Articles by "गोवर्धननाथ मंदिर"

1 26 january 1 abvp 52 Administrative 1 b4 cinema 1 balaji dhaam 1 bhagoria 1 bhagoria festival jhabua 2 bjp 1 cinema hall jhabua 35 city 16 crime 22 cultural 37 education 2 election 15 events 14 Exclusive 2 Famous Place 6 gopal mandir jhabua 17 Health and Medical 92 jhabua 5 jhabua crime 1 Jhabua History 1 matangi 3 Movie Review 5 MPPSC 1 National Body Building Championship India 4 photo gallery 19 politics 2 ram sharnam jhabua 57 religious 5 religious place 2 Road Accident 3 sd academy 72 social 14 sports 2 tourist place 13 Video 2 Visiting Place 11 Women Jhabua 2 अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन 1 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 1 अंगूरी बनी अंगारा 1 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 15 अपराध 1 अल्प विराम कार्यक्रम 6 अवैध शराब 1 आदित्य पंचोली 1 आदिवासी गुड़िया 1 आरटीओं 1 आलेख 1 आवंला नवमी 4 आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट 1 ईद 1 उत्कृष्ट सड़क 23 ऋषभदेव बावन जिनालय 3 एकात्म यात्रा 2 एमपी पीएससी 1 कलाल समाज 1 कलावती भूरिया 3 कलेक्टर 15 कांग्रेस 6 कांतिलाल भूरिया 1 कार्तिक पूर्णिमा 2 किन्नर सम्मेलन 2 कृषि 1 कृषि महोत्सव 3 कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ 1 केरोसीन 2 क्रिकेट टूर्नामेंट 4 खबरे अब तक 1 खेडापति हनुमान मंदिर 16 खेल 1 गडवाड़ा 1 गणगौर पर्व 1 गर्मी 1 गल पर्व 8 गायत्री शक्तिपीठ 2 गुड़िया कला झाबुआ 1 गोपाल पुरस्कार 4 गोपाल मंदिर झाबुआ 1 गोपाष्टमी 1 गोपेश्वर महादेव 14 घटनाए 1 चक्काजाम 4 जनसुनवाई 1 जय आदिवासी युवा संगठन 5 जय बजरंग व्यायाम शाला 1 जयस 7 जिला चिकित्सालय 3 जिला जेल 3 जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ 1 जीवन ज्योति हॉस्पिटल 9 जैन मुनि 7 जैन सोश्यल गुुप 2 झकनावदा 98 झाबुआ 1 झाबुआ इतिहास 2 झाबुआ का राजा 3 झाबुआ पर्व 10 झाबुआ पुलिस 1 झूलेलाल जयंती 1 तुलसी विवाह 6 थांदला 3 दशहरा 1 दस्तक अभियान 1 दिल से कार्यक्रम 3 दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि 1 दीपावली 3 देवझिरी 47 धार्मिक 5 धार्मिक स्थल 10 नगरपालिका परिषद झाबुआ 5 नवरात्री 4 नवरात्री चल समारोह 4 नि:शुल्क स्वास्थ्य मेगा शिविर 1 निर्वाचन आयोग 6 परिवहन विभाग 2 पर्यटन स्थल 3 पल्स पोलियो अभियान 8 पारा 1 पावर लिफ्टिंग 16 पेटलावद 1 प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय 3 प्रतियोगी परीक्षा 1 प्रधानमंत्री आवास योजना 37 प्रशासनिक 1 बजरंग दल 2 बाल कल्याण समिति 1 बेटी बचाओं अभियान 2 बोहरा समाज 1 ब्लू व्हेल गेम 1 भगोरिया पर्व 1 भगोरिया मेला 3 भगौरिया पर्व 1 भजन संध्या 1 भर्ती 2 भागवत कथा 30 भाजपा 1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान 1 भारतीय जैन संगठना 3 भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 1 भावांतर योजना 2 मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग 1 मल्टीप्लेक्स सिनेमा 2 महाशिवरात्रि 1 महिला आयोग 1 महिला एवं बाल विकास विभाग 1 मिशन इन्द्रधनुष 1 मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना 2 मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान 9 मुस्लिम समाज 1 मुहर्रम 3 मूवी रिव्यु 8 मेघनगर 1 मेरे दीनदयाल सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता 2 मोड़ ब्राह्मण समाज 1 मोदी मोहल्ला 1 मोहनखेड़ा 3 यातायात 1 रक्तदान 1 रंगपुरा 2 राजगढ़ 13 राजनेतिक 10 राजवाडा चौक 11 राणापुर 5 रामशंकर चंचल 1 रामा 2 रायपुरिया 1 राष्ट्रीय एकता दिवस 2 राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप 4 राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना 1 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण 1 रोग निदान 3 रोजगार मेला 16 रोटरी क्लब 2 लक्ष्मीनगर विकास समिति 1 लाडली शिक्षा पर्व 2 वनवासी कल्याण परिषद 1 वरदान नर्सिंग होम 1 वाटसएप 1 विधायक 4 विधायक शांतिलाल बिलवाल 1 विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस 2 विश्व विकलांग दिवस 2 विश्व हिन्दू परिषद 1 वेलेंटाईन डे 3 व्यापारी प्रीमियर लीग 1 शरद पूर्णिमा 5 शासकीय महाविद्यालय झाबुआ 35 शिक्षा 1 श्रद्धांजलि सभा 3 श्री गौड़ी पार्श्वनाथ जैन मंदिर 11 सकल व्यापारी संघ 2 सत्यसाई सेवा समिति 1 संपादकीय 2 सर्वब्राह्मण समाज 4 साज रंग झाबुआ 40 सामाजिक 1 सारंगी 14 सांस्कृतिक 1 सिंधी समाज 1 सीपीसीटी परीक्षा 3 स्थापना दिवस 4 स्वच्छ भारत मिशन 5 हज 3 हजरत दीदार शाह वली 7 हाथीपावा 1 हिन्दू नववर्ष 5 होली झाबुआ
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पुष्टिमार्ग के प्राकट्योत्सव के रूप  मे मनाई परित्रा एकादशी

नित नये मनोरथ के हिण्डोला दर्शन का मिल रहा लाभ

झाबुआ । श्रावण माह में भगवान श्री गोवर्धननाथजी को नित नये कलेवर में गोवर्धननाथजी की हवेली में  सायंकाल हिण्डोले  पर झुलाने का क्रम चल रहा है । रविवार को पवित्रा एकादशी के पावन दिन को भगवान श्री गोवर्धननाथजी के बाल स्वरूप को पवित्रा के रेशमी धागो से बने हिण्डोले में झुलाया गया । भगवान गोवर्धननाथजी की इस अनुपम हिण्डोला दर्शन के लिये सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष दर्शनार्थियों ने भगवान के हिण्डोला दर्शन का लाभ उठाया । 
‘पवित्रा परहत राजकुमार तीन्यों लोक पवित्र किये है श्री विट्ठल गिरिधार ।  
अतिही पवित्र  प्रिया बहु बिलकत निरख मगन भयो मार । 
रमानन्द पवित्र की माला  गोकूल की नीज नार ।’’  
पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीडजैेसे  पुष्टिमार्गीय संगीत मय कीर्तन के साथ सभी श्रद्धालुजन भगवान को नतमस्तक हो रहे थे । पवित्रा एकादशी के बारे में जानकारी देते हुए गोस्वामी  श्री दिव्येशकुमारजी महाराज ने पवित्रा एकादशी के माहत्म्य को बताते हुए कहा कि पवित्रा एकादशी पुष्टिमार्ग का प्राकट्य दिवस माना जाता है । इस एकादशी की मध्यरात्री को साक्षात भगवान श्रीनाथजी  ने प्रकट होकर पूज्य श्री वल्लभाचार्यजी  से ब्रह्म संबंध स्थापित कर महामंत्र एवं जगतकल्याण का सन्देश दिया था । इस मंत्र के द्वारा भक्त को भगवत सेवा का अधिकार प्राप्त हो जाता है । पवित्रा एकादशी को 307 केशरिया रंग के तार अर्पित करके मिश्री का भोग अर्पित किया था तथा मदराष्टक स्त्रोत से भगवान श्रीनाथजी के हर अंग का वर्णन किया गया था । पवित्रा एकादशी के दिन  ठाकुरजी ने  ब्रह्म संबंध  का सन्देश दामोदरदासजी हरदानी को दिया था इसलिये पवित्रा एकादशी के दूसरे दिन द्वादशी का दिवस गुरू को  समर्पित होता है । पुष्टिमार्ग में पवित्रा एकादशी का सबसे अधिक महत्व होता है और इस दिन भगवान गोवर्धननाथजी के दर्शन मात्र से ही  सर्व मनोकामनायें पूरी होती है तथा आत्मीय शांति प्राप्त होती है। इसी पूरातन परम्परा को अभी तक पुष्टिमार्ग में  बनाया रखा है । 
श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में  भगवान के पवित्रा हिण्डोले  में बिराजित होकर झुलने की मनोहारी छबि को निहारने के लिये पूरा मंदिर खचाखच भर गया तथा भगवान के दर्शन एवं एक झलक पाने के लिये  श्रद्धालुजनो मे काफी उत्साह दिखाई दिया । मंदिर के मुखिया दिलीप आचार्य द्वारा भगवान के हिण्डोले को होले होले झुला झुलाया गया तथा भगवान को पंखा झला गया । वही पण्डित रमेश त्रिवेदी, गोकूलेश आचार्य एवं कान्हा अरोडा द्वारा संगीत के साथ ’’ पवित्रा पहीरे  हिण्डोला झुले, श्यामा श्याम बराबर बैठे निखट ही समजतुले, ललीतादि सब सखी झुलावत ठाडी खंभ अनुकेले जैसे कीर्तन प्रस्तुत करके पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया ।  करीब एक घंटे से अधिक समय तक भगवान गोवर्धननाथजी के पवित्रा हिण्डोले के दर्शनलाभ श्रद्धालुओं ने प्राप्त किये । इस अवसर पर फलों की प्रसादी का वितरण भी किया गया ।  
पुलिस प्रशासन ने नही लगाई यातायात पुलिस की ड्युटी
श्रावण माह में श्री गोवर्धननाथ जी के मंदिर में प्रति दिन भगवान के हिण्डोला दर्शन का आयोजन हो रहा है । जिसमें सैकडो की संख्या में  महिला एवं पुरूष दर्शनार्थी सायंकाल को हिण्डोला दर्शन के लिये मंदिर आते है। श्रावण माह में सायंकाल को यातायात को नियंत्रित करने तथा मंदिर के आसपास अव्यवस्थित पार्किग को लेकर श्रद्धालुजनों ने पुलिस अधीक्षक से मंदिर के बाहर यातायात नियंत्रित करने के लिये पुलिस की ड्युटी लगाये जाने की मांग की थी । मुख्य बाजार में उक्त मंदिर स्थित होने से  यहां बार बार जाम वाली स्थिति निर्मित हो जाती है ऐसे में दुर्घटनाओं की संभावनायेंब नी रहती है । हिण्डोला पर्व जन्माष्टमी तक जारी रहता है । ऐसे मे मंदिर समिति के साथ ही यमुना मंडल की महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया है कि मंदिर के आसपास दुपहिया एवं चार पहिया वाहनों की व्यवस्थित पार्किग के साथ ही यातायात पुलिस की यहां व्यवस्था बनाये रखने की दृष्टि से ड्युटी लगाई जावे ताकि दर्शनार्थियों को परेशान नही होना पडें ।

पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीडपवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड

पवित्रा एकादशी को गोवर्धननाथजी के हिण्डोला दर्शन के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड

पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देता है हरियाली अमावस्या पर्व- श्री त्रिवेदी

झाबुआ।  श्रावण के पावन माह में हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली में बिराजित भगवान गोवर्धननाथ का  हरितिमा से आच्छादित विशेष श्रृंगार करके उन्हे हरितिमा से सज्जित हिण्डोलें पर झुलाया गया । इस अवसर पर  मंदिर मे उपस्थित महिला श्रद्धालुओं द्वारा  पुष्टिमार्गीय कीर्तन किये गये । जैसे ही भगवान के पट खुले हरितिमा सें सजाये गये हिण्डोलें में भगवान गोवर्धननाथ को होले होले झुला झुलाया गया । मंदिर के पण्डित दिलीप आचार्य जहां भगवान का झुला दे रहे थे वही दुर्गेश पालीवाल भगवान को पंखा झल रहे थे ।  कीर्तनकार रमेश त्रिवेदी द्वारा हरियाली अमावस्या पर संगीत मय ’’ झुला तो डाल्या श्री वृंदावन बाग में जी, राधा ने झुला डारों, रेशम की डोर को जी, एजी कोई डारों है जमुना बाग’ जैसे कीर्तनों के माध्यम से पूरे वातावरण को वृंदावनमय कर दिया । करीब एक घंटे तक  भगवान के हिंडोलें के दर्शनों का क्रम चलता रहा तथा बडी संख्या में दर्शनार्थियों ने भगवान के हरियाली अमावस्या के विशेष श्रृंगार के दर्शनों का लाभ उठाया ।   
             इस अवसर पर यमुना मंडल की महिला सदस्याओं द्वारा अपनी सराहनीय भूमिका का निर्वाह किया गया । हरियाली अमावस्या के महत्व को प्रतिपादित करते हुए गोवर्धननाथ मंदिर के अधिकारी बृजबिहारी त्रिवेदी ने बताया कि  भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। पर्यावरण को संरक्षित करने की दृष्टि से ही पेड़-पौधों में ईश्वरीय रूप को स्थान देकर उनकी पूजा का विधान बताया गया है। जल में वरुण देवता की परिकल्पना कर नदियों व सरोवरों को स्वच्छ व पवित्र रखने की बात कही गई है। वायुमंडल की शुचिता के लिए वायु को देवता माना गया है। 
      वेदों व ऋचाओं में इनके महत्व को बताया गया है। शास्त्रों में पृथ्वी, आकाश, जल, वनस्पति एवं औषधि को शांत रखने को कहा गया है। इसका आशय यह है कि इन्हें प्रदूषण से बचाया जाए। यदि ये सब संरक्षित व सुरक्षित होंगे तभी हमारा जीवन भी सुरक्षित व सुखी रह सकेगा। इसी सन्देश को आत्मसात करते हुए पुरातन काल से हरियाली अमावस्या पर्व को मनाया जारहा है । आरती एवं प्रसादी वितरण के साथ हरियाली महोत्सव का कार्यक्रम समाप्त हुआ । ज्ञातव्य है कि पूरे श्रावण माह में भगवान के विभिन्न मनोरथों के तहत हिण्डोला दर्शन का हवेली में  सायंकाल 6-30 बजे से आयोजन हो रहा है।

Jhabua News- हरियाली अमावस्या पर हरितिमा से आच्छादित हिण्डोले में झुले भगवान गोवर्धननाथ

Jhabua News- हरियाली अमावस्या पर हरितिमा से आच्छादित हिण्डोले में झुले भगवान गोवर्धननाथ

’’झुलत है राधा सुंदरवर सावन सरस हिण्डोरे ’’ कीर्तन के साथ कामदा एकादशी को गोवर्धननाथ पंचमेवों के हिण्डोले में झुले

राजेंद्र सोनी , झाबुआ। नगर के हृदयस्थल स्थित श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली में श्रावण माह में श्रद्धा एवं भक्ति की बयार बह रही है । भगवान श्री गोवर्धननाथ जी का श्रावण माह की कामदा एकादशी पर सायंकाल 7 बजे से विशेष श्रृंगार किया जाकर उन्हे सूखे मेवे से बने हिण्डोले में झुलाया गया ।
      इस अवसर पर महिलाओं ने दर्शन के पूर्व कामदा एकादशी होने से  सामूहिक भजनों की प्रस्तुति दी । ’’ छबीलों गोपाल झुले छबिले हिंडोरना ’’झुलत है राधा सुंदरवर सावन सरस हिण्डोरे ’’ झुलत लाल श्री गोवर्धनधारी  शोभा बरनी न जाये ’’ जेसे संगीत मंय कीर्तन के साथ भगवान की छबि निहारने एवं दर्शन करने के लिये सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष श्रद्धालुओं ने भगवान गोवर्धननाथजी के दर्शन वंदन कर अपने आप को धन्य माना । भगवान गोवर्धननाथ को पंचमेवों से सजाये गये  हिण्डोलें में बिराजित करके मुखिया दिलीप आचार्य भगवान के श्री विग्रह को होले होले झुला दे रहे थे वही उन्हें परम्परागत तरिके से पंखा झल कर हवा की जारही थी । पण्डित रमेश त्रिवेदी , गोकुलेश आचार्य एवं कान्हा अरोडा द्वारा पुष्टिमार्गीय कीर्तनों के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं को कर्णप्रिय स्वरों में कीर्तन से आल्हादित किया गया । करीब एक घंटे से अधिक समय तक कामदा एकादशी पर्व होने के कारण भगवान गोवर्धननाथ जी ने अपने भक्तों को दर्शन दिये । श्री आचार्य ने बताया कि कामदा एकादशी से ही भगवान के जन्माष्टमी बधाई का भी पर्व प्रारंभ हो गया है । 
पुलिस  व्यवस्था की मांग की 
नगर के हृदयस्थल स्थित गोवर्धननाथजी की हवेली में श्रावण माह प्रति दिन हिण्डोला दर्शन मेंं सैकडो की संख्या में नगरवासी एवं श्रद्धालुजन भगवान के हिण्डोला दर्शन के लिये आते है । मुख्य मार्ग होने से यहां बेतरतीब यातायात एवं यही पर दुपहिया एवं अन्य वाहनों पार्किग के कारण दर्शन के आने वाली महिलाओं, एवं श्रद्धालुओं को थोडी थोडी देर में ट्राफिक जाम हो जाने के कारण परेशानिया उठाना पडती है तथा यहां इन दिनों हमेशा दुर्घटना होने की संभावनायें बनी रहती है ।  ऐसे में यातायात व्यवस्था को बनाये रखने की दृष्टि से यातायात पुलिस की पर्व को देखते हुए तैनाती की जाना जनहित में जरूरी है।
     इसके लिये मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालु राजेन्द्र अिर्ग्नहौत्री, जितेन्द्र शाह , शेष नारायण मालवीय, मोहनलाल माहेश्वरी, निरंजनसिंह चौहान, राधेश्याम पटेल, शरद पारिक कृष्णकांत शाह, अजय रामावत, श्रीकिशन माहेश्वरी,नरेन्द्र भाटी, यमुना मंडल की महिलाओं श्रीमती मंजु मिस्त्री, संगीता शाह, संगीता पारिक आदि ने पुलिस अधीक्षक  से मांग की है कि श्रावण माह में हिण्डोला दर्शन पर्व को देखते हुए श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली के पास यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिये यातायात पुलिस की ड्युटी लगाई जाने से  श्रद्धालुओ को परेशानियों का सामना नही करना पडेगा ।

Jhabua News- गोवर्धननाथ जी हवेली में प्रतिदिन सायंकाल हो रहे नये कलेवर मे हिण्डोला दर्शन

जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकल जाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा - श्री सतीशकुमार शर्मा

श्रीमद भागवत कथा में प्रहलाद चरित्र की विशद व्याख्या की गई

झाबुआ । भगवान गोवर्धननाथ जी जिस धरा पर विराजित है,वहां गोवर्धननाथजी की हवेली में 11 दिवसीय 151 पाटोत्सव के दौरान पैलेस गार्डन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से पण्डित सतीश जी शर्मा शास्त्री जी के श्रीमुख से गोस्वामी श्री दिव्येश कुमारजी की दीव्य उपस्थिति में भक्त प्रहलाद एवं नरसिंह अवतार की कथामृत का रसपान कराते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि जो माता अपने पुत्र को संस्कारित बनाने का कार्य करती है उसका पुत्र पूरे कुल को तारने वाला होता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखे तो समय बहुत ही कीमती होता है किन्तु समय को पैसों के बल पर खरीदा नही जासकता है । आज हमारे देश में भारतीय संस्कृति को भुल कर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने ही होड से लगी हुई है । जो समय को व्यर्थ ही खोता है, वह अज्ञानी होता है। समय निकलजाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा । मानव जन्म एक बार मिलता है इसलिये इसे ऐसा बनाओं को हरिकृपा सदैव मिलती रहे । भगवान श्री हरि ठाकुर के चरणों का सदा वंदन पूजन करों। इनके चरणों के चार चिन्ह  का हमे चिंतन करना चाहिये । श्री हरि के चरण में वज्र का चिन्ह हम प्रेरणा देता है कि वज्र के समान कठोर बनों, अंकुश का चिन्ह हमे प्रेरणा देता है कि अपने मन को सदा वश में रखो तथा उस पर अंकुश रखो । घ्वज का चिन्ह हमें बताता है कि जीवनपथ पर सदैव सदकार्य करते हुए विजय पथ को अंगीकार करों । एवं कमल का चिन्ह बताता है कि हमारा हृदय सदा कोमलता एवं संवेदनशीलता से परिपूर्ण बना रहें ।  
         भक्त प्रहलाद का वृतांत सुनाते हुए पण्डित सतीशजी ने कहा कि कश्यप नामक ऋषि एवं उनकी पत्नी दिति को 2 पुत्र हुए जिनमें से एक का नाम हिरण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकश्यप था। हिरण्याक्ष को भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह रूप धरकर मार दिया था। अपने भाई की मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकश्यप ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया। सहस्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, लोकपालों को मारकर भगा दिया और स्वतः संपूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरुपाय हो गए थे। वे असुर हिरण्यकश्यप को किसी प्रकार से पराजित नहीं कर सकते थे। ब्रह्माजी की हिरण्यकश्यप कठोर तपस्या करता है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी वरदान देते हैं कि उसे न कोई घर में मार सके न बाहर, न अस्त्र से और न शस्त्र से, न दिन में मरे न रात में, न मनुष्य से मरे न पशु से, न आकाश में न पृथ्वी में। इस वरदान के बाद हिरण्यकश्यप ने प्रभु भक्तों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, लेकिन भक्त प्रहलाद के जन्म के बाद हिरण्यकश्यप उसकी भक्ति से भयभीत हो जाता है, उसे मृत्युलोक पहुंचाने के लिए प्रयास करता है। इसके बाद भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लेते हैं और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं।
          भगवान नरसिंह में वे सभी लक्षण थे, जो हिरण्यकश्यप के मृत्यु के वरदान को संतुष्ट करते थे। भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का नाश हुआ किंतु एक और समस्या खड़ी हो गई। भगवान नरसिंह इतने क्रोध में थे कि लगता था, जैसे वे प्रत्येक प्राणी का संहार कर देंगे। यहां तक कि स्वयं प्रह्लाद भी उनके क्रोध को शांत करने में विफल रहा। सभी देवता भयभीत हो भगवान ब्रह्मा की शरण में गए। परमपिता ब्रह्मा उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे प्रार्थना की कि वे अपने अवतार के क्रोध शांत कर लें किंतु भगवान विष्णु ने ऐसा करने में अपनी असमर्थता जतलाई। भगवान विष्णु ने सबको भगवान शंकर के पास चलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चूंकि भगवान शंकर उनके आराध्य हैं इसलिए केवल वही नरसिंह के क्रोध को शांत कर सकते हैं। और कोई उपाय न देखकर सभी भगवान शंकर के पास पहुंचे। 
       देवताओं के साथ स्वयं परमपिता ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर भगवान शिव नरसिंह का क्रोध शांत करने उनके समक्ष पहुंचे किंतु उस समय तक भगवान नरसिंह का क्रोध सारी सीमाओं को पार कर गया था। साक्षात भगवान शंकर को सामने देखकर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ बल्कि वे स्वयं भगवान शंकर पर आक्रमण करने दौड़े। उसी समय भगवान शंकर ने एक विकराल ऋषभ का रूप धारण किया और भगवान नरसिंह को अपनी पूंछ में लपेटकर खींचकर पाताल में ले गए। काफी देर तक भगवान शंकर ने भगवान नरसिंह को वैसे ही अपने पूंछ में जकड़कर रखा। अपनी सारी शक्तियों और प्रयासों के बाद भी भगवान नरसिंह उनकी पकड़ से छूटने में सफल नहीं हो पाए। अंत में शक्तिहीन होकर उन्होंने ऋषभ रूप में भगवान शंकर को पहचाना और तब उनका क्रोध शांत हुआ। इसे देखकर भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के आग्रह पर ऋषभरूपी भगवान शंकर ने उन्हें मुक्त कर दिया। इस प्रकार देवताओं और प्रह्लाद के साथ-साथ सभी सत्पात्रों को 2 महान अवतारों के दर्शन हुए। हरिण्याक्ष और हिरण्यकश्यप तथा उनकी बहिन होलिका वर्तमान की राजनीति के षड्यंत्रों के प्रतीक हैं। वर्तमान संदर्भों से इन प्रतीकों का गहरा रिश्ता है।  तीसरे  दिन की कथा के विराम पर पूज्य दिव्येश कुमारजी द्वारा श्रीमद भागवतजी की आरती की गई । सैकडो की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती के बाद प्रसादी का लाभ लिया ।
पनघट मनोरथ के दर्शनों के लिये उमडी श्रद्धालुओं की भीड
श्रीमदभागवत कथा के विराम के बाद रात्री 8 बजे से शयन समय पर ‘‘गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली’’ भजन के साथ श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में आकर्षक झांकिया लगा कर पनघट, जलाशय के प्रतिकात्मक सुंदर आयोजन किया गया । भगवान गोवर्धननाथजी, श्री गोपालजी एवं श्री राधे रानी की प्रतिमाओं को  श्रृंगारित करके बनाये गये महल में बिराजित किया गया जहां  पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज भगवान को पंखा झलरही थी । स्वयं गोस्वामी दिव्येशकुमारजी महाराज संगीतके साथ ’’ गोकुल की पनिहारी पनिया भरन चली ’’ भजन की प्रस्तुति दे रहे थे । सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूष कतार बद्ध होकर भगवान की सुंदर झांकी को निहार कर भगवान के दर्शन लाभ लेकर कृतार्थ दिखाई दिये । शयन आरती के बाद भगवान के कपाट बंद हो गये ।
नन्द उत्सव का हुआ उल्लास के साथ आयोजन
रविवार  को दोपहर 12-30 बजे दिनेश सक्सेना के सौजन्य से राजभोग समय पर ’हेरी है आज नन्दराय के आनंद भयो’ के साथ नंद महोत्सव धुमधाम से मनाया गया। जूज्य दिव्येशकुमार जी द्वारा झुले मे भगवान की त्रिप्रतिमाओं को बिराजित कर झुला झुलाते हुए परम्परागत खिलौनों के द्वारा भगवान का लाड लडाया गया। वही पूज्य पूज्य लक्ष्मी बहूजी मसा. दिव्यश्री बहूजी,महाराज द्वारा भी भगवान के झुले के पास नन्दोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान किये गये । रात्री शयन समय कमल तलाई मनोरथ दर्शन का अलौकिक कार्यक्रम आयोजित किया गया । राज भोज दर्शन के बाद बजे गोस्वामी दिव्येशकुमारजी के कर कमलों से श्रद्धालुओ को तुलसी के पौधों का वितरण भी किया गया ।






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निष्पक्ष, और निडर पत्रकारिता समाज के उत्थान के लिए बहुत जरुरी है , उम्मीद करते है की आशा न्यूज़ समाचार पत्र भी निरंतर इस कर्त्तव्य पथ पर चलते हुए समाज को एक नई दिशा दिखायेगा , संपादक और पूरी टीम बधाई की पात्र है !- अंतर सिंह आर्य , पूर्व प्रभारी मंत्री Whatsapp Status Shel Silverstein Poems Facetime for PC Download

आशा न्यूज़ समाचार पत्र के शुरुवात पर हार्दिक बधाई , शुभकामनाये !!!!- निर्मला भूरिया , पुर्व विधायक

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आशा न्यूज़ से में फेसबुक के माध्यम से लम्बे समय से जुड़ा हुआ हूँ , प्रकाशित खबरे निश्चित ही सच की कसौटी ओर आमजन के विकास के बीच एक अहम कड़ी है , आशा न्यूज़ की पूरी टीम बधाई की पात्र है .- शांतिलाल बिलवाल , पुर्व विधायक झाबुआ

आशा न्यूज़ चैनल की शुरुवात पर बधाई , कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अंक पड़ा था तीखे तेवर , निडर पत्रकारिता इस न्यूज़ चैनल की प्रथम प्राथमिकता है जो प्रकाशित उस अंक में मुझे प्रतीत हुआ , नई शुरुवात के लिए बधाई और शुभकामनाये.- कलावती भूरिया , पुर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

मुझे झाबुआ आये कुछ ही समय हुआ है , अभी पिछले सप्ताह ही एक शासकीय स्कूल में भारी अनियमितता की जानकारी मुझे आशा न्यूज़ द्वारा मिली थी तब सम्बंधित अधिकारी को निर्देशित कर पुरे मामले को संज्ञान में लेने का निर्देश दिया गया था समाचार पत्रो का कर्त्तव्य आशा न्यूज़ द्वारा भली भाति निर्वहन किया जा रहा है निश्चित है की भविष्य में यह आशा न्यूज़ जिले के लिए अहम कड़ी बनकर उभरेगा !!- डॉ अरुणा गुप्ता , पूर्व कलेक्टर झाबुआ

Congratulations on the beginning of Asha Newspaper .... Sharp frown, fearless Journalism first Priority of the Newspaper . The Entire Team Deserves Congratulations... & heartly Best Wishes- कृष्णा वेणी देसावतु , पूर्व एसपी झाबुआ

महज़ ३ वर्ष के अल्प समय में आशा न्यूज़ समूचे प्रदेश का उभरता और अग्रणी समाचार पत्र के रूप में आम जन के सामने है , मुद्दा चाहे सामाजिक ,राजनैतिक , प्रशासनिक कुछ भी हो, हर एक खबर का पूरा कवरेज और सच को सामने लाने की अतुल्य क्षमता निश्चित ही आगामी दिनों में इस आशा न्यूज़ के लिए एक वरदान साबित होगी, संपादक और पूरी टीम को हृदय से आभार और शुभकामनाएँ !!- संजीव दुबे , निदेशक एसडी एकेडमी झाबुआ

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