10/24/17

#Measles-Rubella 15 अगस्त 26 january 26 जनवरी abvp Administrative Admission-Alert b4 cinema balaji dhaam bhagoria bhagoria festival jhabua bjp cbse result cinema hall jhabua city crime cultural education election Epaper events Exclusive Famous Place Gallery gopal mandir jhabua Health and Medical jhabua jhabua crime Jhabua History Jobs Kadaknath matangi Meghnagar MISSING- ALERT Movie Review MPEB MPPSC National Body Building Championship India New Year NSUI petlawad politics post office ram sharnam jhabua Ranapur religious religious place Road Accident rotary club sd academy social sports thandla tourist place Video Visiting Place Women Jhabua अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अखिल भारतीय साहित्य परिषद अंगूरी बनी अंगारा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अपराध अरोडा समाज अल्प विराम कार्यक्रम अवैध शराब आईसेक्ट आंगनवाड़ी आचार संहिता आजाद जयंती आदित्य पंचोली आदिवासी गुड़िया आनंद उत्सव आपकी सरकार आपके द्वार आबकारी विभाग आयुष्मान भारत योजना आरटीओं आर्ट आॅफ लिविंग शिविर आर्मी भर्ती आलेख आवंला नवमी आंवला नवमी आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक इनरव्हील क्लब ईद उत्कृष्ट सड़क उपचुनाव उमापति महादेव ऋषभदेव बावन जिनालय एकात्म यात्रा एनएसयूआई एमपी पीएससी कड़कनाथ मुर्गा कन्या भोज कम्प्यूटर ऑपरेटर महासंघ कलाल समाज कलावती भूरिया कलेक्टर कलेक्टर कार्यालय कल्लाजी महाराज कवि सम्मेलन कांग्रेस कांतिलाल भूरिया कार्तिक पूर्णिमा कालिका माता मंदिर कावड़ यात्रा किन्नर सम्मेलन कृषि कृषि महोत्सव कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ केरोसीन कैथोलिक डायसिस झाबुआ क्रिकेट टूर्नामेंट क्षत्रिय महासभा खबरे अब तक खाद्य एवं औषधि विभाग खेडापति हनुमान मंदिर खेल गडवाड़ा गणगौर पर्व गणतंत्र दिवस गणेशोत्सव गर्मी गल पर्व गायत्री शक्तिपीठ गुड़िया कला झाबुआ गुड़ी पड़वा गेल झाबुआ गोपाल पुरस्कार गोपाल मंदिर झाबुआ गोपाष्टमी गोपेश्वर महादेव गोवर्धननाथ मंदिर गौशाला ग्रामीण बैंक घटनाए चक्काजाम चुनाव जन आशीर्वाद यात्रा जनसुनवाई जन्माष्टमी जय आदिवासी युवा संगठन जय बजरंग व्यायाम शाला जयस जवाहर नवोदय विद्यालय जिला चिकित्सालय जिला जेल जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ जिला सहकारी बैंक जीवन ज्योति हॉस्पिटल जैन मुनि जैन सोश्यल गुुप ज्योतिष परामर्श शिविर झकनावदा झाबुआ झाबुआ इतिहास झाबुआ का राजा झाबुआ पर्व झाबुआ पुलिस झाबुआ रियासत झाबूआ झूलेलाल जयंती डाकघर डीआरपी लाईन तुलसी विवाह तेली समाज थांदला दशहरा दस्तक अभियान दिल से कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि दीपावली देवझिरी धार्मिक धार्मिक स्थल नक्षत्र वाटिका नगर परिषद नगरपालिका परिषद झाबुआ नरेंद्र मोदी नवरात्री नवरात्री चल समारोह नि:शुल्क स्वास्थ्य मेगा शिविर निर्मला भूरिया निर्वाचन आयोग पथ संचलन परिवहन विभाग पर्यटन स्थल पल्स पोलियो अभियान पाक्सो एक्ट पारा पावर लिफ्टिंग पिटोल पीएचई विभाग पेटलावद पेंशनर एसोसिएशन पैलेस गार्डन पोलीटेक्निक काॅलेज प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रतिभा सम्मान सम्मारोह प्रतियोगी परीक्षा प्रधानमंत्री आवास योजना प्रशासनिक फुटतालाब फेंसी ड्रेस फ्लैग मार्च बजरंग दल बस स्टैंड बहादुर सागर तालाब बामनिया बारिश बाल कल्याण समिति बालिका सशक्तिकरण अभियान बेटी बचाओं अभियान बोहरा समाज ब्राह्राण समाज ब्लू व्हेल गेम भगोरिया पर्व भगोरिया मेला भगौरिया पर्व भजन संध्या भर्ती भागवत कथा भाजपा भारत निर्वाचन आयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान भारतीय जीवन बीमा निगम भारतीय जैन संगठना भारतीय थल सेना भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा भावांतर योजना मध्यप्रदेश टूरिज्म अवार्ड मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग मनकामेश्वर महादेव मल्टीप्लेक्स सिनेमा महात्मा गांधी महाशिवरात्रि महिला आयोग महिला एवं बाल विकास विभाग माछलिया घाट मिशन इन्द्रधनुष मीजल्स रूबेला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना मुख्यमंत्री कप मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान मुस्लिम समाज मुहर्रम मूवी रिव्यु मेघनगर मेरे दीनदयाल सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता मैराथन दौड़ मोड़ ब्राह्मण समाज मोदी मोहल्ला मोहनखेड़ा यातायात युवा दिवस युवा शक्ति संगठन यूनीसेफ योग शिविर रक्तदान रंगपुरा रंगोली रतलाम राजगढ़ राजगढ नाका राजनेतिक राजपुत समाज राजवाडा चौक राज्यपाल राणापुर राम शरणम् झाबुआ रामशंकर चंचल रामा रायपुरिया राष्ट्रीय एकता दिवस राष्ट्रीय खेल दिवस राष्ट्रीय पोषण मिशन राष्ट्रीय बालरंग राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप राष्ट्रीय मानवाधिकार राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रेल्वे स्टेशन रोग निदान रोजगार मेला रोटरी क्लब लक्ष्मीनगर विकास समिति लाडली शिक्षा पर्व लोक सेवा केन्द्र लोकरंग शिविर वनवासी कल्याण परिषद वरदान नर्सिंग होम वर्ल्ड रिकॉर्ड वाटसएप विद्युत प्रदाय विधायक विधायक शांतिलाल बिलवाल विश्व आदिवासी दिवस विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस विश्व विकलांग दिवस विश्व हिन्दू परिषद वेटलिफ्टिंग वेलेंटाईन डे वैश्य महासम्मेलन व्यापारी प्रीमियर लीग शरद पूर्णिमा शहीद सैनिक शारदा विद्या मंदिर शासकीय महाविद्यालय झाबुआ शिक्षा शिवगंगा शिविर शौर्य दिवस श्रद्धांजलि सभा श्रावण सोमवार श्री गौड़ी पार्श्वनाथ जैन मंदिर सकल व्यापारी संघ संगीत सत्यसाई सेवा समिति सदभावना दौड संपादकीय सर्वब्राह्मण समाज साज रंग झाबुआ सामाजिक सामूहिक सूर्य नमस्कार सारंगी सांसद सांस्कृतिक साहित्य सिंधी समाज सीपीसीटी परीक्षा सुर श्री स्थापना दिवस स्वच्छ भारत मिशन स्वतंत्रता दिवस हज हजरत दीदार शाह वली हनुमान जयंती हरितालिका तीज हरियाली अमावस्या हाथीपावा हाथीपावा महोत्सव हिन्दू नववर्ष होर्डिग्स होली झाबुआ

झाबुआ : ब्लू व्हेल मोबाइल गेम की लत की शिकार लड़की (19) ने हाथ पर 25 घाव कर लिए जान देने का प्रयास किया। इसमें विफल रहने पर पुन: छत से कूदने की कोशिश की। हालांकि परिजनों ने काबू कर हॉस्पीटल पहुंचाया। पीड़िता को हॉस्पीटल में भर्ती करवाए जाने पर यह घटना सामने आई। पीड़िता मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के एक गांव की है। यहां दाहोद के गोदी रोड क्षेत्र में अपनी बहन के यहां रहने आई थी। रात 03:30 बजे बाथरूम में गई, 15 मिनट में ही किए घाव पीड़िता ने रात साढ़े तीन बजे खुद को नुकसान पहुंचाया। वह रात में घर के बाथरूम में गई। 15 ही मिनट में ब्लेड़ से हाथ पर घाव कर लिए। इसकी भनक लगने पर बहन का परिवार घबरा गया।  
 अब स्वस्थ हो रही है पीड़िता: मनोचिकित्सक
          दाहोद के मनोचिक्त्सक डा. नीलेश भैया ने बताया कि- पीड़िता के हाथ पर 25 घाव थे। 100 टांके लेने पड़े हैं।अभी उसकी मानसिक स्थिति नियंत्रण में है। इलाज चल रहा है। पीड़िता के मानसिक लक्षण गंभीर किस्म के थे। उसने दो बार आत्महत्या का प्रयास भी किया। कोई कहता है तू मर जा, नहीं तो मार ड़ालूंगा: पीड़िता के पिता पीड़िता के पिता ने बताया कि- लड़की पूरी-पूरी रात मोबाइल में व्यस्त रहती थी। सोती ही नहीं थी। व्यवहार में बदलाव-चिड़चिड़ापन लगने पर 21 सितंबर को हॉस्पीटल ले गए। मोहर्रम होने के चलते भर्ती नहीं किया। स्वास्थ्य में सुधार आ रहा था। छुट्‌टी होने पर दाहोद बहन के घर रहने भेज दिया-जहां उसने यह कदम उठा लिया। वह कहती थी कि मुझसे कोई कहता है कि-तू मर जा नहीं तो मैं तुझे मार ड़ालूंगा।

राजेश थापा, झाबुआ। जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं का हमेशा से ही बोलबाला रहा है। यहाँ का स्वास्थ्य विभाग अपने कार्य के प्रति गैर जिम्मेदाराना है । मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्थायें मरीजो के लिये जान की दुश्मन बन गयी है। अव्यवस्थायें ऐसी है कि मरीज यहां आने के बाद भगवान भरोसे ही सुरक्षित वापिस लौट सकता है। गंभीर से गंभीर मरीज को मोटी तनख्वाह पाने वाले चिकित्सक देखने की बजाय चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के भरोसे छोड़ देते है। जिसके चलते कई बार मरीजो की मौत हो जाती है। तो कई बार उनकी हालत बिगड़ जाती है।
       मरीजो के तीरमदार चिकित्सको से चाहे जितना गिडगिडाते रहे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता है। अगर मरीज या उसका तीरमदार अस्पताल के जिम्मेदारो से चिकित्सको की आराजकता तथा लापरवाही की शिकायत करता है तो जिम्मेदार उल्टे शिकायत कर्ता पर ही गुर्राने लगते है। कई बार शिकायत कर्ता पर टूट भी पड़ते है। लडाई झगडे पर उतारू हो जाते है। खामियाजा हर तरफ से मरीज तथा उसके साथ आये शिकायत कर्ता को भुगतना पड़ता है। 
          महज 10 महिनों में आदिवासी झाबुआ जिले में गरीब मरीजों के लिये वरदान साबित हो रही डायलिसिस योजना दम तोड़ चुकी है। कभी फिल्टर की कमी तो कभी आरओ प्लांट से मोटर के गायब हो जाने से मरीजों का डायलिसिस नही हो पा रहा। आलम यह है कि जरूरतमंद मरीज अपने घर से मोटर लाकर डायलिसिस करवा रहे है। दरअसल, 26 जनवरी 2017 से प्रदेशभर के जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा शुरू की गई। तब से अब तक कई बार अलग-अलग कारणों के चलते मरीजों को डायलिसिस न होने से परेशानी उठानी पड़ी है। एक सप्ताह पूर्व जिला अस्पताल की डायलिसिस मशीन से मोटर चोरी हो गई थी, जिसका अब तक कोई सुराग नही लगा है।
       मामले में जिला अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार एजेंसी के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों द्वारा खुद की मोटर लाकर डायलिसिस करवाए जाने के मामले ने न केवल योजना की ज़मीनी हकिकत उजागर की है बल्कि भोपाल स्तर पर योजनाओं के बनने के बाद उनके क्रियान्वयन को लेकर खस्ताहाल हो चुके सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिये है।            
                   उल्लेखनीय है की चिकित्सालय देश के कुछ चुनिंदा आईएसओ प्रमाणित चिकित्सालय में से एक है , बावजूद इसके ऐसी अनियमितता और अव्यवस्था विभागीय ढांचे एवं जिम्मेद्दारो की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाती है ।  
 चिकित्सक नहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कर रहे इलाज
      जिला चिकित्सालय में आपातकालीन चिकित्सा कक्ष / ट्रामा सेंटर भी केवल देखने भर को रह गया है। यहाँ अगर गंभीर रूप से घायल या बीमार व्यक्ति भर्ती होता है तो उसका इलाज चतुर्थ श्रेणी या सफाई कर्मचारी के सहारे ही चलता है। इमरजेंशी डयूटी करने वाले चिकित्सक गंभीर से गंभीर मरीज को भी उठकर देखना भी मुनासिब नहीं समझते। चिकित्सक को तो छोडिय़े फार्मासिस्ट तथा अन्य स्टाफ भी मरीज के आस-पास नहीं भटकते। सारा इलाज चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सहारे होता है। चिकित्सीय शिक्षा से पूरी तरह अनभिज्ञ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गंभीर रूप से घायल मरीज के सही ढंग से घाव साफ तक नहीं करते। सीधे घटिया दवा लगाकर चारो तरफ पटटियां बांधकर मरीज को बस रेफर भर करने की खानापूर्ति कर देते है। जिसके चलते कई बार ऐसे मरीजो की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाती है। जिन्हे आसानी से बचाया जा सकता है।
जिला चिकित्सालय में लग रहा अव्यवस्थाओं का अम्बार , विभाग नहीं ले रहा सुध-Disturbing-disorder-in-jhabua-district-hospital-department-not-taking-action        ऐसे तो हर सरकारी अस्पताल में चिकित्सको की लापरवाही मरीजो के लिये मौत का कारण बनती रही है। लेकिन जिला चिकित्सालय में स्थिति बदसे बदतर है। अगर किसी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की जरूरत होती है तो डयूटी पर होने के बाबजूद चिकित्सक मरीज तक जाने की बजाय मरीज के तीरमदारो को यह सलाह देते है। कि मरीज को जहां वह बैठे हो वही लेकर आओ। कुछ कदम चलने की बजाय मरीज को जो पूरी तरह चलने में असमर्थ होता है। उसे अपने पास बुलाने की बात करते है। हां वह बात अलग है कि यह भी चिकित्सक अपने निजी नर्सिंग होमो में जरूर दौड-दौड़ कर मरीज सेवा करते है। क्योंकि वहां इन्हे अच्छी खासी आमदनी होती है।
           चारो तरफ पटी गन्दगी और इसी गन्दगी के बीच इलाज को तरस रहे मरीज़ शायद दबी जुबान अपने आप को कोसते नज़र आते है काश किसी निजी चिकित्सालय में इलाज कराया होता तो ऐसी फ़ज़ीहत ना होती।  डॉक्टरों की कमीशनबाजी और कर्मचारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया..... बहरहाल सेकड़ो मरीज़ो की जान ले चूका है और सेकड़ो की जान लेने पर आमदा है।
 मोटी तनख्वाह पाने वाले चिकित्सक कर रहे निजी प्रेक्टिस
     सरकार से मिलने वाली तनख्वाह को यह मुप्त का माल मानकर चलते है। चिकित्सको की निजी प्रेक्टिस के चलते ही अस्पताल की व्यवस्थायें गडबडायी है। पूरा ध्यान इन चिकित्सको का अपने उन मरीजो की तरफ होता है। जो या तो इन चिकित्सको के घर में दिखाते है या फिर चिकित्सक के निजी नर्सिंग होम या उस अस्पताल में जहाँ चिकित्सक अप्रत्यक्ष रूप से किसी दूसरे के नाम से संचालित करता है। जिला चिकित्सालय की तकरीबन सभी चिकित्सक किसी न किसी निजी अस्पताल से जुड़े है। या फिर अपना स्वंय का अस्पताल खोले है।
          वाकायदा वहां मरीज भी बैठकर देखते है। नाम भले ही किसी दूसरे चिकित्सक के नाम से पंजीकृत हो। लेकिन असली मालिक यही चिकित्सक होते है। जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सको के साथ-साथ अस्पताल के जिम्मेदार लोग भी मरीजो के प्रति घोर लापरवाही बरतते है। इन्ही जिम्मेदारो की शह के चलते अस्पताल की व्यवस्थायें गडबडायी हुयी है। ऐसे में जरूरी है कि शासन ध्वस्त हो चुकी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिये सबसे पहले लापरवाह हो चुके सरकारी चिकित्सको के पेंच कसे। या फिर बडे-बडे दाबे करना छोड़ दे। आम जनमानस को यमराज के रूप में पल रहे इन्ही भ्रष्ट चिकित्सको के हवाले छोड़ दे।
निजी एम्बुलेंस संचालको से भी कमीशनबाजी
      जिला चिकित्सालय के गेट के बाहर दर्जनो की संख्या में निजी एम्बुलेंस तथा अन्य चारपहिया वाहन खड़े रहते है। जिनका सीधे चिकित्सको से कान्टेक्ट होता है। इसी कान्टेक्ट के चलते ऐसे मरीजो को भी दाहोद या बड़ोदा के लिये रेफर कर दिया जाता है। जिन्हे आसानी से सही इलाज उपलब्ध कराकर जिला चिकित्सालय में ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन दो जगह की कमीशन के चलते चिकित्सको द्वारा मानवता को ताक पर रखकर मरीज को रेफर कर दिया जाता है। यहां एक तो एम्बुलेंस संचालक प्रति मरीज के हिसाब से रेफर करने वाले चिकित्सको को पैंसा देते है। वहीं जिस अस्पताल के लिये चिकित्सक मरीज को रेफर करता है वहां से भी उस चिकित्सक के पास कमीशन आ जाती है। चिकित्सको की कार्यप्रणाली देखकर ऐसा लगता है कि अब यह सब बेनामी हो गये है कि चिकित्सक भगवान का दूसरा रूप होता है बल्कि अब यह सही होगा कि चिकित्सक भगवान नहीं बल्कि शैतान बन गये है जो मानवता को बचाने की जगह निगलने का काम कर रहे है।
*सरकारी अस्पताल की दवाईयों को घटिया क्यों बताते है चिकित्सक?*
            अधिकतर सरकारी चिकित्सक मरीजो को बाहर से दवाईयां खरीदने की सलाह देते है। सलाह के पीछे का कारण भी बताते है कि सरकारी अस्पतालो में सप्लाई होने वाली दवाओं निर्धारित मानको के अनुसार नहीं होती है। लिहाजा गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीज को सरकारी दवाओं के सहारे ठीक करना मुश्किल होता है। ऐसे में महंगी बाहरी दवायें ज्यादा कारगर साबित होती है। हालांकि इस सलाह के पीछे यह हकीकत भी छिपी हुयी है कि जो दवायें सरकारी अस्पताल में सप्लाई होती है उनकी क़्वालिटी घटिया होती है। यानि चिकित्सको की माने तो बडे पैमाने पर दवा सप्लाई में भी घोटाला है। चिकित्सक यह सलाह आम मरीजो को नहीं देते है। बल्कि उन मरीजो को देते है। जो उनके करीब होते है। अगर चिकित्सको की यह सलाह सही है तो सरकार को भी गंभीरता से लेकर सरकारी अस्पतालो की दवा वितरण प्रणाली की जांच करानी चाहिये।
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