोखलाहट इसलिए है कि 50 साल से बने उनके भ्रष्टाचार के रास्ते बंद हो गए। मध्यप्रदेश में 55 साल में 1500 स्कूल बनाए, शिवराज ने 15 साल में 4 हज़ार बनाए। कोयला घोटाला, पनडुब्बी घोटाला, हेलिकॉप्टर घोटाले के चक्कर में किसान का घोटाला सामने नहीं आया। जब चोरी पकड़ाई तो नया खेल खेला, 7 करोड़ लोगों को सर्टिफिकेट नहीं दिया। उस किसान को लोन मिलना बंद हो गया। विरोधियों को परेशानी है मोदी बिना थके इतना काम कैसे कर लेता है।
आदिवासियों का मत (जो संवाददाता को आदिवासी महिला पुरुषो ने बताया )
सभा स्थल पर संवाददात्ता  ने सभा में आये आदिवासी महिला पुरुषो से संवाद किया तो मालूम हुआ की मोदी का जादू आदिवासियों के भी सर चढ़कर बोल रहा है। एसपीजी की गहन सुरक्षा व्यवस्था की वजह से कुछ आदिवासियों का आना बाधित हुआ।  दूरदराज़ के रहने वाले आदिवासी लोग बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री की सभा के बाद सभा स्थल पर आते देखे गए।  जिनके मन में प्रधानमंत्री को नहीं सुनने की निराशा दृष्टिगोचर हो रही थी।  कुछ आदिवासियों ने बताया की वो प्रधानमंत्री को सुनने आये थे किन्तु प्रधानमंत्री की सभा हो चुकी थी।
           प्रधानमंत्री की सभा से लौटी झाबुआ जनपद की ग्राम चारोलीपाडा निवासी आशा पति किशोर खराड़ी जो की अपने डेढ़ वर्ष के बचे को उठाये हुए तथा दो स्कूली बालिकाओ के साथ आयी थी उसने संवाददत्ता  पूछे जाने पर कहा की में अपना वोट मोदी जी और शिवराज के प्रतिनिधिता ही दूंगी उन्होंने हमारे लिए अच्छा काम किया है ।  
          झाबुआ जनपद की ग्राम मोद निवासी देवचंद पिता बच्चू ने कहा की मोदी जी ने अपने भाषण में जो कहा वह बिलकुल सही कहा इस सरकार के शासन में आदिवासियों के हित में बहुत काम हुआ है।  
       थांदला जनपद के करंजपाड़ा ग्राम के निवासी बालू पिता नानिया कटारा ने पूछे जानने पर कहा की मोदी और शिवराज के राज में अच्छा कार्य हुआ है एक रुपये गेंहू मिल रहा है।  में तो अपना मत भाजपा को ही दूंगा।  पिटोल निवासी एक अन्य आदिवासी ने कहा की फसल अच्छी नहीं हुई है में तो काम पर जाऊंगा किन्तु मेरे घर वाले तो मोदी की पार्टी को ही वोट देंगे।  





















झाबुआ। स्थानीय राजवाड़ा चौक स्थित पैलेस गार्डन में आयोजित समारोह में जाबांज शहीद जवानो के परिजनों को सम्मानित किया गया, साथ ही वर्त्तमान में सेना में कार्यरत सेनिको का भी सम्मान किया गया । सेनिको का सम्मान करने हेतु सम्मान समारोह समेत विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह आयोजन भीमा नायक वनांचल सेवा संस्थान द्वारा आयोजित किया गया.  कार्यक्रम में मुख्य अथिति के रूप में कल्ला जी भूरिया, कर्नल लेफ्टिनेंट मनोज बर्मन एवं मोहन नारायण आदि थे। उल्लेखनीय है की जिले में कुल 135 शहीद, भूतपूर्व एवं वर्त्तमान सैनिक है।  
     इस अवसर पर मध्य कमान के कर्नल लेफ्टिनेंट मनोज बर्मन (६५) द्वारा सेवारत सैन्यकर्मियो का सम्मान कर जिले के शहीद सैनिकाे के परिवारजनों का सम्मान किया गया । कर्नल लेफ्टिनेंट बर्मन 1971 के बांग्ला युद्ध में शामिल थे तथा पिछले 25 वर्षो से सेना में सेवाएं दे रहे है। आयोजित सम्मान समारोह में कर्नल बर्मन द्वारा जिले के सैनिकों सहित, शहीद सैनिकों की पत्नियों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों को सम्मानित कर उनसे रूबरू हुए। 
       सभा को सम्बोधित करते हुए कर्नल बर्मन ने कहा की भारतीय सेना के जवानो ने अपनी प्राणों की बाजी लगाकर देश के प्रति अपने प्राण न्योछावर कर दिए। हमे भी इन वीर शहीदो से सीख लेने होगी , हमें भी अपने कर्तव्यो के प्रति निष्ठावान होना पडे़गा। यही हमारी वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धाजंलि होगी। सैनिको ने कारगिल युद्व में अदम्य साहस का परिचय देकर देश की सुरक्षा की। इसके साथ ही आज भी भारतीय सेना सीमाओं में अपनी सेवा देकर देश की रक्षा कर रही है।
इन सैनिको का किया गया सम्मान 
  1. नाथूसिंह कामलिया
  2. रतनसिंह डावर 
शहीदो के परिजनों का किया सम्मान 
  1. शहीद भगवानदास 
  2. शहीद पारसिंह मुनिया 

झाबुआ। देश की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने झाबुआ की पारंपरिक प्रजाति के कड़कनाथ मुर्गे को लेकर सूबे के दावे पर मंजूरी की मुहर लगा दी है. करीब साढ़े छह साल की लंबी जद्दोजहद के बाद झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस के नाम भौगोलिक पहचान (जीआई) का चिह्न पंजीकृत किया गया है. इस निशान के लिए सहकारी सोसायटी कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के स्थापित संगठन ग्रामीण विकास ट्रस्ट के झाबुआ स्थित केंद्र ने आवेदन किया था. जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 'मांस उत्पाद तथा पोल्ट्री एवं पोल्ट्री मीट की श्रेणी' में किये गये इस आवेदन को 30 जुलाई को मंजूर कर लिया गया है. यानी झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस के नाम जीआई तमगा पंजीकृत हो गया है.  
jhabua-famous-kadaknath-breed-of-chickens-झाबुआ कड़कनाथ मुर्गे को मिला जीआई टैग
           यह जीआई पंजीयन सात फरवरी 2022 तक वैध रहेगा. ग्रामीण विकास ट्रस्ट के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक महेंद्र सिंह राठौर ने इसकी तसदीक की. उन्होंने बताया, हमारी अर्जी पर झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस के नाम जीआई चिन्ह का पंजीयन हो गया है. हमें इसकी औपचारिक सूचना मिल चुकी है.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी जिले को पहचान 

       झाबुआ मूल के कड़कनाथ मुर्गे को स्थानीय जुबान में कालामासी कहा जाता है. इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है. कड़कनाथ के मांस में दूसरी प्रजातियों के चिकन के मुकाबले चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है. झाबुआवंशी मुर्गे के गोश्त में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है. कड़कनाथ चिकन की मांग इसलिए भी बढ़ती जा रही है, क्योंकि इसमें अलग स्वाद के साथ औषधीय गुण भी होते हैं. कड़कनाथ प्रजाति के जीवित पक्षी, इसके अंडे और इसका मांस दूसरी कुक्कुट प्रजातियों के मुकाबले काफी महंगी दरों पर बिकता है.
       झाबुआ की गैर सरकारी संस्था ने आठ फरवरी 2012 को कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस को लेकर जीआई प्रमाणपत्र की अर्जी दी थी. लंबी जद्दोजहद के बाद इस अर्जी पर अंतिम फैसला हो पाता, इससे पहले ही एक निजी कंपनी यह दावा करते करते हुए जीआई तमगे की जंग में कूद गयी थी कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मुर्गे की इस प्रजाति को अनोखे ढंग से पालकर संरक्षित किया जा रहा है. हालांकि, जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे के काले मांस को लेकर मध्यप्रदेश का दावा मार्च में शुरुआती तौर पर मंजूर कर लिया था और अपनी भौगोलिक उपदर्शन पत्रिका में इस बारे में विज्ञापन भी प्रकाशित किया था. इसके बाद पड़ोसी छत्तीसगढ़ ने इस प्रजाति के लजीज मांस को लेकर जीआई प्रमाणपत्र हासिल करने की जंग में कदम पीछे खींच लिये थे.
कड़कनाथ मुर्गे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबारी पहचान मिलेगी
जीआई रजिस्ट्रेशन का चिन्ह विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले ऐसे उत्पादों को दिया जाता है जो अनूठी खासियत रखते हों. अब जीआई चिन्ह के कारण कड़कनाथ चिकन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबारी पहचान मिलेगी एवं  इसके निर्यात के रास्ते खुल जायेंगे. इस चिन्ह के कारण झाबुआ के कड़कनाथ चिकन के ग्राहकों को इस मांस की गुणवत्ता का भरोसा मिलेगा. इस मांस के उत्पादकों को नक्कालों के खिलाफ पुख्ता कानूनी संरक्षण भी हासिल होगा.
भोपाल में कड़कनाथ एप लांच किया गया
         चेन्नई जीआई रजिस्ट्रेशन के दफ्तर से खबर मिलते ही भोपाल में एप लांच किया गया। गुरुवार को सहकारिता विभाग की प्रमुख सचिव रेणु पंत झाबुआ पहुंचीं। उन्होंने बताया कि कड़कनाथ मुर्गे के पालन और खरीद-फरोख्त के कारोबार से जुड़ी सहकारी समितियों के लिए मप्र कड़कनाथ मोबाइल एप तैयार किया है। एप में झाबुआ, आलीराजपुर और देवास जिले की कड़कनाथ मुर्गा पालन के लिए काम कर रही चार सहकारी समितियों सहित 20 से ज्यादा संस्थाओं की जानकारी दी गई है।

      विभागीय राज्यमंत्री विश्वास सारंग ने इसे लोकार्पित करते हुए बताया कि एप समितियों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा, जो उन्हें आधुनिक बाजार की सुविधा देगा। एप के मेन्यू में क्लिक करने पर समिति का ईमेल, फोन नंबर और उत्पादन की जानकारी मिल जाएगी। इसमें मांग और पूछताछ का विकल्प भी दिया गया है। एप के जरिए कोई भी व्यक्ति समितियों के पास उपलब्ध कड़कनाथ मुर्गा खरीदने के लिए ऑनलाइन मांग कर सकता है। भविष्य में ऑनलाइन ऑर्डर के साथ होम डिलीवरी की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। एप्प को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

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झाबुआ का “गर्व” और “काला सोना” भी कहा जाता है
जनजातीय लोगों में इस मुर्गे को ज्यादातर “बलि” के लिये पाला जाता है, दीपावली के बाद, त्योहार आदि पर देवी को बलि चढाने के लिये इसका उपयोग किया जाता है । इसकी खासियत यह है कि इसका खून और माँस काले रंग का होता है । लेकिन यह मुर्गा दरअसल अपने स्वाद और औषधीय गुणों के लिये अधिक मशहूर है । 
         कड़कनाथ भारत का एकमात्र काले माँस वाला चिकन है । झाबुआ में इसका प्रचलित नाम है “कालामासी”। आदिवासियों, भील, भिलालों में इसके लोकप्रिय होने का मुख्य कारण है इसका स्थानीय परिस्थितियों से घुल-मिल जाना, उसकी “मीट” क्वालिटी और वजन । शोध के अनुसार इसके मीट में सफ़ेद चिकन के मुकाबले “कोलेस्ट्रॊल” का स्तर कम होता है, “अमीनो एसिड” का स्तर ज्यादा होता है । यह कामोत्तेजक होता है और औषधि के रूप में “नर्वस डिसऑर्डर” को ठीक करने में काम आता है । कड़कनाथ के रक्त में कई बीमारियों को ठीक करने के गुण पाये गये हैं, लेकिन आमतौर पर यह पुरुष हारमोन को बढावा देने वाला और उत्तेजक माना जाता है ।
         इस प्रजाति के घटने का एक कारण यह भी है कि आदिवासी लोग इसे व्यावसायिक तौर पर नहीं पालते, बल्कि अपने स्वतः के उपयोग हेतु पाँच से तीस की संख्या के बीच घर के पिछवाडे में पाल लेते हैं । सरकारी तौर पर इसके पोल्ट्री फ़ॉर्म तैयार करने के लिये कोई विशेष सुविधा नहीं दी जा रही है, इसलिये इनके संरक्षण की समस्या आ रही है । 
ये है कड़कनाथ मुर्गे के गुण 
  • प्रोटीन और लौह तत्व की मात्रा – 25.7%, मुर्गे का बीस हफ़्ते की उम्र में वजन – 920 ग्राम
  • मुर्गे की “सेक्सुअल मेच्युरिटी” – 180 दिन की उम्र में मुर्गी का वार्षिक अंडा उत्पादन – 105 से 110 (मतलब हर तीन दिन में एक अंडा) । 
  • कड़कनाथ के मांस में 25 से 27 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि अन्य मुर्गों में केवल 16 से 17 प्रतिशत ही प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा, कड़कनाथ में लगभग एक प्रतिशत चर्बी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में 5 से 6 प्रतिशत चर्बी रहती है.
  •  कड़कनाथ 500 रुपए से लेकर 1500 रुपए किलो तक बिकता है.  वही एक अंडे की कीमत 20 से 50 रूपए तक होती है.
  • कड़कनाथ के एक किलोग्राम के मांस में कॉलेस्ट्राल की मात्रा करीब 184 एमजी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में करीब 214 एमजी प्रति किलोग्राम होती है. 
  • इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक और फैट की मात्रा न के बराबर पाई जाती है. यह विटामिन-बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, ई, नियासिन, कैल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन से भरपूर होता है. यह अन्य मुर्गो की तुलना में लाभकारी है. इसका रक्त, हड्डियां और सम्पूर्ण शरीर काला होता है.
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राजेश थापा, झाबुआ : झाबुआ  में हुए एक दर्दनाक हादसे में 2 पुरुष और १ महिला सहित कुल 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए जिसमे एक महिला की स्थिति गंभीर है .घायलों का इलाज जिला अस्पताल में कराया गया यहाँ तीनो की गंभीर हालत के चलते दाहोद रेफेर किया गया . यह हादसा झाबुआ के करडावद थाना क्षेत्र में विगत रात्रि तकरीबन ८ बजे के करीब हुआ. जानकारी के अनुसार रोड के पेच वर्क के चलते एक तरफ का रोड डायवर्शन किया गया था,  एक तरफ चल रहे ट्रैफिक से सामने खड़े कंटेनर में तेज रफ़्तार से आ रही बोलेरो असंतुलित होकर जा घुसी. हादसे में बोलेरो के परखच्चे उड़ गए 3 लोगों में एक महिला की स्थिति गंभीर बनी हुई है . 
       पुलिस के अनुसार हादसे में घायल सभी लोग मेघनगर से झाबुआ की और आ रहे थे .घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस हादसे में झीतरा गुण्डिया ,मानसिंह मोहनिया , कमोदी गुण्डिया,  बालमन कमोदी आदि गंभीर घायल है. हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर मौके से फरार हो गया. ट्रक को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है. 











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प्रधानमंत्री आवास योजना से यहां खुश हैं ग्रामीण

          जिले की ग्राम पंचायत कालाखूंट में प्रधानमंत्री आवास योजना में 350 आवासों का लक्ष्य मिला है, जिसमें से 130 आवास पूर्ण है। गांव के ही भगत फलिये के 36 हितग्राहियों को योजना के तहत पक्का मकान मिला। सर पर पक्की छत पाकर ग्रामीणों ने ग्राम सभा में प्रस्ताव कर इस फलिये का नाम बदलकर इसे मोदी फलिया करवा दिया।
          मोदी फलिये की कहानी आपको बताएं इससे पहले जानिए कि झाबुआ जिलें के गाँवो में मोहल्ले को फलिया कहा जाता है जिसमें 20 से लेकर 100 मकान होते हैं। कई परिवार यहां रहते हैं और एक दूसरे के सुख दुख के साथी होते हैं। पूरे गांव में अलग अलग मोहल्ले (फलिये) हैं जो अलग अलग नाम से जानें जाते हैं।
 कैसे पड़ा नाम मोदी फलिया
झाबुआ में बना देश का पहला मोदी मोहल्ला (मोदी फलिया) -jhabua-kalakhut-panchayat-name-mohalla-as-modi-faliyaकालाखूंट पंचायत के इस फलिये में एक साथ 48 परिवारों के बारिश के मौसम में टपकनें वाले खपरैल और टपकती छत की जगह पक्के मकानों ने ले ली है। 48 मकानों में से 36 का काम पूरा हो चुका है। कच्चे टूटे मकानों से छुटकारा दिलानें में मोदी सरकार की आवास योजना ने बड़ी भूमिका अदा की है। इस आवास योजना के अन्तर्गत इन परिवारों को जो घर मिला उसके बाद इन लोगों ने अपनें मोहल्ले का नाम ही मोदी फलिया रख दिया। 
गांव की भौगोलिक संरचना 
मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा से सटे इस गांव की आबादी करीब 3500 के आसपास है। आवास योजना के पहले चरण में 285 मकानों को मंजूरी मिली थी। जिसके बाद कच्ची झोपड़ियों को पक्का मकान बनानें का काम शुरु हो गया। 2 अक्टूबर के पहले तक इस जगह को भगत फलिया के नाम से जाना जाता था पर अब नाम है मोदी फलिया। मोदी फलिये के बाद अब वहां के ग्रामीण अब स्वछता की ओर आगे बढ़ रहे है फलिये में साफ सफाई का दौर भी शुरू हो चुका है।

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       ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि जब से उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिले है तब से वह अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे पहले कच्चे आवास के कारण जहरीले जीव-जन्तु का भी खतरा बना रहता था साथ बारिश में उनके घर के छज्जे उड़ जाया करते थे जिससे उन्हें हमेशा किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती थी। लेकिन प्रधानमंत्री की इस महत्वकांक्षी योजना से वह बहुत खुश है और उनकी इस योजना का सम्मान भी करते है, जिस सम्मान को एक नया नाम देते हुए उन्होंने अपनी पंचायत के फलिये का नाम मोदी फलिया रख दिया व अपनी खुशी जताई।
सरपंच ने जताई खुशी 
गांव के सरपंच भी बेहद खुश हैं। इस चरण में जिन गावों का चयन हुआ है उनका काम खत्म होते ही दूसरे चरण में और कई गांव हैं जो इस योजना के अन्तर्गत आएंगे।

झाबुआ। किसी ने सच कहा है कि प्रतिभा और मेहनत के आग मुश्किलों की कोई हैसियत नहीं रह जाती. झोपड़ी में रहने वाले आदिवासी किसान राधू सिंह चौहान की बेटी रंभा ने इस कहावत को सही साबित कर दिखाया है. राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षा में सहायक जेल अधीक्षक के पद के लिए रंभा का सेलेक्शन हो गया है. रंभा के पिता राधु सिंह चौहान झाबुआ के नवापाड़ा गांव के निवासी हैं. उनका परिवार झोपड़ी में रहता है. उनका गांव जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर दूर है. 
झाबुआ झोपड़ी में रहने वाले किसान की बेटी बनी जेल सुपरिटेंडेंट     पिता राधूसिंह बताते हैं कि उन्होंने बेटी को पढ़ाने का संकल्प लिया था, उसके बाद बेटी को लगातार मोटिवेट करते रहे. वहीं रंभा की मां श्यामा कहती हैं कि वह खुद नहीं पढ़ पाईं, इसका उन्हें हमेशा हमेशा अफसोस रहता है. इसीलिए उन्होंने रंभा से कहा था, "तुम पढ़ाई पूरी करना और जब तक कोई नौकरी नहीं मिल जाए, तब तक रुकना मत. " रंभा अपने माता-पिता के मोटिवेशन के कारण अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रही. 
बचपन से थी पढ़ने की ललक 
रंभा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई नवापाड़ा गांव के सरकारी स्कूल से की थी. गांव में आगे की पढ़ाई की सुविधा नहीं थी, तो वह 18 किलोमीटर दूर झाबुआ रोजाना पढ़ने जाती थी. इसके लिए उसे रोज डेढ़ किलोमीटर तक पैदल भी चलना पड़ता था, क्योंकि गांव तक कोई बस आती नहीं थी. रंभा के पिता राधू और मां श्यामा चौहान ने कहा कि वह खुद पढ़ाई नहीं कर पाए, इसका मलाल मन में हमेशा रहता था. लेकिन सोच रखा था कि बेटियों को जरूर पढ़ाएंगे. 
       इस समय उनके गांव में त्योहार जैसा माहौल है. गांव के लोग और रिश्तेदार बधाई देने रंभा के घर पहुंच रहे हैं और रंभा के साथ-साथ उसके माता-पिता को भी शुभकामनाएं दे रहे हैं. रंभा माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला बछेंद्री पाल से काफी प्रभावित हैं. वह गांव की लड़कियों से भी कहती है, "जो मैं कर सकती हूं, वो आप क्यों नहीं कर सकतीं. मेहनत करो, सफलता जरूर मिलेगी."

माता-पिता ने पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया
      इस इलाके में आदिवासी समाज के लोग अधिकतर अपनी बेटियों की कम उम्र में ही शादी कर देते हैं. मेरे माता-पिता ने पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया है. तभी आज मेरा पीएससी परीक्षा 2017 में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर सेलेक्शन हो पाया है.
 रंभा

झाबुआ-आलीराजपुर में मुख्य रूप से सात हस्तशिल्प कलाकृतियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मान्यता है 

        झाबुआ-आलीराजपुर में मुख्य रूप से सात हस्तशिल्प कलाकृतियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। इनमें झाबुआ की आदिवासी गुड़िया, गलसन हार, पिथोरा आलीराजपुर की बैलगाड़ी (लकड़ी), पंजा दरी, भावरा का पिथोरा आर्ट (पेंटिंग), जोबट का ब्लॉक प्रिंट और कट्ठीवाड़ा का बांस आर्ट  मुख्य है। झाबुआ में 1963 में इन शिल्पों को पहचान दिलाने के लिए सरकार ने काम शुरू किया। शिल्पकार रमेश परमार बताते हैं कि उद्यमी यहां बने विकास केंद्र और इंदौर रोड पर बने एंपोरियम दोनों को खुलवाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन कुछ नहीं हो पाया। राज्यस्तरीय पुरस्कार विजेता शिल्पकार सुभाष गिदवानी बताते हैं कि मार्केटिंग न होने से रोजगार नहीं मिलता। पांच साल पहले 70-80 कलाकार थे। अब 30-40 ही काम कर रहे हैं। हस्तशिल्प मंत्रालय के इंदौर क्षेत्र प्रभारी एलएस मीणा भी मानते हैं कि कम मेहनताना मिलना बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। लकड़ी की बैलगाड़ी बनाने वाले आलीराजपुर के शिल्पकार घनश्याम पवार कहते हैं, एक बैलगाड़ी यहां 500-800 रुपये में मिलती है और सरकारी एंपोरियम में 1500- 1800 में बिकती है। सही मार्केटिंग हो जाए तो आय पांच गुना बढ़ सकती है।

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भारतीय हस्तशिल्प बाजार में उछाल और यहां गिरावट 
  • 467000 एक्सपोटर्स जुड़े हैं इस बाजार से 
  • 411.07 फीसद की बढ़ोत्तरी, अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के बीच 
  • 41.2 फीसद हिस्सा विश्व बाजार में भारतीय हस्तशिल्प का 
  • 41.5 फीसद हिस्सा, भारत से होने वाले एक्सपोर्ट आयटम का 
  • यूएस, यूके, जर्मनी, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय शिल्प के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध (एक्सपोर्ट प्रमोशनल काउंसिल के मुताबिक) 

मजदूरी के लिए चले जाते हैं गुजरात 
कोशिश है कि झाबुआ की संस्कृति देखने के लिए लोग झाबुआ आएं। पर्यटन बढ़ेगा तो हस्तशिल्प को भी बाजार मिलेगा। एंपोरियम को वापस खुलवाने की कोशिश जारी है।
 – आशीष सक्सेना, कलेक्टर, झाबुआ

राजेश थापा, झाबुआ। जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं का हमेशा से ही बोलबाला रहा है। यहाँ का स्वास्थ्य विभाग अपने कार्य के प्रति गैर जिम्मेदाराना है । मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्थायें मरीजो के लिये जान की दुश्मन बन गयी है। अव्यवस्थायें ऐसी है कि मरीज यहां आने के बाद भगवान भरोसे ही सुरक्षित वापिस लौट सकता है। गंभीर से गंभीर मरीज को मोटी तनख्वाह पाने वाले चिकित्सक देखने की बजाय चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के भरोसे छोड़ देते है। जिसके चलते कई बार मरीजो की मौत हो जाती है। तो कई बार उनकी हालत बिगड़ जाती है।
       मरीजो के तीरमदार चिकित्सको से चाहे जितना गिडगिडाते रहे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता है। अगर मरीज या उसका तीरमदार अस्पताल के जिम्मेदारो से चिकित्सको की आराजकता तथा लापरवाही की शिकायत करता है तो जिम्मेदार उल्टे शिकायत कर्ता पर ही गुर्राने लगते है। कई बार शिकायत कर्ता पर टूट भी पड़ते है। लडाई झगडे पर उतारू हो जाते है। खामियाजा हर तरफ से मरीज तथा उसके साथ आये शिकायत कर्ता को भुगतना पड़ता है। 
          महज 10 महिनों में आदिवासी झाबुआ जिले में गरीब मरीजों के लिये वरदान साबित हो रही डायलिसिस योजना दम तोड़ चुकी है। कभी फिल्टर की कमी तो कभी आरओ प्लांट से मोटर के गायब हो जाने से मरीजों का डायलिसिस नही हो पा रहा। आलम यह है कि जरूरतमंद मरीज अपने घर से मोटर लाकर डायलिसिस करवा रहे है। दरअसल, 26 जनवरी 2017 से प्रदेशभर के जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा शुरू की गई। तब से अब तक कई बार अलग-अलग कारणों के चलते मरीजों को डायलिसिस न होने से परेशानी उठानी पड़ी है। एक सप्ताह पूर्व जिला अस्पताल की डायलिसिस मशीन से मोटर चोरी हो गई थी, जिसका अब तक कोई सुराग नही लगा है।
       मामले में जिला अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार एजेंसी के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों द्वारा खुद की मोटर लाकर डायलिसिस करवाए जाने के मामले ने न केवल योजना की ज़मीनी हकिकत उजागर की है बल्कि भोपाल स्तर पर योजनाओं के बनने के बाद उनके क्रियान्वयन को लेकर खस्ताहाल हो चुके सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिये है।            
                   उल्लेखनीय है की चिकित्सालय देश के कुछ चुनिंदा आईएसओ प्रमाणित चिकित्सालय में से एक है , बावजूद इसके ऐसी अनियमितता और अव्यवस्था विभागीय ढांचे एवं जिम्मेद्दारो की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाती है ।  
 चिकित्सक नहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कर रहे इलाज
      जिला चिकित्सालय में आपातकालीन चिकित्सा कक्ष / ट्रामा सेंटर भी केवल देखने भर को रह गया है। यहाँ अगर गंभीर रूप से घायल या बीमार व्यक्ति भर्ती होता है तो उसका इलाज चतुर्थ श्रेणी या सफाई कर्मचारी के सहारे ही चलता है। इमरजेंशी डयूटी करने वाले चिकित्सक गंभीर से गंभीर मरीज को भी उठकर देखना भी मुनासिब नहीं समझते। चिकित्सक को तो छोडिय़े फार्मासिस्ट तथा अन्य स्टाफ भी मरीज के आस-पास नहीं भटकते। सारा इलाज चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सहारे होता है। चिकित्सीय शिक्षा से पूरी तरह अनभिज्ञ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गंभीर रूप से घायल मरीज के सही ढंग से घाव साफ तक नहीं करते। सीधे घटिया दवा लगाकर चारो तरफ पटटियां बांधकर मरीज को बस रेफर भर करने की खानापूर्ति कर देते है। जिसके चलते कई बार ऐसे मरीजो की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाती है। जिन्हे आसानी से बचाया जा सकता है।
जिला चिकित्सालय में लग रहा अव्यवस्थाओं का अम्बार , विभाग नहीं ले रहा सुध-Disturbing-disorder-in-jhabua-district-hospital-department-not-taking-action        ऐसे तो हर सरकारी अस्पताल में चिकित्सको की लापरवाही मरीजो के लिये मौत का कारण बनती रही है। लेकिन जिला चिकित्सालय में स्थिति बदसे बदतर है। अगर किसी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की जरूरत होती है तो डयूटी पर होने के बाबजूद चिकित्सक मरीज तक जाने की बजाय मरीज के तीरमदारो को यह सलाह देते है। कि मरीज को जहां वह बैठे हो वही लेकर आओ। कुछ कदम चलने की बजाय मरीज को जो पूरी तरह चलने में असमर्थ होता है। उसे अपने पास बुलाने की बात करते है। हां वह बात अलग है कि यह भी चिकित्सक अपने निजी नर्सिंग होमो में जरूर दौड-दौड़ कर मरीज सेवा करते है। क्योंकि वहां इन्हे अच्छी खासी आमदनी होती है।
           चारो तरफ पटी गन्दगी और इसी गन्दगी के बीच इलाज को तरस रहे मरीज़ शायद दबी जुबान अपने आप को कोसते नज़र आते है काश किसी निजी चिकित्सालय में इलाज कराया होता तो ऐसी फ़ज़ीहत ना होती।  डॉक्टरों की कमीशनबाजी और कर्मचारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया..... बहरहाल सेकड़ो मरीज़ो की जान ले चूका है और सेकड़ो की जान लेने पर आमदा है।
 मोटी तनख्वाह पाने वाले चिकित्सक कर रहे निजी प्रेक्टिस
     सरकार से मिलने वाली तनख्वाह को यह मुप्त का माल मानकर चलते है। चिकित्सको की निजी प्रेक्टिस के चलते ही अस्पताल की व्यवस्थायें गडबडायी है। पूरा ध्यान इन चिकित्सको का अपने उन मरीजो की तरफ होता है। जो या तो इन चिकित्सको के घर में दिखाते है या फिर चिकित्सक के निजी नर्सिंग होम या उस अस्पताल में जहाँ चिकित्सक अप्रत्यक्ष रूप से किसी दूसरे के नाम से संचालित करता है। जिला चिकित्सालय की तकरीबन सभी चिकित्सक किसी न किसी निजी अस्पताल से जुड़े है। या फिर अपना स्वंय का अस्पताल खोले है।
          वाकायदा वहां मरीज भी बैठकर देखते है। नाम भले ही किसी दूसरे चिकित्सक के नाम से पंजीकृत हो। लेकिन असली मालिक यही चिकित्सक होते है। जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सको के साथ-साथ अस्पताल के जिम्मेदार लोग भी मरीजो के प्रति घोर लापरवाही बरतते है। इन्ही जिम्मेदारो की शह के चलते अस्पताल की व्यवस्थायें गडबडायी हुयी है। ऐसे में जरूरी है कि शासन ध्वस्त हो चुकी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिये सबसे पहले लापरवाह हो चुके सरकारी चिकित्सको के पेंच कसे। या फिर बडे-बडे दाबे करना छोड़ दे। आम जनमानस को यमराज के रूप में पल रहे इन्ही भ्रष्ट चिकित्सको के हवाले छोड़ दे।
निजी एम्बुलेंस संचालको से भी कमीशनबाजी
      जिला चिकित्सालय के गेट के बाहर दर्जनो की संख्या में निजी एम्बुलेंस तथा अन्य चारपहिया वाहन खड़े रहते है। जिनका सीधे चिकित्सको से कान्टेक्ट होता है। इसी कान्टेक्ट के चलते ऐसे मरीजो को भी दाहोद या बड़ोदा के लिये रेफर कर दिया जाता है। जिन्हे आसानी से सही इलाज उपलब्ध कराकर जिला चिकित्सालय में ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन दो जगह की कमीशन के चलते चिकित्सको द्वारा मानवता को ताक पर रखकर मरीज को रेफर कर दिया जाता है। यहां एक तो एम्बुलेंस संचालक प्रति मरीज के हिसाब से रेफर करने वाले चिकित्सको को पैंसा देते है। वहीं जिस अस्पताल के लिये चिकित्सक मरीज को रेफर करता है वहां से भी उस चिकित्सक के पास कमीशन आ जाती है। चिकित्सको की कार्यप्रणाली देखकर ऐसा लगता है कि अब यह सब बेनामी हो गये है कि चिकित्सक भगवान का दूसरा रूप होता है बल्कि अब यह सही होगा कि चिकित्सक भगवान नहीं बल्कि शैतान बन गये है जो मानवता को बचाने की जगह निगलने का काम कर रहे है।
*सरकारी अस्पताल की दवाईयों को घटिया क्यों बताते है चिकित्सक?*
            अधिकतर सरकारी चिकित्सक मरीजो को बाहर से दवाईयां खरीदने की सलाह देते है। सलाह के पीछे का कारण भी बताते है कि सरकारी अस्पतालो में सप्लाई होने वाली दवाओं निर्धारित मानको के अनुसार नहीं होती है। लिहाजा गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीज को सरकारी दवाओं के सहारे ठीक करना मुश्किल होता है। ऐसे में महंगी बाहरी दवायें ज्यादा कारगर साबित होती है। हालांकि इस सलाह के पीछे यह हकीकत भी छिपी हुयी है कि जो दवायें सरकारी अस्पताल में सप्लाई होती है उनकी क़्वालिटी घटिया होती है। यानि चिकित्सको की माने तो बडे पैमाने पर दवा सप्लाई में भी घोटाला है। चिकित्सक यह सलाह आम मरीजो को नहीं देते है। बल्कि उन मरीजो को देते है। जो उनके करीब होते है। अगर चिकित्सको की यह सलाह सही है तो सरकार को भी गंभीरता से लेकर सरकारी अस्पतालो की दवा वितरण प्रणाली की जांच करानी चाहिये।
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आलौकिक अविस्मरणीय अनुभूति ने शरद पूर्णिमा पर ब्रजधाम की अनुभूति को किया साकार 
       मां दुर्गा की आराधना में हजारों पांवों ने संगीत की स्वर लहरियों के साथ अनुशासनबद्ध होकर थिरक कर शरद पूर्णिमा को एक उत्सव के रूप् में तब्दिल कर दिया । राजवाडा चौक में रात्रि 9 बजे से जमें गरबो के रंग में रंगे, माँ की आराधना में तल्लीन माँ भक्त व इसको निहारती दर्शकों की हजारों जोड़ी आंखे, अलपक होकर इस भक्ति एवं आराधना के  गरबों रास का आनन्द उठाती दिखाई दी । रात्रि 11.30 पर महशूर फिल्म अभिनेता आदित्य पंचोली को अपने बीच पाकर , युवा वर्ग सहित नगरवासी रोमांचित हो मस्ती में झूमने व गाने लगे ।         फिल्म अदाकार आदित्य पंचोली सीधे मुख्य मंच पर पहुँचे वहां सभी से मिल यहाँ का दृश्य देख वे स्वंय को रोक न पाए और उतर गए अपने चाहने वाले हजारों दर्शकों के बीच जो उनको समीप से देखने के लिए लालायित थे । वे गरबा ग्राउंड आर्केस्ट्रा के मंच पर पहुँचे  सभी से मुखातिब हो उनको अपनी चर्चित फिल्मों के डायलॉग सुनाए व उनका अभिवादन भी किया । करीब आधे घण्टे से अधिक समय तक वे आर्केस्ट्रा मंच पर जनता का अभिवादन करते हुए उनसे मुखातिब होते रहे और वहां से वे पुनः मुख्य मंच पर पहुँचे । अतिथि स्वागत की इस परम्परा में राजवाडा मित्र मंडल ने इस बार अनूठी पहल की । महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयासरत मित्र मंडल ने यह कार्य सिर्फ और सिर्फ अपनी महिला मंडल के हाथों करवाया । स्वागत के बाद मित्र मंडल द्वारा नवदुर्गा महोत्सव के दौरान आयोजित स्वच्छता चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता बच्चो को मुख्य अतिथि आदित्य पंचोली के हाथों पुरस्कार प्रदान किए गए ।
            कार्यक्रम की अगली कड़ी में झाबुआ शहर की तीन अति विशिष्ट प्रतिभा को तालियों की गडगडाहट के बीच सम्मानित किया गया । अंगदान के रूप मे स्वयं की कीडनी को अपनी मां को दान करने वाली कु. आयुषी दत्त को आदित्य पंचोली द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं शाल ओडा कर अंगदान व उसके बाद उसको लेकर जागरूकता अभियान चलाने के लिए पुरस्कृत किया । वही  अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश एवं अपने शहर का नाम रोशन करने वाली खिलाडी कु. सिमरन राठौर को क्रिडा के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हांसील करने पर प्रशस्ति पत्र एवं शाल ओढा कर सम्मानित किया । वही नगर के बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक कुशल संगीतकार, चित्रकार, कोरियोग्राफर , रंगमंच के कलाकार व प्रशिक्षक आशीष पाण्डे का सम्मान आदित्य पंचोली के हाथों मित्र मंडल द्वारा कराया  गया ।
            इसी बीच ठीक 12 बजे मध्यरात्री को श्री देवधर्मराज मंदिर पर महाआरती भी हुई व उसके पश्चात 500 किलो केशर मिश्रित केशरिया दूध की प्रसादी का वितरण विभिन्न काउंटरों के माध्यम से प्रत्येक आगन्तुक को किया गया ।
             कार्यक्रम के अंत मे फिल्म कलाकार आदित्य पंचोली ने अपने सम्बोधन में यह कहा कि आपके लाड़ले चुन्नू भैय्या हमारे भी मित्र हैं । दुनिया में मित्रता का एक ऐसा रिश्ता हैं जो हम तय करते हैं । इससे बढ़कर और कोई रिश्ता नहीं । में इनके आग्रह को टाल नहीं सका । पहले भी झाबुआ आ चुका हूँ, और आपके इस प्यार व स्नेह का आभारी हूँ । आपका यह आयोजन व दर्शकों का यह प्यार मेैं कभी नही भूल सकता । पुनः आऊँगा यह मेरा वादा है आपसे ।
      कार्यक्रम का संचालन नगर के ख्यातनाम मंच संचालक मनीष त्रिवेदी व अंकुश कांठी ने किया व आभार पार्षद अजय सोनी ने व्यक्त किया ।
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आशा न्यूज़ समाचार पत्र के शुरुवात पर हार्दिक बधाई , शुभकामनाये !!!!- निर्मला भूरिया , पुर्व विधायक

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आशा न्यूज़ चैनल की शुरुवात पर बधाई , कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अंक पड़ा था तीखे तेवर , निडर पत्रकारिता इस न्यूज़ चैनल की प्रथम प्राथमिकता है जो प्रकाशित उस अंक में मुझे प्रतीत हुआ , नई शुरुवात के लिए बधाई और शुभकामनाये.- कलावती भूरिया , पुर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

मुझे झाबुआ आये कुछ ही समय हुआ है , अभी पिछले सप्ताह ही एक शासकीय स्कूल में भारी अनियमितता की जानकारी मुझे आशा न्यूज़ द्वारा मिली थी तब सम्बंधित अधिकारी को निर्देशित कर पुरे मामले को संज्ञान में लेने का निर्देश दिया गया था समाचार पत्रो का कर्त्तव्य आशा न्यूज़ द्वारा भली भाति निर्वहन किया जा रहा है निश्चित है की भविष्य में यह आशा न्यूज़ जिले के लिए अहम कड़ी बनकर उभरेगा !!- डॉ अरुणा गुप्ता , पूर्व कलेक्टर झाबुआ

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महज़ ३ वर्ष के अल्प समय में आशा न्यूज़ समूचे प्रदेश का उभरता और अग्रणी समाचार पत्र के रूप में आम जन के सामने है , मुद्दा चाहे सामाजिक ,राजनैतिक , प्रशासनिक कुछ भी हो, हर एक खबर का पूरा कवरेज और सच को सामने लाने की अतुल्य क्षमता निश्चित ही आगामी दिनों में इस आशा न्यूज़ के लिए एक वरदान साबित होगी, संपादक और पूरी टीम को हृदय से आभार और शुभकामनाएँ !!- संजीव दुबे , निदेशक एसडी एकेडमी झाबुआ

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