1 26 january 1 abvp 45 Administrative 1 b4 cinema 1 balaji dhaam 1 bhagoria 1 bhagoria festival jhabua 2 bjp 1 cinema hall jhabua 27 city 16 crime 19 cultural 35 education 2 election 15 events 12 Exclusive 1 Famous Place 6 gopal mandir jhabua 17 Health and Medical 78 jhabua 4 jhabua crime 1 Jhabua History 1 matangi 3 Movie Review 5 MPPSC 1 National Body Building Championship India 4 photo gallery 18 politics 2 ram sharnam jhabua 48 religious 5 religious place 2 Road Accident 3 sd academy 65 social 13 sports 1 tourist place 13 Video 1 Visiting Place 11 Women Jhabua 2 अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन 1 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 1 अंगूरी बनी अंगारा 1 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 15 अपराध 1 अल्प विराम कार्यक्रम 6 अवैध शराब 1 आदित्य पंचोली 1 आदिवासी गुड़िया 1 आरटीओं 1 आलेख 1 आवंला नवमी 3 आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट 1 ईद 1 उत्कृष्ट सड़क 20 ऋषभदेव बावन जिनालय 3 एकात्म यात्रा 2 एमपी पीएससी 1 कलाल समाज 1 कलावती भूरिया 3 कलेक्टर 14 कांग्रेस 6 कांतिलाल भूरिया 1 कार्तिक पूर्णिमा 2 किन्नर सम्मेलन 2 कृषि 1 कृषि महोत्सव 3 कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ 1 केरोसीन 2 क्रिकेट टूर्नामेंट 4 खबरे अब तक 1 खेडापति हनुमान मंदिर 15 खेल 1 गडवाड़ा 1 गणगौर पर्व 1 गर्मी 1 गल पर्व 8 गायत्री शक्तिपीठ 2 गुड़िया कला झाबुआ 1 गोपाल पुरस्कार 4 गोपाल मंदिर झाबुआ 1 गोपाष्टमी 1 गोपेश्वर महादेव 14 घटनाए 1 चक्काजाम 3 जनसुनवाई 1 जय आदिवासी युवा संगठन 5 जय बजरंग व्यायाम शाला 1 जयस 6 जिला चिकित्सालय 3 जिला जेल 3 जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ 1 जीवन ज्योति हॉस्पिटल 9 जैन मुनि 6 जैन सोश्यल गुुप 2 झकनावदा 80 झाबुआ 1 झाबुआ इतिहास 1 झाबुआ का राजा 3 झाबुआ पर्व 9 झाबुआ पुलिस 1 झूलेलाल जयंती 1 तुलसी विवाह 6 थांदला 3 दशहरा 1 दस्तक अभियान 1 दिल से कार्यक्रम 3 दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि 1 दीपावली 2 देवझिरी 38 धार्मिक 5 धार्मिक स्थल 7 नगरपालिका परिषद झाबुआ 5 नवरात्री 4 नवरात्री चल समारोह 4 नि:शुल्क स्वास्थ्य मेगा शिविर 1 निर्वाचन आयोग 4 परिवहन विभाग 1 पर्यटन स्थल 3 पल्स पोलियो अभियान 7 पारा 1 पावर लिफ्टिंग 14 पेटलावद 1 प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय 3 प्रतियोगी परीक्षा 1 प्रधानमंत्री आवास योजना 30 प्रशासनिक 1 बजरंग दल 2 बाल कल्याण समिति 1 बेटी बचाओं अभियान 2 बोहरा समाज 1 ब्लू व्हेल गेम 1 भगोरिया पर्व 1 भगोरिया मेला 3 भगौरिया पर्व 1 भजन संध्या 1 भर्ती 2 भागवत कथा 28 भाजपा 1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान 1 भारतीय जैन संगठना 3 भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 1 भावांतर योजना 2 मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग 1 मल्टीप्लेक्स सिनेमा 2 महाशिवरात्रि 1 महिला आयोग 1 महिला एवं बाल विकास विभाग 1 मिशन इन्द्रधनुष 1 मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना 2 मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान 8 मुस्लिम समाज 1 मुहर्रम 3 मूवी रिव्यु 6 मेघनगर 1 मेरे दीनदयाल सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता 2 मोड़ ब्राह्मण समाज 1 मोदी मोहल्ला 1 मोहनखेड़ा 2 यातायात 1 रंगपुरा 2 राजगढ़ 12 राजनेतिक 8 राजवाडा चौक 11 राणापुर 5 रामशंकर चंचल 1 रामा 1 रायपुरिया 1 राष्ट्रीय एकता दिवस 2 राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप 4 राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना 1 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण 1 रोग निदान 2 रोजगार मेला 15 रोटरी क्लब 2 लक्ष्मीनगर विकास समिति 1 लाडली शिक्षा पर्व 2 वनवासी कल्याण परिषद 1 वरदान नर्सिंग होम 1 वाटसएप 1 विधायक 4 विधायक शांतिलाल बिलवाल 1 विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस 2 विश्व विकलांग दिवस 2 विश्व हिन्दू परिषद 1 वेलेंटाईन डे 3 व्यापारी प्रीमियर लीग 1 शरद पूर्णिमा 5 शासकीय महाविद्यालय झाबुआ 32 शिक्षा 1 श्रद्धांजलि सभा 3 श्री गौड़ी पार्श्वनाथ जैन मंदिर 9 सकल व्यापारी संघ 2 सत्यसाई सेवा समिति 1 संपादकीय 2 सर्वब्राह्मण समाज 4 साज रंग झाबुआ 33 सामाजिक 1 सारंगी 11 सांस्कृतिक 1 सिंधी समाज 1 सीपीसीटी परीक्षा 3 स्थापना दिवस 3 स्वच्छ भारत मिशन 4 हज 3 हजरत दीदार शाह वली 5 हाथीपावा 1 हिन्दू नववर्ष 5 होली झाबुआ

Places to Visit Around Jhabua-Alirajpur

        यह सच है कि मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में कम आबादी है और इस क्षेत्र की जनसंख्या के अधिकांश आबादी एक आदिवासी आबादी है. लेकिन जिले के पर्यटन स्थलों के रूप में अलग महत्व है. झाबुआ-अलीराजपुर के पर्यटन स्थलों का भ्रमण धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व के रूप में अच्छी तरह से किया जा सकता है. प्रमुख (Speciality of Jhabua) पर्यटन स्थलों में से कुछ पीपलखूंटा, समोई , तारखेडी, भाबरा, देवझिरी, लखमनी, हाथीपावा पहाड़ी , मालवई, आमखुट , अनास नर्सरी आदि हैं वही धार्मिक पर्यटन स्थलों में हनुमान टेकरी, वनेश्वर हनुमान मंदिर, गोपाल मंदिर, "लक्ष्मणी", "मालवई" माता मंदिर, मातंगी धाम, सिद्धपीठ बालाजी हनुमान मंदिर , चिंतामणि गणेश मंदिर, बावड़ी हनुमान मंदिर, राम शरणम्, आदि है. 
झाबुआ पर्यटन स्थल (Tourist Places- Famous Visiting Place Jhabua District)
        यहाँ जनजातीय आबादी है, जो दुनिया में सबसे प्राचीन है, जहाँ की संस्कृति एवं सभ्यता ने हमेशा विदेशी पर्यटकों एवं शोधार्थियों का ध्यान आकर्षित किया है। अब झाबुआ अपने पर्यटन क्षमता और भीली संस्कृति पर शोध करने वाले शिक्षाविदों के लिए एक मंच प्रदान करने के साथ ही क्षेत्र के शाही परिवार और पर्यटकों के लिए अकादमिक गंतव्य बनने के लिए तैयार है। होली के दौरान विश्व प्रसिद्ध भगोरिया त्योहार के अलावा लगभग 120 उत्सव झाबुआ जिले को विश्व भर में नयी पहचान दिलाते है। झाबुआ अपने चांदी के आभूषणों और रंगीन रंगाई के लिए भी जाना जाता है.
       यहां मुख्यत: भील और भीलाला आदिवासी जातियां रहती हैं। यह जिला आदिवासी हस्तशिल्प खासकर बांस से बनी वस्तुओं, गुडियों, आभूषणों और अन्य बहुत-सी वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है। अलीराजपुर जो की पूर्व में झाबुआ जिले का ही हिस्सा था वर्ष 2008 में अलीराजपुर को अलग जिला बनाया गया जिससे की कई पर्यटन स्थल अलीराजपुर जिले में बट गए उक्त सभी पर्यटन स्थलों को भी उक्त सुची में शामिल किया गया है , झाबुआ शहर से महज़ 85  किमी की दुरी पर स्थित यह जिला पर्यटन हेतु एक बेहतर विकल्प है कट्ठीवाड़ा के घने जंगल यहाँ की मुख्य विशेषता है बारिश के दिनों में यहाँ का नज़ारा कश्मीर की वादियों की तरह दिखने लगता है।  

झाबुआ-अलीराजपुर पर्यटन
प्रमुख पर्व भगोरिया
प्रमुख पर्यटन स्थल 7
पर्यटन स्थल सीमा 15-85 किलोमीटर
सर्वश्रेष्ठ मौसम अगस्त से नवम्बर
पर्यटन स्थल पीपलखूंटा, समोई , तारखेडी, भाबरा, देवझिरी, लखमनी, हाथीपावा पहाड़ी, मालवई, आमखुट, मथवाड, अनास नर्सरी, श्रृंगेश्वर धाम



      कैसे पहुंचे       
  1. निकटतम रेलवे स्टेशन: निकटतम रेलवे स्टेशन मेघनगर की दूरी झाबुआ से 16 किलोमीटर है , जहाँ देश भर की लगभग सभी एक्सप्रेस ट्रैन का स्टोपेज है।  
  2. निकटतम हवाई अड्डा : इंदौर (150 किमी) भारतीय एयरलाइंस द्वारा बॉम्बे से जुड़ा है , यहाँ कॉन्टिनेंटल एयरवेज मुंबई से इंदौर तक उड़ानें संचालित करती है।
  3. सड़क  मार्ग : राष्ट्रीय राजमार्ग सड़कें NH-59 , NH-39 आदि सड़के अहमदाबाद (250 किलोमीटर), भोपाल (344 किमी), दिल्ली (750 किमी), इंदौर (147 किलोमीटर) आदि के साथ झाबुआ को जोड़ती हैं। रीजनल बस सर्विसेज झाबुआ को इंदौर, भोपाल, रतलाम, मांडू , धार आदि से जोड़ती हैं।
         झाबुआ नगर को प्राचीन मंदिरों की धरोहर कहे तो गलत नहीं होगा इन मंदिरों और दरगाहो के प्रति भक्तो की आस्था देख जिले के दिवंगत प्रगान ज्योतिष श्री विश्वनाथ जी त्रिवेदी जी ने कहा था की ""आध्यात्मिक उन्नयन की द्रष्टि से झाबुआ नगर उपयुक्त है और भविष्य में यह अच्छी तरक्की करेगा ... यहाँ पर 1990 के बाद पुण्यात्मा अधिकाधिक जन्म लेगी .. दुश्प्रवातियो का नाश होगा और शने: शने: सदप्रवत्तियों का उदय होगा "" वाकई में यह बात आज सत्य प्रतीत हो रही प्राचीन स्थलों, ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोधार कर उन्हे उपयुक्त बनाना, उनकी देख- रेख और सफाई कर मंदिरों के प्रति आस्था प्रकट करना इसी बात का संकेत है

अलीराजपुर पर्यटन 

सुरम्य वादीया, घने वन , अमराईयों के कुंज , पलास के चटख रंगो की लालिमा, "महुआ" वृक्ष के फूलों की मीठी गंध और अनवरत कल कल करते प्रवाहित पहाड़ी झरनों का अल्हड़पन ये सभी बरबज ही आपका मन मोह लेगी। आदीवासीयों की मस्तमोला जीवनशैली को करीब से जज करना ही किसी बडे पर्यटन स्थल कि सैर से कम नही है ओर फिर सेलानियो के लिए अलीराजपुर जिले में भ्रमण दर्शन के लिए काफी कुछ है। जनजातीय जीवन शैली को पर्यटन स्थल के रूप में महसूस करने के लिए यहां पर्यटको के लिए बहुत अधिक संभावनाएं है। जिनमे एक छोर कट्ठीवाड़ा (मिनी कश्मीर के नाम से विख्यात) के जंगल व दर्शनिय स्थानों से होकर दुसरे छोर में स्थित सोण्डवा विकासखण्ड के "मथवाड़"  क्षेंत्र की सुन्दर घुमावदार हरिभरी पहाडीयां और साथ ही जोर -शोर से प्रवाहित होती नर्मदा नदी का दर्शन उसमें मोट व बोट की सवारी का अपना अलग ही आनंद है , और इन सब क साथ ही अलीराजपुर के समीप मालवई माताजी का प्राचीन मंदिर जैनतीर्थ स्थल लक्ष्मणी का सौदर्य ऐसे ही कई ऐतिहासिक व पूराताविक महत्व के स्थानों को आप पाऐगे अलीराजपुर जिले के आगमन पर ।
    अलीराजपुर जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। लक्ष्मणी तीर्थ जहाँ पद्म प्रभु स्वामी की मूर्ति विध्यमान है । लक्ष्मणी तीर्थ जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर स्थित है। यह 2000 साल पुराना मंदिर है यहाँ एक बड़ा हॉल स्थित है, जिसमें 140 रंगीन और कलात्मक पत्थर एवं अभिलेखागार स्थापित है। मंदिर में श्री पद्म प्रभु स्वामी की पद्मसन मुद्रा में एक सफेद पत्थर की मूर्ति स्थापित है। राजवाड़ा किला एवं फतेह क्लब नामक एक खूबसूरत खेल मैदान शहर के केंद्र में स्थित है। अलीराजपुर विभिन्न प्रकार के व्यापार और व्यापार के लिए भीलों का केंद्र है। इसके अलावा, "नूर जहां" आम जो अलीराजपुर जिले की एक बहुत ही दुर्लभ विविधता है वर्तमान में "नूर जहां" आम के केवल चार पेड़ वर्तमान में जीवित हैं, जो मात्र अलीराजपुर जिले में पाए जाते हैं. अलीराजपुर में 120 वर्ष प्राचीन विक्टोरिया पुल 1897  की डायमंड जुबली मनाने के लिए बनाया गया था। । 

  कैसे पहुंचें: -    अलीराजपुर खण्डवा-बड़ौदा राज्य राजमार्ग नंबर 26 पर स्थित है। वड़ोदरा से 150 किलोमीटर की दूरी पर अलीराजपुर का दूरी, कुक्षी (धार) से 48 किलोमीटर और झाबुआ से 85 किलोमीटर की दूरी पर है। हर तरफ से यहां तक ​​पहुंचने के लिए सड़क बहुत अच्छी है यह इंदौर से 250 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां से  सभी राज्यों के लिए बसे उपलब्ध है। निकटतम रेलवे स्टेशन दाहोद, मेघनगर और छोटा उदयपुर हैं।
         अलीराजपुर जिले में भगोरिया पर्व वालपुर, सोंडवा, छकतला और नानपुर  का बहुत प्रसिद्ध हैं। जिले के बखतगढ़ गांव में गुजरात बॉर्डर से सटा होने के कारन भगोरिया पर्व में "गेर"  बहुत खास है।
आज़ाद कुटिया भाबरा, -अलीराजपुर
     यह अलिराजपुर जिले के जोबट तहसील में जोबट दाहोद रोड पर ३२ किलोमीटर की दुरी के लगभग उत्तर - पश्चिम क्षेत्र में है.भाबरा एक पर्यटन स्थल के रूप में लोकप्रिय है क्योंकि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद भाबरा में ही पैदा हुवे थे. हाल ही में मध्य प्रदेश शासन द्वारा चंद्रशेखर आजाद की प्राचीन कुटिया का जीर्णोधार कर यहाँ एक भव्य स्मारक बनाया गया है ... साथ ही मध्य प्रदेश शासन द्वारा भाबरा शहर का नाम परिवर्तन कर आजाद नगर भी कुछ समय पहले ही किया है

shahid-chandrashekhar-azad-kutiya-bhabra-चंद्रशेखर आज़ाद कुटिया भाबरा अलीराजपुर
देवझिरी, -झाबुआ 
       देवझिरी एक प्राचीन मंदिर है जैसा की नाम से ही प्रतीत है की भगवान शिव (देव, एक देवता) और झिरी या एक बारहमासी वसंत ! वसंत एक कुंड में निर्मित किया गया है. एक समाधि बैसाख पूर्णिमा, जो अप्रैल के महीने में आयोजित की जाती है. देवझिरी तीर्थ में भगवान शिव का भव्य मंदिर चारो तरफ हरियाली युक्त द्रश्य और मंदिर प्रांगन में ही एक जल कुंड जहा पिछले कई वर्षो से नर्मदा नदी का जल अनवरत प्रवाहित हो रहा है ,, जल का निकास और मार्ग आज तक सभी भक्तो के लिए एक आश्चर्य का विषय है की यह जल कुंड यहाँ तक किस मार्ग से आ रहा है .. देवझिरी तीर्थ एक धार्मिक, ऐतिहासिक, पर्यटन और एक चमत्कारिक स्थल जहा भक्तो की सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है

devjhiri-jhabua-देवझिरी तीर्थ झाबुआ-झाबुआ पर्यटन स्थल (Tourist Places- Famous Visiting Place Madhya Pradesh State-Jhabua District)

पूरा इतिहास जाने
लक्ष्मणी तीर्थ, -अलीराजपुर
       लखमनी ग्राम सुकर नदी के तट पर स्थित एक छोटा सा गांव है. इस गांव में एक नवनिर्मित जैन मंदिर है. गांव १९२५ के मध्य प्रमुखता से पुरातत्वविदों, इतिहासकारों के मध्य प्लास्टिक कला के रूप में आ गया .. जब इस मंदिर में प्रतिष्ठापित जैन छवियों का एक क्षेत्र से पता लगाया गया. छवियों दूधिया सफेद , संगमरमर और काले संगमरमर की थी ... इन छवियों को संमूसा नाम दिया गया .. तत्पश्चात स्थल को खुदवाया गया तो यहाँ से जैन छवियों के अलावा हिंदू देवी - देवता और हिंदू मंदिर के अवशेष की छवियों भी पाई गयी .यह सभी मूर्तियां 10 वीं से 11 वीं सदी की शैली की थी . इन सभी छवियों की प्राप्ति के बाद से लखमनी ग्राम को एक तीर्थ (पवित्र स्थान) के रूप में विकसित किया गया .... इसके उपरांत प्रतिवर्ष यहाँ एक मेला आयोजित किया जाता है.

तीर्थ परिचय
ऐतिहासिक तीर्थ लक्ष्मणी की महिमा अपार      

       अलीराजपुर से मात्र 8 km की दुरी पर यह महान तीर्थ स्तिथ हैं जहाँ पर परम पूज्य तीर्थाधिपति मूलनायक श्री पद्मप्रभु भगवान की हजारों वर्ष प्राचीन दुर्लभ भूगर्भ से निकली श्वेतवर्णी चमत्कारी प्रतिमा स्थित हैं जिसके दर्शन मात्र से मन को असीम शान्ति का अनुभव होता है इस तीर्थ की पुरे क्षेत्र में बड़ी महिमा है चैत्री पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा एवं मगसरसुदी 10 के दिन प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र एवं पुरे देशभर से दर्शनार्थी इस तीर्थ के दर्शन करने आते है एवं सेवा पूजा का लाभ लेते है ये तीर्थ जैन ही नहीं अपितु अन्य समाज जन में भी लोकप्रिय है इसीलिए यह जैन तीर्थ जन तीर्थ के भी नाम से जाना जाता है इस तीर्थ में समय समय पर होने वाले चमत्कार के भी कई लोग साक्षी रहे हैं पुरे भारतभर में कुछ गिनी चुनी जगह पर ही मूलनायक के रूप में पद्मप्रभु भगवान की प्रतिमा स्थित हैं इस तीर्थ की ऐसी मान्यता है कि यहाँ से कोई भी ख़ाली हाथ नहीं जाता है
        विक्रम संवत 1427 में जैन मुनिराज जयानंद नामा के अनुसार तीर्थ लक्ष्मणी में 101 जिनालय एवं 2000 जैन धर्म अनुयायीयो के घर थे विक्रम की सोहलवी सदी में यह तीर्थ विद्यमान था एवं प्राचीन लेखों में इस तीर्थ की प्राचीनता कम से कम 2000 वर्ष से भी पूर्व समय की हैं।
         विक्रम की 19 वीं सदी में इस तीर्थ पर यवनो के आक्रमण के कारण इस तीर्थ का नाम ही शेष रह गया था। इस स्थान के आसपास कुछ समय पश्यात कृषक के खेत से सर्वांग सुन्दर चौदह प्रतिमा प्राप्त हुई जिनमे से सबसे बड़ी प्रतिमा पद्मप्रभु भगवान की श्वेतवर्णी प्रतिमा थी।
       तत्कालीन नरेश श्री प्रतापसिंह जी के द्वारा तीर्थ निर्माणार्थ भूमि उपहार स्वरूप दान की गई एवं सभी के सहयोग से मंदिर का नवनिर्माण किया गया विक्रम संवत 1994 मगसरसुदी 10 को परमपूज्य आचार्य देव श्रीमद यतिंद्रसूरीश्वर जी म.सा. के कर कमलो से नवनिर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई गई जिसमें मूलनायक के रूप में पद्मप्रभु भगवान की प्रतिमा को एवं अन्य प्रतिमा को विराजित किया गया इस प्रकार इस तीर्थ की पुनः स्थापना हुई ।
        तक़रीबन 8 एकड़ मै फैले इस तीर्थ क्षेत्र में परमपूज्य दादा गुरुदेव श्री राजेंद्रसूरीश्वरजी म.सा. का मंदिर भी है और पावापुरी जलमंदिर की प्रतिकृति भी बनी हुई है इसके अलावा श्रीपाल और मयणा सुंदरी के जीवन प्रसंगों का पूरा वृतान्त अत्यन्त आकर्षक भिति चित्रो के द्वारा प्रस्तुत किया गया है जो की दर्शनीय है लक्ष्मणी तीर्थ के समीप 100 km के दायरे में श्री तालनपुर, मोहनखेड़ा, भोपावर, अमझेरा तीर्थ स्तिथ है जिससे लक्ष्मणी तीर्थ पर आने वाले दर्शनार्थी को पंचतीर्थि का भी लाभ मिलता है हाल ही में तीर्थ पर आने वाले दर्शनार्थियो के लिये नविन भोजनशाला एवं एयरकंडिशनर धर्मशाला का निर्माण हुआ है

   ऐसे पहुंचे लक्ष्मणी तीर्थ    
 
      यह तीर्थ अलीराजपुर से 8 किमी और झाबुआ से 85 किमी दुरी पर है।  बस के माध्यम से यहाँ आसानी से पंहुचा जा सकता है धार जिले से इस तीर्थ की दुरी 135 किमी , बड़वानी से 75 किमी,  दाहोद से दुरी 78 किमी एवं वडोदरा से दुरी 135 किमी पड़ती है।

लक्ष्मणी तीर्थ- laxmani-jain-tirth-alirajpur-jhabua-लखमनी ग्राम जैन मंदिर
मालवई, -अलीराजपुर
मालवई अलीराजपुर- malwai-alirajpurमालवई अलीराजपुर से 5 किमी. दक्षिण में अलीराजपुर-वालपुर रोड पर मालवई स्थित है। यह स्थान विन्ध्याचल के निचली पहाड़ियों के सबसे रमणीय स्थलों में एक माना जाता है। 11वीं शताब्दी में बना महादेव मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। यह मंदिर मालवा शैली में बना है। मंदिर में पत्थरों की शानदार मूर्तियां स्थापित हैं। यह मूर्तियां 12-13वीं शताब्दी की हैं।
      मालवई अलीराजपुर जिले  में विंध्याचल रेंज के उत्तरी तलहटी पर निर्मित है.. वहाँ एक प्राचीन लेकिन छोटे खंडहर वाला शिव मंदिर है. मंदिर के मंच आयताकार है, लेकिन कई शंक्वाकार कॉलम मंदिर के कलश तक पहुची हुई है , कलश वर्तमान में गिर गया है .शंक्वाकार कॉलम के सामने भाग भी गिर गया है. पेनल्स की सामने की पंक्ति में कई खूबसूरत और नक्काशीदार छवियों को बनाया गया है जो 12 वीं से 13 वीं सदी के बीच की प्रतीत होती है .साथ ही यहाँ माता चामुण्डा देवी का मंदिर स्थित है।
हाथीपावा, -झाबुआ 
       400 फ़ीट ऊंची इस हाथीपावा पहाड़ी से पुरे शहर का नज़ारा साफ़ देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में विभिन्न सामाजिक संस्थाओ और जिला पुलिस के सहयोग से लगाए 8500 से अधिक पोधे अब वृक्ष का रूप ले चुके है, चारो तरफ हरियाली, पक्षियों की चहचहाट, तेज हवाएं और सुरम्य वादियों का नज़ारा यह सब मौजूद है झाबुआ की इस हाथीपावा पहाड़ी पर, जहाँ रोजाना सेकड़ो की संख्या में पर्यटक इस मनमोहक माहौल का जायजा लेने भलबस पहुंच ही जाते है. इको टूरिज्म की मंजूरी के साथ अब यह स्थल बहुत तेजी से विकसित होता दिखाई दे रहा है।
        मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल झाबुआ शहर को हरा भरा बनाने और शहर का वाटर ग्राउंड लेवल बढाने के उदेश्य से झाबुआ की हाथी पावा टेकरी को हरा भरा करने एवं उसके बंजरपन को दूर कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने हेतु जिला प्रशासन, वन विभाग, समाज सेवी संस्थाएं और नागरिक मिलकर सामूहिक भागीरथी प्रयास कर रहे है।
         हाथीपावा पहाडियों पर हर वर्ष मकर संक्रांति पर पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमे जिले भर से बड़ी संख्या में लोग स्थल पर पहुंच कर पतंगबाजी का लुत्फ़ उठाते है। विगत 15 अगस्त 2018 को जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग ने हाथीपावा की 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर मध्यप्रदेश का तीसरा सबसे ऊंचा 100 फीट ऊंचा तिरंगा झण्डा फहराया। इस तिरंगे को 100 फीट का खंभा लगाकर इस पर 600 वर्ग फुट का तिरंगा फहराया गया है । यह तिरंगा 4 किलोमीटर दूर से देखा जा सकेगा। रात में दिखाई दे, इसलिए खंभे पर चार हाई मास्ट लैम्प लगाए गए है । खुशनुमा मौसम में अब शहर के हाथीपावा पहाड़ी पर लोग घुड़सवारी का भी आनंद ले सकेंगे। ध्यान एवं योग के लिए यहाँ ध्यान स्थल का निर्माण किया गया है। यहाँ बच्चो के लिए झूले चकरी आदि की भी व्यवस्था की गयी है.उक्त पहाड़ी पर पर्यटकों हेतु सनसेट पॉइंट, और ध्यान केंद्र भी विकसित किया गया है
        उल्लेखनीय है की हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा उक्त हाथीपावा पहाडी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने हेतु इसे इको टूरिज्म के तहत मंजूरी प्रदान की है जिससे की इस स्थल को जिले के एवं साथ ही प्रदेश के श्रेष्ट पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा सके।
        उक्त पहाड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का जिम्मा पुलिस अधीक्षक महेश चंद्र जैन ने स्वयं लिया है. पुलिस विभाग द्वारा यहाँ पर्यटकों के बैठने के लिए कुर्सी लगवाई गयी है, साथ ही उक्त पहाड़ी तक पहुंचने हेतु रोड का सीमेंटीकरण, पर्याप्त लाइट व्यवस्था आदि सभी कार्य पुलिस अधीक्षक जैन के मार्ग दर्शन में किया जा रहा है .
          नगर के पश्चिमी छोर पर स्थित हाथी पावा की विशाल पहाडी जहां पर कभी घना जंगल होता था जिसके कारण शहर के छोटा तालाब, बहादूर सागर तालाब और मेहताजी के तालाब के साथ ही साथ झाबुआ शहर का ग्रांउड वाटर लेवल बढता था और ये तालाब इस पहाडी से रिसने वाले पानी की बदौलत भर जाया करते थे। कुछ सालों पहले इस पहाडी पर प्रदेश सरकार ने इसे हरी भरी करने का प्रयास किया था और राले गांव सिद्वि की तर्ज पर इसे हरा भरा करने के लिये यहां पर पर्यावरण विद अनिल अग्रवाल और अन्ना हजारे को लाकर इस पहाडी को हरा भरा करने के प्रयास किये गये थे।

हाथीपावा झाबुआ -haathipawa-jhabua-shivganga-halma-शिवगंगा-हलमा-100-feet-tiranga-in-jhabua-haathi pawa

हाथीपावा पहाड़ी झाबुआ -haathipawa-jhabua-shivganga-halma-शिवगंगा-हलमा

आमखुंट , -अलीराजपुर
     आमखुंट गांव अलीराजपुर-कट्ठीवाड़ा रोड पर अलीराजपुर के उत्तर-पश्चिम में 24 किमी दुरी पर है। यह जगह विध्यांचल रेंज के जंगलों के बीच स्थित है। यह एक प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण प्राप्त स्थल है. कनाडा ईसाई मिशनरियो ने आदिवासी गांवों के बीच वर्ष 1914 में ईसाई मिशनरियो का एक केंद्र स्थापित किया है। गांव में एक ग्राम पंचायत, एक पुलिस पोस्ट, एक प्राथमिक विद्यालय और वन विभाग द्वारा बनाए गया विश्रामगृह है।

आमखुंट अलीराजपुर भील ईसाई मिशनरी 5 नवम्बर 1914 -Bhil-Isai Missionary-Alirajpur-Aamkhut-5-november-1914
भील ईसाई मिशनरी आमखुंट
आमखुंट अलीराजपुर जंगल-aamkhunt-alirajpur
आमखुंट अलीराजपुर 
धमोई तालाब, -झाबुआ 
       शहर की पेय जल व्यवस्था का मुख्य स्त्रोत धमोई तालाब बारिश के दिनों में पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है , सेकड़ो की तादाद में प्रतिदिन आसपास के रहवासी और अन्यत्र पर्यटक यहाँ पिकनिक मनाने और फोटोग्राफ़ी करने यहाँ पहुंचते है , बारिश के दिनों में तालाब पूर्ण भरने के बाद वेस्टवेयर से पानी का निकास झरने के रूप में देखने को मिलता है , प्राकृतिक सौन्दर्य एवं नैसर्गिकता का यह दृश्य निश्चित रूप से बेहत मनमोहक और लुभावना है , हालाकि सुरक्षा की दृष्टि से यहाँ पहुंचने का मार्ग बेहत पेचीदा है और यहाँ हादसों की आशंका लगातार बानी रहती है बावजूद इसके प्रतिदिन बड़ी तादाद में पर्यटक लुत्फ़ उठाने यहाँ  पहुंचते है

   ऐसे पहुंचे   
 
      धमोई तालाब की झाबुआ शहर से दुरी 28 किमी है ,अतः यहाँ पहुंचने के लिए पर्यटकों को झाबुआ से पारा एवं कलमोडा होते हुए धमोई तालाब तक पंहुचना होता  है।

धमोई तालाब-dhamoi-talab-jhabua-piknic-spot

राम मंदिर रंगपुरा, -झाबुआ 
रंगपुरा में स्थित प्राचीन श्रीराम दरबार मंदिर, -rangpura-shri-ram-mandir-

केशरियाजी जैनतीर्थ रंगपुरा, -झाबुआ 
श्री केशरियाजी जैन तीर्थ रंगपुरा की प्रतिष्ठा दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेंद्रसुरिजी महाराजा द्वारा 122 वर्ष पूर्व की गई थी।  67 वर्ष पूर्व पूज्य मुनिभगवंत श्री कल्याण विजयजी म.सा.एवं श्री वल्लभविजयजी म.सा. द्वारा रंगपुरा नदी पर बारिश में पुल एवं रपट नही होने से नदी पार नही होने से प्रभुजी को बावन जिनालय मंदिर झाबुआ में  मेहमान स्वरूप  बिराजमान किया गया है। वर्तमान में रंगपूरा महातीर्थ में जीणोद्धार कार्य पूर्ण हो चूका है.

श्रृंगेश्वर धाम  , -झाबुआ 
       झाबुआ जिले के पेटलावद में पर्यटन के लिहाज़ से बेहद रमणीय एवं धार्मिक स्थल श्रृंगेश्वर धाम है, यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर, पंच मुखी हनुमान मंदिर है. श्रृंगेश्वर धाम  श्रृंगेश्वर ऋषि की तपोभूमि है, ये वही ऋषि है जिन्होंने राजा दशरथ के यहाँ पुत्र कामेष्ठि यज्ञ किया था।  इसका वर्णन रामायण में मिलता है।  ऋषिवर के मस्तक पर श्राप के कारण सींग निकल आये थे 99 नदी में स्नान करने के बाद भी उनके सींग नहीं गले लेकिन जब उन्होंने माही और मधुकन्या नंदी के संगमस्थल पर स्नान किया तो उनके मस्तक से सींग हट गए, जिसके बाद ऋषिवर ने यहाँ श्रृंगेश्वर महादेव की स्थापना की इसका वर्णन स्कंध पुराण में है।  वर्त्तमान में माही नदी के बैक वाटर में यह प्राचीन मंदिर डूब  गया है जो शिवरत्रि तक बाहर आ जाता है मंदिर प्रांगण में वर्त्तमान में रामेश्वर गिरी महाराज वयवस्थाये संभाल रहे है, यहाँ शनेश्चरी एवं सोमवती अमावस्या पर भव्य मेला लगता है

   ऐसे पहुंचे   

श्रृंगेश्वर धाम पहुंचने के लिए उमरकोट, तारखेडी,बोलासा, सेमरोड, झकनावदा होते हुए पंहुचा जा सकता है।

shrangeshwar dhaam petlawad jhaknawada jhabua-श्रृंगेश्वर धाम झकनावदा पेटलावद
     
          यहाँ माही बांध के बैक वाटर में बोटिंग का मज़ा लिया जा सकता है रविवार एवं अन्य छुट्टी के दिन बड़ी संख्या में लोग यहाँ पिकनिक मनाने आते है  उक्त स्थल पेटलावद विकासखंड के झकनावदा में स्थित है झाबुआ शहर से इस स्थल की दुरी 50 किमी है. माही बांध के बैक वाटर के कारन यहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य अत्यंत ही मनोरम दिखाई देता है। पर्यटन के लिहाज़ से यह स्थान उपयुक्त है।

shrangeshwar dhaam petlawad jhaknawada jhabua-श्रृंगेश्वर धाम झकनावदा पेटलावद
श्रृंगेश्वर धाम बैक वाटर में बोटिंग करते पर्यटक  
अति प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर , -झाबुआ 
पेटलावद शहर में पंपावती नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर जो की भूतेश्वर महादेव फूटा मंदिर के नाम से प्रसिद्द है , किवंदिती मान्यता के अनुसार यह मंदिर सेकड़ो साल से भी अधिक पुराना हैं। इसके स्थापना के रूप में मान्यता है की इसे न तो किसी राजा महाराजा ने और न ही किसी साधु संत ने बनवाया है बल्कि ये उडकर इस स्थान पर आया है । उक्त मंदिर बड़े - बड़े  चट्टानी पत्थरो से निर्मित है जो एक के ऊपर रखे हुए है। मंदिर गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है , पूर्णिमा , महाशिवरात्रि  पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचते है।  यह मंदिर देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण होता जा रहा था। पुरातत्व विभाग द्वारा हाल ही में मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया है।  
       उल्लेखनीय है की फूटा मंदिर क्षैत्र में कई प्राचीन धरोहरे एवं पुरातात्विक अवशेष होने की बात कही जाती रही है, पूर्व में भी यहाँ महावीर स्वामी की संगमरमर पत्थर की अतिप्राचीन मूर्ति निकल चुकी है, जो शहर के ही जैन मंदिर में स्थापित है।  

पेटलावद में पंपावती नदी के तट पर स्थित भूतेश्वर महादेव फूटा मंदिर-bhuteshwar-mahadev-mandir-petlawad-jhabua
कट्ठीवाड़ा वन, -अलीराजपुर 
 जिले का वन क्षेत्र कट्ठीवाड़ा के जंगलों में सिमटा पड़ा है। कट्ठीवाड़ा विकासखण्ड में कई वनग्राम है जहां प्रकृति ने अपनी अनूपम छटा बिखेर रखी है। साल , सागौन , व शीशम के मुल्यवान लंबे लबे पेड़ों के साथ ही चारोली व काजू के महत्वपूर्ण पेड़ों से अच्छादित कट्ठीवाड़ा के जंगल न केवल सुंदर है वरन वन्य जीव जन्तुओं से भी सम्पन्न हे यहा जगल का राजा शेर , चीता ,तेन्दुआ , भालू नीलगाय भी अपना एहसास करवा देते है। वैसे इन वनो मे कोयल की कुक , झीगुरों की झुन-झुन , खरगोश की सरपट तो आ में पर यदा-कदा जंगल के राजा की गुरहिट भी सुनाई दे जाती है।
        प्रकृति के खुबसुरत नजारों से भरे पडे कट्ठीवाड़ा के वनो मे पहाडी रास्ते , पहाडी नाले , पहाड़ी झरने , छोटी छोटी नदीयां बहुत ही मनभावन दिखाई देते है। देशभर में अपनी विशिष्ठिता के चलते पुरस्कृत कट्ठीवाड़ा के नूरजहां , शाहजहां आम पत्थरों के छत्तों से मधुमख्खीयों का असली शहद व नक्काशियों वाला हस्तशिल्प सब कुछ आपके लिए एक बार जरूर कट्ठीवाड़ा आये तो पायेगे नन्हे कश्मीर को अपने नजारों मे। हरिभरी वादियों , मध्यप्रदेश के चेरापूंजी व जिले के कश्मीर के नाम से विख्यात कट्ठीवाड़ा ग्राम अपनी खुबसुरती , पहाड़ी बस्ती व प्राकृतिक आदाओं एवं पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हरे भरे उंचे सागोन , शीशम , साल के वृक्षों के बीच पहाड़ी नदीयों , नालों व झरनों का कल-कल यहां सहज ही आकर्षित करता है।
         कट्ठीवाड़ा ग्राम के हवेजली खेडा से लगा हुआ कट्ठीवाडा का झरना (वाटरफाल) की खुबसुरती तो बस देखते ही बनती है। काफी उंचाई से गिरते हुए झरने की धड़धड़ाहट (जोर की आवाज के साथ) के साथ ही धवल धारा भर उतनी ही सुदंर व मनमोहक लगती है। बारीश के महीनों में यहां आकर वाटर फाल का नजारा करना प्रकृति का सीधा उपहार पाने जैसा ही है। कट्ठीवाड़ा वाटर फाल के साथ ही यहा चाटलिया पानी जैसे ओर भी जल प्रपात है जिनका दर्शन भी मन को बहुत सुकुन देने वाला है। कट्ठीवाड़ा में ही डुगरीमाता मंदिर से प्रकृति के वहंगम द्रशयों का अवलोकन करने से ही कट्ठीवाड़ा की प्राकृतिक सम्रध्दता का एहसास होता है। वैसे तो वर्ष भर परन्तु बारीस के महीनो में जूलाई से नवम्बर तक का समय बहुत आर्दश होता है। जब आप जिले के कश्मिर कहे जाने वाले कट्ठिवाड़ा की प्राकृतिक सम्पनता को करीब से महसूस कर सकते है।
kathivada-alirajpur-van-वन क्षेत्र अलीराजपुर कट्ठीवाड़ा के जंगल
मथवाड, -अलीराजपुर 
जिले के दक्षिण में, विंध्य पर्वत श्रृंखला के चारों ओर स्थित मथवाड क्षेत्र और बहुत ऊंचाई पर स्थित मथुवाड़ क्षेत्र में जंगली जानवर के घने वन क्षेत्र और कई प्रसिद्ध मंदिर भी यहां है। यहां पहुंचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर दूरी में पहाड़ी खंड "मथवाड" के जंगल में, भालू, खरगोश, शेर, पैंथर, लकड़बग्घा, तेंदुआ , टाइगर आदि देखा जा सकता है। वही यहाँ के जंगलो में कई दुर्लभ जड़ीबूटियां जैसे शंख पुष्पी , रोजा घास , काली मूसली , सतावर जंगली कालमेप आदि मौजूद है,  गुजराती सीमा से सटे होने के कारण यहाँ की भाषा गुजराती संस्कृति के समान है। 
मथवाड़ नर्मदा नदी के पास स्थित है और मध्यप्रदेश का अंतिम गांव है। मध्य प्रदेश सरकार ने मथवाड़ को 2017 जनवरी में एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। मथवाड़ रानी काजल माता मंदिर के लिए प्रसिद्ध है पर्यटन के लिहाज़ से यहाँ की खूबसूरत वादियों को देखने हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग पहुंचते है।रानी काजल माता का मंदिर मथवाड़ की शीर्ष पहाड़ियों में स्थित है। मथुवाड़ की ऊपरी पहाड़ी से नर्मदा नदी देखी जा सकती है।  तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रानी काजल माता मंदिर के विकास कार्य के लिए ३ करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी. 
          उल्लेखनीय है की इस रियासत में हिडेन वैली सिविलाइजेशन (रहस्यमयी सभ्यता) के प्रमाण मिल रहे हैं। यह सिविलाइजेशन हड़प्पा, माया और मिस्त्र की सभ्यता  के समय की बताई जा रही है। रियासत के वर्तमान राजा राणा सज्जनसिंह सभ्यता को प्रकाश में लाने का काम कर रहे हैं। 

किस प्रकार की है सिविलाइजेशन... 

यह सभ्यता, मानव इतिहास में सबसे रहस्यपूर्ण घटनाओं में से एक बनी हुई है। नर्मदा नदी के साथ मथवाड क्षेत्र में शहर के महत्वपूर्ण स्मारकों, धार्मिक संरचनाओं, अनाज का भंडार, पानी के जलाशय, प्राचीन मंदिर आदि के प्रमाण मिले हैं।  भूवैज्ञानिक सबूतों से पता चलता है कि यहां ज्वालामुखी कई सौ हजार वर्षों में कई बार भड़के हैं। अंत में यहां पिजन हॉल राक्स जैसी अद्भुत रहस्यमय संरचना बनी।
मौजूद है सबसे पुराने मानव पैरों के निशान - ये अजीब आकार वास्तव में बहुत ही उन्नत प्राचीन संस्कृतियों के बारे में बताते है। सबसे पुराने मानव पैरों के निशान मथवाड के पास जलसिंधी गांव में पाए गए हैं। ये 5000 और 6000 वर्ष पुराने हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां लंबे समय तक मानव रहे हैं।

मथवाड क्षेत्र में हड़प्पा, माया और मिस्त्र की  सभ्यता के प्रमाण मिले है।  

  • प्राचीन काल की मध्य अमेरिका की माया सभ्यता-- यहां रहस्यमय प्राचीन रॉक नक्काशी के प्रमाण मिले हैं। 
  • कंबोडिया, थाईलैंड जैसी प्राचीन सभ्यता-- इस क्षेत्र की घाटी के आसपास प्रागैतिहासिक सभ्यता के अस्तित्व के कुछ रोमांचक संभावनाएं हैं। यहां एक स्वयंभू शिवलिंग के साथ एक प्राचीन मंदिर , कृषि भूमि के नीचे मिला है। एक मंदिर के अवशेष मिले हैं जिसमें विशाल पत्थर का उपयोग के साथ शिवलिंग की तरह किया गया है। इस क्षेत्र के आसपास के ग्रामीण इलाकों में कंबोडिया, थाईलैंड जैसी प्राचीन सभ्यता के दौरान के कई सौ हिंदू और बौद्ध मंदिर खंडहर हैं। 
     यह मध्य अमेरिका की माया सभ्यता के समकालीन हो सकती है जिसका समय 2000 BC से 250 AD तक है। आज़ादी से पहले अालीराजपुर जिले का बखतगढ़ मथवाड (Mathwad) की एक स्वतंत्र रियासत थी। मथवाड ही प्रदेश में एक ऐसी जगह है जहां दशहरा उत्सव रातभर मनाया जाता है और सांस्कृतिक नाट्य को देखने गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से कई लोग जाते है।

मथवाड अलीराजपुर- mathwad-alirajpur-tourist place
चेनपुरी स्थित अति दुर्लभ शिवकुण्ड, -झाबुआ 
पेटलावद शहर के छोटे से कसबे चेनपुरी में एक अति दुर्लभ शिवकुण्ड स्थापित है यह कुंड वर्ष भर पानी से भरा होता है यह मंदिर ऊंची ऊंची पहाड़ियों के बिच में स्थित है दूर से यदि इस स्थान को देखा जाये तो यहाँ ऊँ का आकर  पूर्ण रूप में दिखाई देता है जो की इस स्थान को बेहत दुर्लभ एवं आस्था के विहंगम केंद्र बनाता है । यहां गर्भ गृह में स्थित शिवलिंग का  प्राकृतिक रूप से जलाभिषेक होता है। शिवरात्रि एवं विभिन्न पर्व त्योहारों पर यहाँ भक्तो का जमावड़ा लगता है।  
पेटलावद चेनपुरी स्थित अति दुर्लभ शिवकुण्ड
दर्शनीय स्थल नेवा माता मंदिर, -अलीराजपुर
वालपुर की पहाड़ियों के समीप स्थित ग्राम फड़तला में स्थित नेवा माता का मंदिर पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। जहां पर पहाड़ों से 12 माह पानी रिसकर आता है। यहां दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों के अलावा बाहरी श्रद्घालु भी पहुंचते हैं। नेवा माता का यह मंदिर बहुत ही चमत्कारी हे, आदीवासी समाज एवं आसपास के अंचल मे ऐसी मान्यता है की यहा हर मनोकामना पुरी होती हे।
क्या है इतिहास 
मंदिर की स्थलाकृति देख यह पाषाणकाल निर्मित दिखाई देता है, जहा अनवरत पानी की बुंदे निकलती है, अति प्राचीन पत्थरो की गुफा में विराजित है माँ की प्रतिमा। यहा पानी का एक कुण्ड है जिसमे बारहमासी शीतल जल भरा होता है चाहे जितनी गर्मी पड़े इस कुंड में कभी जल न तो ख़त्म होता है और नहीं जल स्तर गिरता है । लोगो का ऐसा मानना है की यहाँ कुंड का पानी अत्यंत चमत्कारी है, यहा के पानी से स्नान करने पर सभी रोगो से मुक्ति मिलती है, बड़वा ओर तांत्रीको का यहा ताता लगा रहता हे।

वालपुर नेवा माता मंदिर, -अलीराजपुर-walpur-alirajpur-newa-mata-mandir
मोहनकोट , -झाबुआ 
     यह छोटा-सा गांव झाबुआ  जिले के पेटलावद से दक्षिण दिशा में 11  किलोमीटर दूरी पर स्थित है। मोहनकोट के नजदीकी दर्शनीय स्थल हैं। जो कि नन्दर माता के मन्दिर के नाम से जाना जाता हे जो कि एक छोटी सी घाटी पर खुले मैदान मे स्थित हे यहा पर चोरी नही होती है।

मोहनकोट नन्दर माता मंदिर - mohankot-nandarmata-mandir-petlawad
मोहनकोट नन्दर माता मंदिर 
राणापुर स्थित 1000 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर, -झाबुआ 
राणापुर से 12 किमी दूर स्थित ग्राम देवल फलिया के एक अहाते में प्राचीन शिव मंदिर है। मंदिर में स्थापित है दुर्लभ पंचमुखी शिवलिंग। मान्यता है कि मंदिर को कोई यति महाराज उड़ाकर लाए थे। मंदिर की प्राचीनता लगभग एक हजार वर्ष मानी गई है। वनवासी बहुल क्षेत्र में लगभग 1000 वर्ष प्राचीन यह मंदिर भूमिज शैली का है। जो परमार कालीन है। यूं तो महाशिवरात्रि और सावन सोमवार को यहां दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती है लेकिन छुट्टी के दिन भी लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं। अनमोल प्राचीन धरोहर देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर यहां आस्था का हुजूम उमड़ता है। किंतु वर्ष के बाकी दिनों में यहां उपस्थिति नगण्य रहती है। बेहद शांत व प्राकृतिक वातावरण में मंदिर तलहटी में स्थित है। 
       प्रकृति की सुरम्य वादियों में स्थित देवल फलिया के मंदिर के पिछले हिस्से में पहाड़ों से निरंतर एक जल स्त्रोत बहता रहता है। मान्यता है कि यह जल नर्मदा का है। यहां पूरे साल अविचल निरंतर जल धारा बहती रहती है। गर्भगृह अंतराल व मंडप युक्त था। वक्त के साथ अंतराल व मंडप भग्न हो चुके हैं। मंदिर का शिखर भी क्षतिग्रस्त है। पार्श्व भाग में शेषसायी विष्णु एवं अन्य कलाकृतियां विद्यमान है। मंदिर भूमिज शैली के पंचरथी पंचांग प्रकार से निर्मित है। शैलीगत आधार पर पुरातत्व विभाग इसे 11वीं या 12वीं सदी में बना हुआ मानता है।

  कैसे पहुंचे    

झाबुआ से सड़क मार्ग से राणापुर होते हुए देवल फलिया पहुंचा जा सकता है। रास्ता अच्छा है और अपने वाहन से 45 मिनट में पहुंच सकते हैं। 

राणापुर से 12 किमी दूर स्थित ग्राम देवल फलिया प्राचीन शिव मंदिर दुर्लभ पंचमुखी शिवलिंग-ranapur-deval-faliya-shiv-mandir

ग्राम भगोर स्थित अतिप्राचीन शिव मंदिर , -झाबुआ 
1000 से ज्यादा वर्ष पुराने इस मंदिर की विशेषता है कि इस मंदिर को कभी किसी ने बनवाया नहीं, बल्कि ये देवलोक से उड़कर यहां पहुंचा है। वैज्ञानिक भी आज तक इस बात का राज नहीं तलाश सके हैं कि बिना नींव के भरी दीवारों वाला यह मंदिर यहां कैसे स्थापित हुआ।  यह मंदिर भगोर ग्राम में स्थित है।  इस मंदिर से जुड़ी प्राचीन कथा इसे बेहद चमत्कारी बनाती है। कहा जाता है कि ये मंदिर यहां प्रकट हुआ है इसे बनवाया नहीं गया। इस बात की सच्चाई जानने के लिए मंदिर की खुदाई करवाई गई तो लोग चौंक गए। खुदाई में कहीं भी पक्की नींव का पता नहीं चला। बिना किसी ठोस नींव के यहां स्थापित इस मंदिर में एक भी खंभा नहीं है और मंदिर की दीवारें 6 से 8 फीट चौड़ी है । 
      मंदिर के पुजारी ने बताया कि हम छ: पीढिय़ों से इस मंदिर की सेवा में जुटे हैं। पूर्वजों से यही सुना है कि एक तपस्वी मुनिराज इस मंदिर को लेकर कहीं जा रहे थे, किसी कारणवश उन्होंने मंदिर को यहां रखा और तपस्या करने लगे, शाम हो गई तो मंदिर यहीं स्थापित हो गया। तब से ये मंदिर यहीं है। मंदिर में अतिप्राचीन शिव लिंग है जो रख रखाव के अभाव में जीर्णशीर्ण हो रहा है । यहां सफेद पाषाण की कई प्राचीन मूर्तियां भी हैं जिन पर 1248 संवत विक्रम का समय लिखित में अंकित है। ये मूर्तियां चौैथे काल की बताई जाती हैं।

ग्राम भगोर स्थित अतिप्राचीन शिव मंदिर -bhagore-shiv-mandir-jhabua-alirajpur
चरण-कुंड, थांदला
शहर के पूर्व में मुगल काल का एक चरण-कुंड है, जिसके पास एक प्राचीन हनुमान मंदिर मौजूद है। यहां दो पंक्तियों में छह मंदिर मौजूद थे जो वर्त्तमान में जीर्णशीर्ण हो चुके है। चरण-कुंड में जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया हैं। दोनों तरफ के मंदिर सुंदर पंक्तियों में बने हैं। ईंटों से बना चरण-कुंड बहुत सुंदर और आकर्षक हैं, बारिश के मौसम में कुंड पानी से भरा रहता है। इनके ऊपर चारों तरफ कमरे बने हैं। नीच, मेहराब, मेहराब स्तंभ आदि चूने के मोर्टार से बने होते हैं। दरबाजंदी भी बहुत खूबसूरत है। सामने के हिस्से में दोनों तरफ निचे में तीन पंक्तियाँ हैं। प्रत्येक पंक्ति में तीन तख़्त शामिल हैं।
      मंदिर में पांच पत्थरों वाला शिवलिंग (पशुपतिनाथ) स्थापित है, जो काले पत्थर से बना है। इसके सामने एक नंदी स्थापित है। पास में एक आधुनिक शिव प्रतिमा भी रखी गई है। चरण-कुंड के पास एक देवी प्रतिमा स्थापित है। इस छवि पर हाथियों को अभिषेक करते दिखाया गया है। इसके पास एक स्तंभित देव कुल्लिका एक सूर्य छवि और पार्वती छवि के अलावा एक विकृत नंदी है। थांदला में काशी विश्वनाथ, पट्टाभि सीता राम, रामजी, गणेश, लक्ष्मीनारायण, बिहारीजी, बिट्ठलजी और केशरी नाथ को समर्पित कई अन्य पुराने मंदिर भी हैं।
Step-Well and Temple, Thandla- चरण-कुंड एंड टेम्पल, थांदला
गोपाल मंदिर झाबुआ, -झाबुआ 
    झाबुआ शहर के मध्य भाग में स्थित गोपाल मंदिर झाबुआ की स्थापना 48 वर्ष पूर्व १० मई १९७० को की गई।  मंदिर निर्माण के समय मंदिर के समीप ही ३३ निवास स्थलों के सदस्यों का छोटा सा ऋषिकुल आज 48 वर्ष बाद हजारो भक्तो कि आस्था व प्रेम वाला ऋषिकुल आश्रम बन चूका है।
       सेकड़ो वर्ग फ़ीट में फैला यह गोपाल मदिर शहरवासियों और पर्यटकों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है मंदिर प्रांगण में भव्य बगीचा है। मंदिर प्रांगण में ही गोपाल वाचनालय जिसमे की प्राचीन, मध्यकालीन और महापुरुषों के विभिन्न ग्रंथो और पुस्तकों का विशाल संग्रह शहरवासियो के लिए निश्चित ही एक अनुपम सौगात है, समीप ही गोपाल शिशु विद्या मंदिर स्कूल में सेकड़ो बच्चो को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है,
 गोपाल मंदिर ट्रस्ट द्वारा भक्तो की सुविधा हेतु ऑनलाइन दर्शन सुविधा का अनावरण कुछ समय पहले ही किया गया है गोपाल मंदिर की वेबसाइट पर इस सुविधा का लाभ लिया जा सकता है ।
      झाबुआ शहर कि सांस्कृतिक व धार्मिक छवि को पल्वित और पोषित करने हेतु गोपाल मंदिर व ऐसे ही कई मंदिर जो पिछले कई वर्षो से अपने प्राचीन इतिहास को यथावत रखते हुए भक्तो के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है उनका भी महत्वपूर्ण योगदान है . शहर के मध्य भाग में स्थित होने के कारन गोपाल मंदिर तक पहुंचने हेतु आवागमन के पर्याप्त साधन उपलब्ध है दूरस्थ भक्त या पर्यटक गोपाल मंदिर पहुंचने हेतु मेघनगर रेलवे स्टेशन जो की झाबुआ से महज़ १५ किमी की दुरी पर है जहाँ पर देश भर के लगभग सभी स्थानों से ट्रैन का आवागमन अनवरत चलता रहता है , जिसके माध्यम से पहुंच सकते है 

पूरा इतिहास जाने
मातंगी धाम , - झाबुआ 
   
matangi darshan mandir jhabua मातंगी मंदिर
        सेकड़ो फ़ीट की उचाई पर स्थित मातंगी मंदिर चारो और से हरियाली से ढकॉ हुआ है। पर्यटन के लिहाज़ से मातंगी मंदिर बेहत ही रमणीय स्थल है , मंदिर में खडे होकर जिस और भी नजर जाती हरियाली और सुंदरता से भरे दृश्य ही दिखाई देते ।
      मंदिर के समीप ही विशालकाय तालाब  मंदिर की सुंदरता को और बढ़ाता हुआ दिखाई देता है , मातंगी मंदिर प्रांगण में ही सिद्धपीठ बालाजी धाम और पारद शिवलिंग का महादेव मंदिर भी यही पर स्थित है , फरवरी 2011 में मातंगी धाम झाबुआ में नवनिर्मित मंदिर स्थल का निर्माण पश्चात् मातंगी की मूर्ति स्थापना की गयी , कार्यक्रम चार दिनों का था जिसमे मातंगी मूर्ति की स्थापना के साथ ही मातंगी का पाटोत्सव भी भव्य रूप में मनाया गया।  मातंगी मंदिर शहर के बिल्कुल मध्य भाग में स्थित है । मातंगी मंदिर इंदौर अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही स्थित है।
Nakshatra Vatika-नक्षत्र वाटिका झाबुआ नक्षत्र वाटिका, नवग्रह के पौधे     मातंगी ट्रस्ट द्वारा हाल ही में सर्वजन हित हेतु नक्षत्र वाटिका तैयार की जा रही है , उक्त वाटिका को उत्तराखंड से पौधे लाकर झाबुआ की नक्षत्र वाटिका को तैयार किया जाएगा संभवतः प्रदेश की पहली व उत्तराखंड के बाद देश की दूसरी नक्षत्र वाटिका झाबुआ में स्थित होगी ।  वाटिका स्थल को लगातार तैयार किया जा रहा है।
      10 हजार वर्गफीट में वाटिका तैयार करने की योजना बनाई गई है।  मंदिर के चारों तरफ से अलग-अलग तरह के पौधे लगाए जाएगे। इसके लिए तीन अलग-अलग हिस्से घाटी पर तैयार किए गए है। यह 30-30 फीट के रहेंगे। 20 फीट की सर्पाकार सीढ़ी बनाई जा रही है। यहां नक्षत्रों के अनुसार 27, नवग्रह के 27, 5 पूजन-हवन में उपयोगी और 49 पौधे आकर्षण के लिए लगाए जा रहे हैं।

मातंगी धाम , पूरा इतिहास जाने
समोई बाबा देव दर्शन, -झाबुआ 
    झाबुआ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल , बाबा देव ग्राम समोई ब्लॉक राणापुर भक्तो की  असीम आस्था और धर्म के प्रतीक  है।  संस्कृति समाज का दर्पण होती है, जहां आस्था व विश्वास होता है वहां श्रद्धालु को पूरा सुकुन मिलता है। आदिवासी संस्कृति में बाबा देव का स्थान बहुत ही अहम है, जनजन की आस्था यहां उमड़ती दिखाई देती है।
             कहा जाता है कि जहां विज्ञान की सीमाएं समाप्त होती है वहीं से आध्यात्म की शुरुआत होती है। अंचल के राणापुर विकासखंड के समोई के डूंगरवाला बाबादेव का माहत्म्य भी जन-जन की आस्था का प्रतीक है। यहां हजारों लोगों की मन्नत पूरी होती है।

समोई बाबा देव दर्शन- डूंगरवाला बाबादेव- samoi-ranapur-babadev darshan-dungarwala babadev-jhabua
शिव मंदिर भोरण, -अलीराजपुर 
अलीराजपुर से करीब 14 किमी दूर उमराली रोड पर सघन वनीय और पहाड़ी क्षेत्र में स्थित ग्राम भोरण का यह शिवगंगा हनुमान मंदिर काफी प्रसिद्घ और मनोहारी रमणीय धार्मिक स्थल है। यहां पांडव कालीन चमत्कारी हनुमानजी की प्राचीन प्रतिमा है। पास में ही शिव मंदिर है। यहां स्थित शिवलिंग पर बारह मास प्राकृतिक रूप से शिव गंगा के रूप में पहाड़ी क्षेत्र से आने वाली जलधारा अनवरत गिरती रहती है। यहां के ग्रामीण और महंत बाबा बताते हैं कि क्षेत्र में चाहे कितनी भी भीषण गर्मी का दौर हो पर यह जलधारा कभी भी नहीं सूखती है। हरे-भरे सघन वन और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में स्थित इस मंदिर परिसर के आसपास कई जंगली जानवर भी रहते हैं।

शिव मंदिर भोरण- alirajpur shiv mandir bhoran
श्री विश्वमंगल हनुमान धाम तारखेड़ी, - झाबुआ 
         धार के समीप झाबुआ जिले के तारखेडी ग्राम में चमत्कारी विश्वमंगल हनुमान का मंदिर है | यहाँ मंगलवार व शनिवार को दर्शनार्थियों की भीड़ जमा रहती है।  यहाँ लोगो का मानना हे की मूर्ति के दर्शन मात्र से मनोकामना पूर्ण होती है।  श्री विश्वमंगल हनुमान धाम तारखेड़ी में विराजित विश्वमंगल हनुमानजी स्वयंभू है और मूर्ति भी पूज्यगुरुदेव को स्वप्नावस्था में दर्शन देने के बाद उसी स्थान से खुदाई कर निकाली गई है  इस बारे में पंडित कालीचरण दास वैष्णव ने बताया की इनके पिता राम प्रसन्न वैष्णव ने 12 मई 1957 शनिवार जयेष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को  पूर्व जन्मनुकृत प्रेरणा शक्ति से पेटलावाद तहसील के ग्राम तारखेडी में विश्व मंगल हनुमान मंदिर की स्थापन कराई  थी , गुरुदेव को स्वप्नावस्था में दर्शन देकर हनुमान जी ने अपनी उपस्थिति का अहसास करवाया तब स्वयं गुरुदेव महाराज ने जमीन खुदाई कर मूर्ति निकाली और प्रतिष्ठित कर मंदिर का निर्माण करवाया  तभी से दर्शनार्थियों का ताता लगा रहता है |
       प्रति मंगलवार लाल चन्दन और सिंदूर से सुन्दर कपडे और आभूषणों से सजाकर हनुमान जी को चोला चढाया जा रहा है।  स्वयं के एवं चढावे की राशि से मंदिर में पूजापाठ,भजन कीर्तन , सुन्दर कांड कीर्तन के साथ होता रहता है।  स्वंय दर्शनार्थी और भक्त हनुमान जी के चमत्कारों के किस्से सुनाते है।  विपरीत परिस्तिथियों से उबर कर स्वास्थ लाभ रोग मुक्ति एवं मनोकामनाये पूर्ण होने के अनुभव सुनाते है |
     प्रति मंगलवार् , दोनों नवरात्रि , हनुमान जयंती , गुरुपूर्णिमा को चोला , अभिषेक , पूजन , संगीतमय सुन्दरकाण्ड , हवन , उत्तरपुजन , पूर्णाहुति , मंगल आरती के बाद गुरूदेव द्वारा मंत्रित गदा का आशीर्वाद हनुमानयंत्र को लाल चन्दन से निर्मित कर पूजन के बाद यंत्र के मंत्रो को शुद्ध जल में मिलाकार स्वयं के पीने हेतु , हवन घृत को लकवा शारीरिक पीड़ा में मालिश हेतु , हवन भस्म को ललाट पर लगाने और स्वयं के ग्रहण हेतु दिया जाता है।  
        विश्वमंगल धाम के शिवालय की स्थापना पूज्य गुरुदेव श्रीरामप्रपन्न जी वैष्णव महाराज ने 20 फरवरी 1955 महाशिवरात्री को की और शिवलिंग भी स्वयंभू है । इस स्थान पर प्रारम्भ सेवा में प्रति सोमवार और महाशिवरात्रि पर रूद्र अभिषेक , पूजन , पीठ पूजा , यंत्रपूजा , परिवार पूजन , संगीतमय शिवलीला बालकाण्ड का आयोजन किया जाता है । साथ ही प्रति मंगलवार दोप.12.30 से 1.00 बजे तक दिव्य ध्यानयोग का आयोजन किया जाता है। 

   ऐसे पहुंचे तारखेड़ी     
   
         झाबुआ शहर से तारखेड़ी की दुरी  किमी है , यहाँ पहुंचने के लिए झाबुआ से पेटलावद होते हुए या झाबुआ से राजगढ़ होते हुए  यहाँ पंहुचा जा सकता है पेटलावद से तारखेडी की दुरी 22 किमी है। 

श्री विश्वमंगल हनुमान धाम तारखेड़ी झाबुआ पेटलावाद vishvamangal hanuman mandir tarkhedi jhabua petlawad
पीपलखूंटा, -झाबुआ 
     मध्यप्रदेश के पश्चिमी सीमान्त पर स्थित झाबुआ जिला मुख्यालय से २३ कि.मी. दूर एवं पश्चिमी रेलवे  दिल्ली मुंबई रेल मार्ग के मेघनगर रेलवे स्टेशन से ८ कि.मी. दूर कल-कल कर बहती हुई पवित्र पद्मावती नदी के किनारे सुरम्य पहाड़ी पर चमत्कारिक हनुमानजी का मंदिर तपोभूमि पीपलखूंटा आश्रम मध्यप्रदेश, राजस्थान , गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में ख्याति प्राप्त होकर जन-जन की आस्था एवं श्रधा का केंद्र है कहा जाता है कि रावण पूत्र मेघनाथ के अत्याचारों से त्रस्त ऋषि मुनियों ने घने जंगलो में स्थित ऊँची पहाडियों एवं कन्दराओ में शरण लेकर तपस्या की थी उन्हीं में से महर्षि पिपलाद एवं विश्वामित्र जी ने वर्षो तक इस वन में तपस्या की थी |
       इस तीर्थ को ख्याति दिलाने वाले महंत श्री जमनादासजी महाराज ने अपने गुरु महंत श्री साँवलादास जी महाराज की आज्ञा से वर्तमान स्थल पर पीपल के विशाल पेड़ के नीचे विराजित हनुमानजी की सेवा तथा पूजा अर्चना एवं तपस्या कर इस तपोस्थल को जागृत किया ! पूर्व में यह स्थान घने जंगलो के बीच स्थित था जहाँ हमेशा जंगली जानवरों का डेरा डला रहता था एवं सदा उनसे भय बना रहता था एवं इस बियाबान स्थल पर जाने से लोग डरते थे किन्तु धीरे धीरे इस स्थान के आस पास आदिवासी ग्रामीण  बसने लगे एवं यह पवित्र स्थल तीर्थ रूप में परिवर्तित हो गया |
     महंत श्री जमनादासजी महाराज  द्वारा वर्ष १९५२ में १०१ कुण्डीय श्री राम यज्ञ , वर्ष १९७६ में ११११ कुण्डीय एव वर्ष १९७९ में २५२५ कुण्डीय वृहद स्तरीय श्री राम यज्ञ संपन कराये जिसमे हजारो कि तादाद में भक्तो ने सम्मिलित होकर लाभ लिया, इसी बीच  मंदिर श्रेत्र का विकास भी करवाया एवं मंदिर में २४ अवतारों की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा करवाया साथ ही मंदिर, भोजनालय- रसोईघर संतो एव भक्तो हेतु आवास ,गौशाला आदि का निर्माण करवाया जो पूर्व समयानुसार कनची दीवारों एव कवेलू के छापरो से बने हुए हे.
       आश्रम परिसर में विशाल मंदिर, सत्संग भवन, संतो एवं भक्तो हेतु सुविधायुक्त आवास निर्माण, गौशाला निर्माण, संस्कृत पाठशाला, चिकित्सालय, भोजनशाला, भव्य बगीचा आदि है।  गुरु पूर्णिमा , नवरात्री , हनुमान जयंती , राम नवमी पर देश भर से हज़ारो की तादाद में भक्त यहाँ  दर्शन हेतु पहुंचते है 

   ऐसे पहुंचे पीपलखूंटा     
   
         झाबुआ शहर से पीपलखूंटा की दुरी 26 किमी है , मेघनगर से रम्भापुर होते हुए   यहाँ पंहुचा जा सकता है मेघनगर से पीपलखूंटा की दुरी महज़ 10 किमी है  

झाबुआ पीपलखूंटा  हनुमान मंदिर -pipalkhuta-hanuman-mandir-jhabua-meghnagar-madhya pradesh-india
हनुमान टेकरी, -झाबुआ 
           झाबुआ शहर के शीर्ष पर और तल से लगभग ७० फिट उचाई पर स्थित हनुमान टेकरी मंदिर .... झाबुआ जिले के इतिहास में एक अलग महत्वता का परिचय कराता  है . जैसा की नाम से ही स्पष्ट है की हनुमान टेकरी . टेकरी शब्द उची , और टेकरी पर निर्मित मंदिर की संरचना का आभास कराता है मंदिर प्रांगन में खडे होकर पूरे झाबुआ शहर का अदभुद नज़ारा देखा जा सकता है इतनी उचाई से पूरे शहर का द्रश्य रात्रि के समय और भी विहंगम हो जाता है ..

hanuman-tekri-mandir-jhabua-हनुमान टेकरी झाबुआ
राम शरणम्, -झाबुआ 
ram_sharnam_jhabua
        बडे तालाब के समीप सात हज़ार वर्ग फीट में बना राम शरणम् का विशाल भवन झाबुआ जिले के साथ ही पूरे प्रदेश में आस्था का केंद्र बना हुआ है .. तल से ३ मंजिला राम शरणम् भवन की आकृति भक्तो और दर्शनाथ लोगो के लिए बेहत आकर्षक और दुर्लभ नज़ारा प्रतीत होता है ... चारो तरफ हरियाली से भरे द्रश्य और समीप ही विशाल तालाब को देख ऐसा आभास होता है जैसे राम शरणम् का यह विशाल भवन तालाब में अपना प्रतिबिम्ब निहार रहा हो.... निश्चित रूप से अनुपम छठा , दुर्लभ नज़ारा और हरियाली भरे द्रश्य राम शरणम् भवन के खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा सा दिखाई पड़ते है ...
         भवन के निर्माण में हजारो भक्तो ने अपना पसीना बहाया ...यही कारण है की बाज़ार मूल्य के हिसाब से करीब पोने दो करोड़ की लागत का मंदिर मात्र 90 लाख रुपये में बनकर तैयार हो गया भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल 33 हज़ार 250 वर्ग फीट है ,जिसमे पांच सो साधक एक साथ रहकर साधना कर सकते है ... भवन के लिए सात हज़ार फीट जमीन 12 लाख रुपये में खरीदी गयी यह जमीन पहले राजा की थी जिस पर हाथी बांधे जाते थे बाद में इसे पांच व्यवसायियों ने खरीद लिया .....संस्था के अलावा 17 हज़ार लोगो ने 90 लाख के राशी बिना मांगे भेट करी .....२६ जनवरी 2005 को भवन का भूमि पूजन किया गया ...करीब 13 महीनो की अवधि तक अनवरत कार्य चलने के पश्चात् 3 मार्च 2006 को राम शरणम् का उदघाटन समारोह रखा गया जिसमे पूरे देश के भक्तो ने अपनी मोजुदगी दर्ज कराई..


jhabua-Alirajpur-famous-bhagoriya-festival navratri-chal-samaroh jhabua-history Alirajpur-History jhabua-ka-raja



झाबुआ-अलीराजपुर पर्यटन स्थल अपनी भाषा में पढ़े:


झाबुआ - अलीराजपुर के पर्यटन स्थलों का भ्रमण धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व के रूप में अच्छी तरह से किया जा सकता है. झाबुआ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से कुछ भाबरा, देवझिरी, लखमनी, हाथीपावा पहाड़ी , माल्वई, आमखुट , राजवाडा , अनास नर्सरी आदि हैं वही धार्मिक पर्यटन स्थलों में हनुमान टेकरी , वनेश्वर हनुमान मंदिर, गोपाल मंदिर, मातंगी धाम, सिद्धपीठ बालाजी हनुमान मंदिर , साईं मंदिर, प्राचीन कलिका मंदिर, चिंता मणि गणेश मंदिर, बावड़ी हनुमान मंदिर , राम शरणम् , आदि है ,

पाए ताज़ा वीडियो न्यूज़ सब्सक्राइब करे
ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

Reactions:

Location: झाबुआ-अलीराजपुर

व्हाट्स एप् ब्राडकॉस्ट सेवा से जुड़े

झाबुआ न्यूज़ व्हाट्स एप्प ब्राड कॉस्ट सेवा से जुड़ने के लिए हमारे मोबाईल नंबर 8989002425 पर व्हाट्स एप्प मैसेज करे टाइप करे JHABUA NEWS और भेज दे व्हाट्स एप्प नंबर 8989002425 पर अगले 24 घण्टे में झाबुआ- अलीराजपुर जिले की ताजा खबरे आपके मोबाइल पर निःशुल्क शुरू कर दी जाएगी

विज्ञापन

आपकी राय

Trending

[random][carousel1 autoplay]

More From Web

[blogger]

आपकी राय / आपके विचार .....

निष्पक्ष, और निडर पत्रकारिता समाज के उत्थान के लिए बहुत जरुरी है , उम्मीद करते है की आशा न्यूज़ समाचार पत्र भी निरंतर इस कर्त्तव्य पथ पर चलते हुए समाज को एक नई दिशा दिखायेगा , संपादक और पूरी टीम बधाई की पात्र है !- अंतर सिंह आर्य , पूर्व प्रभारी मंत्री Whatsapp Status Shel Silverstein Poems Facetime for PC Download

आशा न्यूज़ समाचार पत्र के शुरुवात पर हार्दिक बधाई , शुभकामनाये !!!!- निर्मला भूरिया , विधायक

जिले में समाचार पत्रो की भरमार है , सच को जनता के सामने लाना और समाज के विकास में योगदान समाचार पत्रो का प्रथम ध्येय होना चाहिए ... उम्मीद करते है की आशा न्यूज़ सच की कसौटी और समाज के उत्थान में एक अहम कड़ी बनकर उभरेगा - कांतिलाल भूरिया , सांसद

आशा न्यूज़ से में फेसबुक के माध्यम से लम्बे समय से जुड़ा हुआ हूँ , प्रकाशित खबरे निश्चित ही सच की कसौटी ओर आमजन के विकास के बीच एक अहम कड़ी है , आशा न्यूज़ की पूरी टीम बधाई की पात्र है .- शांतिलाल बिलवाल , विधायक झाबुआ

आशा न्यूज़ चैनल की शुरुवात पर बधाई , कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अंक पड़ा था तीखे तेवर , निडर पत्रकारिता इस न्यूज़ चैनल की प्रथम प्राथमिकता है जो प्रकाशित उस अंक में मुझे प्रतीत हुआ , नई शुरुवात के लिए बधाई और शुभकामनाये.- कलावती भूरिया , जिला पंचायत अध्यक्ष

मुझे झाबुआ आये कुछ ही समय हुआ है , अभी पिछले सप्ताह ही एक शासकीय स्कूल में भारी अनियमितता की जानकारी मुझे आशा न्यूज़ द्वारा मिली थी तब सम्बंधित अधिकारी को निर्देशित कर पुरे मामले को संज्ञान में लेने का निर्देश दिया गया था समाचार पत्रो का कर्त्तव्य आशा न्यूज़ द्वारा भली भाति निर्वहन किया जा रहा है निश्चित है की भविष्य में यह आशा न्यूज़ जिले के लिए अहम कड़ी बनकर उभरेगा !!- डॉ अरुणा गुप्ता , पूर्व कलेक्टर झाबुआ

Congratulations on the beginning of Asha Newspaper .... Sharp frown, fearless Journalism first Priority of the Newspaper . The Entire Team Deserves Congratulations... & heartly Best Wishes- कृष्णा वेणी देसावतु , पूर्व एसपी झाबुआ

आशा न्यूज़ का ताजा प्रकाशित अंक मैंने दो तीन पहले ही पड़ा था आशा न्यूज़ पर प्रकाशित खबरों की सामग्री अद्भुत है , समाज के हर एक पहलु धर्म , अपराध , राजनीती जैसी हर श्रेणी की खबरों को इस समाचार पत्र में बखूबी प्रस्तुत किया गया है जो पाठको और समाज के हर वर्ग के लोगो के लिए नितांत आवश्यक है , समाचार पत्र की नयी शुरुवात लिए बधाई !!- रचना भदौरिया , एडिशनल एसपी झाबुआ

महज़ ३ वर्ष के अल्प समय में आशा न्यूज़ समूचे प्रदेश का उभरता और अग्रणी समाचार पत्र के रूप में आम जन के सामने है , मुद्दा चाहे सामाजिक ,राजनैतिक , प्रशासनिक कुछ भी हो, हर एक खबर का पूरा कवरेज और सच को सामने लाने की अतुल्य क्षमता निश्चित ही आगामी दिनों में इस आशा न्यूज़ के लिए एक वरदान साबित होगी, संपादक और पूरी टीम को हृदय से आभार और शुभकामनाएँ !!- संजीव दुबे , निदेशक एसडी एकेडमी झाबुआ

Contact Form

Name

Email *

Message *

E-PAPER
Layout
Boxed Full
Boxed Background Image
Main Color
#007ABE
Powered by Blogger.