झाबुआ/भोपाल।  श्यामला हिल्स स्थित यूनीसेफ के ऑफिस का नजारा कुछ अलग था। बच्चे अपने मन की बात कह रहे थे, नाटक दिखा रहे थे, डांस कर रहे थे। दरअसल यूनीसेफ इंडिया के सत्तरवें स्थापना दिवस पर यहां झाबुआ, हरदा और भोपाल जिले से बच्चे आए थे।
    इस अवसर पर यूनीसेफ के मध्यप्रदेश प्रमुख माइकल जुमा ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण मौका है कि यूनीसेफ भारत में सत्तर साल पूरे कर रहा है और बाल अधिकार समझौते को तीस साल पूरे होने जा रहे हैं, इस मौके पर हमें हर बच्चे को उसका अधिकार देने के लिए एकजुट होना है। उन्होंने बताया कि यूनीसेफ बच्चों के अधिकारों के लिए लगातार सहयोग कर रहा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां ठीक हों, इस संबंध में आमूलचूल बदलाव आए हैं, लेकिन अभी बहुत काम किए जाने की जरूरत है।
    चाइल्ड राइट्स आब्रजेटरी की अध्यक्ष निर्मला बुच ने कहा कि बच्चों के शत प्रतिशत अधिकार पूरे होने चाहिए और इसके लिए सरकारी विभागों और संस्थाओं को आगे बढ़कर अपनी भूमिका लेनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल बाल विवाह अपराध है कह देने से काम नहीं चलेगा जरूरत इस बात की है कि बाल विवाह क्यों ठीक नहीं है, यह भी बताया जाए। श्रीमती अनुराधा शंकर सिंह ने कहा कि इस दौर में जब हमने एक दूसरे की जिंदगी के बारे में सोचना बंद कर दिया है, बच्चे समाज के बारे में इतना सोच रहे हैं यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चों के पास दुनिया को देखने का एकदम ताजा नजरिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की बातों का सुना जाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी और की बात का। इससे पहले यूनीसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने सभी बच्चों और अतिथियों का स्वागत किया और बधाई दी।
नाटक और डांस की प्रस्तुति
कार्यक्रम में झाबुआ से आए बच्चों ने बाल विवाह पर नाटक प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में झाबुआ के मांदल समूह के बच्चों की ओर से तैयार बाल अखबार मांदल के पहले अंक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में वसुधा झाबुआ, सिनर्जी हरदा, अंश हैप्पीनेस सोसायटी, विकास संवाद, अटल बिहारी इंस्टीट्यूट आफ गुड गवर्नेंस, आरंभ, मुस्कान संस्था से जुड़े बच्चे शामिल थे।