राजेश थापा , झाबुआ । शहर में धार्मिक सद्भाव का नजारा पेश करते हुए हजारों मुस्लिमों ने रविवार को इस्लामी महीने के दसवें दिन 'अशूरा' पर मुहर्रम का जुलूस निकाला, जबकि एक दिन पहले विजयादशमी पर हिंदुओं ने दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जित किया। मुस्लमानों और हिंदुओं ने इस धार्मिक अवसरों पर पूर्ण शांति और सद्भाव के साथ भाग लिया। 
         मुहर्रम के मौकों पर, मुस्लमानों ने इस्लामिक महीने के मुहर्रम के 10 वें दिन ढोल की ताल पर सीने पर हाथ पीटते हुए जुलूस निकाला। इस जुलूस के साथ ही उन्होंने 680 ईस्वी में इराक के करबला में पैगंबर मोहम्मद के पोते इमाम हुसैन की शहादत पर शोक मनाया। रविवार की रात मुहर्रम की नौ तारीख को ताजिये नगर भ्रमण पर निकले । इस माह के 7वें दिन मेहँदी की रस्म होती है। 10 वें दिन जुलूस निकाला जाता है। 
        पुलिस के पुख्ता सुरक्षा इंतजामो के बीच निकले इन ताजियों के पीछे हजारो की संख्या में महिलाये भी शामिल हुई । मुहर्रम की नौ तारीख यानी क़त्ल की रात, इसी रात को ताजिये नगर भ्रमण पर निकलते है । शनिवार रात को यही परम्परा निभाई गई । इन ताजियों के साथ ही हजारो की तादाद में मुस्लिम समाजजन नजर आए । मान्यता के अनुसार जिन महिलाओं की मन्नत पूरी होती है वो ताजियों के पीछे चलती है जिसमे हिन्दू महिलाये भी शामिल है । ताजियों के दौरान कोई शरारती तत्व गड़बड़ी न फैला दे इस वजह से पुलिस ने पुरे मार्ग को कैमरो की नजर में कैद कर दिया था ।
 इस्लामी नववर्ष 1439 की शुरुवात
           जुलुस के दौरान पुलिस प्रशासन का अमला पुरे रास्ते मुस्तैद नजर आया , देर रात तक शहर में मुहर्रम के जुलुस की धूम रही । नए साल का चाँद मुबारक नजर आते ही मुस्लिम समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी के साथ इस्लामी नववर्ष 1439 हिजरी  की शुरुआत हो गई है। 
         समाज के हुसैन खान, आबिद खान एवं साबिद खान ने बताया कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब ने इस दिन मक्का से मदीना के लिए हिजरत (प्रस्थान) किया था। उसी की याद में इस्लामी कैलेण्डर बनाया गया। उसी दिन से कैलेण्डर की गणना की जाती है। इसलिए इस्लामी वर्ष को हिजरी कहा जाता है। मोहर्रम माह में 10 दिन में विशेष इबादत की जाती है। श्री खान के अनुसार इन दिनों में इबादत करने और खाना खिलाने का विशेष महत्व है।
        उल्लेखनीय है कि झाबुआ में ताजिए राजवाड़ा चौक पर रखे जाते हैं। यहाँ देर रात तक ढोल-नगाड़ों के साथ समाज के बच्चे और युवा अखाड़े के आकर्षक करतब दिखाते हैं। यहाँ पूजा-अर्चना सहित मन्नातें लेने एवं उतारने का दौर भी चलता है। 
 एक से बढ़कर एक ताजिए
चाँद दिखते ही स्थानीय हुडा क्षेत्र में ताजिए बनाने का कार्य प्रारंभ हो गया था।  वसीम शेख ने बताया कि नगर के हुडा क्षेत्र एवं टीचर्स कॉलोनी में करीब एक दर्जन से अधिक ताजिए बनाये गए। बाँस, कागज एवं अन्य सजावटी सामग्री से ताजिए बनाए गए। इनमें आकर्षक विद्युत सज्जा वाले ताजिए भी शामिल हैं। इस वर्ष छोटे बच्चों ने भी आकर्षक ताजिए बनाए, जिन्हें देखेने कई लोग आए।     
चौकी का जुलूस निकाला
रविवार की शाम चाँद दिखते ही मुस्लिम समाज द्वारा ढोल-नगाड़ों के साथ स्थानीय हुसैनी चौक से जुलूस निकाला गया। जुलूस हुसैनी चौक से शुरू हुआ, जो जगमोहनदास मार्ग, बाजार क्षेत्र होते हुए राजवाड़ा चौक पहुँचा।  जुलूस के दौरान जमकर ढोल-नगाड़े बजाए जा रहे थे। 
लाइव वीडियो