देवझिरी....जैसा की नाम से ही प्रतीत है की भगवान शिव (देव, एक देवता) और झिरी या एक बारहमासी वसंत ! वसंत एक कुंड में निर्मित किया गया है. एक समाधि बैसाख पूर्णिमा, जो अप्रैल के महीने में आयोजित की जाती है. देवझिरी तीर्थ में भगवान शिव का भव्य मंदिर चारो तरफ हरियाली युक्त द्रश्य और मंदिर प्रांगन में ही एक जल कुंड जहा पिछले कई वर्षो से नर्मदा नदी का जल अनवरत प्रवाहित हो रहा है ,, जल का निकास और मार्ग आज तक सभी भक्तो के लिए एक आश्चर्य का विषय है की यह जल कुंड यहाँ तक किस मार्ग से आ रहा है .. देवझिरी तीर्थ एक धार्मिक, ऐतिहासिक, पर्यटन और एक चमत्कारिक स्थल जहा भक्तो की सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है
Deojhiri-JHABUA-A-Famous-Religious-Place            देवझिरी के इतिहास इस तरह है की प्राचीन काल में देवझिरी तीर्थ में किसी समय सिंघा  जी नाम के सन्यासी हुआ करते थे वे  प्रतिदिन यहाँ शिव जी का अभिषेक नर्मदा के जल से किया करते थे , देवझिरी से लगभग 150 किलोमीटर दूर कोटेश्वर से प्रतिदिन नर्मदा का जल लाना और उसी जल से शिव जी का अभिषेक करना , सिंघा जी की दिनचर्या थी , समय गुजरता गया , सिंघा  जी वृद्ध  हो गए मगर फिर भी उन्होने नर्मदा के जल से शिव जी का अभिषेक बंद नहीं किया , एक दिन सिंघा जी के तप  और साधना से माँ नर्मदा प्रसन हुई और सिंघा  जी को साक्षात् दर्शन देते  हुए  कहा की में वाही आउंगी जहा से तुम आते हो सिंघा  जी ने कहा की में कैसे मान  लू की आप आएँगी माँ नर्मदा ने कहा की तुम्हारा कमंडल यही छोड़ जाओ . 
           सिंघा   जी ने वैसा ही किया और अपना कमंडल वही  छोड़ कर देवझिरी आश्रम चले आये ,, अगले दिन जब बाबा सिंघा  जी की नींद खुली तो देवझिरी में एक छोटे जल स्त्रोत से निरंतर जल प्रवाहित हो रहा था ,,, साथ ही इस जल स्त्रोत के अन्दर सिंघा  जी का वह कमंडल जिसे वह नर्मदा नदी पर छोड़ कर आये थे वह भी मोजूद था .... इस प्रकार उस दिन से देवझिरी तीर्थ पर नर्मदा नदी का जल अनवरत प्रवाहित हो रहा है .. सिंघा  जी ने इसी देवझिरी तीर्थ पर समाधी ली .... आज भी प्रतिदिन इस नर्मदा नदी के जल से शिव जी का अभिषेक किया जाता है .....वर्ष 1934 में झाबुआ के महाराजा ने यहाँ एक कुंड  का निर्माण करवाया .....देवझिरी तीर्थ पर  झाबुआ जिले के ग्रामीणों की विशेष आस्था है ,, शहर में प्रति वर्ष निकलने वाली कावड  यात्रा में ग्रामीणों द्वारा कोटेश्वर महादेव से नर्मदा का जल ले जाकर देवझिरी तीर्थ में शिव जी का अभिषेक किया जाता है।  देवझिरी तीर्थ में भक्तो की मान्यता है की यहाँ  प्राचीन काल में एक शेर आया करता था , जो देवझिरी के कुंड  में स्नान करता और फिर शिव जी के दर्शन कर  चला जाता ....ग्रामीणों और भक्तो में यह मान्यता आज भी उसी रूप में है।
   इस प्रकार देवझिरी तीर्थ झाबुआ जिले के साथ ही पूरे प्रदेश में एक अलग महत्वता के साथ एक ऐसा  प्राचीन स्थल , धार्मिक स्थल , और पर्यटन स्थान जहा एक बार भगवान  शिव के दर्शन करने के उपरांत ताउम्र इस स्थान की दिव्य  छवि सदेव हर भक्त के  जहन  में बनी रहती है ।