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झाबुआ।  नगर के हृदयस्थल पर स्थित श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में सांयकाल राजभोग के समय भगवान गोवर्धननाथ जी हवेली में चतुर्दशी के अवसर पर पुष्प से किलाकोट का निर्माण किया गया तथा भगवान गोवर्धननाथ जी को हरियाली से आच्छादित झुले में बिराजित किया गया । इस अवसर पर जमुना महिला मंडल की चन्द्रकांता आचार्य, यशोद आचार्य, मीना पंवार, संगीता शाह, श्रीमती त्रिवेदी, पप्पु भाटी, प्रेमलता भाटी विणा कटलाना, संगीता पारिक, मंजु मिस्त्री, चंचला सोनी, वर्षा सोनी, दीपा सोनी, ज्योत्सना चौहान, संगीता पारिक, आदि ने इस अवसर पर भजनों की प्रस्तुति दी । 
      इस अवसर पर भगवान के दर्शन के लिये पुरा मंदिर खचाखच भर गया। दिलीप आचार्य द्वारा भगवान को मयूर पंख से निर्मित चंवर ढुला कर उनकी सेवा की जा रही थी । इस अवसर पण्डित रमेश त्रिवेदी, कान्हा अरोडा द्वारा संगीत के साथ सांलली की आई रे राधे, वरण वरण के फुल बिन कर अपने हाथ बनाई... श्री राधे सांझ बली वन आई रे राधे ..... पर पारम्परिक प्रस्तुति दी जा रही थी । करीब एक घंटे तक भगवान के दर्शनों के बाद शयन आरती पश्चात् प्रसादी का वितरण किया गया ।

Jhabua News-श्री गोवर्धन नाथ मंदिर में शनिवार को सांजी पर्व का हुआ भव्य आयोजन

Jhabua News-श्री गोवर्धन नाथ मंदिर में शनिवार को सांजी पर्व का हुआ भव्य आयोजन

राजवाड़ा पर अहमदाबाद (गुजरात) के कलाकार आकर्षक गरबों से बाधेंगे समां पाॅलिथीन मुक्त झाबुआ रहेगी विशेष थीम

झाबुआ। श्री देवधर्म राज नवदुर्गा महोत्सव समिति एवं राजवाड़ा मित्र मंडल द्वारा इस वर्ष 34वां नवरात्रि महोत्सव पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। 29 सितंबर को भव्य शोभायात्रा निकालकर माताजी की प्रतिमा की श्री देव धर्म राज मंदिर में स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही यहां 9 दिनों तक रात्रि में गरबा रास होंगे। विशेष आकर्षण में अहमदाबाद (गुजरात) के 50 सदस्यीय दल द्वारा प्रतिदिन आकर्षक गरबों की प्रस्तुति दी जाएगी। इस बार आयोजक मंडल की विशेष थीम सामाजिक साराकोर के तहत ‘पाॅलिथीन मुक्त झाबुआ’ पर रहेगी। सभी आयोजन राजवाड़ा मित्र मंडल के संरक्षक बृजेन्द्र चून्नू शर्मा के मार्गदर्शन में होंगे।
       जानकारी देते हुए राजवाड़ा मित्र मंडल के अध्यक्ष लाखनसिंह सोलंकी एवं कार्यक्रम संयोजक राजेन्द्र कांसवा ने बताया कि शारदेय नवरात्रि के प्रथम दिन 29 सितंबर, रविवार को सुबह 10 बजे राजवाड़ा चौक से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। जिसमें विशेष आकर्षण नासिक के ढोल के साथ अद्भुत करतब प्रदर्शन भी होगा। विशेष वाहन पर बड़ौदा (गुजरात) से तैयार कर बुलवाई गई मां जगदम्बे की सुंदर प्रतिमा विराजमान रहेगी। यह शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होने के बाद प्रतिमा स्थापना देवधर्म राज मंदिर में की जाएगी, जहां प्रतिदिन माताजी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगेगी। इसके साथ ही प्रतिदिन रात्रि 9 से 12 बजे तक राजवाड़ा पर गरबों का आयोजन होगा। राजवाड़ा पर 9 दिनों तक गरबो खेलने एवं देखने वालों का जमवाड़ा होने के साथ ही विशेष प्रस्तुति अहमदाबाद (गुजरात) के दल में शामिल युवक-युवतियों की रहेगी। 6 अक्टूबर को अष्टमी पर दोपहर 3 बजे से श्री देव धर्म राज मंदिर पर हवन का आयोजन होगा। 8 अक्टूबर दशमी पर सुबह 7 बजे चल समारोह निकालकर रंगपुरा अनास नदी पर प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।  
‘पाॅलिथीन मुक्त झाबुआ’ रहेगी विशेष थीम
समिति के वरिष्ठ जितेन्द्र पटेल एवं गोपाल नीमा ने बताया कि इस बार राजवाड़ा मित्र मंडल की विशेष थीम ‘पाॅलिथीन मुक्त झाबुआ रहेगी’, चूंकि 2 अक्टूबर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती से केंद्र सरकार द्वारा संपूर्ण देश में पाॅलिथीन बेन किया जा रहा है। इसी क्रम में झाबुआ शहर को भी पाॅलिथीन मुक्त बनाने के लिए सामाजिक सारोकार की दृष्टि से राजवाड़ा मित्र मंडल द्वारा इस दौरान विशेष अभियान संचालित किया जाएगा। जिसमें लोगों से प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने एवं कपड़े की थैली उपयोग करने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
दूधिया रोशनी से नहाएगा राजवाड़ा
समिति सचिव अजय सोनी ने जानकारी दी कि शारदेय नवरात्रि के दौरान राजवाड़ा पर आकर्षक विद्युत सज्जा भी की जाएगी। इस बार राजवाड़ा महल पर दूधिया रोशनी के साथ पांडाल पर भी डिजिटल विद्युत सज्जा कर पूरे राजवाड़ा को रोशनी से जगमग किया जाएगा। 
13 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा उत्सव मनाया जाएगा
समिति के सक्रिय युवा सदस्य अंकुश कांठी के अनुसार 13 अक्टूबर को राजवाड़ा पर शरद पूर्णिमा उत्सव मनाते हुए रात्रि 10 से 12 बजे तक गरबों का आयोजन होगा। इस दौरान गरबा खेलने वालों के उत्सावर्धन हेतु फेमस सेलिब्रेटी को भी आमंत्रित किया जाएगा। रात 12 बजे महाआरती कर महा-प्रसादी का आयोजन होगा।
आयोजन को सफल बनाने की अपील 
श्री देवधर्म राज नवदुर्गा महोत्सव समिति एवं राजवाड़ा मित्र मंडल के उपाध्यक्ष अनूप सोनी, संजय कटकानी, देवेन्द्रसिंह चौहान, निलेश कटारा, बंटी ब्रजवासी, गोपाल सोनी, पंकज चौहान, अमित कांठी, प्रमोद परमार, दीपक भंडारी, गौतम त्रिवेदी, भावेश  सोलंकी भाऊ आदि ने शोभायात्रा एवं 9 दिनों तक होने वाले गरबा रास का अधिकाधिक संख्या में पधारकर आनंद लेने एवं आयोजन को भव्य रूप प्रदान करने की अपील की है।

Jhabua News-श्री देवधर्म राज नवदुर्गा महोत्सव समिति द्वारा 34वां नवरात्रि महोत्सव का आयोजन 29 सितंबर से
बड़ौदा (गुजरात) से बुलवाई गई मां जगदम्बे की नयनाभिराम प्रतिमा

डीजे ओर ढोल के  साथ राजवाड़ा से आरंभ होगी यात्रा  

झाबुआ। श्री विश्व मंगल हनुमान धाम मित्र मंडल झाबुआ द्वारा विश्व मंगल हनुमान धाम तारखेड़ी की एक दिवसीय पद यात्रा का आयोजन 20 सितंबर को किया जाएगा। जानकारी देते हुए मित्र मंडल के सदस्यों ने बताया कि यात्रा की शुरूआत 20 सितंबर, शुक्रवार को शाम 5 बजे शहर के राजवाड़ा स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर से होगी। जिसमें सभी भक्तजन पैदल शामिल होकर डीजे और ढोल के साथ भगवा ध्वज लहराते हुए उत्साहपूर्वक हनुमान धाम तारखेड़ी के लिए रवाना होंगे।  
      यह यात्रा अगले दिन शनिवार को तारखेड़ी पहुंचेगी। जहां विश्व  मंगल हनुमानजी के सभी द्वारा दर्शन-पूजन करने के बाद यात्रा का समापन हुआ। बाद सभी यात्रियों के लिए झाबुआ वापस आने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई है। श्री विष्व मंगल हनुमान धाम मित्र मंडल द्वारा सभी श्री राम-हनुमान भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे इस पद यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इसे भव्य रूप प्रदान करे। साथ ही तारखेड़ी में विराजमान विश्व मंगल के दर्शन  का लाभ ले।

Jhabua News-विश्व मंगल हनुमान धाम तारखेड़ी की एक दिवसीय पद-यात्रा 20 सितंबर को


अनास नदी पर क्रेन से शहर की सबसे बड़ी गणेशजी की प्रतिमा का हुआ विसर्जन

झाबुआ। शहर के कस्तूरबा मार्ग में विराजमान झाबुआ के राजा (सबसे बड़ी गणेशजी की प्रतिमा) का 12 सितंबर, गुरूवार को दोपहर 1.30 बजे चल समारोह निकालकर रंगपुरा स्थित अनास नदी पर क्रेन की मद्द से भव्य प्रतिमा का विसर्जन कार्यक्रम संपन्न हुआ।  
10 दिवसीय गणेशोत्सव पर्व के तहत झाबुआ का राजा ग्रुप द्वारा प्रतिवर्ष बड़ौदा (गुजरात) से गजाजनजी की भव्य प्रतिमा तैयार बुलवाई जाती है और 10 दिनों तक प्रतिमा को कस्तूरबा मार्ग में विराजमान कर रात्रि में महाआरती कर महा-प्रसादी का वितरण किया गया। अंतिम दिन 12 सितंबर को अनंत चर्तुदशी पर दोपहर 1 बजे बाप्पा की विदाई आरती बाद कस्तूरबा मार्ग से डीजे और ढोल के साथ विसर्जन चल समारोह आरंभ हुआ। डीजे पर धार्मिक भजन एवं बाप्पा के विदाई गीत प्रस्तुत किए। इसके पीछे जेकेआर ग्रुप के सभी सदस्य एक जैसी वेशभूषा में कुर्ता-पजामा एवं सिर पर सफेद टोपी पहनकर चले। सबसे पीछे ट्रेक्टर में झाबुआ के महाराजा की प्रतिमा विराजमान रहीं।
रंगपुरा नदी पर हुआ महा-विसर्जन संपन्न
यह चल समारोह शहर के श्री गोवर्धननाथ मंदिर तिराहा, आजाद चौक, बाबेल चौराहा, थांदला गेट, मेन बाजार, बस स्टेंड गांधी चौक, जिला चिकित्सालय मार्ग, चेतन्य मार्ग, दिलीप गेट, मेघनगर नाका होते हुए देर शाम तक रंगपुरा अनास नदी पर क्रेन की सहायता से शहर की सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा का महा-विसर्जन कर सभी ने झाबुआ के राजा के जयकारे लगाकर उन्हें नम-आखों से विदाई दी। 10 दिवसीय गणेश महोत्सव को सफल बनाने में जेकेआर ग्रुप के सभी सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा।

Jhabua News- Jhabua Ka Raja Ganeshotsav-झाबुआ के राजा की आरती बाद निकला महा-विसर्जन चल समारोह

Jhabua News- Jhabua Ka Raja Ganeshotsav-झाबुआ के राजा की आरती बाद निकला महा-विसर्जन चल समारोह

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Jhabua News- Jhabua Ka Raja Ganeshotsav-झाबुआ के राजा की आरती बाद निकला महा-विसर्जन चल समारोह

Jhabua News- Jhabua Ka Raja Ganeshotsav-झाबुआ के राजा की आरती बाद निकला महा-विसर्जन चल समारोह

Jhabua News- वरिष्ठ समाजसेवी बृजेन्द्र चून्नू शर्मा एवं राजवाड़ा मित्र मंडल ने की झाबुआ के राजा की महाआरतीमुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा

झाबुआ। 10 दिवसीय गणेशोत्सव पर्व के तहत शहर के कस्तूरबा मार्ग में झाबुआ के राजा (सबसे बड़ी गणेशजी की प्रतिमा) विराजमान है। जिनकी आरती करने का लाभ प्रतिदिन अलग-अलग लाभार्थियों द्वारा लिया जा रहा है। बाप्पा की महाआरती का लाभ जिले के वरिष्ठ समाजेसवी एवं उद्योगपति बृजेन्द्र चून्नू शर्मा तथा राजवाड़ा मित्र मंडल ने लिया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में मप्र शासन के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने भी शामिल होकर झाबुआ के राजा की महाआरती की।  
वरिष्ठ समाजसेवी बृजेन्द्र चून्नू शर्मा एवं राजवाड़ा मित्र मंडल ने की झाबुआ के राजा की महाआरती महाआरती में राजवाड़ा मित्र मंडल के संरक्षक बृजेन्द्र चून्नू शर्मा के साथ लाखनसिंह सोलंकी, पंकज चौहान, पप्पू कटकानी, शंशाक संघवी, अंकुश कांठी, भावेश सोलंकी, जितेन्द पटेल, अभिमन्यूसिंह, हेमेन्द्र पटेल आदि ने महाआरती करने का लाभ लिया। इसी बीच मप्र शासन के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया, जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ. विक्रांत भूरिया, जिला कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल मेहता, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती मन्नूबेन डोडियार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रकाश रांका, रमेश डोषी, आशीष भूरिया, विरेन्द्र मोदी, जिला कांग्रेस प्रवक्ता हर्ष भट्ट आदि ने भी पहुंचकर महाआरती की। 
लाल बाग  के राजा की तरह झाबुआ के राजा
बाद जनसंपर्क मंत्री श्री शर्मा ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि जिस तरह से मुंबई में लाल बाग के राजा प्रसिद्ध है, उसी तरह झाबुआ में झाबुआ के राजा की प्रसिद्धी है। मुझे झाबुआ की राजा की आरती कर अत्यंत सुकुन मिला। पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया ने कहा कि जेकेआर ग्रुप प्रतिवर्ष गणेशोत्सव के दौरान शहर की सबसे बड़ी गणेशजी की प्रतिमा (झाबुआ के राजा) की स्थापना करता है। जिसमे पूरे शहर के श्रद्धालुजन दर्शन के लिए आते है, इसके लिए जेकेआर ग्रुप बधाई का पात्र है।
महाप्रसादी का हुआ वितरण
महाआरती में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए। महाआरती बाद महाप्रसादी में सभी श्रद्धालुओं को पोहे, आलूबड़ा और लड्डूओ का वितरण किया गया। इस दौरान सभी ने सामूहिक रूप से झाबुआ के राजा के जयकारे भी लगाए। आयोजन को सफल बनाने में जेकेआर ग्रुप से जुड़े सभी सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा।

Jhabua News-वरिष्ठ समाजसेवी बृजेन्द्र चून्नू शर्मा एवं राजवाड़ा मित्र मंडल ने की झाबुआ के राजा की महाआरती
महाआरती करते मप्र शासन के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा

झाबुआ में श्री मनकामेश्वर गणेश मंडल छोटा तालाब पर बाबा गणपति का 650000 लाख के नोट एवं 7 तोले सोने से श्रृंगार किया गया

Jhabua News-झाबुआ में श्री मनकामेश्वर गणेश मंडल छोटा तालाब पर बाबा गणपति का 650000 लाख के नोट एवं 7 तोले सोने से श्रृंगार किया गया

सुहागिन महिलाओं द्वारा पूजन कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना की 

झाबुआ। शहर में 1 सितंबर, रविवार को हरितालिका तीज व्रत मनाया गया। इस अवसर पर विवेकानंद काॅलोनी स्थित उमापति महादेव मंदिर पर दिनभर महिलाओं की पूजन के लिए भीड़ लगी रहीं। महिलाओं द्वारा बालू रेत से शिव परिवार बनाकर उनकी विधि-विधान से पूजन की। बाद रात्रि में जागरण एवं भजन-किर्तन भी किए। 
उमापति महादेव मंदिर के पूजारी पं. प्रदीप भट्ट ने बताया कि अलसुबह से ही महिलाओं की मंदिर में  पूजन-दर्शन के लिए भीड़ लगी रहीं। महिलाओं के साथ बालिकाओं द्वारा भी सज-संवरकर एवं पूजा की थालियां सजाकर मंदिर आकर यहां बालू रेत से बनाए गए भगवान शिवजी एवं माता गौराजी के साथ गणेशजी एवं कार्तिकजी की पूजन की गई। पूजन अक्षय मुर्हुत में सुबह से लेकर रात तक चलती रहीं। पूजन में विभिन्न आम, जाम, आंवल के पत्ते, तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र, केले के पत्ते इत्यादि का उपयोग किया गया। बाद सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र की कामना एवं परिवार की सुख-समृद्धि तथा बालिकाओं ने अच्छे वर के लिए भगवान से कामना की। 
     इस दिन महिलाओं ने अन्न-जल का त्याग किया। दिनभर पूजन का क्रम चलने के बाद रात्रि जागरण कर समूह में भजन-किर्तन किए।   
दिनभर चलता रहा पूजन-पाठ का क्रम
आज गणेश चतुर्थी पर सुबह यथा शक्ति दान देकर एवं भगवान श्री गणेश को भोग लगाकर महिलाओं द्वारा व्रत खोलते हुए अन्न-जल ग्रहण किया गया। साथ ही बालू रेत से बनाए गए शिव परिवार का तालाब में विसर्जन किया गया। इस व्रत के महत्व के बारे में विनीता महोदिया ने बताया कि इस दिन माता पार्वतीजी ने अपनी सहेली के साथ वन जाकर आराधना की थी। उसी निमित्त यह हरितालिका तीव्र व्रत रखा जाता है। इस दिन शहर के अन्य मंदिरों में भी दिनभर पूजन-पाठ का क्रम चलता रहा।

Jhabua News- उमापति महादेव मंदिर में मनाया गया हरितालिका तीज व्रत



कलश जल संग्रहित कर  कलश  की स्थापना की गई

झाबुआ । वरुण सप्तमी पर झाबुआ अरोडा समाज द्वारा आयोजित वरुण भगवान का अभिषेक प्रातः 8-30 बजे पंडित प्रकाश त्रिवेदी के सानिध्य में विधि विधान से सभी समाज जनों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। महिला मंडल के अति उत्साह एवं नवयुवक मंडल के द्वारा वरुण भगवान प्रतीक स्वरूप कलश जल संग्रह हेतु खेड़ापति हनुमान मंदिर से वाडी हनुमान मंदिर पर पहुंचकर महिलाओं द्वारा जल भरकर ड्रेस कोड के साथ बाजे गाजे से  खेड़ापति हनुमान मंदिर लाकर कलश स्थापना की गई। झाबुआ समाज के सभी परिवार द्वारा वरुण भगवान की सामूहिक पूजा अर्चना की गई। दोपहर 12-30 बजे महा आरती का आयोजन जन्मोत्सव के रूप में किया गया। इसमे सभी समाजजनो द्वारा दारियाव जी महाराज जी की भावपूर्ण स्तुति की गई पश्चात जय दरियाव के जयकारों से पूरा वातावण गुंजायमान हो गया।
varun saptami arora samaj jhabua-भक्ति एवं श्रद्धा के साथ अरोडा समाज ने मनाई वरूण सप्तमी      वरुण सप्तमी के उपलक्ष में सभी समाज जनों द्वारा एक दूसरे को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रकट की गयी। साथ  ही 13 जुलाई  को आयोजित कार्यक्रम में की गई घोषणा के अनुसार सभी का सम्मान किया गया जिसमें श्री महेश जी अरोड़ा (संरक्षक), सत्यनारायण जी अरोड़ा (अध्यक्ष), हेमेंद्र अरोड़ा (कोषाध्यक्ष) तथा किशोर अरोड़ा द्वारा चांदी के छत्र अर्पण हेतु एवं नंदकिशोर जी अरोड़ा द्वारा वरुण भगवान के अभिषेक का लाभ लेने पर अजय विष्णु राम जी अरोड़ा परिवार द्वारा सतत 4 वर्षों से भगवान को पुष्पमाला अर्पण  करने हेतु सम्मान किया गया। साथ ही महिला मंडल संरक्षक श्रीमती राधा अरोड़ा उपाध्यक्ष श्रीमती इंदु अरोड़ा एवं हमेशा भगवान की पोशाक तैयार करने के कार्य हेतु श्रीमती अल्पना अरोड़ा तथा नवयुवक साथियों का सम्मान किया गया। इसी के साथ प्रदीप अरोड़ा के सफल संचालन हेतु उनका सम्मान किया गया श्री प्रदीप अरोड़ा पीकू द्वारा स्वरचित ’रीता प्याला’ के प्रकाशन पर उनका सम्मान किया गया एवं प्रसादी के साथ यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
     दूसरे सत्र में साईं बाबा मंदिर पर सायंकाल 5 बजे महिला मंडल, नवयुवक मंडल के तत्वाधान में सतोलिया कबड्डी,क्रिकेट एवं मटकी फोड़ का आयोजन किया जाकर उपस्थित सभी समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लेते हुए अपनी सहभागिता प्रदान की। विजय अरोड़ा द्वारा खेल गतिविधियों का सफल संचालन किया गया तथा प्रदीप अरोड़ा द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार वितरण किया जाकर स्वल्पाहार के साथ रात्रि 8-30 बजे कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के लिए उपस्थित सभी समाज जनों का आभार एवं धन्यवाद अरुण अरोड़ा कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा ज्ञापित किया गया।

varun saptami arora samaj jhabua-भक्ति एवं श्रद्धा के साथ अरोडा समाज ने मनाई वरूण सप्तमी

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श्रावण मास के अंतिम सोमवार को शिवालयों में गूंजे ऊॅं नमः षिवाय के स्वर, देवझिरी तीर्थ पर लगा मेला, भक्तों की रहीं भारी भीड़

झाबुआ। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को शहर में स्थित शिव मंदिरों पर अलसुबह से ही दर्शन-पूजन का क्रम आरंभ हो गया, जो देर शाम तक चलता रहा। मंदिरों में भोले शंभु-भोलेनाथ एवं ऊॅं नम‘ शिवाय के समधुर गीत गूंजायमान हुए। देवझिरी तीर्थ पर मेले जैसा माहौल रहा। अंतिम सोमवार होने सभी मंदिरों में पर भक्तों की भारी लगी रहीं। शहर के  विवेकानंद कालोनी स्थित उमापति महादेव मंदिर सुश्री विद्या गोलानी द्वारा भगवान भोलेनाथ का फलों, एवु पुष्पों से आकर्षक श्रृगार किया गया तथा सजावत में धारा 370 का सन्देश दिया गया वहीं सिद्धेष्वर कॉलोनी स्थित सिद्धेष्वर महादेव मंदिर में अलसुबह से ही महिलाओं का पूजन की थालियां सजाकर दर्शन-पूजन के लिए आना आरंभ हो गया। सुबह के दौरे में यहां भक्तों की कतार भी लगी।   
       श्रद्धालुओं ने आस्था एवं श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत से अभिषेक कर कुंक, चावल चंदन से तिलक लगाकर भगवान के चरणों में पुष्पों के साथ गुलाब के फूल, बिल्व पत्र एवं शिवजी को प्रिय धतुरा अर्पण किया। भांग भी अर्पण की। मंदिर में शिवजी के समधुर गीत गूंजायमान हुए। छोटा तालाब स्थित श्री मनकामेष्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से लेकर शाम तक भक्तों की आना-जाना लगा रहा। यहां श्रद्धालुओं की मनकामेष्वर महोदवजी के दर्शन के लिए कतार देखी गई। डीआरपी लाईन स्थित गोपेष्वर महादेव मंदिर पर भोले शंभु-भोलेनाथ के जयकारों के साथ भक्तों ने गोपष्वर महादेवजी की पूजा-अर्चना करने का लाभ प्राप्त किया। 
इन मंदिरों पर भी रहीं भीड़
अंतिम श्रावण सोमवार को शहर के विवेकानंद कॉलोनी स्थित उमापति महादेव मंदिर पर विवेकानंद कॉलोनी, हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी, न्यू हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी, लक्ष्मीनगर, रतनपुरा, एलआईसी कॉलोनी के रहवासी महिला-पुरूषों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर यहां पूजन-पाठ किया। कॉलेज मार्ग पर प्राचीन सोमेष्वर महादेव मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ स्थित स्फटिक महादेव मंदिर, बसंत कॉलोनी स्थित षिव मंदिर, गोपाल कॉलोनी स्थित महांकाल मंदिर पर भी श्रद्धालुओं का सुबह के दौर में आना-जाना लगा रहा। 
विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए संपन्न
देवझिरी तीर्थ पर शहर सहित जिलेभर से श्रद्धालुओं द्वारा पवित्र कुंड में स्नान करने के बाद कतार में खड़े रहकर भगवान के दर्शन किए गए। यहां स्व. पं. हरिप्रसाद अिर्ग्नहोत्री की परंपरा का निर्वहन करते हुए जितेन्द्रप्रसाद अग्निहोत्री, देवेन्द्रप्रसाद अग्निहोत्री परिवार की ओर से भगवान का रूद्राभिषेक बादआचार्य जैमिनी शुक्ला द्वारा मंत्रोच्चार के साथ करवाया गया तथा दोपहर में महाआरती पश्चात् महाप्रसादी रखी गई। झाबुआ-मेघनगर मार्ग पर स्थित पारदेष्वर महादेव मंदिर एवं दूधेष्वर महादेव मंदिर पर भी श्रद्धालुजन दर्षन-पूजन के लिए पहुंचे।

jhabua news-धारा 370 को लेकर उमापति महादेव का किया गया श्रृंगार

झाबुआ। श्रावण माह के अंतिम सोमवार को शहर के छोटा तालाब स्थित श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर से शाम 6 बजे शिवजी की शाही सवारी निकाली गई। जिसमें  मनकामेष्वर महादेव मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारी-सदस्यों के साथ बड़ी संख्या मंश्रद्धालुजन शामिल हुए। बैंड-बाजों पर प्रस्तुत धार्मिक गीतों से पूरा शहर गूंजायमान हुआ।
         शाही सवारी में सबसे आगे बेंड-बाजे बज रहे थे। इसके पीछे ढोल और पुरूष श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक गीतों पर महिलाओं एवं बालिकाओं द्वारा जगह-जगह नृत्य किया एवं गरबे खेले। शाही सवारी में मनकामेश्वर महादेवजी को विराजमान किया और उन्हें नगर भ्रमण करवाया। शाही ढोले को कंधे पर युवा लेकर चले। सबसे पीछे महिलाएं एवं बालिकाएं सम्मिलित हुई। यह शाही सवारी शहर के मनकामेश्वर महादेव मंदिर से पानी की टंकी, राजवाड़ा, नेहरू मार्ग, श्री गौवर्धननाथ मंदिर तिराहा, आजाद चैक, बाबेल चैराहा, थादंला गेट, लक्ष्मीबाई मार्ग होते हुए पुनः मंदिर पर पहुंची। जहां महाआरती का आयोजन हुआ। बाद महाप्रसादी रखी गई।
इनकी रहीं विशेष  सहभागिता 
चल समारोह में मनकामेश्वर महादेव मंदिर समिति के पदाधिकारियों में अजय रामावत, जगदीश पंवार, सुशील वाजपेयी, रविराजसिंह राठौर, अरविन्दसिंह सांकला, राकेश कटारा, श्री बैरागी, श्रीमती रेखा राठौर, श्रीमती गोस्वामी आदि विशेष रूप से शामिल हुई। चल समारोह के दौरान पुलिस सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम रहे।

शाही सवारी में विराजित मनकामेश्वर महादेवजी, ढोले को लेकर चलते युवाजन

चल समारोह में शामिल मनकामेश्वर महादेव मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं श्रद्धालुजन

पुष्टिमार्ग के प्राकट्योत्सव के रूप  मे मनाई परित्रा एकादशी

नित नये मनोरथ के हिण्डोला दर्शन का मिल रहा लाभ

झाबुआ । श्रावण माह में भगवान श्री गोवर्धननाथजी को नित नये कलेवर में गोवर्धननाथजी की हवेली में  सायंकाल हिण्डोले  पर झुलाने का क्रम चल रहा है । रविवार को पवित्रा एकादशी के पावन दिन को भगवान श्री गोवर्धननाथजी के बाल स्वरूप को पवित्रा के रेशमी धागो से बने हिण्डोले में झुलाया गया । भगवान गोवर्धननाथजी की इस अनुपम हिण्डोला दर्शन के लिये सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष दर्शनार्थियों ने भगवान के हिण्डोला दर्शन का लाभ उठाया । 
‘पवित्रा परहत राजकुमार तीन्यों लोक पवित्र किये है श्री विट्ठल गिरिधार ।  
अतिही पवित्र  प्रिया बहु बिलकत निरख मगन भयो मार । 
रमानन्द पवित्र की माला  गोकूल की नीज नार ।’’  
पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीडजैेसे  पुष्टिमार्गीय संगीत मय कीर्तन के साथ सभी श्रद्धालुजन भगवान को नतमस्तक हो रहे थे । पवित्रा एकादशी के बारे में जानकारी देते हुए गोस्वामी  श्री दिव्येशकुमारजी महाराज ने पवित्रा एकादशी के माहत्म्य को बताते हुए कहा कि पवित्रा एकादशी पुष्टिमार्ग का प्राकट्य दिवस माना जाता है । इस एकादशी की मध्यरात्री को साक्षात भगवान श्रीनाथजी  ने प्रकट होकर पूज्य श्री वल्लभाचार्यजी  से ब्रह्म संबंध स्थापित कर महामंत्र एवं जगतकल्याण का सन्देश दिया था । इस मंत्र के द्वारा भक्त को भगवत सेवा का अधिकार प्राप्त हो जाता है । पवित्रा एकादशी को 307 केशरिया रंग के तार अर्पित करके मिश्री का भोग अर्पित किया था तथा मदराष्टक स्त्रोत से भगवान श्रीनाथजी के हर अंग का वर्णन किया गया था । पवित्रा एकादशी के दिन  ठाकुरजी ने  ब्रह्म संबंध  का सन्देश दामोदरदासजी हरदानी को दिया था इसलिये पवित्रा एकादशी के दूसरे दिन द्वादशी का दिवस गुरू को  समर्पित होता है । पुष्टिमार्ग में पवित्रा एकादशी का सबसे अधिक महत्व होता है और इस दिन भगवान गोवर्धननाथजी के दर्शन मात्र से ही  सर्व मनोकामनायें पूरी होती है तथा आत्मीय शांति प्राप्त होती है। इसी पूरातन परम्परा को अभी तक पुष्टिमार्ग में  बनाया रखा है । 
श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में  भगवान के पवित्रा हिण्डोले  में बिराजित होकर झुलने की मनोहारी छबि को निहारने के लिये पूरा मंदिर खचाखच भर गया तथा भगवान के दर्शन एवं एक झलक पाने के लिये  श्रद्धालुजनो मे काफी उत्साह दिखाई दिया । मंदिर के मुखिया दिलीप आचार्य द्वारा भगवान के हिण्डोले को होले होले झुला झुलाया गया तथा भगवान को पंखा झला गया । वही पण्डित रमेश त्रिवेदी, गोकूलेश आचार्य एवं कान्हा अरोडा द्वारा संगीत के साथ ’’ पवित्रा पहीरे  हिण्डोला झुले, श्यामा श्याम बराबर बैठे निखट ही समजतुले, ललीतादि सब सखी झुलावत ठाडी खंभ अनुकेले जैसे कीर्तन प्रस्तुत करके पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया ।  करीब एक घंटे से अधिक समय तक भगवान गोवर्धननाथजी के पवित्रा हिण्डोले के दर्शनलाभ श्रद्धालुओं ने प्राप्त किये । इस अवसर पर फलों की प्रसादी का वितरण भी किया गया ।  
पुलिस प्रशासन ने नही लगाई यातायात पुलिस की ड्युटी
श्रावण माह में श्री गोवर्धननाथ जी के मंदिर में प्रति दिन भगवान के हिण्डोला दर्शन का आयोजन हो रहा है । जिसमें सैकडो की संख्या में  महिला एवं पुरूष दर्शनार्थी सायंकाल को हिण्डोला दर्शन के लिये मंदिर आते है। श्रावण माह में सायंकाल को यातायात को नियंत्रित करने तथा मंदिर के आसपास अव्यवस्थित पार्किग को लेकर श्रद्धालुजनों ने पुलिस अधीक्षक से मंदिर के बाहर यातायात नियंत्रित करने के लिये पुलिस की ड्युटी लगाये जाने की मांग की थी । मुख्य बाजार में उक्त मंदिर स्थित होने से  यहां बार बार जाम वाली स्थिति निर्मित हो जाती है ऐसे में दुर्घटनाओं की संभावनायेंब नी रहती है । हिण्डोला पर्व जन्माष्टमी तक जारी रहता है । ऐसे मे मंदिर समिति के साथ ही यमुना मंडल की महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया है कि मंदिर के आसपास दुपहिया एवं चार पहिया वाहनों की व्यवस्थित पार्किग के साथ ही यातायात पुलिस की यहां व्यवस्था बनाये रखने की दृष्टि से ड्युटी लगाई जावे ताकि दर्शनार्थियों को परेशान नही होना पडें ।

पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीडपवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड

पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड


नगर भ्रमण कर भगवान भोलेनाथ देगें दर्शन -आशीर्वाद 

झाबुआ । नगर के छोटा तालाब के तट पर विराजित भगवान मनकामेश्वर महादेव कल अन्तिम सोमवार को नगर भ्रमण कर नगरवासियों को दर्शन एवंआशीर्वाद प्रदान करेगें । श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर के मनोज नानालाल कोठारी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रावण माह के अंतिम सोमवार 12 अगस्त को को भगवान श्री मनकामेश्वर महादेव की शाही सवारी सायं 5-30 बजे से बेंड बाजों एवं ढोल ढमाकों के साथ निकाली जाएगी जो नेहरू मार्ग, चन्द्र शेखर आजाद मार्ग, बस स्टैंड, लक्ष्मीबाई मार्ग होकर पुनः मन कािमेश्वर महादेव मंदिर मंदिर पर वापस आएगी।   
     भगवान भोलेनाथ की इस शाही सवारी में नगर की धर्मप्राण जनता से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लिये जाने की अपील मंदिर समिति द्वारा की गई है । सवारी समापन के अवसर पर भगवान की आरती की जावेगी, तत्पश्चात रात्रि 8 बजे महाआरती एवं प्रसादी वितरण होगा । श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर समिति द्वारा नगरवासियों सेे सपरिवार सम्मिलित होने का अनुरोध किया गया है ।





राजेश नागर परिवार ने लिया लाभ

झाबुआ। श्रावण माह के तीसरे सोमवार को शहर के कृषि विभाग के पीछे बालाजी धाम पर स्थित हाटकेष्वर (धर्मेष्वर) धाम पर नागर ब्राम्हण समाज द्वारा रूद्राभिषेक का आयोजन किया गया। यह रूद्राभिषेक सोमवार को सुबह 8 से 10 बजे तक तक चला। बाद महाआरती कर प्रसादी वितरण हुआ।  
तीसरे सोमवार को रूद्राभिषेक के लाभार्थी समाज के राजेश नागर एवं लीना नागर परिवार रहा। रूद्रिभषेक विधि-विधान से पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने संपन्न करवाया। 2 घंटे तक सत्तत चले अभिषेक के आयोजन के बाद राजेश-लीना नागर परिवार ने हाटकेष्वर महादेव की आरती की। बाद सभी को प्रसादी वितरित की। इस अवसर पर मातंगी पारमार्थिक ट्रस्ट के प्रमुख राकेश त्रिवेदी के साथ नागर ब्राम्हण समाजजनों में सुभाष नागर, देवेन्द्र कोठारी, धर्मेन्द्र नागर, हेमेन्द्र नागर, नैना कोठारी, साधना कोठारी आदि उपस्थित थे।


पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देता है हरियाली अमावस्या पर्व- श्री त्रिवेदी

झाबुआ।  श्रावण के पावन माह में हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली में बिराजित भगवान गोवर्धननाथ का  हरितिमा से आच्छादित विशेष श्रृंगार करके उन्हे हरितिमा से सज्जित हिण्डोलें पर झुलाया गया । इस अवसर पर  मंदिर मे उपस्थित महिला श्रद्धालुओं द्वारा  पुष्टिमार्गीय कीर्तन किये गये । जैसे ही भगवान के पट खुले हरितिमा सें सजाये गये हिण्डोलें में भगवान गोवर्धननाथ को होले होले झुला झुलाया गया । मंदिर के पण्डित दिलीप आचार्य जहां भगवान का झुला दे रहे थे वही दुर्गेश पालीवाल भगवान को पंखा झल रहे थे ।  कीर्तनकार रमेश त्रिवेदी द्वारा हरियाली अमावस्या पर संगीत मय ’’ झुला तो डाल्या श्री वृंदावन बाग में जी, राधा ने झुला डारों, रेशम की डोर को जी, एजी कोई डारों है जमुना बाग’ जैसे कीर्तनों के माध्यम से पूरे वातावरण को वृंदावनमय कर दिया । करीब एक घंटे तक  भगवान के हिंडोलें के दर्शनों का क्रम चलता रहा तथा बडी संख्या में दर्शनार्थियों ने भगवान के हरियाली अमावस्या के विशेष श्रृंगार के दर्शनों का लाभ उठाया ।   
             इस अवसर पर यमुना मंडल की महिला सदस्याओं द्वारा अपनी सराहनीय भूमिका का निर्वाह किया गया । हरियाली अमावस्या के महत्व को प्रतिपादित करते हुए गोवर्धननाथ मंदिर के अधिकारी बृजबिहारी त्रिवेदी ने बताया कि  भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। पर्यावरण को संरक्षित करने की दृष्टि से ही पेड़-पौधों में ईश्वरीय रूप को स्थान देकर उनकी पूजा का विधान बताया गया है। जल में वरुण देवता की परिकल्पना कर नदियों व सरोवरों को स्वच्छ व पवित्र रखने की बात कही गई है। वायुमंडल की शुचिता के लिए वायु को देवता माना गया है। 
      वेदों व ऋचाओं में इनके महत्व को बताया गया है। शास्त्रों में पृथ्वी, आकाश, जल, वनस्पति एवं औषधि को शांत रखने को कहा गया है। इसका आशय यह है कि इन्हें प्रदूषण से बचाया जाए। यदि ये सब संरक्षित व सुरक्षित होंगे तभी हमारा जीवन भी सुरक्षित व सुखी रह सकेगा। इसी सन्देश को आत्मसात करते हुए पुरातन काल से हरियाली अमावस्या पर्व को मनाया जारहा है । आरती एवं प्रसादी वितरण के साथ हरियाली महोत्सव का कार्यक्रम समाप्त हुआ । ज्ञातव्य है कि पूरे श्रावण माह में भगवान के विभिन्न मनोरथों के तहत हिण्डोला दर्शन का हवेली में  सायंकाल 6-30 बजे से आयोजन हो रहा है।

Jhabua News- हरियाली अमावस्या पर हरितिमा से आच्छादित हिण्डोले में झुले भगवान गोवर्धननाथ

Jhabua News- हरियाली अमावस्या पर हरितिमा से आच्छादित हिण्डोले में झुले भगवान गोवर्धननाथ

’’झुलत है राधा सुंदरवर सावन सरस हिण्डोरे ’’ कीर्तन के साथ कामदा एकादशी को गोवर्धननाथ पंचमेवों के हिण्डोले में झुले

राजेंद्र सोनी , झाबुआ। नगर के हृदयस्थल स्थित श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली में श्रावण माह में श्रद्धा एवं भक्ति की बयार बह रही है । भगवान श्री गोवर्धननाथ जी का श्रावण माह की कामदा एकादशी पर सायंकाल 7 बजे से विशेष श्रृंगार किया जाकर उन्हे सूखे मेवे से बने हिण्डोले में झुलाया गया ।
      इस अवसर पर महिलाओं ने दर्शन के पूर्व कामदा एकादशी होने से  सामूहिक भजनों की प्रस्तुति दी । ’’ छबीलों गोपाल झुले छबिले हिंडोरना ’’झुलत है राधा सुंदरवर सावन सरस हिण्डोरे ’’ झुलत लाल श्री गोवर्धनधारी  शोभा बरनी न जाये ’’ जेसे संगीत मंय कीर्तन के साथ भगवान की छबि निहारने एवं दर्शन करने के लिये सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष श्रद्धालुओं ने भगवान गोवर्धननाथजी के दर्शन वंदन कर अपने आप को धन्य माना । भगवान गोवर्धननाथ को पंचमेवों से सजाये गये  हिण्डोलें में बिराजित करके मुखिया दिलीप आचार्य भगवान के श्री विग्रह को होले होले झुला दे रहे थे वही उन्हें परम्परागत तरिके से पंखा झल कर हवा की जारही थी । पण्डित रमेश त्रिवेदी , गोकुलेश आचार्य एवं कान्हा अरोडा द्वारा पुष्टिमार्गीय कीर्तनों के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं को कर्णप्रिय स्वरों में कीर्तन से आल्हादित किया गया । करीब एक घंटे से अधिक समय तक कामदा एकादशी पर्व होने के कारण भगवान गोवर्धननाथ जी ने अपने भक्तों को दर्शन दिये । श्री आचार्य ने बताया कि कामदा एकादशी से ही भगवान के जन्माष्टमी बधाई का भी पर्व प्रारंभ हो गया है । 
पुलिस  व्यवस्था की मांग की 
नगर के हृदयस्थल स्थित गोवर्धननाथजी की हवेली में श्रावण माह प्रति दिन हिण्डोला दर्शन मेंं सैकडो की संख्या में नगरवासी एवं श्रद्धालुजन भगवान के हिण्डोला दर्शन के लिये आते है । मुख्य मार्ग होने से यहां बेतरतीब यातायात एवं यही पर दुपहिया एवं अन्य वाहनों पार्किग के कारण दर्शन के आने वाली महिलाओं, एवं श्रद्धालुओं को थोडी थोडी देर में ट्राफिक जाम हो जाने के कारण परेशानिया उठाना पडती है तथा यहां इन दिनों हमेशा दुर्घटना होने की संभावनायें बनी रहती है ।  ऐसे में यातायात व्यवस्था को बनाये रखने की दृष्टि से यातायात पुलिस की पर्व को देखते हुए तैनाती की जाना जनहित में जरूरी है।
     इसके लिये मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालु राजेन्द्र अिर्ग्नहौत्री, जितेन्द्र शाह , शेष नारायण मालवीय, मोहनलाल माहेश्वरी, निरंजनसिंह चौहान, राधेश्याम पटेल, शरद पारिक कृष्णकांत शाह, अजय रामावत, श्रीकिशन माहेश्वरी,नरेन्द्र भाटी, यमुना मंडल की महिलाओं श्रीमती मंजु मिस्त्री, संगीता शाह, संगीता पारिक आदि ने पुलिस अधीक्षक  से मांग की है कि श्रावण माह में हिण्डोला दर्शन पर्व को देखते हुए श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली के पास यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिये यातायात पुलिस की ड्युटी लगाई जाने से  श्रद्धालुओ को परेशानियों का सामना नही करना पडेगा ।

Jhabua News- गोवर्धननाथ जी हवेली में प्रतिदिन सायंकाल हो रहे नये कलेवर मे हिण्डोला दर्शन

झाबुआ। भगवान भोलेनाथ के पावन तीर्थ स्थल देवझिरी में वैकुण्डठवासी पण्डित हरिप्रसाद अग्निहोत्री द्वारा स्थापित परम्परा को सतत रखते हुए उनके परिजनों के सहयोग द्वारा श्रावण के पवित्र माह में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष प्रथम श्रावण सोमवार दिनांक 22 जुलाई को भगवान संकट मोचन महादेव का विधि विधान से महाअभिषेक, अनुष्ठान पण्डित संत रूपादास के सानिध्य में प्रातः 10 से  दोपहर 2ः30 तक अभिषेक का कार्यक्रम होगा तत्पश्चात दोपहर 3 बजे महाआरती का आयोजन होगा तथा दोपहर 3ः30 प्रसादीत आयोजन होगा।  
Jhabua News- श्रावण सोमवार के पावन अवसर पर देवझिरी में होगा अभिषेक      उक्त जानकारी देते हुए समाजसेवी जितेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री एवं हर्ष भटट् ने बताया कि अभिषेक पंडित रमेश उपाध्याय भी पंडित भागवतजी शुक्ल उपाध्याय, पंडित जनार्दन शुक्ला पंडित जैमिनी शुक्ला, पंडित विलास सारोलकर, पंडित आनन्द शर्मा, पंडित शैलेन्द्र पंडिया, पंडिया गोलु चतुर्वैदी, पंडित निखिल त्रिवेदी, पंडित आचार्य नामदेव जी, द्वारा संम्पन्न किया जायेगा। जितेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री ने अंचल के सभी शिव भक्तों से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में  सपरिवार देवझिरी मंदिर में पधाकर श्रावण सोमवार पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त करें। 

भूखे को भोजन,प्यासे को पानी, घर घर कर कल्याण- के गगन भेदी नारे के साथ निकली भगवान वरूणदेव की शोभायात्रा

समाज की महासभा की बैठक में विशद चर्चा कर लिये गये निर्णय

झाबुआ। अरोडा खत्री सामज के आराध्य देव श्री वरूण भगवान की प्रतिमा की स्थापना के तृतीय वर्ष पर  अरोडा खत्री समाज द्वारा तुलसी गली स्थित  खेडापति हनुमान मंदिर स्थित भगवान वरूण देव का तृतीय स्थापना दिवस धुमधाम से मनाया गया । इस समारोह में नगर सहित खाचरौद, आलोट,रतलाम, नागदा, जावरा, भाबरा, रानापुर, जोबट, थांदला, उदयपुर, जोधपुर आदि स्थानों से परिवार सहित समाजजनों ने इस आयोजन में सहभागिता की । प्रातः 7-30 बजे  मंदिर में बिराजित भगवान वरूण देव का शास्त्रोक्त विधि से मंत्रोच्चार के साथ महा अभिषेक किया गया । इस अवसर पर बडी संख्या में समाज के पुरूष एवं महिलाओं ने भाग लिया । आरती के पश्चात नगर में भगवान वरूणदेव की रथ मे बिराजित करके भव्य शोभायात्रा निकाली गई । बेंड बाजो एवं पुष्पवर्षा के साथ पैलेस गार्डन से प्रारंभ हुई शोभायात्रा राजवाडा चौक ,राधाकृष्ण मार्ग, थांदला गेट, बाबेल चौराहा होते हुए तुलसी गली स्थित खेडापति हनुमान मंदिर पर समाप्त हुई । पूरी शोभायात्रा में भगवान वरूणदेव के जय जय कारो के साथ ही ’’ सूर सुरतान ने दरियावान, मुश्किल कर आसान, भूखे को भोजन,प्यासे को पानी, घर घर कर कल्याण, घर घर कर कल्याण, राजा राज करो, प्रजा चेन करों, प्राणीमात्र का कल्याण करो, जय दरियाव जय दरियाव ’’ के गगन भेदी नारे लगाये जारहे थे । शोभायात्रा का सभी समाजजनों की ओर से स्वागत किया गया ।   


ठीक 12 बजे भगवान वरूणदेव की आरती में सैकेडो की संख्या में  समाजजनों ने भाग लिया तथा प्रसादी का वितरण किया गया । इस आयोजन में अतिथिगण’ के रूप में’ धनराज खत्री, अध्यक्ष अखिल भारतीय खत्री महासभा,’ ज्योतिप्रकाश छाबड़ा, संरक्षक राजस्थान अरोड़ा-खत्री सर्वोच्च समिति,विजय तोलवानी, अध्यक्ष राजस्थान अरोड़ा-खत्री सर्वोच्च समिति,हरिनारायण अरोड़ा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश अरोड़ा-खत्री महासभा’ तथा कुंदन अरोडा राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश महा सचिव तथा सरंक्षक सत्यनारायण अरोडा विशेष रूप से शामील हुए । महामंगल आरती के बाद पैलेस गार्डन मे समाजजनों के लिये सहभोज का आयोजन किया गया । दोपहर 1 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन पैलेस गार्डन में रखा गया जिसमें समाज की युवा प्रतिभाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर तालिया बटोरी । 
’महासभा की बैठक’
अरोडा खत्री समाज के सत्यनारायण अरोडा ने जानकारी देते हुए बताया कि पैलेस गार्डन में दोपहर 3.30 बजे मध्यप्रदेश अरोड़ा-खत्री महासभा कार्यकारिणी की बैठक होगी संपन्न हुई जिसमें अनेक महत्वपूर्ण मुद्दो पर चर्चा, सुझाव प्राप्त करके समाज हित में निर्णय लिये गये । महासभा की बैठक के बाद मध्यप्रदेश अरोड़ा-खत्री नवयुवक मंडल द्वारा ’समाज मे नवयुवक मंडल का योगदान व भूमिका’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें युवचा तरूणाई ने अपने बेवाक विचार व्यक्त किये । आभार के साथ आयोजन का समापन किया गया । 

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया

Jhabua News- अरोडा खत्री समाज ने भगवान वरूणदेव की प्रतिमा स्थापना का तृतीय समारोह आयोजित किया

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दीप यज्ञ एवं महाआरती का होगा आयोजन

झाबुआ। मां गंगा दशमी और वेद माता गायत्रीजी की जयंती (अवतरण) दिवस पर आज 12 जून, बुधवार को स्थानीय कॉलेज मार्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। इस दिन मुख्य रूप से शाम को मंदिर में दीप यज्ञ एवं महाआरती का आयोजन रखा गया है।  
यह जानकारी देते हुए गायत्री शक्तिपीठ से जुड़ी नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने बताया कि मंदिर में बुधवार को अलसुबह 4.30 बजे गायत्री माताजी का महाभिषेक पश्चात् 7.30 बजे मंगला आरती होगी। 6 से 8 बजे के बीच साधकों द्वारा मंदिर परिसर में बैठकर गायत्री महामंत्र का जाप (उच्चारण) भी किया जाएगा। बाद 9 से 12 बजे के बीच गर्भवती महिलाओं के गभोत्सव संस्कार गायत्री परिवार के जिला समन्वयक पं. घनष्याम बैरागी द्वारा संपन्न करवाएं जाएंगे। शाम 7 बजे दीप यज्ञ होगा एवं बाद रात 8 बजे महाआरती का आयोजन रखा गया है। तत्पष्चात् प्रसादी वितरण होगा।
वेद माता गायत्रीजी की महिमा
नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने मां गायत्रीजी की महिमा बताई कि गायत्री माता वेदो की माता है। उनसे संपूर्ण वेद आदि ज्ञान प्रकट हुआ है। उन्हें देव माता भी कहा गया है, यहीं माता समस्त देवताओं की उत्पत्ति करती है। उन्हें जगत माता भी कहा गया है, यहीं समस्त विष्व की जननी और पालन करने वाली है। गायत्री मंत्रजी का देवता सविता (सूर्य) है। गायत्री साधक सविता के तेज का ध्यान करने से भी महातेजस्वी बन जाता है। गायत्री मंत्रजी के ऋषि विष्वामित्रजी है। स्वयं भगवान श्री रामजी एवं श्री कृष्णजी भी गायत्री मंत्र का नित्य जाप करते थे। ऐसी मां गायत्रीजी की साधकों द्वारा आराधना-भक्ति-पूजा-अर्चना करने से समस्त संकटों एवं विपत्तियो का नाश होता है एवं घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मप्र के 51 हजार स्थानों पर एक साथ एक समय पर होंगे दीपयज्ञ, झाबुआ जिले में 1 हजार स्थानों पर होगा आयोजन
अखिल विष्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में देश से आतंकवाद-भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं खत्म हो, विष्व शांति बनी रहे और भारत विष्व गुरू बनने की ओर अग्रसर हो, इस हेतु गायत्री परिवार द्वारा आज बुधवार को गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा पर मप्र में 51 हजार स्थानों पर दीप यज्ञ का आयोजन रखा गया है। इसी क्रम में झाबुआ जिले में करीब 1 हजार स्थानों पर यह आयोजन होगा। जिसकी तैयारी गायत्री परिवार गायत्री शक्तिपीठ कॉलेज मार्ग झाबुआ ने पूर्ण कर ली है।
गायत्री परिवार नारी जागरण अभियान की जिला संयोजिका श्रीमती नलिनी बैरागी ने बताया कि गायत्री परिवार की ओर से आध्यात्मिक पहल के रूप में यह आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के गांव-कस्बों एवं शहरों में यह आयोजन होगा। इस आयोजन की खासियत यह रहेगी कि एक साथ एक समय पर ही पूरे प्रदेश में दीप यज्ञ किया जाएगा। इसी के तहत प्रदेश के हर जिले को गायत्री जयंती पर एक हजार स्थानों पर दीप यज्ञ का आयोजन करने जिम्मेदारी सौंपी गई है। गायत्री शक्तिपीठ कॉलेज मार्ग के तत्वावधान में संपूर्ण जिले में जिसमें रानापुर, मांंडलीनाथू, समोई, पारा, कालीदेवी, मेघनगर, कल्याणपुरा, थांदला, नौगांवा, खवासा, पेटलावद बामनिया, सारंगी, झकनावदा आदि स्थानों पर शक्तिपीठ से जुड़े गायत्री परिजनों द्वारा दीप यज्ञ संपन्न करवाएं जाएंगे। 
दीप यज्ञ बाद होगी महाआरती
दीप यज्ञ का समय देर शाम 7.30 से 8.30 बजे के बीच होगा। बाद महाआरती कर प्रसादी वितरण होगा। श्रीमती नलिनी बैरागी ने झाबुआ जिले के समस्त साधकगणों से इस दिन अपने घरों पर भी शाम 7 से 8 के बीज पांच-पांच दीपक प्रज्जवलित कर गायत्री महामंत्र का जाप करने हेतु आग्रह किया है। 

जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकल जाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा - श्री सतीशकुमार शर्मा

श्रीमद भागवत कथा में प्रहलाद चरित्र की विशद व्याख्या की गई

झाबुआ । भगवान गोवर्धननाथ जी जिस धरा पर विराजित है,वहां गोवर्धननाथजी की हवेली में 11 दिवसीय 151 पाटोत्सव के दौरान पैलेस गार्डन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से पण्डित सतीश जी शर्मा शास्त्री जी के श्रीमुख से गोस्वामी श्री दिव्येश कुमारजी की दीव्य उपस्थिति में भक्त प्रहलाद एवं नरसिंह अवतार की कथामृत का रसपान कराते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि जो माता अपने पुत्र को संस्कारित बनाने का कार्य करती है उसका पुत्र पूरे कुल को तारने वाला होता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखे तो समय बहुत ही कीमती होता है किन्तु समय को पैसों के बल पर खरीदा नही जासकता है । आज हमारे देश में भारतीय संस्कृति को भुल कर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने ही होड से लगी हुई है । जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकलजाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा । मानव जन्म एक बार मिलता है इसलिये इसे ऐसा बनाओं को हरिकृपा सदैव मिलती रहे । भगवान श्री हरि ठाकुर के चरणों का सदा वंदन पूजन करों। इनके चरणों के चार चिन्ह  का हमे चिंतन करना चाहिये । श्री हरि के चरण में वज्र का चिन्ह हम प्रेरणा देता है कि वज्र के समान कठोर बनों, अंकुश का चिन्ह हमे प्रेरणा देता है कि अपने मन को सदा वश में रखो तथा उस पर अंकुश रखो । घ्वज का चिन्ह हमें बताता है कि जीवनपथ पर सदैव सदकार्य करते हुए विजय पथ को अंगीकार करों । एवं कमल का चिन्ह बताता है कि हमारा हृदय सदा कोमलता एवं संवेदनशीलता से परिपूर्ण बना रहें ।  
         भक्त प्रहलाद का वृतांत सुनाते हुए पण्डित सतीशजी ने कहा कि कश्यप नामक ऋषि एवं उनकी पत्नी दिति को 2 पुत्र हुए जिनमें से एक का नाम हिरण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकश्यप था। हिरण्याक्ष को भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह रूप धरकर मार दिया था। अपने भाई की मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकश्यप ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया। सहस्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, लोकपालों को मारकर भगा दिया और स्वतः संपूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरुपाय हो गए थे। वे असुर हिरण्यकश्यप को किसी प्रकार से पराजित नहीं कर सकते थे। ब्रह्माजी की हिरण्यकश्यप कठोर तपस्या करता है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी वरदान देते हैं कि उसे न कोई घर में मार सके न बाहर, न अस्त्र से और न शस्त्र से, न दिन में मरे न रात में, न मनुष्य से मरे न पशु से, न आकाश में न पृथ्वी में। इस वरदान के बाद हिरण्यकश्यप ने प्रभु भक्तों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, लेकिन भक्त प्रहलाद के जन्म के बाद हिरण्यकश्यप उसकी भक्ति से भयभीत हो जाता है, उसे मृत्युलोक पहुंचाने के लिए प्रयास करता है। इसके बाद भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लेते हैं और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं।
          भगवान नरसिंह में वे सभी लक्षण थे, जो हिरण्यकश्यप के मृत्यु के वरदान को संतुष्ट करते थे। भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का नाश हुआ किंतु एक और समस्या खड़ी हो गई। भगवान नरसिंह इतने क्रोध में थे कि लगता था, जैसे वे प्रत्येक प्राणी का संहार कर देंगे। यहां तक कि स्वयं प्रह्लाद भी उनके क्रोध को शांत करने में विफल रहा। सभी देवता भयभीत हो भगवान ब्रह्मा की शरण में गए। परमपिता ब्रह्मा उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे प्रार्थना की कि वे अपने अवतार के क्रोध शांत कर लें किंतु भगवान विष्णु ने ऐसा करने में अपनी असमर्थता जतलाई। भगवान विष्णु ने सबको भगवान शंकर के पास चलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चूंकि भगवान शंकर उनके आराध्य हैं इसलिए केवल वही नरसिंह के क्रोध को शांत कर सकते हैं। और कोई उपाय न देखकर सभी भगवान शंकर के पास पहुंचे। 
       देवताओं के साथ स्वयं परमपिता ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर भगवान शिव नरसिंह का क्रोध शांत करने उनके समक्ष पहुंचे किंतु उस समय तक भगवान नरसिंह का क्रोध सारी सीमाओं को पार कर गया था। साक्षात भगवान शंकर को सामने देखकर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ बल्कि वे स्वयं भगवान शंकर पर आक्रमण करने दौड़े। उसी समय भगवान शंकर ने एक विकराल ऋषभ का रूप धारण किया और भगवान नरसिंह को अपनी पूंछ में लपेटकर खींचकर पाताल में ले गए। काफी देर तक भगवान शंकर ने भगवान नरसिंह को वैसे ही अपने पूंछ में जकड़कर रखा। अपनी सारी शक्तियों और प्रयासों के बाद भी भगवान नरसिंह उनकी पकड़ से छूटने में सफल नहीं हो पाए। अंत में शक्तिहीन होकर उन्होंने ऋषभ रूप में भगवान शंकर को पहचाना और तब उनका क्रोध शांत हुआ। इसे देखकर भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर ऋषभरूपी भगवान शंकर ने उन्हें मुक्त कर दिया। इस प्रकार देवताओं और प्रह्लाद के साथ-साथ सभी सत्पात्रों को 2 महान अवतारों के दर्शन हुए। हरिण्याक्ष और हिरण्यकश्यप तथा उनकी बहिन होलिका वर्तमान की राजनीति के षड्यंत्रों के प्रतीक हैं। वर्तमान संदर्भों से इन प्रतीकों का गहरा रिश्ता है।  तीसरे  दिन की कथा के विराम पर पूज्य दिव्येश कुमारजी द्वारा श्रीमद भागवतजी की आरती की गई । सैकडो की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती के बाद प्रसादी का लाभ लिया ।
पनघट मनोरथ के दर्शनों के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड
श्रीमदभागवत कथा के विराम के बाद रात्री 8 बजे से शयन समय पर ‘‘गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली’’ भजन के साथ श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में आकर्षक झांकिया लगा कर पनघट, जलाशय के प्रतिकात्मक सुंदर आयोजन किया गया । भगवान गोवर्धननाथजी, श्री गोपालजी एवं श्री राधे रानी की प्रतिमाओं को  श्रृंगारित करके बनाये गये महल में बिराजित किया गया जहां  पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज भगवान को पंखा झलरही थी । स्वयं गोस्वामी दिव्येशकुमारजी महाराज संगीतके साथ ’’ गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली ’’ भजन की प्रस्तुति दे रहे थे । सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष कतार बद्ध होकर भगवान की सुंदर झांकी को निहार कर भगवान के दर्शन लाभ लेकर कृतार्थ दिखाई दिये । शयन आरती के बाद भगवान के कपाट बंद हो गये ।
नन्द उत्सव का हुआ उल्लास के साथ आयोजन
रविवार  को दोपहर 12-30 बजे दिनेश सक्सेना के सौजन्य से राजभोग समय पर ’हेरी है आज नन्दराय के आनंद भयो’ के साथ नंद महोत्सव धुमधाम से मनाया गया। जूज्य दिव्येशकुमार जी द्वारा झुले मे भगवान की त्रिप्रतिमाओं को बिराजित कर झुला झुलाते हुए परम्परागत खिलौनों के द्वारा भगवान का लाड लडाया गया। वही पूज्य पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज द्वारा भी भगवान के झुले के पास नन्दोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान किये गये । रात्री शयन समय कमल तलाई मनोरथ दर्शन का अलौकिक कार्यक्रम आयोजित किया गया । राज भोज दर्शन के बाद बजे गोस्वामी दिव्येशकुमारजी के कर कमलों से श्रद्धालुओ को तुलसी के पौधों का वितरण भी किया गया ।






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आशा न्यूज़ चैनल की शुरुवात पर बधाई , कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अंक पड़ा था तीखे तेवर , निडर पत्रकारिता इस न्यूज़ चैनल की प्रथम प्राथमिकता है जो प्रकाशित उस अंक में मुझे प्रतीत हुआ , नई शुरुवात के लिए बधाई और शुभकामनाये.- कलावती भूरिया , पुर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

मुझे झाबुआ आये कुछ ही समय हुआ है , अभी पिछले सप्ताह ही एक शासकीय स्कूल में भारी अनियमितता की जानकारी मुझे आशा न्यूज़ द्वारा मिली थी तब सम्बंधित अधिकारी को निर्देशित कर पुरे मामले को संज्ञान में लेने का निर्देश दिया गया था समाचार पत्रो का कर्त्तव्य आशा न्यूज़ द्वारा भली भाति निर्वहन किया जा रहा है निश्चित है की भविष्य में यह आशा न्यूज़ जिले के लिए अहम कड़ी बनकर उभरेगा !!- डॉ अरुणा गुप्ता , पूर्व कलेक्टर झाबुआ

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